मस्त विचार – खामोश रहा पर मै कुछ कह न सका – 016

खामोश रहा पर मै कुछ कह न सका.

इतने मिले दुःख कि दुःख ही दवा बन गए.

न खुशी में ख़ुशी न ग़म में ग़म मिले.

मन और दिमाग सब सुन्न हो गया.

चोट पे चोट मै खाता चला गया.

खामोश रहा पर मै कुछ कह न सका.

 

मस्त विचार 015

खुल कर हँसना मै भी हूँ चाहता.

मुस्कुराना मै भी हूँ चाहता.

पर तरसता हूँ एक बहाने को.

तू आए तो एक बहाना बन जाए.

मस्त विचार 012

 न मुस्कुराने को जी चाहता है,

न आँसू बहाने को जी चाहता है,

लिखूँ तो क्या लिखूँ तेरी याद में,

बस तेरे पास आने को जी चाहता है.

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