सुविचार – आसक्ति, ममता, राग, बंधन, अनुराग, प्रीति, लगाव, अटैचमेंट, Attachment – 170

आसक्ति बंधन है, बेड़ियां है…आसक्ति बंधे रहने को विवश करती है.

_ जिस क्षण आसक्ति मिटी…बंधन छूटा…बेड़ियां कटी…उसी पल हम आज़ाद हो जाएंगे.
_ किसी का हमारे जीवन में चले आना जितना स्वाभाविक है…उतना ही स्वाभाविक है उसका हमारे जीवन से चले जाना भी.
_ गीता कहती है कि ख़ुशी के क्षण में न तो अतिउत्साहित होइए न ही दुःख में अति व्याकुल..
_ लेकिन हम गीता को महज़ मानते भर हैं…न तो पढ़ते हैं न ही अमल में लाते हैं.
_ किसी का अपने जीवन में आने को इस दुनिया की सबसे अदभुत घटना मानते हैं..
_ तो वहीं उसके अनायास ही चले जाने को इतना कठिन मानते हैं..
_ जैसे ये महज़ हमारे साथ ही घटित हुआ हो.
_ और इन सब के पीछे जो शक्ति काम करती है वहीं आसक्ति है…
_ जिससे छूटना हमें दुष्कर कार्य प्रतीत होता है.
_ असल में हम आसक्ति की बेड़ियों का वरण भी स्वयं ही करते हैं…
_ हम स्वयं ही बंधन को गले का हार समझकर बड़ी प्रसन्नता से अपने गले में डाल लेते हैं..
..और फ़िर ताउम्र बंधन से छूटने को….आसक्ति से निकलने को चीखते पुकारते रहते हैं…..
_ जबकि आसक्ति की बंधन खोलने वाली कुंजी हमारे ही इर्द गिर्द कहीं पड़ी होती है..
..हम जब चाहे उस कुंजी को उठाकर अपनी आसक्ति से आज़ाद हो सकते हैं…
_ हम जब चाहे अपनी बेड़ियां काट सकते हैं।।
— अविनाश राही
लगाव शब्द जितना सरल दिखता है, उतना ही रहस्यमय और दोधारी है.

_ यह वो एहसास है जो इंसान को ज़मीन से जोड़ता भी है और कभी-कभी उसी ज़मीन में दफ़न भी कर देता है.
_ दरअसल, लगाव समस्या नहीं है, समस्या उसकी अंधी गहराई है.
_ हम अक्सर किसी को इतना अपना बना लेते हैं कि उसके बिना “स्वयं” की परिभाषा ही धुंधली पड़ जाती है.
_ हम भूल जाते हैं कि किसी और में खो जाना, प्रेम नहीं है, यह आत्मविस्मरण है..
_ और जब वह शख़्स जीवन से चला जाए या दूरी बना ले, तब वही लगाव एक खाली गुफा बन जाता है, जिसमें हमारी आवाज़ भी लौटकर नहीं आती.
_ पर क्या इसका अर्थ यह है कि हम किसी से न जुड़ें ? नहीं.. जुड़ें ज़रूर, पर इस बोध के साथ कि जो साथ है वो संयोग है, स्थायी नहीं.
_ हर संबंध एक ऋतु की तरह है, कुछ लंबे होते हैं, कुछ अल्पकालिक..पर दोनों ही अपने भीतर कोई न कोई फूल ज़रूर खिलाते हैं.
_ हमें लगाव को त्यागने की नहीं, बल्कि उसे संजीदगी से निभाने की ज़रूरत है, इतना कि अगर कभी अलग होना पड़े, तो अपनी ही परछाईं में हम फिर से मुस्करा सकें !
_ दिल से टूटें नहीं, बस थोड़ा गहराएं !
_ क्योंकि लगाव जब आत्मज्ञान से जुड़ जाए, तब वो दीमक नहीं, दीपक बन जाता है…!
लगाव दुख की जड़ है.. जो सबसे उम्मीद छोड़ देता है, वही सबसे शांत रहता है.

_ लगाव चाहे इंसान से हो, किसी चीज़ से या किसी जानवर से यह एहसास बेहद सुंदर होता है..
_ पर सच यही है कि लगाव अक्सर कुछ समय तक ही साथ निभाता है, क्योंकि वक़्त बदलता है और उसके साथ रिश्तों की शक्ल भी.!!
किसी चीज़ से लगाव रखना ज़रूरी नहीं कि वह हमेशा बना ही रहे..

