सुविचार 652
ठहराव जीवन की हार है, चलना व गतिशीलता ही जीवन का सार है.
ठहराव जीवन की हार है, चलना व गतिशीलता ही जीवन का सार है.
ठहराव का सुख तभी है…जब जी भर के भटक लिया जाए..!!
क्योंकि आइना कभी झूठ नही बोलता और परछाई कभी साथ नही छोङती.
_ इसलिए सुलझते कम, उलझते ज्यादा हैं.
बङी छोटी हैं ये ज़िन्दगी, मुस्करा के मिला करो !
क्या मिलेगा दिल में नफरत रख के,
बस इंसानियत कहीं-कहीं जन्म लेती है….!!
इन्सान तो हर घर में पैदा होते हैं….!!