मस्त विचार – रिश्तों कि मर्यादा में, घुट- घुट कर जीना सीखा है – 025
कुछ पल खुशियाँ पाने को, आँसू को पीना सीखा है.
ताने- उलहाने सुन कर मै, बना रहा हर बार अनजान.
लोग मुझे सताते रहे, मुझे न समझा कभी इन्सान.
सब्र के पनघट का पानी, घावों को नित सीना सीखा है.
रिश्तों कि मर्यादा में, घुट- घुट कर जीना सीखा है
ठोकर खाकर इतना जाना, स्वार्थ की पसरी है धुन्ध.
सब कुछ सहा खामोशी में, मैंने अपनी आँखे ली मूंद.
लोग दुःख पर दुःख देते रहे,मै ही जानता हूँ जो मुझपे बीता है.
रिश्तों कि मर्यादा में, घुट- घुट कर जीना सीखा है.
मस्त विचार 024
समझ नहीं आ रहा
एक कदम आगे बढ़ाऊँ
या दो कदम पीछे
समझ नहीं पाता हूँ
जब भी निकलता हूँ
पूरा का पूरा निकलता हूँ
लेकिन फिर जहाँ पहुँचता हूँ
वहाँ मेरे अलावा बहुत कुछ होता है
समझ नहीं आता क्या रुका रहूँ यूँ ही
समझ नहीं पा रहा
एक कदम आगे बढ़ाऊँ
या दो कदम पीछे.
मस्त विचार 023
उसमे यही है खास, एक उम्मीद है.
मस्त विचार – मेरे अपने – 022
_ उनकी असलियत न दिखती तो.. मैं आज भी उन्हें बेशकीमती समझने की भूल कर रहा होता.!!
_ उन्हें आपके दुख दर्द से कोई मतलब नही खैर.!!
_ मैंने उनका असली चेहरा देख लिया.!!
– फिर उसके बाद आपको सारी उम्र शर्मिंदा भी रहना है.!!
_ मन की खिड़कियों को सदा के लिये बंद करने पर..!
_ बाद में हम उन्हें वैसे देखना शुरू कर देते हैं, जैसे वो सच में होते हैं.!!
_इसलिए बस जियो और खूब मस्त रहो.!!
_ आप का दिल कहता है भाड़ में जाय ये.!!
_वरना मैं भी कभी सीधा हुआ करता था.!!
– The chapter is over.
_जब तक कोई अपना ज़ोर का धक्का ना दे.!!
_ वो हमारा नहीं हो सकता.. उसे हर किसी के पास रहने दो.!!
_ इस तरह हम उन रिश्तों से मुक्त हो जाते हैं जो बोझ बन गए थे.!!
_ और हम उनके लिए अच्छे बने रहते हैं.!!
_ अब अपनों में ही कोई दम नहीं.
_ चलो, ग़ैरों में अपने ढूँढते हैं.
_ न भी मिले तो कोई गम नहीं.!!
_ अब अपनों पर भी यक़ीन सोच-समझ कर आता है.!!
_ सही वो भी थे… गलत मैं भी नही.!!
_ मैं भी ढीठ था, बीज बन कर उगा और खुशबू बन हवाओं में फैल गया.!!
_ बल्कि दुख इस बात का है कि वो अपनों का नक़ाब पहनकर हमारे बीच मौजूद हैं.!
_ क्योंकि मेरे पास इनमें से ना कोई है और ना कोई था..!!
_ उतना ही मिलो किसी से जितना वो मिलना चाहता है..!!
मस्त विचार 021
मन तुझी से लगा है तोड़ मत देना.
मुझे तेरे बिना जीने की आदत नहीं.
मुझे अकेले जीने के लिए छोड़ मत देना.