_ वक़्त के साथ वही लगाव कभी मुस्कान बन जाता है, कभी आँखें भिगो देता है..
_ जो कभी हमारी दुनिया था, वही एक दिन याद बनकर रह जाता है और तब हम समझ पाते हैं कि लगाव भी वक़्त की तरह है, आता है, ठहरता है और फिर अपने निशान छोड़कर चला जाता है.!!

सुविचार 169

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परम्पराओं से रब से मिलने के रास्ते अलग- अलग हो सकते हैं, पर रब तो एक ही है.

 

सुविचार – Financial freedom – फाइनेंसियल फ्रीडम – वित्तीय स्वतंत्रता – 168

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“फाइनेंसियल फ्रीडम हो गई या नहीं” – इसका मतलब सिर्फ पैसा होना नहीं, बल्कि जीवन के फैसलों में स्वतंत्रता होना है, बिना परेशानी के..

ये रहा एक चेकलिस्ट – अगर आप इनमें से अधिकांश या सभी पॉइंट्स पर ✔️ कर पाते हैं, तो फाइनेंसियल फ्रीडम आपके पास है (या बहुत करीब है):-
✅ 1. आप अपना जीवन स्वच्छंद रूप से जी रहे हैं..
_ किसी की मर्जी या पैसों की मजबूरी से नहीं, अपने “मन की बात” सुन कर फैसले [decisions] लेते हैं.
✅ 2. आपके मंथली खर्च निष्क्रिय या अनुमानित आय [passive ya predictable income] से कवर हो जाते हैं.
_ यानी आपको सक्रिय [actively] रूप से काम करने की ज़रूरत नहीं सिर्फ जिंदा रहने के लिए.
_ स्रोत [Sources] हो सकते हैं: रेंट, इन्वेस्टमेंट, पेंशन, एन्युटी, इंटरेस्ट, रॉयल्टी, आदि.
✅ 3. इमरजेंसी [Emergency] के लिए 6-12 महीने का फंड तैयार है.
_ मेडिकल [Medica] या कोई अनजाने खर्चे के लिए आपको लोन नहीं लेना पड़ेगा.
✅ 4. कोई बड़ा उधार [EMI, loan] पेंडिंग नहीं है. “आप “कर्ज मुक्त” हैं”
✅ 5. आप खर्चने से पहले पैसे की चिंता नहीं करते.
_ आपको किराना [grocery], कपड़े, सैर [outing], मोबाइल रिचार्ज जैसे छोटे निर्णयों [decisions] के लिए सोचना नहीं पड़ता.
✅ 6. आप अपना समय जहां चाहें, वहां लगा सकते हैं.
_ चाहे सेवा में, लिखने में, मैडिटेशन में या सफर में – बिना पैसों के सोच-विचार के.
✅ 7. आपके सपनों के लिए संसाधन [resources] हैं.
_ अगर आप कोई प्रोजेक्ट, सफर या सेवा का काम सोच रहे हैं, तो आप उसे बिना रुकावट शुरू कर सकते हैं.
✅ 8. आप अपनी और दूसरों की मदद करने में सक्षम हैं.
_ आप किसी को अपना बजट बिगाड़े सहायता दे सकते हैं – वित्तीय और भावनात्मक [financial aur emotional] दोनों.
✅ 9. पैसा आपका सेवक है, स्वामी नहीं.
_ पैसा आपके फैसले कंट्रोल नहीं करता, आप पैसा कहां जाए, ये तय करते हैं.
✅ 10. आपको पैसा दिखाना नहीं, जीना आता है.
_ आप “सरल प्रचुरता”[“simple abundance”] में विश्वास रखते हैं –
– आप दिखावा नहीं, सुकून को चुनते हैं.
🧘 Bonus Spiritual Indicator:
> मैं पैसा कमाने के लिए नहीं जी रहा… मैं जी रहा हूं, और पैसा मेरे जीवन का एक माध्यम बन गया है”
✔️ Self-Evaluation Tip:
एक डायरी ले कर, ऊपर के 10 पॉइंट लिख लीजिये.
_ हर एक के आगे लिखिए:
❏ Yes
❏ Almost
❏ Not yet
_ जहां “Yes” अधिक है, वहां आपका जीवन फाइनेंसियल फ्रीडम के साथ घूम रहा है.

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Take every chance you get in LIFE because some things only happen once.

LIFE में मिलने वाले हर मौके को लें _ क्योंकि कुछ चीजें केवल एक बार होती हैं.

 

 

 

सुविचार 165

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संसार में प्रसिद्धि हवा के जैसी है, जो कभी इधर बहती है तो कभी उधर,

और दिशा बदलने के साथ ही नाम भी बदल देती है.

