मस्त विचार 262

“अँधेरा” सिर्फ एक शब्द भर नहीं है मेरे लिए

पूरी कहानी है, जिसे ढोया है मैंने सालों से एक बोझ कि तरह.

मस्त विचार 261

काम ऐसे कीजिए जिस मे हो सब का भला.

बातें ऐसे कीजिए जिनमे हो अमृत्त भरा.

मीठी बोली बोल सब को प्रेम से पुकारिए.

कड़वे बोल बोल के न ज़िन्दगी गुजारिए.

हँसते- मुस्कुराते हुए ज़िन्दगी गुजारिए.

मस्त विचार 259

उन लोगों का क्या हुआ होगा,

जिनको मेरी तरह गम ने मारा होगा.

किनारे पर खड़े लोग क्या जाने,

डूबने वाले ने किस किस को पुकारा होगा.

मस्त विचार 258

खुशियां बटोरते बटोरते उमर गुजर गई पर खुश ना हो सके;

एक दिन एहसास हुआ…..

खुश तो वो लोग थे जो खुशियां बांट रहे थे.

मस्त विचार 257

एक अजीब सी दौड़ है यह जिंदगी…

जीत जाओ तो अपने पीछे छूट जाते है,

और हार जाओ तो अपने ही पीछा छोड़ देते है. 

सुविचार – तुझे क्या मिला ? – 245

तुझे क्या मिला ?

_ क्या तू सच में जीता.
_ अच्छा होता कि तू हार जाता.
_ तू तो जीत कर भी हारा ही है.
_ दुनिया में जो जीता वह भी हारा.
_ जो हारा वह तो हारा ही.
_ तूने क्या पाया ?
_ क्या करेगा इस जीत का.
_ किसको दिखायेगा, बताएगा.
_ खुशियाँ क्या मना पायेगा तू.
_ केवल बचा है तू और बना है सन्नाटे का बादसाह.
_ अपनी जीत के साथ अकेला खड़ा है.
_ तू जीता नहीं, हारा है.
_ तुझे क्या मिला ?

मस्त विचार 255

आज मन में मेरे उल्लास है.

आज फिजाओं ने छेड़ा राग है.

आज बहारों ने भी बरसाए फूल हैं.

आज तारों ने भी सजाया आसमान है.

आज मन की भी मीत से हुई बात है.

आज मेरे मन में उल्लास है.

सुविचार 244

जो आदमी यह समझता है कि हर बात तुरंत उस की समझ में आ जाती है, वह कुछ भी नहीं सीख सकता.

 

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