मस्त विचार 165

लोहे की दीवारे पंछी कैसे तुझे सुहाती होंगी ?

अंतर में संघर्ष छिपाए, तेरा जीवन जलता होगा…

हांसो में छिप क्रन्दन तेरा, भोले जग को छलता होगा,

पर अनजाने में तो तेरी अखियाँ भी भर आती होंगी…

लोहे की दीवारे पंछी कैसे तुझे सुहाती होंगी………

जग की खुशियों पर न्योछावर, होगी कब तक तेरी चाहें,

पलको की डोरों से कब तक, नापेगा जीवन की राहें ?

सोच रहा हूँ बुझती कितनी यूँ ही जीवन बाती होंगी………….

जागृति का सन्देश लिए जब, लेती होगी वायु हिलोरे…

उषा की आभा से रक्तिम होती होगी नभ की कोरें…

जग के आँगन में जब चिड़िया, गाती मधुर प्रभाती होगी…

लोहे की दीवारे पंछी कैसे तुझे सुहाती होंगी………..

मस्त विचार 164

अगर मौजे डूबो देती तो कुछ तस्कीन हो जाती…

किनारो ने डूबोया है, मुझे इस बात का गम है……… 

सुविचार – कुछ ज़रूरी बातें – 235

🙏 *10 वर्षों में अधिकतम घरों की अर्थिक स्थिति बिगड़ने के प्रमुख कारण…* 🙏

*1. घर मे प्रत्येक सदस्य के पास स्मार्ट फोन, एवं प्रति वर्ष नया लाना।*

*2. जन्म दिन, मैरिज एनीवर्सरी में दिखावटी खर्चे।*

*3. जीवन शैली में बदलाव के कारण खर्चों का बेतहाशा बढ़ना।*

*4. बच्चों के स्कूल, ट्यूशन आदि शिक्षण खर्चों में वृद्धि।*

*5. व्यक्तिगत खर्चे, ब्यूटी पार्लर, सेलून, ब्रांडेड कपड़ा, पार्टी, गेट टूगेदर आदि।*

*6. सगाई, शादी आदि में प्रतिष्ठा की भूख के कारण होने वाले खर्चे।*

*7. लोन पर दिया जाने वाला ब्याज।*

*8. मेडिकल खर्चों में बहुत ज्यादा बढ़ोत्तरी। कारण गलत खान पान।*

*इस तरह के बिना जरूरत के खर्चो के अनुरूप कमाई बढ़ नही रही है। परिणाम, तनाव तनाव तनाव।*

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*व्यापार आर्थिक मंदी में आगे कैसे बढ़े

*Government के आंकडे चाहे कुछ भी कहे, ये सच है की भारत मे आर्थिक मंदी शुरू हो चुकी हैं और ये सबसे बड़ी और सबसे लंबी चलने वाली मंदी हो सकती हैं .* *इससे बाहर निकलने के लिये हमे कड़े संघर्ष की ज़रूरत पड़नी ही है .*

*कुछ ज़रूरी बातें और कदम जिससे मंदी की मार कम की जा सकती हैं .*

*1) अपने खर्चे पर लगाम लगाये. चाहे व्यापार मे हो या व्यक्तिगत जीवन मे, फ़िज़ूल खर्च से बचे. बिना कारण यात्रा, trip या व्यापार के अनआवश्यक खर्च टाले .*

*2) किसी भी customer या client के बड़े order को double check करे. क्या वो भुगतान मे सक्षम है, इस समय आप सिर्फ़ वही order ले जो firm रह सकते हैं. outstanding आपका Budget बिगाड़ सकते हैं .*

*3) अपनी क्षमता के अनुसार ही काम या booking ले .*

*4) अपने stock का निरंतर जायज़ा ले और क्षमता और order के हिसाब से ही stock करे*

*5) व्यापार पर कडी और दैनिक नज़र रखे*

*6) After Sales Service पे ज़्यादा ध्यान दे, Regular Customer इस समय की सबसे बड़ी ताक़त रहेगी*

