सुविचार 542

एक अच्छी और खुशहाल ज़िन्दगी के लिए सन्तुलित रहना बहुत जरुरी है. न तो सुख में बहुत खुश और न ही दुःख में ज्यादा हताश हों.

 

सुविचार 541

इन्सान जब सभ्य होता है तो प्रायः अधिकांश लोगों का चहेता बन जाता है. उस के व्यवहार से मित्रता,प्रेम, सरलता, सहजता आदि गुण झलकते हैं.

मस्त विचार 507

तुम जीवन को जीना सीखाते हो.

सुख- दुःख की कड़ी को मिलाते हो.

हम जीयें ज़िन्दगी मस्तों की तरह.

ऐसी मस्ती तुम ही लाते हो.

सुविचार 540

आप की सक्रियता, कार्य- कुशलता सिर्फ आनन्द के लिए है. जो व्यक्ति अपने संतोष को नहीं जानता है, वह कार्य कुशलता से उत्पन्न होने वाले सुख को नहीं प्राप्त कर पाता.

मस्त विचार 504

कितनी भी तेज उठे लपटें आग की मगर,

तेरा एक एहसास आए तो सब सर्द हो जाये…

मुझे सरफरोशी से मोह्ब्बत इतनी हो गयी है,

दर्द भी मेरे आगोश में आकर बेदर्द हो जाये…..

सुविचार 537

जीवन में कभी किसी से अपनी तुलना मत कीजिए. आप जैसे हैं, सर्वश्रेष्ठ हैं,  रब की हर रचना अपने आप में सर्वोत्तम है.
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