मस्त विचार 041
मुझे मालूम है तुम्हे पता है
मुझे अब अच्छा लगने लगा है
अपने ही भीतर खो जाना
क्योंकि वहाँ तुम चले आते हो हर बार.
मुझे अब अच्छा लगने लगा है
अपने ही भीतर खो जाना
क्योंकि वहाँ तुम चले आते हो हर बार.
तू मिल गया मुझे, मिल गया ठिकाना.
ऐ यार, तुम कहीं बदल न जाना.
मेरी ये दुनिया, आबाद है तुम्ही से.
आबाद मेरी दुनिया, बरबाद न बनाना.
मुझे भा गया है, तेरे पास आना.
हमे मिटा के मुकद्दर को भी सुकूं न मिला……
और मेरी तक़दीर पर, मेरा ही वश नहीं चलता.
सुना है ऊपरवाले के घर में कपडे कि कोई दूकान नहीं है…
तो तुम्हारे आंसू बन जाता
जो तुम्हारे गालों पर जीता और होठों पर मर जाता.