सुविचार 467
हर इनसान की ज़िन्दगी में ऎसा मोड़ आता है, जिस कारण से वह तरक्की करता है.
मेरा वजूद जैसे किनारा नदी का था…….
गुलशन में हमीं, लेकिन खुशबू को तरसते है…….
_ और दुख का कोई खरीदार नहीं होता !!
लेकिन उन्हें पता ही नहीं होता कि
वे क्या बदल सकते हैं —
—मैंने अपने जीवन को बदला है.