सुविचार – सब कुछ बिखर जाने दो मेरा यार – 223

सब कुछ बिखर जाने दो मेरा यार,

_ सारा परिवार, मित्र, रिश्तेदार
_ हाथ की अँगूठी तक भी
_ फिर भी उत्साह मेरा लौट आएगा
_ बुझेगी नहीं मेरी आँच
_ इस बची- खुची रोशनी से भी
_ जला लूँगा ढेर सारे दीपक
_ उपजा लूँगा फिर से
_ सूखी हुई फसल
_ और तुम्हें दिखाऊँगा
_ अपना हँसता हुआ चेहरा फिर से
_ क्योंकि तुम्हारे ही बोये
_ हिम्मत के नये बीजों ने
_ जन्म लिया है दोबारा मुझमें !

मस्त विचार 106

ऐ यार, मैंने भी अपना यार देखा है.

तुम्हे दूर से, उसे पास से देखा है.

तू दीखता नहीं, उसे आँखों से देखा है.

फर्क सिर्फ इतना है तुझमे और उसमे.

उसे आँखों से और तुझे दिल से देखा है.

मस्त विचार 101

वो सब कुछ जो कहा जाना बहुत ज़रूरी है..

या तो डायरियों में दर्ज़ है _ या चुप्पियों में कैद …!

मस्त विचार – एक जाम ख़ुदा ने दोस्ती का पिला दिया – 100

एक जाम ख़ुदा ने दोस्ती का पिला दिया, सूनी गुमसुम राहों को आपसे सजा दिया.

बीत रहा हर लम्हा आपकी दोस्ती के साये में, कुछ इस तरह कायल आपने दोस्ती का बना लिया.

इन लकीरों में आपका नाम छुपा था, मेरी तक़दीर में अनजाने दोस्त का पैगाम भी छुपा था.

बरसी इनायत इस कदर ख़ुदा कि मुझ पर, कि फूल-सा दोस्त मेरे भी आंगन में खिला दिया.

आपकी दोस्ती से मुझे एक जूनून मिला है, गिरती ठोकरों में उठाते हाथ का सकून मिला है.

डूब जाती है हर उठती लहर इस दोस्ती कि गहराई में, मेरी कश्ती जो तैरा दे, ऐसा दोस्त दिया है.

अँधेरे में आपने एक दीप जलाया है, कुछ टूटे सपनो को, फिर इन आँखों में सजाया है.

रोशन है हर राह मेरी आपके नूर से, कि हर राह को रोशन करता चाँद, फलक पर बैठा दिया.

अरज है मेरी आपसे दूर न होना, मेरी किसी ख़ता से रूठ मत जाना.

आपकी दूरी से कहीं बिखर न जांऊ मै, कुछ ऐसा कायल आपने अपनी दोस्ती का बना लिया.

कि एक जाम ख़ुदा ने दोस्ती का पिला दिया.

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