मस्त विचार 020

आँसू पोंछ कर हँसाया है मुझे.

मेरी ग़लती पर भी सीने से लगाया है मुझे.

कैसे प्यार न हो ऎसे यार से.

जिसके प्रेम ने जीना सीखाया है मुझे.

 

मस्त विचार 019

यों तो कुछ ख़ास नहीं है मेरे यार में.

पर फिर भी शायद कुछ बात है.

उसकी वजह से ही हवाओं में अनोखा अहसास है.

हर वक़्त यूँ लगता है वह आस पास है.

मस्त विचार 018

तस्बीर अपनी दिखा कर कह गये राज अपने बहुत कुछ,

चहरा आप का दिखा कर एहसास करा गये बहुत कुछ.

मस्त विचार – खामोश रहा पर मै कुछ कह न सका – 016

खामोश रहा पर मै कुछ कह न सका.

इतने मिले दुःख कि दुःख ही दवा बन गए.

न खुशी में ख़ुशी न ग़म में ग़म मिले.

मन और दिमाग सब सुन्न हो गया.

चोट पे चोट मै खाता चला गया.

खामोश रहा पर मै कुछ कह न सका.

 

मस्त विचार 015

खुल कर हँसना मै भी हूँ चाहता.

मुस्कुराना मै भी हूँ चाहता.

पर तरसता हूँ एक बहाने को.

तू आए तो एक बहाना बन जाए.

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