मस्त विचार 286

मैं जैसा भी हूँ…………अच्छा या बुरा……..अपने लिए हूँ…

मैं खुद को नहीं देखता……………..औरों की नजर से……

सुविचार – काश………कि……मै इंसान न होता. – 251

काश…………….कि……….मै इंसान न होता.

खुद से फिर अनजान न होता.
क्यों आया इस धरा पर मै.
सोच – सोच परेशान न होता.
तन की काया मन की माया.
घर वाले और बाहर वाले.
कितने टुकड़े करूँ मै खुद के.
करूँ मै खुद को किस के हवाले.
इसलिए मै अक्सर ही,
सोचा ये करता हूँ कि………..
कि काश कि मै होता एक पंछी.
फिर मुझे कोई रोक न पाता
सरहद के उस पार भी मै.
अपनी मरजी से जा पाता.
मिलता वहाँ मै सब से पर,
जंग की कोई बात न करता.
प्रेम के गीत उन्हें सुना कर.
अपने घर में आ जाता.
या काश कि मै होता एक वृच्छ……
देता सब को शीतल छाया.
भेद- भाव ना किसी से करता.
क्या अपना और क्या पराया.
पथिक जो मेरे पास आता.
सब को मीठे फल मै देता.
बदले में कुछ भी न लेता.
और काश कि मै होता एक बूंद……
तृष्णा किसी की मिटा तो पाता.
तृप्ति भले न कर पाता पर,
काम तो कुछ पल आ जाता.
और काश मै होता…..
काश कि होता एक कोरा पन्ना.
कोई मुझ पर तो कुछ लिख पाता.
वेद, पुराण और ग्रन्थ न सही,
एक छोटी- सी कविता ही.
जिसे पढ़ कर प्रेरित तो कुछ लोग होते.
और मै एक प्रेरक अंश बन जाता.
और भूल वश गर जुड़ जाता मै,
इतिहास के पन्नों संग.
फिर कोई तमन्ना शेष न होती,
क्यों कि…………………….
युगों तलक मै अमर हो जाता.
काश………कि……मै इंसान न होता.

सुविचार – मैं धीरे-धीरे सीख रहा हूँ कि… – 250

मैं धीरे-धीरे सीख रहा हूँ कि…

_ किसी का दिल जीतने के लिए बहुत कठोर प्रयास करना, समय और ऊर्जा की बर्बादी है और यह आपको कुछ नहीं देता, केवल खालीपन से भर देता है.
_ मैं धीरे-धीरे सीख रहा हूँ कि…
जवाब नहीं देने का अर्थ यह कदापि नहीं कि यह सब मुझे स्वीकार्य है, बल्कि यह कि मैं इससे ऊपर उठ जाना बेहतर समझता हूँ.
_ मैं धीरे-धीरे सीख रहा हूँ कि…
कभी-कभी कुछ नहीं कहना सब कुछ बोल देता है.
_ मैं धीरे-धीरे सीख रहा हूँ कि…
किसी परेशान करने वाली बात पर प्रतिक्रिया देकर, आप अपनी भावनाओं पर नियंत्रण की शक्ति किसी दूसरे को दे बैठते हैं.
_ मैं धीरे-धीरे सीख रहा हूँ कि…
मैं कोई प्रतिक्रिया दे दूँ, तो भी कुछ बदलने वाला नहीं है इससे लोग अचानक मुझे प्यार और सम्मान नहीं देने लगेंगे.
यह उनकी सोच में कोई जादुई बदलाव नहीं ला पायेगा।
_ मैं धीरे-धीरे सीख रहा हूँ कि…
जिंदगी तब बेहतर हो जाती है, जब आप इसे अपने आस-पास की घटनाओं पर केंद्रित करने के बजाय उस पर केंद्रित कर देते हैं, जो आपके अंतर्मन में घटित हो रहा है.
_ आप अपने आप पर और अपनी आंतरिक शांति के लिए काम करिए और आपको बोध होगा कि….
चिंतित करने वाली हर छोटी बड़ी बात पर प्रतिक्रिया नहीं देना, एक स्वस्थ और प्रसन्न जीवन का ‘प्रथम अवयव’ है.
जीवन हर कदम पर हमें कुछ न कुछ सीखने का मौका देता है.

_ यह हम पर निर्भर करता है कि या तो हम उसे अपना लें या फिर अनदेखा करके आगे बढ़ जाएं.. यह हमारे हाथ में है.!!

सुविचार 249

बहुत से कामों को पूरा करने का सब से आसान तरीका है, एक समय में एक काम को ही हाथ में लेना.

सुविचार – लुंज-पुंज – 248

“लुंज-पुंज” व्यक्ति वह नहीं है, जो शांत है.

_ लुंज-पुंज व्यक्ति वह है :
_ जो निर्णय नहीं ले सकता,
जिम्मेदारी से भागता है,
हर बात में दूसरों पर निर्भर है,
जीवन में कोई सजगता नहीं रखता.
_ जबकि एक शांत और सजग व्यक्ति :
कम शोर करता है,
लेकिन जो करता है, पूरे होश से करता है.!!

मस्त विचार 284

खाने में कोई ‘ज़हर’ घोल दे तो एक बार उसका ‘इलाज’ है.

लेकिन

‘कान’ में कोई ‘ज़हर’ घोल दे तो, उस का कोई ‘इलाज’ नहीं है.

मस्त विचार 283

कभी सोचा न था कि ?

मुस्कुराने की आदत भी कितनी मंहगी पड़ेगी हमको.

छोड़ दिया सब ने ये सोच कर

हम तो अकेले भी खुश रह लेंगे.

मस्त विचार 282

तूने कब सींचा मै हरा हो गया.

तूने कब कर दी ये शीतल छाया.

अब मुझको बस तू ही संभाले.

अब तो जीऊँगा तेरे ज्ञान के सहारे.

मस्त विचार 281

ज़िंदगी

कमरे की दीवार पर

लगे कलैंडर से मिलती जुलती होती है…

जिस पर हर दिन नयी तारीख आती है.

नया हफ्ता आता है. साल बदल जाता है.

ज़िंदगी में भी हर दिन, एक नयी समस्या से

झूझना पड़ता है..

हर हफ्ते सोच बदलती है..

हर साल कोई साथ छोड़ता है.

कोई नया साथ बनता है..

कलैंडर को तो देख कर पता चल जाता है

कल नयी तारीख आयेगी..

पर ‪ज़िंदगी‬ में पता नहीं चल पाता

कल कौन सी ‪समस्या‬ सर उठाएगी…

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