स्पष्ट इनकार और अस्वीकार से पहले थोड़ा सा कष्ट अवश्य होता है किंतु बाद में विपत्ति से रछा हो जाती है.
मस्त विचार 605
जो निखर कर बिखर जाए वो कर्तव्य है,
और जो बिखर कर निखर जाए वो व्यक्तित्व है.
मस्त विचार 604
जैसे रेत मुट्ठी से फिसलती है… शिकवे कितने भी हो हर पल, फिर भी हँसते रहना… क्योंकि ये ज़िन्दगी जैसी भी है, बस एक ही बार मिलती है.
ज़िन्दगी पल-पल ढलती है,
सुविचार 666
कौन इंसान किन परिस्थितियों से गुजर रहा है, यह आप बाहरी रूप देख कर अन्दाजा नहीं लगा सकते. इसलिए बिना किसी को जाने, किसी के बारे में कोई निर्णय न लें.
हर व्यक्ति कि परवरिश, आर्थिक स्थिति, दिमागी स्थिति, सोचने का तरीका अलग होता है. जो आपके लिए गलत है, हो सकता है उनके लिए सही हो.
सुविचार 665
आदमी की आधी से ज्यादा जिंदगी इसी में चली जाती है, कि दूसरे मेरे बारे में क्या बोलते हैं, क्या सोचते हैं.
सुविचार 664
शालीनता बिना मोल बिकती है, पर उससे सब कुछ ख़रीदा जा सकता है .
मस्त विचार 603
जिंदगी को इतना # सिरियस लेने की जरूरत नही यारों..
यहाँ से # जिन्दा बचकर # कोई नही जायेगा.
मस्त विचार 602
जिन्हें साथ नहीं चलना है वो अक्सर रूठ जाया करते हैं.
भूल जा न देख मुड़ मुड़ कर उनको.
मगर…..बदलने वाले बदल ही जाते हैं….!!
कितनी ही शिद्दत से निभा लो तुम रिश्ता…
मस्त विचार 601
जो सफ़र की धूल को गुलाल समझता है…!!!
असल में वही… जीवन की चाल समझता है…,
मस्त विचार 600
“हर. शख्स. के अपने. अफसाने. हैं “ जो सामने. हैं. उसे लोग. बुरा कहते. हैं, जिसको. देखा. नहीं उसे सब “खुदा”. कहते. है….
क्या. बात करे इस दुनिया. की






