Quotes by जीन केरर

मेरा मानना है कि सफलता का कोई नियम नहीं है, लेकिन आप असफलता से बहुत कुछ सीख सकते हैं. –  Jean Kerr

Quotes by इ.एफ.सचुमचेर

मैं सुख- साधनों का कतई तिरस्कार नहीं करता, लेकिन उनका अपना एक स्थान है और वह पहला नहीं है. – E. F. Schumacher 

सुविचार 230

जागो और देखो कि जीवन अत्यन्त छोटा है, यह अहसास कि जीवन छोटा है, आपके जीवन में गतिशीलता लाता है – अनचाही चीजें, विकर्षण और बाधाएं स्वतः ही छूट जाती हैं.

सुविचार – जिंदगी में कभी अफसोस मत कीजिए – 229

हमें किसी खास समय का इंतजार नहीं करना चाहिए..

_ बल्कि कोशिश करनी चाहिए कि हमारा हर एक पल खास बनें.!!

जिंदगी में कभी अफसोस मत कीजिए – अपने कर्मों को लेकर, अपने अतीत को लेकर और अपने वर्तमान को लेकर – बहुधा आम, अमरूद या मीठे फलों के लगाए हुए पौधे बड़े होकर बबूल या बेशर्म में तब्दील हो जाते हैं..

_ और आपको इन्हें देखकर दुख होता है कि आपका जीवन इन्हें पालते और पोसते हुए निकल गया और आप पछतावे में हाथ मलते रह जाते हैं.
_ बेहतर है कि अपने – आपसे एकाकार हो जाईए, आप जब अपने आप पर नियंत्रण नहीं रख सकते,
_ तो बाहरी चीजों या वस्तुओं से बदलने की क्या और कैसी उम्मीद रखेंगे.!!
– Sandip Naik

मस्त विचार 151

वह इश्क़ ही क्या जिसके रास्ते न कठिन हो.

जो चल पड़े इस रास्ते पर फिर क्या भंवर

और क्या किनारा

किसको मंजिल की तलाश है

डूबने में ही मजा है

किनारे पर जाकर किसी को क्या मिला है.

मस्त विचार 150

कभी तू मुझसे दूर कहीं , कभी तू मुझमे पास है

हर घड़ी हर लम्हा मुझको , बस तेरी तलाश है.

कभी तू साँसों की जुबां , कभी तू दिल की आस है

तू ही तू बातो का मंजर , तू ही मेरी प्यास है.

कभी तू आँखों की कशिश , कभी तू मन का राज है

तू ही तू इस दिल के अन्दर , तू ही मेरा साज है.

कभी तू लहराती पवन , कभी तू ग़म का राज है

तुझसे ही जन्नत है मेरी , तू ही मेरी आवाज है.

कभी तू माथे की चमक , कभी तू मेरा नाम है

तेरे ही हांथो से बनता , मेरा हर एक काम है.

कभी यू फूलो की महक , कभी तू प्यारा जाम है

तुझसे है रौशन है रोशनी , तू ही तो हर शाम है.

मस्त विचार 149

थक जाओ अगर इन रास्तों पर चलते हुए तुम …….

कभी न सोचना वहाँ कि तन्हा हो तुम ………

मूँद कर पलकों को अपनी जो देखोगे तुम ……

तो अपने साथ ही सदा मुझ को पाओगे तुम………

मस्त विचार 148

एक पुरानी याद फिर से आ गयी,

एक पुराना ख्वाब फिर से रो दिया.

चल दिया आगे जो पीछे छोड़ के,

चन्द टुकड़े पा लिए और सब खो दिया….. 

मस्त विचार – अपने ही घर में , भटकता ढूंढ़ता हूँ – 147

अपने ही घर में, भटकता ढूंढ़ता हूँ

अपनों में अपनों को.

दर है दीवार है, छत है और सब सामान

जो होतें हैं घरों में.

वे लोग भी हैं, जिनके होने से

मकान होता है घर.

बैचैन – सा घूमता हूँ इस घर में,

ढूंढ़ता हूँ किसी अपने को.

क्यों मै अपने को, अकेला महसूस कर रहा हूँ.

सब चीजें अपनी जगह ठीक है.

सारे रिश्ते, कोई भी रिश्ता बिखरा नहीं पड़ा.

फिर क्यों मै अलग – थलग, अनजान अजनबी – सा

ढूंढ़ता हूँ किसी को.

कुछ रूठने कि इच्छा है, कुछ टूटा हुआ हूँ मै

कोई चाहिए दुलारनेवाला.

भटक रहा हूँ अपने ही घर में.

अपने ही घर में, भटकता ढूंढ़ता हूँ.

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