मस्त विचार 236
जीत भी जाता हूँ कभी मैं हार जाने के लिए,
ये जिंदगी ही है ऐसी जिसका कुछ पता नहीं,
दूर जाता हूँ कभी मैं पास आने के लिए,
समझते जो मुझे दुश्मन ये उनकी ही है समझ
मैं तो खड़ा हूँ हर घड़ी सिर झुकाने के लिए,
गीत गाता हूँ तुम्हे पाने के लिए.
जीत भी जाता हूँ कभी मैं हार जाने के लिए,
ये जिंदगी ही है ऐसी जिसका कुछ पता नहीं,
दूर जाता हूँ कभी मैं पास आने के लिए,
समझते जो मुझे दुश्मन ये उनकी ही है समझ
मैं तो खड़ा हूँ हर घड़ी सिर झुकाने के लिए,
गीत गाता हूँ तुम्हे पाने के लिए.
जरा सा अपने लिए क्या सोचा , जमाना दुश्मन बन गया.
हालांकि तुझे आँख से देखा भी नही………..
वही मौका होता है करतब दिखाने का.
हमें काँटों के साथ तालमेल की कला सीखनी होगी.
पर इतना सब करने पर भी, तुमने क्या मुझको पहचाना.
तुम तो अब भी पहले जैसे, लगते हो वैसे के वैसे.
मै कितना मजबूर हुआ हूँ, अपनों से भी दूर हुआ हूँ.
दोबारा भी गिरूँ, तो उठने की तमन्ना रखता हूँ.
इसलिए जरा धीरज रख ले, शायद फिर अपनी सुबह मिले.
हाँ सच है कि गम से बचना है, पर इसका हमसे कहना है.
मैं तुम्हे सिखाने आया हूँ, फौलाद बनाने आया हूँ.
मुझ से इतना घबराओगे, तो ख़ुशी कहाँ से पाओगे.
क्योंकि जगाने का वक़्त आ गया है,
अतः अपनी तरह औरों को भी जगाओ.