सुविचार 204

हर इन्सान के साथ जीवन में कुछ न कुछ होता ही है,

उस बात को पकड़ कर बैठ जाने से जीवन नहीं चलता. उसे भूल कर आगे बढ़ें.

 

 

सुविचार 203

जीवन में सबसे मुश्किल काम है सरल, संतुलित बने रहना, लेकिन यह नामुमकिन नहीं है.

यदि चंद छोटी-छोटी बातों को आप अपनी दिनचर्या और जीवन का हिस्सा बनाकर अपनी आदत में शुमार कर लेंगे,

तो ज़िंदगी न स़िर्फ बेहतर लगेगी, बल्कि हेल्दी भी बनेगी.

 

मस्त विचार 026

कुछ इस तरह हमने ज़िंदगी को जी लिया.
_ ग़म के सागर को दवा, कड़वी समझ कर पी लिया.
_ ज़िंदगी कि राह काँटों से भरी थी.
_ गिरते-उठते और सम्भलते रास्ता तय कर ही लिया.
_ कई नई मंजिलें भी आयीं, कई नयी खुशियां मिलीं.
_ रास्ते बढ़ते गए, ज्यों-ज्यों सफ़र हमने किया.
_ कुछ इस तरह हमने जिंदगी को जी लिया.!!

मस्त विचार – रिश्तों कि मर्यादा में, घुट- घुट कर जीना सीखा है – 025

रिश्तों कि मर्यादा में, घुट- घुट कर जीना सीखा है

कुछ पल खुशियाँ पाने को, आँसू को पीना सीखा है.

ताने- उलहाने सुन कर मै, बना रहा हर बार अनजान.

लोग मुझे सताते रहे, मुझे न समझा कभी इन्सान.

सब्र के पनघट का पानी, घावों को नित सीना सीखा है.

रिश्तों कि मर्यादा में, घुट- घुट कर जीना सीखा है

ठोकर खाकर इतना जाना, स्वार्थ की पसरी है धुन्ध.

सब कुछ सहा खामोशी में, मैंने अपनी आँखे ली मूंद.

लोग दुःख पर दुःख देते रहे,मै ही जानता हूँ जो मुझपे बीता है.

रिश्तों कि मर्यादा में, घुट- घुट कर जीना सीखा है.

मस्त विचार 024

मुझे मुझ तक पहुँचने के लिए

समझ नहीं आ रहा

एक कदम आगे बढ़ाऊँ

या दो कदम पीछे

समझ नहीं पाता हूँ

जब भी निकलता हूँ

पूरा का पूरा निकलता हूँ

लेकिन फिर जहाँ पहुँचता हूँ

वहाँ मेरे अलावा बहुत कुछ होता है

समझ नहीं आता क्या रुका रहूँ यूँ ही

समझ नहीं पा रहा

एक कदम आगे बढ़ाऊँ

या दो कदम पीछे.

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