मस्त विचार 525
जब तक हम दूसरों के बारे में नहीं सोचते है और उनके लिए कुछ नहीं करते हैं,
तब तक हम खुशियों के सबसे बड़े स्त्रोत को गँवाते रहते हैं.
तब तक हम खुशियों के सबसे बड़े स्त्रोत को गँवाते रहते हैं.
क्योंकि उन से हम घृणा करते हैं.
कोरा पन्ना न सार्थक होता न व्यर्थ होता, सिर्फ खाली होता है –
– उस पर क्या लिखोगे, सब इस पर निर्भर करता है.