सुविचार 338

दुनिया पूरी तरह से तटस्थहै. इस में कांटे हैं, इस में गुलाब के फूल हैं, इस में रातें हैं, इस में दिन भी हैं,  दुनिया पूरी तरह से तटस्थहै, संतुलित – इस में सब कुछ है.

सुविचार 337

थोड़ा मान पाने के लिए अपमान भी सहना पड़ता है,

थोड़ा सुख पाने के लिए दुःख भी सहना पड़ता है.

सुविचार- पुच्छल्ला, पुछल्ला, पिछलग्गु, दुँबाला, साथ न छोड़नेवाला – 336

किसी के साथ होने में तभी मज़ा है जब किसी को आपकी ज़रूरत हो..

_ वरना तो आप फ़ालतू पुच्छल्ले की तरह पीछे लगे हुए हैं.
.… अरे नहीं, नहीं, पुच्छल्ले कहाँ फ़ालतू होते हैं ? उनकी ज़रूरत तो सब से ज़्यादा होती है.
_ किसी को आपकी ज़रूरत इंसान के रूप में हो, न हो, पुच्छल्ले के रूप में ज़रूर अच्छी लगेगी.
_ क्योंकि पुच्छल्ला सिर्फ़ सेवादार होता है, उसे कुछ चाहने का हक़ नहीं होता.
– Manika Mohini

मस्त विचार 364

कहीं हम अपने उस यार को तो नहीं भूल गए.

जो हमारी खुशियों में हमारे साथ नहीं था,

लेकिन बुरे दौर में वह हमारे साथ रहा.

सुविचार – शर्म – 335

शर्म एक ऐसा भाव है, जो बताता है कि, हमारे जीवन में कहीं कुछ गड़बड़ है. इस के कारण हम दूसरों से कटने लगते हैं और आत्मसम्मान की कमी का अनुभव करते हैं.

सुविचार 334

नकारात्मक सोच में जीने वाला एक व्यक्ति अनेक उत्साही व्यक्तियों को भ्रमित कर देता है अतः कभी भी नकारात्मक सोच वाले व्यक्ति की संगति न करें.

सुविचार 332

यदि हम अंदर से खुश होते हैं, तो हमारा मन स्थिर रहता है और जीवन में संतुलन आता है.

सुविचार 331

जैसे गूंगे के संकेत को गूंगा ही आसानी से पहचान पाता है. उसी प्रकार ज्ञानी के सुख को वही जान पाता है, जो खुद भी ज्ञानी होता है.
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