मस्त विचार 126
तू ने तो अपनी पारसमणि से छूकर पारस ही बना दिया.
तू ने तो अपनी पारसमणि से छूकर पारस ही बना दिया.
ये महकने की सज़ा हो जैसे……..
क्यूंकि मैं एहसास लिखता हूँ लोग अलफ़ाज़ पड़ते है………
१. इबादत के वक़्त अपने दिल को क़ाबू मे रखो.
२. किसी के घर जाओ तो आँख को क़ाबू मे रखो.
३. किसी महफ़िल मे जाओ तो ज़बान पे क़ाबू रखो.
४. जब खाने बैठो तो पेट को क़ाबू मे रखो.
५. अपनी नेकियाँ और दूसरों की बुराई भूल जाओ.
६. रब और मौत को हमेशा याद रखो.
_ हमारा ध्यान अपने जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में ले जाने पर होना चाहिए.!!
_ बेहतर [ Better ] होने के लिए, _कड़ी मेहनत करनी पड़ती है..!!
_ क्योंकि आप उनसे बेहतर हैं, उनसे तेज़ हैं और आप बहुत बेहतर दिखते हैं.!!
_ फ़ालतू चीजें सिर्फ और सिर्फ आपको भटकाने के लिए ही होती हैँ.!!
अभी कईं कर्ज चुकाना बाकी है.
कुछ दर्द मिटाना बाकी है, कुछ फर्ज निभाना बाकी है.
रफ्तार मे तेरे चलने से कुछ रूठ गये, कुछ छूट गये.
रूठों को मनाना , छुटे हुये को जुटाना अभी बाकी है.
कुछ हसरतें , कुछ जरूरी काम अभी बाकी है.
ख्वाईशें जो दबी रही इस दिल में,उनको दफनाना बाकी है.
कुछ रिश्ते बन कर टूट गये, कुछ जुडते जुडते छुट गये,
उन टुटे और छुटे रिश्तों के, जख्म मिटाना अभी बाकी है.
तू आगे चल मै आता हूं,
क्या छोड कर तुझे जी पाउंगा?
इन सांसो पर जिनका हक है, उनको समझाना अभी बाकी है.
आहीस्ता चल जिंदगी,
अभी कईं कर्ज चुकाना बाकी है.
आप संसार के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति हो.
ह्रदय में हो मेरे विशालता, बुद्धि में हो मेरे समता.
ज़माना क्या जाने हम कौन हैं.
जो खुद को नहीं जानता है.
वो हमें पूछता है तुम कौन हो.
_ सारे खिलौने छोड़ के जज्बातों से खेलते हैं.
_ उन्हें अलविदा कहने में कोई बुराई नहीं ..