जब प्यार और नफरत दोनों अनुपस्थित होते हैं तो सब कुछ स्पष्ट और निर्विवाद हो जाता है.
सुविचार 458
काम करने के लिए छमता एक मानसिक स्थिति है, हम कितना ज्यादा काम कर सकते हैं. यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम अपनी छमताओं के बारे में क्या सोचते हैं, जब आपको सचमुच विश्वास हो जाता है कि आप ज्यादा काम कर सकते हैं, तो आपका दिमाग रचनात्मक तरीके से सोचता है.
यदि आप रोज तारीफ़ के काबिल करने योग्य कार्यों को ढूँढ निकालते हैं तो ऐसे कार्यों को और ज्यादा ढूँढ़ने की आदत विकसित होने लगती है.
मस्त विचार 454
चुन चुन के दे रहे हैं दर्द यहां लोग,
गिन गिन के जैसे ली हो ख़ुशी हर किसी से हमने.
सुविचार 457
सोचने वाली बात है कि हम दूसरों के साथ जो बुरा व्यवहार करते हैं, लेकिन अगर वैसा ही व्यवहार कोई हमारे साथ करे, तो हम आगबबूला हो उठते हैं, ऎसा क्यों ? जब भी आप किसी के साथ कोई बुरा बरताव करें, दो मिनट रुक कर खुद से पूछें कि, अगर कोई मेरे साथ ऐसा बरताव करे, तो मुझे कैसा लगेगा.
अपने नेक इरादों को जाहिर करने वाले शब्दों में चिड़चिड़ाहट व गुस्से को शामिल न होने दें. हर बात को दो तरीके से समझाया जा सकता है, एक चिल्ला कर और दूसरा शान्त भाव से. चिल्लायेंगे तो सामने वाला आपकी बात कभी नहीं समझेगा.
मस्त विचार 453
शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है…
जिस डाल पे बैठे हो वो टूट भी सकती है….!!
मस्त विचार 452
स्वयं की खोज करें, _ अन्यथा आपको अन्य लोगों की राय पर निर्भर रहना होगा जो खुद को भी नहीं जानते हैं.
सुविचार 456
अपनी भावनाओं और मूड पर नियंत्रण रखने का प्रयास करें. बहुत ज़्यादा ग़ुस्सा न करें, न ही बहुत दुखी या उदास रहें.
समाज में भी अपने व्यवहार और भावनाओं में संतुलन बनाए रखें.
सुविचार 455
ज़िंदगी में सभी को सब कुछ नहीं मिलता.
जो नहीं मिला उसकी आस में रोने की बजाय, जो मिला है उसकी कद्र करें.
सुविचार 454
आप को विरासत में क्या मिला, अब यह उतना महत्वपूर्ण नहीं है, जितना यह कि आप भावी पीढ़ी को कौन से मूल्य एवं संस्कार दे कर जाएँगे.
मस्त विचार 451
और हम उसकी ग़लती के बारे में सब को जाकर बता दें.
हमेशा इस बात का इन्तजार बन्द करें कि कोई ग़लती करे





