सुविचार 253

जीवन के ये 17 मूल आधार………!!!

01. आनन्द के लिए = संगीत,

02. खाने के लिए = गम,

03. पीने के लिए = क्रोध,

04. निगलने के लिए = अपमान,

05. व्यवहार के लिए = नीति,

06. लेने के लिए = ज्ञान,

07. देने के लिए = दान,

08. जीतने के लिए = प्रेम,

09. धारणे के लिए = धैर्य,

10. तृ्प्ति के लिए = संतोष,

11. त्यागने के लिए = लोभ,

12. करने के लिए = सेवा,

13. प्राप्त करने के लिए = यश,

14. फैंकने के लिए = ईर्ष्या,

15. छोडने के लिए = मोह,

16. रखने के लिए = इज्जत,

17. बोलने के लिए = सत्य.

सुविचार – आख़िर जीवन इतना कठिन क्यों है ? – 252

आख़िर जीवन इतना कठिन क्यों है ?

_ क्योंकि जीवन हमें हर पल सिखाने के लिए बना है, सुख देने के लिए नहीं..
_ हर कठिनाई में एक गुप्त पाठ छिपा होता है — जो हमें भीतर से और सच्चा, और गहरा बनाता है.
_ कठिनाई तब तक कठिन लगती है, जब तक हम उसे बाहरी दृष्टि से देखते हैं.
_ पर जब भीतर से देखने लगते हैं — वही दर्द बोध बन जाता है, वही संघर्ष साधना बन जाता है.
“जीवन कठिन नहीं, वह हर पल हमें सिखाता है.”

मस्त विचार – है खामोश मगर सब कुछ कह जाता है – 288

है खामोश मगर सब कुछ कह जाता है.

है रंगीन मगर दुनिया को बेरंग नजर आता है.

कठोरता उसकी फ़ितरत नहीं.

लोगों की फ़ितरत है उसे कठोर समझना.

ख़ामोशी उसकी आदत नहीं.

लोगों की गलतफहमी है उसे खामोश समझना.

है रास्ते में पड़ा पर कुछ नहीं कह पाता है.

है सोचता कहने को बहुत कुछ.

पर जब किसी के पैरों तले आ जाता है.

खुद चलते नहीं संभल कर, दुनिया वाले.

सौ गालियां देने से चूकते नहीं, दुनिया वाले.

रहते हो पत्थर की नीवं में तुम.

पूजते हो पत्थर की ही मूरत तुम.

समझना हो तो पत्थर के दिल को समझ लो.

पत्थर के जैसा अडिग बन कर.

दुनिया में अपनी भी जीत हासिल कर लो.

बस यही पत्थर की जुबानी है.

पत्थर की छोटी- सी यही कहानी है.

है खामोश मगर सब कुछ कह जाता है.

है रंगीन मगर दुनिया को बेरंग नजर आता है.

मस्त विचार 287

अक्सर वही लोग आप पर उठाते है उँगलियाँ,,

जिनकी तमन्ना आप से बराबरी करने की तो है ….

लेकिन औकात नहीं…!!

मस्त विचार 286

मैं जैसा भी हूँ…………अच्छा या बुरा……..अपने लिए हूँ…

मैं खुद को नहीं देखता……………..औरों की नजर से……

सुविचार – काश………कि……मै इंसान न होता. – 251

काश…………….कि……….मै इंसान न होता.

खुद से फिर अनजान न होता.
क्यों आया इस धरा पर मै.
सोच – सोच परेशान न होता.
तन की काया मन की माया.
घर वाले और बाहर वाले.
कितने टुकड़े करूँ मै खुद के.
करूँ मै खुद को किस के हवाले.
इसलिए मै अक्सर ही,
सोचा ये करता हूँ कि………..
कि काश कि मै होता एक पंछी.
फिर मुझे कोई रोक न पाता
सरहद के उस पार भी मै.
अपनी मरजी से जा पाता.
मिलता वहाँ मै सब से पर,
जंग की कोई बात न करता.
प्रेम के गीत उन्हें सुना कर.
अपने घर में आ जाता.
या काश कि मै होता एक वृच्छ……
देता सब को शीतल छाया.
भेद- भाव ना किसी से करता.
क्या अपना और क्या पराया.
पथिक जो मेरे पास आता.
सब को मीठे फल मै देता.
बदले में कुछ भी न लेता.
और काश कि मै होता एक बूंद……
तृष्णा किसी की मिटा तो पाता.
तृप्ति भले न कर पाता पर,
काम तो कुछ पल आ जाता.
और काश मै होता…..
काश कि होता एक कोरा पन्ना.
कोई मुझ पर तो कुछ लिख पाता.
वेद, पुराण और ग्रन्थ न सही,
एक छोटी- सी कविता ही.
जिसे पढ़ कर प्रेरित तो कुछ लोग होते.
और मै एक प्रेरक अंश बन जाता.
और भूल वश गर जुड़ जाता मै,
इतिहास के पन्नों संग.
फिर कोई तमन्ना शेष न होती,
क्यों कि…………………….
युगों तलक मै अमर हो जाता.
काश………कि……मै इंसान न होता.

सुविचार – मैं धीरे-धीरे सीख रहा हूँ कि… – 250

मैं धीरे-धीरे सीख रहा हूँ कि…

_ किसी का दिल जीतने के लिए बहुत कठोर प्रयास करना, समय और ऊर्जा की बर्बादी है और यह आपको कुछ नहीं देता, केवल खालीपन से भर देता है.
_ मैं धीरे-धीरे सीख रहा हूँ कि…
जवाब नहीं देने का अर्थ यह कदापि नहीं कि यह सब मुझे स्वीकार्य है, बल्कि यह कि मैं इससे ऊपर उठ जाना बेहतर समझता हूँ.
_ मैं धीरे-धीरे सीख रहा हूँ कि…
कभी-कभी कुछ नहीं कहना सब कुछ बोल देता है.
_ मैं धीरे-धीरे सीख रहा हूँ कि…
किसी परेशान करने वाली बात पर प्रतिक्रिया देकर, आप अपनी भावनाओं पर नियंत्रण की शक्ति किसी दूसरे को दे बैठते हैं.
_ मैं धीरे-धीरे सीख रहा हूँ कि…
मैं कोई प्रतिक्रिया दे दूँ, तो भी कुछ बदलने वाला नहीं है इससे लोग अचानक मुझे प्यार और सम्मान नहीं देने लगेंगे.
यह उनकी सोच में कोई जादुई बदलाव नहीं ला पायेगा।
_ मैं धीरे-धीरे सीख रहा हूँ कि…
जिंदगी तब बेहतर हो जाती है, जब आप इसे अपने आस-पास की घटनाओं पर केंद्रित करने के बजाय उस पर केंद्रित कर देते हैं, जो आपके अंतर्मन में घटित हो रहा है.
_ आप अपने आप पर और अपनी आंतरिक शांति के लिए काम करिए और आपको बोध होगा कि….
चिंतित करने वाली हर छोटी बड़ी बात पर प्रतिक्रिया नहीं देना, एक स्वस्थ और प्रसन्न जीवन का ‘प्रथम अवयव’ है.
जीवन हर कदम पर हमें कुछ न कुछ सीखने का मौका देता है.

_ यह हम पर निर्भर करता है कि या तो हम उसे अपना लें या फिर अनदेखा करके आगे बढ़ जाएं.. यह हमारे हाथ में है.!!
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