सुविचार 393
आशा का बंधन विरह के कठोर दुःख को भी सहन करा देता है. – कालिदास
_ पर बाद में वे आपको ही कष्ट पहुँचाते हैं.
_ सर उठा के जीता हूँ पारदर्शिता में गर्व, शिकायतें ढूँढना.
_ कई जगहों पर अपूर्णता लेकिन कोई पछतावा नहीं.
_ और शायद इस अपूर्णता में मैं खुद को बार-बार पाता हूँ.!!