सुविचार 338
दुनिया पूरी तरह से तटस्थहै. इस में कांटे हैं, इस में गुलाब के फूल हैं, इस में रातें हैं, इस में दिन भी हैं, दुनिया पूरी तरह से तटस्थहै, संतुलित – इस में सब कुछ है.
थोड़ा सुख पाने के लिए दुःख भी सहना पड़ता है.
जो हमारी खुशियों में हमारे साथ नहीं था,
लेकिन बुरे दौर में वह हमारे साथ रहा.
अकेले को मिलके हजारों ने लूटा !!