सुविचार 534
अपनी सोच हमेशा ऊंची रखो, दूसरों की अपेछाओं से कहीं अधिक ऊंची, तो आपको बड़ा बनने से कोई रोक नहीं सकता है.
वर्ना हम गरीबों का नवाबो से ताल्लुक कैसा………
अभी चार दिन नहीं गुजरे, साल अभी से पुराना लगता है…!
जैसे पर्वत शिखरों के बीच से उठती हुई नदियाँ अपने तेज प्रवाह के साथ छोटे- मोटे पत्थरों को भी बहाकर ले जाती है. ऎसे ही आपका उत्साह विघ्न- बाधाओं को पार कर सकता है, अपने उत्साह को कभी ठण्डा मत पड़ने देना, अपने शरीर के रोम- रोम को उत्साह से भरपूर रखिए.
आप तैयार रहना, आज़माने वाले भी मिलेंगे..