मस्त विचार 438

 ना मुस्कुराने को जी चाहता हैं,

ना आंसू बहाने को जी चाहता हैं,

लिखूँ तो क्या लिखूँ तेरी याद में

बस तेरे पास लौट आने को जी चाहता हैं.

मस्त विचार 436

मांगी थी दुआ रब से.

देना उसे जो अलग हो सब से,

रब ने मिला दिया मुझे तुम से,

और कहा ” लो संभालो यह अनमोल है सब से “.

सुविचार 441

 जो व्यक्ति भीतर सत्य को अनुभव करता है, उस का सारा जीवन सौन्दर्य से, शान्ति से और संगीत से भर जाता है.

सुविचार 440

पछतावा कायरता के लिए होता है वीरता के लिए नहीं, वीरता कभी नहीं पछताती.

सुविचार 439

रब ने हर इंसान को खास बनाया है. हर किसी में कोई न कोई खूबी जरूर दी है. उसे पहचानें और उस पर गर्व करें.

मस्त विचार 432

ऎसा जीवन यापन करिए,

जो अंत समय तक आपका स्टैण्डर्ड बनाए रखे.

सुख- समृद्वि को बढ़ाने की चेष्टा अवश्य कीजिए,

किन्तु भविष्य को अन्धकारमय बनाने के मूल्य पर नहीं.

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