मस्त विचार 077
रोज़ कोई ना कोई नाराज हो जाता है !!
मनुष्य की कीमत
पिता कुछ देर शांत रहे फिर बोले, ” यह लोहे की छड़ देख रहे हो, इस की कीमत तुम जानते ही हो कि यह लगभग २०० रूपए की है. अगर मै इस के छोटे छोटे कील बना दूँ तो इसी छड़ की कीमत लगभग १ हजार रूपए हो जाएगी. अब तुम बताओ इसी प्रकार अगर मै इस छड़ से बहुत सारे स्प्रिंग बना दूँ तो ? “
बालक ने गणना की और बोला, ” फिर तो इस की कीमत बहुत ज्यादा हो जाएगी. “
” ठीक इसी प्रकार मनुष्य की कीमत इस बात से नहीं होती कि अभी वह क्या है, बल्कि इस बात से होती है कि वह अपने आप को क्या बना सकता है, ” पिता ने समझाया, ” अकसर हम अपनी सही कीमत आंकने में गलती कर देते हैं. हमारे जीवन में कई बार स्थितियाँ अच्छी नहीं होतीं, पर इस से हमारी कीमत कम नहीं होती.”
पिता की बातों से बालक समझ गया कि मनुष्य की कीमत क्या है.
मस्त विचार 076
पर दुःख अच्छा भी होता है,
जब आता है, कुछ- ना- कुछ सीखा जाता है .
मस्त विचार 075
बेवजह हर समय ना शिकायत कीजिये .
दुश्मनी का सफ़र तय ना हो पायेगा,
प्रेम से मन का आँगन सजा लीजिये .
सुविचार – हर तरफ पागलपन – 213
मस्त विचार 074
निकल ही आएगा , कोई ना कोई रास्ता .
मस्त विचार 073
अब किसी शख्श की आदत नहीं होती मुझको.
मस्त विचार – कोई इतना करीब हो कर, दूर क्यों हो जाता है – 072
कोई खुशी बन कर ग़म में, क्यों बदल जाता है.
कोई मन में बस कर, ज़िन्दगी से दूर क्यों हो जाता है.
कोई जीवन को रंगों से भर कर, उजाड़ क्यों देता है.
कोई हमराह बन कर, राह में छोड़ क्यों जाता है.
क्यों और क्यों कोई ऎसा करता है.
कि इतना ख़ास हो कर, बेगाना बन जाता है.
क्यों कोई हमारा साथ छोड़कर, दूसरों का हो जाता है.
क्यों कोई हमें बताये बिना,
अपने दिल से बाहर निकाल देता है.
क्या हम इतने बुरे हैं.
कि उसे हमारे दर्द का, एहसास भी नहीं होता.
_ बेहद हुए करीब तो किस्सा हुआ ख़तम..!!
_ अब जब हम उनसे दूर हो गए हैं तो, अब वो निश्चित सुखी होंगे..!!
_ जब बिना किसी किंतु-परंतु के आपके द्वारा पूछे गए सवाल उसे परेशान करने लगें..!!
मस्त विचार 071
तुम चाहो तो प्रतिकूल को अनुकूल बना दो.
चाहने की देर है और बस कुछ भी नहीं.
तुम चाहो तो आसमान को धूल बना दो.




