मस्त विचार 041

मुझे मालूम है तुम्हे पता है

मुझे अब अच्छा लगने लगा है

अपने ही भीतर खो जाना

क्योंकि वहाँ तुम चले आते हो हर बार.

मस्त विचार 040

मुझे भा गया है, तेरे पास आना.

तू मिल गया मुझे, मिल गया ठिकाना.

ऐ यार, तुम कहीं बदल न जाना.

मेरी ये दुनिया, आबाद है तुम्ही से.

आबाद मेरी दुनिया, बरबाद न बनाना.

मुझे भा गया है, तेरे पास आना.

मस्त विचार 037

तेरी नेकी का लिबास ही तेरा बदन ढकेगा ऐ बन्दे..

सुना है ऊपरवाले के घर में कपडे कि कोई दूकान नहीं है…

 

मस्त विचार 036

अगर मै मनचाहा रूप लेने में सछम होता,

तो तुम्हारे आंसू बन जाता

जो तुम्हारे गालों पर जीता और होठों पर मर जाता.

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