सुविचार 214

Question : आपका जीवन को देखने का नजरिया कितना बेहतर है, पर पता नहीं आप जैसे लोग दुनिया में इतने कम क्यों हैं ?
Answer : शायद इसकी एक वजह ये है भौतिकता की मांग में, मानव सभ्यता भी भारी भौतिकता की चपेट में है..
_ वह लोगों के रिश्तों में भी उनके व्यक्तिगत वर्ताव में भी देखने को मिलता है और इसकी वजह ये भी है उन्हें घर में भी यही सब सिखाया बताया जा रहा है..
_ शायद इंसान अति जरूरत वादी हो चुका है.. बाकी मेरा मानना है जब से सभ्यता आई सब कुछ इस संसार में मानव निर्मित है, सिवाय कुदरत को छोड़कर, तो जो कुछ मानव निर्मित है उसे बदला जाना आवश्यक है, पर लोग बदलना नहीं चाहते.. वो हर चीज़ में छेड़छाड़ चाहते हैं, सुकून से कुदरत को अपना काम नहीं करने देना चाहते..
_ जब से तर्क हावी हुआ इंसानों के भीतर से संवेदनाओं को हटा लेने का निरंतर काम जारी है..
_ अब यहां जीवन एक प्रोडक्ट बनकर रह गया है.. पर हमें अपनी सीमाएं तय करनी होंगी, वरना भागते हुए ज़िन्दगी गुज़र जाएगी और हाथ कुछ भी नहीं आएगा..
_ सिवाय चार पांच फ्लैट, पांच छह गाड़ियां, हो सकता है इससे भी ज्यादा कोई प्रॉपर्टी बना ले..
_ मगर किसके लिए आख़िर क्यों इतना भागकर कौन सा जीवन अमृत मिल जायेगा..
_ यहां तो अगले पल ही सांसों का भरोसा नहीं.. और जानते हुए भी यह सच किसी को दिखता नहीं.!!
– Rhythm Raahi

मनुष्य की कीमत

लोहे की दुकान में अपने पिता के साथ काम कर रहे एक बालक ने पिता से पूछा, ” इस दुनिया में कोई अमीर है, कोई गरीब. किसी का सम्मान अधिक तो किसी का कम है, ऎसा क्यों ? आखिर मनुष्य की कीमत क्या है ?
पिता कुछ देर शांत रहे फिर बोले, ” यह लोहे की छड़ देख रहे हो, इस की कीमत तुम जानते ही हो कि यह लगभग २०० रूपए की है. अगर मै इस के छोटे छोटे कील बना दूँ तो इसी छड़ की कीमत लगभग १ हजार रूपए हो जाएगी. अब तुम बताओ इसी प्रकार अगर मै इस छड़ से बहुत सारे स्प्रिंग बना दूँ तो ? “
बालक ने गणना की और बोला, ” फिर तो इस की कीमत बहुत ज्यादा हो जाएगी. “
” ठीक इसी प्रकार मनुष्य की कीमत इस बात से नहीं होती कि अभी वह क्या है, बल्कि इस बात से होती है कि वह अपने आप को क्या बना सकता है, ” पिता ने समझाया, ” अकसर हम अपनी सही कीमत आंकने में गलती कर देते हैं. हमारे जीवन में कई बार स्थितियाँ अच्छी नहीं होतीं, पर इस से हमारी कीमत कम नहीं होती.”
पिता की बातों से बालक समझ गया कि मनुष्य की कीमत क्या है. 

मस्त विचार 076

लोग कहतें हैं दुःख ख़राब होता है, जब आता है रुलाता है.

पर दुःख अच्छा भी होता है,

जब आता है, कुछ- ना- कुछ सीखा जाता है .

मस्त विचार 075

खुशबू से भरी बातें किया कीजिये ,

बेवजह हर समय ना शिकायत कीजिये .

दुश्मनी का सफ़र तय ना हो पायेगा,

प्रेम से मन का आँगन सजा लीजिये .

सुविचार – हर तरफ पागलपन – 213

हर तरफ पागलपन : अरे मैं इस युग में क्यों पैदा हुआ ?

_ यह एक भयानक युग है.
_ दुनिया इतनी भयावह हो गई है कि कभी लगता है कि सब कुछ बंद करके एकांत में कहीं चला जाऊं.. – जहां कोई मुझे न जानता हो.!!
_ “क्या मेरा मन दुनिया से भागना चाहता है या अपने भीतर के शोर को शांत करना चाहता है ?”
_ जब संवेदनशील और गहरी सोच रखने वाला व्यक्ति चारों तरफ़ की दौड़, हिंसा, शोर और उथल-पुथल देखता है, तो उसका मन यही कहता है — “मैं इस युग में क्यों ?”
_ दरअसल यह अनुभूति भीतर की साफ़ दृष्टि और संवेदनशीलता का ही प्रमाण है.
“जब भीतर शांति का दीपक जलता है, तब सबसे अंधेरे युग में भी उजाला अपना घर बना लेता है.”

मस्त विचार – कोई इतना करीब हो कर, दूर क्यों हो जाता है – 072

कोई इतना करीब हो कर, दूर क्यों हो जाता है.

कोई खुशी बन कर ग़म में, क्यों बदल जाता है.

कोई मन में बस कर, ज़िन्दगी से दूर क्यों हो जाता है.

कोई जीवन को रंगों से भर कर, उजाड़ क्यों देता है.

कोई हमराह बन कर, राह में छोड़ क्यों जाता है.

क्यों और क्यों कोई ऎसा करता है.

कि इतना ख़ास हो कर, बेगाना बन जाता है.

क्यों कोई हमारा साथ छोड़कर, दूसरों का हो जाता है.

क्यों कोई हमें बताये बिना,

अपने दिल से बाहर निकाल देता है.

क्या हम इतने बुरे हैं.

कि उसे हमारे दर्द का, एहसास भी नहीं होता.

पास में रह कर दूर रहने से अच्छा है, दूर रह कर पास रहा जाए..!!
जिनके करीब बहुत लोग हैं,, उनसे दूर रहना ही ठीक होता है…!!
एक हद में थे हम तो बेहद करीब थे,

_ बेहद हुए करीब तो किस्सा हुआ ख़तम..!!

कुछ लोग हमारी वजह से दुखी थे,

_ अब जब हम उनसे दूर हो गए हैं तो, अब वो निश्चित सुखी होंगे..!!

किसी के जीवन से तब पूरी तरह दूर चले जाना चाहिए !

_ जब बिना किसी किंतु-परंतु के आपके द्वारा पूछे गए सवाल उसे परेशान करने लगें..!!

मस्त विचार 071

तुम चाहो तो शूल को भी फूल बना दो.

तुम चाहो तो प्रतिकूल को अनुकूल बना दो.

चाहने की देर है और बस कुछ भी नहीं.

तुम चाहो तो आसमान को धूल बना दो.

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