मस्त विचार 146
ये दुनिया न मेरा घर है न तेरा ठिकाना.
ये दुनिया न मेरा घर है न तेरा ठिकाना.
मौत से पहले तू भी बता दे ज़िंदगी,
तेरी क्या कीमत है ?
दुनिया से, एक बुरा व्यक्ति कम हो जाएगा…
इसे बड़ी मेहनत से सीखना पड़ता है.
रात बीती सुबह उतर जायेगी.
उनकी नजरों के दो घूंट पी लो.
सारी ज़िंदगी नशे में गुजर जायेगी.
किसी के छुप जाते हैं, तो किसी के छप जाते हैं.
तुम चुन लो, कंचन बन जाऊँ
तन- मन भूखा जीवन भूखा
सारा खेत पड़ा है सूखा
तुम बरसो अब तनिक तो
मैं आषाढ़ सावन बन जाऊँ.
मेरा जीवन बिखर गया है………….
बिन धागे की सुई ज़िन्दगी
सिये न कुछ बस चुभ- चुभ जाये
कब तक सहूँ यह क्रीड़ा
इतना दो न थकान मुझे
जब तुम आओ
मैं नयन खोल न पाऊँ.
मेरा जीवन बिखर गया है…………
तुम चुन लो, कंचन बन जाऊँ.
जो अपने आप छानती रहती है चीजों को,
जो अच्छे को अपना लेती है और खराब को किनारे कर देती है.
हँस बन जा मोती तू चुनना.
सबको रिजेक्ट किया, तुम को सिलेक्ट किया.
तुमसे रिक्वेस्ट है, इसे रीफुज न करना.
ज्ञान के इस बल्ब को, फ्यूज न करना.