सुविचार 453
इंसान बड़ी अजीब फितरत का मालिक है,
ये मरे हुवे को रोता है और जिन्दों को रुलाता है.
ये मरे हुवे को रोता है और जिन्दों को रुलाता है.
आदमी वो नहीं जो चेहरे से दिखता है . आदमी वो है जो सोच से दिखता है .
दूसरों को मजा चखाने के बजाय अपने काम पर ध्यान दें.
सच्ची समृद्धि है.
किसी चीज़ की आवश्यकता न रह जाने की स्थिति ही
जिसको अपना अँधेरा ही नहीं दिख रहा, वो रोशनी की चाह क्यूँ करेगा.
इसका सीधा- सा मतलब है कि आप इतने मजबूत हैं कि
अपनी ज़िन्दगी अकेले जी सकते हैं और किसी पर निर्भर नहीं हैं.
जिनको इसकी अधिक आवश्यकता है,
वे ही इसको सबसे कम पसन्द करते हैं.