मस्त विचार 032
मुझको खुद मुझसे भी मिलने नहीं देती दुनिया.
छुप के मिलता हूँ कभी जब नहीं होता कोई.
छुप के मिलता हूँ कभी जब नहीं होता कोई.
य़ाद करता हूँ बताऊँ ये जरुरी तो नहीं.
जब रोना होता है तब रो लेता हूँ.
तुझे रो कर दिखाऊँ ये जरुरी तो नहीं.
जिन्हें हम पा नहीं सकते सिर्फ चाह सकते हैं….
तो समझ लेना कि सौदा घाटे का ही है.