मस्त विचार 070
जब तेरा नाम जबान पर आता है.
पता नहीं मन क्यों मुस्कुराता है.
तसल्ली होती है मेरे मन को
कि चलो, कोई तो है अपना
जो हर वक़्त याद आता है.
पता नहीं मन क्यों मुस्कुराता है.
तसल्ली होती है मेरे मन को
कि चलो, कोई तो है अपना
जो हर वक़्त याद आता है.
वो गिराएंगी बार बार, तू उठकर फिर से चलता चल..
जो चट्टानों से ही न उलझे वो झरना किस काम का.
_ अकल का बोझ उठा नहीं सकता !!
तू चाहे तो फिर बहार आये.
फिर से तू मुझको खिला दे.
फिर से तू जीवन मस्त बना दे.
_ की उदास होने का वक़्त ही ना मिले..