मस्त विचार – अँधेरे में दिया जला दो मेरा – 162
_ हमारा दायित्व है हम बदलें, पर हम में इतना होश और अक्ल कहां ?
आदमी वो है जो सोच से दीखता है.
_ व्यक्तित्व निखर जाएगा _ धैर्य से सामना करें.
_ जो हार कर सीख जाते हैं..
अगर यह हक़ इन्सान को दिया होता तो क्या होता.
मिलने की बारी आने से पहले मिलना हो गया कई बार.
हर समय बैठ कर सोचना, “मेरा क्या होगा ? मेरा क्या होगा ?”
तुझमे तो हर रोज ही इक नई अदा दिखती है..!!
अभी तक इस सोच में हूँ कि ‘क्या सोचूँ’ ………!!
जिस व्यक्ति में ज्ञान और कुछ सीखने की भूख होती है, वह हमेशा तरोताजा अवस्था में रहता है,_ _ उसके पास विचारों का व्यापक दृष्टिकोण है और इसके साथ ही वह अंततः महान उपलब्धियां हासिल करता है.