मस्त विचार 532

नदिया चले, चले रे धारा, चंदा चले चले रे तारा

तुझकाे चलना हाेगा, तुझकाे चलना हाेगा,

जीवन कही भी ठहरता नही है

आंधी से तूफा, से डरता नही है

तू ना चलेगा ताे चले तेरी राहे

मंजिल काे तरसेगी तेरी निगाहें

तुझकाे चलना हाेगा…?

मस्त विचार 530

दुनिया टूटते हुए तारे से भी दुआ मांगती है…..

कौन कहता है बर्बादी किसी के काम नहीं आती…….

मस्त विचार – कायम रखो दिल मेँ धैर्य सुकून – 529

कायम रखो दिल मेँ धैर्य सुकून, चढ न जाये स्वार्थ का जुनून.
_ ईर्ष्या – द्वेष हैँ मीठे जहर, बचके रहना आठोँ पहर.
_ मन मेँ संजो लो मीठे सपने, अजनबी बन जाएंगे अपने.
_ घृणा की काट दो बेल बना रहेगा तालमेल.
_ सच्ची धारणा और पक्का विश्वास उन्नति के सोपान हैँ.
_ मत दिखाओ झूठी औकात, सब मेँ बाँटो खुशियोँ की सौगात.
_ सबकी उन्नति मेँ अपनी उन्नति, करते रहो इसी का गुणगान..
_ कण-कण मेँ आन्नद अपार, हर दिन रहेगी बसन्त बहार.!!
मैं हर समय उपलब्ध नहीं रहता.. खासकर उनके लिए तो बिल्कुल नहीं, जो मेरा ऊर्जा तो सोख लेते हैं.. पर बदले में न लिहाज़ देते हैं, न अपनापन, ​

_ दुनिया कहता है कि हम साथ निभाएंगे, मगर सच तो यह है.. मैं बस वहाँ से खामोशी से निकल जाता हूँ.. जहाँ बने रहने की कीमत खुद को खोना हो,
​_ जो मुझे करीब से जानते हैं, वे मेरा सॉफ्टनेस और साथ निभाने का हुनर जानते हैं लेकिन जिस पल मेरी इस सॉफ्टनेस को कमज़ोरी समझा गया, मैं अपने कदम पीछे खींच लेता हूँ,
​_ मैं कोई महात्मा नहीं हूँ, मुझे गुस्सा भी आता है और चोट भी लगती है, पर मैं अपना हिफाज़त करना जानता हूं,
_ मुझे पता है मैं क्या डिज़र्व करता हूँ और यह भी..कि मेरे अपने कौन हैं, मुझसे खुशामद नहीं होता, मेरे शब्द सीधे हैं और सम्मान मेरा स्वभाव..
_ इसलिए जब किसी का लहजा बदलने लगे और नज़रें बोझ जैसे हो जाएँ,
तो मैं अपने सुकून के लिए एक सेफ दूरी चुन लेता हूँ,
​_ मैं छोड़ देता हूँ, क्योंकि मैं जानता हूँ, कहाँ ठहर कर इंतज़ार करना है और कहाँ से मुड़कर दोबारा नहीं देखना..!!
– Tanveer

मस्त विचार 528

एक शब्द है ( प्यार ) इसे कर के देखो तुम, तड़प ना जाओ तो कहना,

एक शब्द है ( क़िस्मत ), इससे लड़ कर देखो तुम, हार ना जाओ तो कहना,

एक शब्द है (ईमानदारी ), जमाने में नहीं मिलती, कहीं ढूंढ पाओ तो कहना,

एक शब्द है ( आँसू ) दिल में छुपा कर रखो, तुम्हारी आँखों से ना निकल जाए तो कहना,

एक शब्द है ( बिछड़ना ) इसे सह कर तो देखो, तुम टूट कर बिखर ना जाओ तो कहना,

मस्त विचार 527

हमारे आस पास नकारात्मक और दोषदर्शी लोग हमेशा मौजूद रहेंगे. यदि हम उनकी बातों को सुन कर, डर कर बैठ जाएंगे, तो काम कैसे चलेगा. लोगों की बातें या भविष्य वाणी सुन कर, हार मान लेना, बिना परीछा दिए ही फेल हो जाने जैसा है. ऎसी बातों को अनसुना कर अपने काम में जुट जाएं — भविष्य वाणियों के हवाले न करें, अपनी काबिलियत.

सुविचार 576

जब तुम्हारा जन्म हुआ था, तब तुम रोये थे जब कि पूरी दुनिया ने जश्न मनाया था. जीवन ऐसे जियो कि तुम्हारी मौत पर पूरी दुनिया रोये और तुम जश्न मनाओ.

सुविचार 575

गाँठ बाँध लें, जो भी काम या चीज अवसर की तरह दिखे, उसे ठुकराना नहीं चाहिए, खुद की छमताओं को नए काम दे कर परखें.

सुविचार 574

कोई भी ऎसा व्यक्ति नहीं है, जिससे कभी कोई गलती नहीं हुई. इसलिए गलती होने पर उसकी जिम्मेदारी भी लें.

मस्त विचार 526

हम खुद पर गरूर नहीं करते,

याद करने के लिए किसी को मजबूर नहीं करते,

मगर एक बार किसी को अपना बना लें तो,

उसे अपने से कभी दूर नहीं करते.

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