मस्त विचार 339

कहने को खुली किताब हूँ मैँ !

मगर सच कहूँ

तो एक राज़ हूँ मै!

सब को लगता है लहर हूँ,

नदी हूँ या समन्दर हूँ मै!

मगर सच कहूँ तो बस

प्यास हूँ मै!!

खुद का नौकर, खुद

का मालिक, खुद से आज़ाद हूँ मै!

हवाओँ

कि भी बन्दिश के बस सख्त खिलाफ़ हूँ मै!!

सब को लगता है रस्ता हूँ,

मन्जिल हूँ

या किनारा हूँ-मगर सच कहूँ

बस तलाश हूँ मै!

कहने को खुली किताब हूँ मै!

मगर सच कहूँ

तो राज़ हूँ मैँ!

चलना रूकना मेरी मर्जी-

अपनी खातिर इतना खास हूँ मै!

तुम समझोगे

खुशी हूँ गम हूँ हंसी हूँ

मगर सच कहूँ बस

एहसास हूँ मैँ!

अपनी जंग का खुद सिपाही बस

अपना हथियार हूँ मैँ!

तुम समझोगे सूरज हूँ,

चाँद हूँ, या सितारा हूँ

मगर सच कहूँ तो बस

आसमान हूँ मैँ!

अपनी जिद हूँ,

अपनी ख्वाहिश अपना ही विश्वास हूँ मै!

तुम समझोगे मौन हूँ,

अन्त हूँ, अंजाम हूँ मगर सच

कहूँ तो बस शुरूआत हूँ मैँ!

मस्त विचार 338

इन्कार किया जिन्होंने मेरा समय देखकर.

वादा है मेरा ऐसा समय भी लाऊंगा कि,

मिलना पड़ेगा मुझ से समय लेकर.

मस्त विचार 337

जीवन में कभी भी किसी को कसूरवार न बनाए,

अच्छे लोग खुशियाँ लाते है,,बुरे लोग,तजुर्बां,,,,।

मस्त विचार 334

अँधेरे कहाँ समझते हैं, मशाल के जलने का दर्द.

वजह कोई भी हो, हर सूरत में दोनों की मात तो है.

डूबने वाले के लिए फर्क नहीं, मझधार और किनारे में.

बेबसी का मतलब, ज़िन्दगी के उलझे हालात ही तो हैं.

मस्त विचार 333

हम तो खिलने को तैयार हैं, हम तो मिलने को बेकरार हैं.

मांगते नहीं तुझ से जन्नत, बस तुम से तुम्ही को मांगते हैं.

मस्त विचार 332

 उदार बनो पर इस्तेमाल मत होने दो,

प्यार करो पर खुद को ठेस न लगने दो,

विश्वास करो पर भोले मत बनो,

दूसरों की सुनो लेकिन अपनी आवाज मत खोने दो !!

मस्त विचार 331

माना कि मैं अमीर नहीं हूँ, यह बात तो सच है.

लेकिन कोई अपना बना ले तो, उसका हर ग़म खरीद सकता हूँ.

कामयाबी का रास्ता

बालक अब्दुल के मन में नई-नई बातों को जानने की जिज्ञासा थी. उस के मोहल्ले में एक मौलवी रहते थे. एक दिन अब्दुल उन के पास गया और बोला, ” मै कामयाब बनना चाहता हूँ, कृपया बताएँ कि कामयाबी का रास्ता क्या है ?
हँसते हुए मौलवी साहब बोले, ” बेटा, मै तुम्हें कामयाबी का रास्ता बताऊंगा, पहले तुम मेरी बकरी को सामने वाले खूंटे से बांध दो, ” कह कर उन्होंने बकरी की रस्सी बालक अब्दुल को थमा दी.
वह बकरी किसी के काबू में नहीं आती थी. अतः जैसे ही अब्दुल ने रस्सी थामी कि वह छलांग लगा, हाथ से छूट गई. फिर काफी मशक्कत के बाद बालक अब्दुल ने चतुराई से काम लेते हुए तेजी से भाग कर बकरी को पैरों से पकड़ लिया. पैर पकडे जाने पर बकरी एक कदम भी नहीं भाग पाई और अब्दुल उसे खूंटे से बांधने में कामयाब हुआ.
यह देख मौलवी साहब बोले, ” शाबाश, अब्दुल , यही है कामयाबी का रास्ता. जड़ पकड़ने से पूरा पेड़ काबू में आ जाता है. अगर हम किसी समस्या की जड़ पकड़ लें, तो उस का हल आसानी से निकाल सकते हैं. “
बालक अब्दुल ने इसी सूत्र को आत्मसात कर लिया और जीवन में आगे बढ़ता गया. यह बालक था अब्दुल गफ्फार खां. जिन्हें सीमांत गांधी के नाम से भी जाना जाता है. 
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