मस्त विचार 174

मन भरा – भरा रहता है, आंसू का दरिया – सा बहता है.

दुःख भीतर – भीतर रहता है, मन हर समय कुछ कहता है.

कुछ बात थी जो ख़त्म हो रही है, यादें हैं और विलाप है.

क्या होना था क्या हो गया, मन हर समय ही रो दिया.

कुछ कहने को भी तरशा, हाँ पर बात किससे करूँ.

क्या हुआ कोई भी नहीं कहता,आंसू का दरिया बहता रहता है.

मस्त विचार 172

 अब मुझे पैसे से लिए हुए सामान से ख़ुशी नहीं मिलती,

क्योंकि वो मेरे लिए कोई बड़ी बात नहीं है.

अब मुझे कोई भी वो काम सुख देता है,

जिसे करके मै किसी के लिए उपयोगी हो सकूँ.

सुविचार – CRISIS OF COOKING CYLINDER – 236

CRISIS OF COOKING CYLINDER

जैसे ही घर में गैस सिलेंडर खत्म होने की सूचना मिलती है,
घर का वातावरण अचानक आपातकाल जैसा हो जाता है.
_ सबसे पहला सवाल उठता है – अब खाना कैसे बनेगा ?
_ मानो प्रकृति ने खाने के लिए सिर्फ गैस का चूल्हा ही बनाया हो.
_ थोड़ा ठहरकर सोचिए..
_ कुछ दिन कम व्यंजन भी बन सकते हैं.
_ अगर कभी गैस सिलेंडर की समस्या आ जाए तो थोड़ा सरल और धैर्यपूर्ण जीवन अपनाकर कुछ दिन आराम से निकाले जा सकते हैं.
कुछ और तरीके भी काम आ सकते हैं:
1. एक समय का भोजन सरल रखें.
_ दिन में एक बार पका हुआ साधारण खाना और एक समय हल्का भोजन (फल, सलाद, अंकुरित) लिया जा सकता है.
2. अंकुरित अनाज और फल सब्जी का उपयोग.
_ चना, मूंग, मूंगफली को भिगोकर अंकुरित कर लें.
_ यह पौष्टिक भी होता है और पकाने की जरूरत भी नहीं पड़ती.
_ फल हैं, गाजर, खीरा, टमाटर, चुकंदर, पत्तागोभी – कितनी चीजें हैं जो कच्ची भी खाई जा सकती हैं.
_ गाजर, खीरा, टमाटर, चुकन्दर, प्याज पत्तागोभी गोभी..- तमाम तरह का रायता बनाकर कर खा सकते हैं.
_ दही, दूध, शरबत – इनसे भी पेट को थोड़ा आराम मिल जाता है.
_ प्रकृति ने इतना कुछ दिया है कि बिना गैस के भी कुछ दिन गुजारा हो सकता है.
3. पहले से बने खाने का उपयोग.
_ कई चीजें पहले से बनाकर कुछ दिन चल सकती हैं : भुना चना, सत्तू, मुरमुरा / चिवड़ा, सूखे मेवे – इनसे हल्का भोजन हो सकता है.
4. वैकल्पिक छोटे साधन.
_ अगर ज़रूरत हो तो कुछ लोग अस्थायी रूप से उपयोग करते हैं :
_ इलेक्ट्रिक केतली (पानी, दलिया, ओट्स)
_ इंडक्शन चूल्हा
_ छोटा सोलर कुकर
_ मिट्टी का चूल्हा / सिगड़ी (जहाँ संभव हो)
5. भोजन की मात्रा कम और सरल रखें.
_ जब संसाधन कम हों तो शरीर को भी थोड़ा हल्का भोजन देना अच्छा होता है.
_ कभी-कभी यह स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी हो जाता है.
6. पड़ोस और साझेदारी.
_ पहले समाज में लोग एक-दूसरे से गैस या खाना साझा कर लेते थे.
_ यह परंपरा अभी भी कई जगह काम करती है.
ज़रा याद कीजिए – जब आग का आविष्कार नहीं हुआ था,
तब भी मनुष्य जीवन जी ही रहा था.
_ असल समस्या गैस की नहीं है, समस्या यह है कि..
“हम सभ्य और समझदार होते गये और धैर्य और विवेक खोते गये”
_ “समस्या अक्सर साधनों की नहीं होती, समस्या तब होती है जब धैर्य कम पड़ जाता है”

मस्त विचार 169

  जिन्दगी की हर सुबह कुछ शर्ते लेके आती है.

 
और जिन्दगी की हर शाम कुछ तर्जुबे देके जाती है.

 

मस्त विचार 168

इन्सान ने वक़्त से पूछा……..

मैं हार क्यूँ जाता हूँ ?

वक़्त ने कहा….

धूप हो या छाँव हो,

काली रात हो या बरसात हो,

चाहे कितने भी बुरे हालात हों,

मैं हर वक़्त चलता रहता हूँ,

इसलिए मैं जीत जाता हूँ,

तू भी मेरे साथ चल,

कभी नहीं हारेगा……… ”

मस्त विचार 166

समय और परिस्थिति के अनुकूल बदलना कोई बुरी बात नहीं है,

इससे पहले कि समय आपको बदल दे, खुद बदल जाओ . 

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