सुविचार 282

जो सब से ज्यादा व्यस्त है वह ही सब से अधिक समय निकाल सकता है. सुस्त व कामचोर ही हमेशा समय की कमी का रोना रोते रहते हैं.

 

सुविचार 281

समय और परिश्रम मनुष्य के दो सर्वोत्तम चिकित्सक हैं. परिश्रम से भूख तेज होती है और संयम अतिभोग को रोकता है.

सुविचार – अनजाने लोग – 280

और यही तो सोचने वाली बात है, कि कैसे कुछ लोग यूँ ही टकरा जाते हैं और ख़ास हो जाते हैं.!!
सार्थक संबंध बनाएं : ऐसे लोग जो आपकी आत्मा को सांस लेने में मदद करें, न कि केवल आपके अहंकार को हंसाएं और बकवास करें.!!
कभी-कभी जीवन में ऐसा भी होता है कि कोई इंसान वर्षों तक हमारी दुनिया से अनजान और गुम सा रहता है, और फिर एक दिन अचानक हमारे सामने आ खड़ा होता है,

_ हैरानी की बात यह होती है कि हम उसे पहले से नहीं जानते, फिर भी उसके आने से एक अजीब-सी परिचित अनुभूति महसूस होने लगती है…!

सुविचार 279

द्वेष रखने वाला, मर्म स्थान पर प्रहार करने वाला, कठोर वाणी बोलने वाला, विरोध रखने वाला तथा धूर्त, बुरे कर्म करता हुआ शीघ्र ही बड़ी विपत्तियों में घिर जाता है.

सुविचार – अदृश्य शक्ति – 277

इस बात पर आश्चर्य होता है कि कई बार कोई काम मैं सोचूं..

_ और वह काम मेरे करने से पहले ही अपने आप हो जाता है.!!

इंसान के जीवन में ना जाने कौन सी अदृश्य शक्ति काम करती है,

_ जिसके कारण जो बात हम कभी सोचते तक नहीं.. वही हो जाता है.
_ और जो सोचते है वह उम्र बीत जाती है और पूरी नहीं होती,
_ ऐसा जान पड़ता है कि व्यक्ति का सारा जीवन किसी ने पहले से लिख कर रखा है और सब कुछ उसी पर चल रहा.!!

मस्त विचार 328

काश….कि….मै इंसान न होता.

खुद से फिर अनजान न होता.

क्यों आया इस धरा पर मै.

सोच – सोच परेशान न होता.

तन की काया मन की माया.

घर वाले और बाहर वाले.

कितने टुकड़े करूँ मै खुद के.

करूँ मै खुद को किस के हवाले.

इसलिए मै अक्सर ही,

सोचा ये करता हूँ कि………..

कि काश कि मै होता एक पंछी.

फिर मुझे कोई रोक न पाता

सरहद के उस पार भी मै.

अपनी मरजी से जा पाता.

मिलता वहाँ मै सब से पर,

जंग की कोई बात न करता.

प्रेम के गीत उन्हें सुना कर.

अपने घर में आ जाता.

या काश कि मै होता एक वृच्छ……

देता सब को शीतल छाया.

भेद- भाव ना किसी से करता.

क्या अपना और क्या पराया.

पथिक जो मेरे पास आता.

सब को मीठे फल मै देता.

बदले में कुछ भी न लेता.

और काश कि मै होता एक बूंद……

तृष्णा किसी की मिटा तो पाता.

तृप्ति भले न कर पाता पर,

काम तो कुछ पल आ जाता.

और काश मै होता…..

काश कि होता एक कोरा पन्ना.

कोई मुझ पर तो कुछ लिख पाता.

वेद, पुराण और ग्रन्थ न सही,

एक छोटी- सी कविता ही.

जिसे पढ़ कर प्रेरित तो कुछ लोग होते.

और मै एक प्रेरक अंश बन जाता.

और भूल वश गर जुड़ जाता मै,

इतिहास के पन्नों संग.

फिर कोई तमन्ना शेष न होती,

क्यों कि…………………….

युगों तलक मै अमर हो जाता.

काश………कि……मै इंसान न होता.

मस्त विचार 327

किसी ने बर्फ से पुछा की, आप इतने ठंडे क्युं हो ?

बर्फ ने बडा अच्छा जवाब दिया :-

” मेरा अतीत भी पानी; मेरा भविष्य भी पानी…”

फिर गरमी किस बात पे रखु ??

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