मस्त विचार 297

जिंदगी ice-cream की तरह होती है,

Taste करो तो भी पिघलती है और waste करो तो भी.

इसलिए life को taste करना सीख लो,

वरना waste तो हो ही रही है.

मस्त विचार 296

मैंने पत्थरों को भी रोते देखा है, झरने के रूप में

मैंने पेड़ों को प्यासा देखा है, सावन की धुप में,

घुलमिल के बहुत रहते हैं, लोग जो शातिर हैं बहुत

मैंने अपनों को तनहा देखा है, बेगानों के रूप में !

मस्त विचार 295

किसी को तकलीफ देना, मेरी आदत नही,

बिन बुलाया मेहमान बनना, मेरी आदत नही…!

मैं अपने गम में रहता हूँ, नबाबों की तरह,

परायी ख़ुशी के पास जाना, मेरी आदत नही…!

सबको हँसता ही, देखना चाहता हूँ मै,

किसी को धोखे से भी, रुलाना मेरी आदत नही…!

बांटना चाहता हूँ तो बस, प्यार और मोहब्बत,

यूँ नफरत फैलाना, मेरी आदत नही…!

ज़िदगी मिट जाये, किसी की खातिर गम नही,

कोई बद्दुआ दे मरने की, यूँ जीना मेरी आदत नही…!

सबसे दोस्त की हैसियत से, बोल लेता हूँ,

किसी का दिल दुखा दूँ,मेरी आदत नही…!

दोस्ती होती है, दिलों के चाहने पर,

जबरदस्ती दोस्ती करना, मेरी आदत नही..!

अगर दोस्ती दौलत है…

तो हम इस शहर के, सबसे अमीर इंसान है……

सुविचार 256

जब आपको एक आईडिया मिल जाए जिसके बारे में सोचना बंद ना कर सकें, …… तो ये आगे बढ़ने के लिए एक अच्छा अवसर है.

सुविचार – दुनिया के पाँच सबसे दिलचस्प नियम – 255

दुनिया के पाँच सबसे दिलचस्प नियम :-

1. जिससे डरते हो, वही घटित होने की संभावना सबसे अधिक होती है.
(यानी छाता भूलो तो बारिश तय है.)
2. समस्या को साफ़-साफ़ लिख दो, आधा हल तो वहीं हो गया.
(काग़ज़ और कलम कभी धोखा नहीं देते.)
3. काम उठाया है तो उसे सही ढंग से पूरा करना तुम्हारी ही ज़िम्मेदारी है.
(बहाने नहीं, उपाय खोजो.)
4. ज्ञान और बुद्धि को प्राथमिकता दो, धन अपने आप पीछे-पीछे आएगा.
(सच्ची पूँजी दिमाग़ है, जेब नहीं.)
5. जहाँ निर्णय लेना ज़रूरी न हो, वहाँ निर्णय मत लो.
(कभी-कभी “रुकना” ही सबसे समझदारी है.)
_ ये नियम हमें याद दिलाते हैं कि जीवन केवल तर्क नहीं, बल्कि अनुभव और दृष्टिकोण का खेल है.
– विजय प्रभाकर नगरकर

मस्त विचार 294

सम्भव क्या असम्भव क्या , ये तो एक आडम्बर है.

पहचानो उस शक्ति को , जो छुपी तुम्हारे अंदर है .

मस्त विचार 293

जिन्दगी मुश्किल है अगर तू न साथ है.

मै तो हूँ बेवकूफ़ तू समझदार है.

ज़िन्दगी की नैया को तू ही संभालना.

तू ही तो मेरा तारणहार है.

मस्त विचार 292

मैं वो खेल नहीं खेलता, जिसमें जीतना फिक्स हो.

क्योंकि

जीतने का मज़ा तब है, जब हारने का रिस्क हो.

मस्त विचार 291

कोई दुःख नहीं कोई सुख नहीं.

तू मिल गया मुझे कोई प्यास नहीं.

तू पिलाते ही रहना मै पीता रहूँगा.

तेरा साथ अब मै कभी ना छोडूंगा.

सुविचार – “सही दिशा में बढ़ना” – 254

“सही दिशा में बढ़ना”

_ ज़िंदगी में आगे बढ़ना कोई बड़ी बात नहीं,
हर कोई किसी न किसी दिशा में भाग रहा है.
_ मुद्दा ये नहीं कि हम चल रहे हैं या नहीं,
मुद्दा ये है कि किधर जा रहे हैं और क्यों जा रहे हैं.
_ सही दिशा अक्सर धीमी लगती है,
क्योंकि वहाँ शोर नहीं होता, बस सच्चाई होती है.
“तेज़ चलने से ज़्यादा ज़रूरी है — सही दिशा में चलना”
“चलना आसान है, लेकिन सही से आगे बढ़ना ?”
_ यह एक पूरी तरह से अलग बात है.!!
error: Content is protected