मस्त विचार 118

ऐ यार, मैंने तो एक तुम पर ही चाहत ख़त्म कर दी…….

…….. अब प्रेम किसको कहते हैं मालूम नहीं……………

मस्त विचार 117

पिन्जरे में बन्द था मै, तूने आजाद किया.

क्या करूँ लाचार था, दुनिया की निर्दयता का दास था.

तूने आज़ाद किया.

मस्त विचार 116

मै हवा में उड़ती खुशबू को अपने भीतर समेटना चाहता हूँ

और चाँद से खुशबू निचोड़ने का हुनर भी सीखना चाहता हूँ.

मस्त विचार 115

ऐे यार, कोई शब्द सुना दे.

आँखों से अच्छा कुछ दिखा दे.

जिधर भी देखूं तू ही दिखे, मस्ती कुछ ऎसी तू ला दे.

मस्त विचार 114

जीवन के पथरीले रास्ते पर.

कुछ खोया कुछ पाया हमने.

कहीं धूप मिली कहीं छांव मिली.

हर मौसम को हंसकर कर बिताया हमने.

सफ़र ये आसान न होगा.

जानकार भी कदम बढ़ाया हमने.

खुशी और गम जो भी मिले.

दोनों को गले लगाया हमने.

कुछ खोया, कुछ पाया हमने.

मस्त विचार 113

मिली थी जिन्दगी

किसी के काम आने के लिए

पर वक्त बीत रहा है

कागज के टुकड़े कमाने के लिए

क्या करूँगा इतना पैसा कमा कर

ना कफन मे जेब है ना कब्र मे अलमारी

और ये मौत के फ़रिश्ते तो रिश्वत

भी नही लेते…

मस्त विचार 112

जिन्दगी हसीन है उनकी, जिन्होंने तुझको जाना है.

क्यूंकि जानने वाले ही जानते हैं, जीना क्या है.

मस्त विचार 111

दूर जाकर भी दूर जा न सकूंगा .

मै कितना रोऊंगा बता न सकूंगा .

ग़म इसका नहीं कि आप मिल न सकोगे .

दर्द इस बात का होगा कि मै आपको भुला न सकूंगा .

सुविचार 226

हमारा अहंकार ही है जिस के कारण हमें अपनी आलोचना सुन कर दुःख होता है.

 

 

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