*7) भुगतान के लिए प्यार से और निरंतर call करते रहे*

*8) बेवजह की कानूनी झंझटो से खुद को दूर रखे. ये समय और पैसे की सबसे बड़ी बर्बादी हैं*

*9) अपने व्यापार के नियम और सिद्धांतो पे कायम रहे .*

*10) अपने परिवार के लिए कमाये और बचत करे .*

*11) शादियो और सामाजिक कार्यक्रमों पे कम खर्च करे. आगे और मौके आयेंगे, तब हम अपनी शान और मान दिखा सकते हैं, अभी टिक के खेलने का समय हैं .*

*12) सबसे मधुर सम्बन्ध बनाये रखें. कौन जाने आपके अच्छे व्यव्हार से आप को कौन Reference दे जाए .*

*13) अपने Products, व्यापार, Services, Market की Expertise निरंतर बढाते रहे.*

*14) Positive लोगों मे रहे. Negative लोगों से बचे. हमेशा मन को शान्त और संतुलित रखने पर ज़ोर दे .*

*15)अपने शरीर और मन को भरपूर समय दे. Exercise करे, अच्छा भोजन ग्रहण करे, अच्छी दिनचर्या follow करे. Medical के bills कम से कम करते जाये. ये बचत आप के बहोत काम आयेगी. अपनी Family के साथ Quality Time बिताये. आखिर इन्ही के लिये तो सब कुछ कर रहे हैं.* *एक वाजिब मार्जिन से काम करे कंपटीशन में सेल करके कोई इनाम नही मिलेगा*

*🙏बिना जरूरत के खर्चे कम करे। जरूरत रोटी, कपड़ा, मकान की थी, है, और रहेंगी। इच्छाएं अनन्त है।*

सुविचार – हम अक्सर जो नहीं हैं, वैसा दिखने का स्वांग करते हैं. – 234

हम अक्सर जो नहीं हैं, वैसा दिखने का स्वांग करते हैं. यह स्वांग ही एक दिन हमें निगल जाता है. इसके बजाय अगर हम अपनी कमियों- कमजोरियों को स्वीकार करते हुए चलें, तो जीवन का सफ़र बड़े सकून से कट सकता है और लोगों का सहयोग भी भरपूर मिल सकता है.
उतार चढ़ाव तो जीवन के अभिन्न अंग हैं. उन से घबराने के बजाय उन का मुकाबला करना चाहिए. हम आखिर ऐसी गारन्टी ले कर चलते ही क्यों है कि दुःख हमारे पास फटकेगा ही नहीं और सुख हमेशा बाहें फैलाए खड़ा रहेगा.
झूठे वादे, कोरे आश्वासन व खोखली सहानुभूति से छणिक सामीप्य हासिल किया जा सकता है, परन्तु सच के सामने आते ही दूरी बढ़ जाती है.

मस्त विचार 163

छेनी की चोटों से जितना , रेशा – रेशा दुखता है .

ऊँचा उठने की कीमत तो , जख्मी मीनारों से पूछ .

मस्त विचार – अँधेरे में दिया जला दो मेरा – 162

– अँधेरे में दिया जला दो मेरा –

_ अँधेरे में दिया जला दो जरा, मुझे कोई रास्ता सूझता नहीं.
_ जिंदगी पहेली बन गई है मेरी, मगर कोई उसको बुझता नहीं.
_ उठते हुए को पूजते हैं लोग, गिरते को कोई पूछता नहीं.
_ मन में पड़ी जो ऐसी दरार, लाख कोशिश से भी वो जुड़ता नहीं.
_ मोम-सा मन पत्थर बना, जो पिघलाने से भी पिघलता नहीं.
_ मन पर जख्म इतने गहरे हुए, जो मलहम लगाने से सूखते नहीं.
_ बता दो जहाँ में इंसान कोई, जो मुश्किलों से उबारे जरा.
– अँधेरे में दिया जला दो मेरा –
असली बहादुरी अपने भीतर के अंधेरे पर विजय पाने में है.
_ हमारा दायित्व है हम बदलें, पर हम में इतना होश और अक्ल कहां ?
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