 

 

 

सुविचार – गैर – अजनबी – अंजान – अनजान – 164

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अच्छी ज़िन्दगी जीने के दो तरीके हैं. पहला, जो पसन्द है उसे हासिल कर लो और दूसरा, जो हासिल है उसे पसन्द करना सीख लो.
हम कभी-कभी ऐसे लोगों से मिलते हैं, यहां तक ​​कि पूर्ण अजनबी भी, जो हमें पहली नजर में, किसी तरह अचानक, एक बार में, एक शब्द बोले जाने से पहले ही दिलचस्पी लेने लगते हैं.
कई बार ये अनजान लोग अपने लोगों से भी ज़्यादा अपने लगने लगते हैं और हमको पता भी नहीं चलता है.!!
मिला करो अनजानों से भी, कभी-कभी अंजान अपनो से बेहतर मिल जाते है..!!
अपनों में अपने नहीं मिलते.. गैरों में अपने मिल जाते हैं.!!
कुछ अजनबी, अपनो से बेहतर मिल जाते हैं.!!
कई बार ऐसा होता है हम किसी को जानते नहीं, पर हम उनको जानने लगते हैं,

_ न जाने कैसे हम ऐसे कितने ही अनजान लोगों को अपने भीतर रखे हुए होते हैं…!

अजनबी सब अपने हुए, अपनों से ही तो बगावत है,

_अपने तो अपने होते हैं, ये तो सिर्फ कहावत है.

“अब मैं इतना बदल गया हूं कि.. जो लोग मुझे अच्छे से जानते हैं,

_ उन्हें भी मैं अजनबी लगने लगता हूँ.!!”
– कभी-कभी हमारी आंतरिक यात्रा हमें इतना बदल देती है कि पुराने रिश्ते, परिचय और पहचान भी हमें पहचान नहीं पाते..
_ यह अजनबीपन दरअसल नए स्वरूप की गवाही है.
_ जो लोग आपको सच में समझना चाहते हैं, वे आपके इस बदलाव को पहचानेंगे..
_ बाकी लोग वहीं ठहर जाएंगे, जहाँ वे पहले आपको देखते थे.
_ यह “अजनबी लगना” वास्तव में अपने नए सच में प्रवेश करना है.!!
अगर तुम सोशल मीडिया की दुनिया में कुछ करना चाहते हो तो..

_ सबसे पहले खुद को आजाद करना सीखो.
_ अपने दोस्तों से, अपने रिश्तेदारों से..- अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को ब्लॉक करो
अपनी पहचान से.
_ क्योंकि सोशल मीडिया की दुनिया में, सपोर्ट सबसे पहले अजनबी देते हैं
अपने लोग नहीं..
_ अपने लोग तुम्हें जानते हैं और यही जानना सबसे बड़ी रुकावट बन जाता है.
_ वे तुम्हें उसी नजर से देखते हैं, जैसे तुम कभी थे.
_ वे तुम्हारे बदलने को स्वीकार नहीं कर पाते, वे तुम्हारे आगे बढ़ने से डरते हैं.
_ अजनबी तुम्हें नहीं जानते, इसलिए वे तुम्हें तुम्हारे काम से पहचानते हैं.
_ वहाँ तुम्हारा अतीत नहीं चलता, वहाँ सिर्फ तुम्हारा हुनर बोलता है.
_ इसलिए अजनबियों से दोस्ती करो.. दिल लगाकर..
_ लेकिन भरोसा अपने हुनर पर रखो.. लोगों पर नहीं..
_ अपने शब्दों से, अपनी सोच से, अपने सच से, उनका दिल जीतो..
_ क्योंकि इस दुनिया में सिर्फ वही टिकता है, जो ईमानदारी से लिखता है.
_ अच्छे लोग हमेशा अच्छे रहते हैं, हालात जैसे भी हों.
_ इसलिए भीड़ से मत डरो, अकेलेपन से मत भागो.
_ अजनबी तुम्हें रास्ता देंगे और तुम्हारा हुनर तुम्हें मंजिल तक ले जाएगा.!!
– लेखक की दुनिया

सुविचार 163

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अविश्वास नकारात्मक शक्ति है, जब मस्तिष्क किसी बात पर सन्देह करता है तो वह ऎसे कारणों को खोज लेता है, जिनसे उस विश्वास को बल मिले.

 

Quotes by अमृता प्रीतम

कई दिलों से मिलने के लिए कुछ होता ही नहीं, दो कदम चलो और ज़मीन ख़त्म हो जाती है. एक गोता लगाओ तो मालूम होता है कि यह समुद्र नहीं, एक छोटा सा तालाब है. खानों में से भी हमेशा सोना ही नहीं निकलता, मिट्टी और रेत भी निकलती है.
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