सुविचार – इनकार – अस्वीकार – नकार – Denied – 178

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कोई भी काम शुरू करने से पहले उसके परिणाम के बारे में जरुर सोच ले और उसी के अनुसार क्रिया करे.

_ ख़ुशी और शांति पाने के लिये अपने दिमाग में हमेशा किये जा रहे काम के परिणाम को रखिये.
_ किसी चीज के लिए इनकार करना भी _ हमें दुःख की भावनाओं को कम करने में मदद करता है ; इनकार में एक अनुग्रह है.
_ यह प्रकृति का तरीका है कि हम उतना ही अंदर आने दें” – जितना हम संभाल सकें.”

सुविचार – माफ़ – माफ – माफ़ी – माफ़ी – 177

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लोगों को माफ़ करना तो एक बार को संभव है, लेकिन उन्हें अपनी ज़िंदगी में वही पहले वाला स्थान दे पाना.. लगभग नामुमकिन.!!
किसी की जिंदगी बर्बाद करके माफ़ी तो मांग सकते हो,

_ मगर बर्बाद की हुई जिंदगी को दोबारा संवार नहीं सकते..

आप कुछ लोगों को अपनी ज़िंदगी में दोबारा आने का मौक़ा दिए बग़ैर भी माफ़ कर सकते हो.
माफ़ी से कुछ नहीं होता, कुछ बातें दिल को लग जाती हैं, जो कभी भुलाई नहीं जाती..
माफ़ी सिर्फ उन्हें मिलनी चाहिए, जो जाने अनजाने में भूल कर बैठते है.. ना की उन्हें.. जो सोच समझकर चालाकी करते हैं.
हर बार इंसानियत के नाम पर माफ कर देना सही नहीं होता..

_ कुछ हालात ऐसे होते हैं, जहाँ हमारी चुप्पी और नरमी को लोग हमारी कमजोरी समझ लेते हैं, ऐसे में खुद की हिफाज़त के लिए थोड़ा सख्त होना भी जरूरी हो जाता है..
_ ताकि सामने वाला समझ सके कि हर बार सहना हमारी मजबूरी नहीं, हमारी मर्यादा है.!!
हम नहीं जानते कि कौन सा व्यक्ति इस समय किस परिस्थिति से गुजर रहा है,

_ लेकिन हम बिना सोचे-समझे ही दूसरे व्यक्ति के दर्द को जाने बिना ही उसके बारे में यह राय बनाना शुरू कर देता है कि फलां व्यक्ति ऐसा है या वैसा है.
_ न जाने ऐसे कितने लोगों की हमारे मन में छवि बुरी बनी हुई है, कि फलाना व्यक्ति ऐसा है वैसा है..!!
_ यदि किसी ने कुछ गलत किया हो आपके जीवन में, आपको दुख, कष्ट या हानि पहुंचाई हो तो उसे माफ कर दीजिए.
_ जीवन छोटा है, हमें लोगों को माफ़ कर देना चाहिए, चाहे उन्होंने हमारे साथ कितना भी गलत किया हो,
_ अपने भीतर किसी व्यक्ति के लिए कड़वाहट रखकर, इस जीवन को सहजता और शांति से नहीं जिया जा सकता, इसलिए माफ़ करें !!

सुविचार 176

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किसी की करुणा व पीड़ा देख कर मोम की तरह पिघलने वाला ह्रदय तो रखो, परन्तु विपत्ति की आँच आने पर कष्ट और प्रतिकूलताओं के थपेड़े खाने की स्थिति में चट्टान की तरह दृढ व ठोस बने रहो.

 

सुविचार – क्या बदला है दुनिया में ? – 175

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सभी कहते हैं दुनिया बदल गई है, क्या बदला है दुनिया में ?

_ मिरची ने अपना तीखापन नहीं बदला,
_ आम ने अपनी मिठास नहीं बदली,
_ पत्तों ने अपना हरा रंग नहीं बदला है,
_ बदली है तो इंसान ने अपनी इंसानियत और इल्ज़ाम देता है पूरी दुनिया को..!!
दुनिया बड़ी गोल-गोल हो गई है.. – समझ नहीं आता कि ‘क्या ही किया जाए’.!!

सुविचार – “हमारे ज़माने में” – 174

आ_अब_लौट_चलें..

_ जीवन के लगभग 40 साल बीतने पर नई पीढ़ी आ जाती है और हम “हमारे ज़माने में” कहने की सुविधा प्राप्त कर लेते हैं.
_ तो ! हमारे ज़माने में ऐसी गुंडागर्दी न थी.
_ प्यार मुहब्बत थे, दिल मिलने, न मिलने की बातें थीं.. लेकिन भई, मार-काट डालने की खबरें हमने नहीं सुनी थीं.
_ हमारे ज़माने में हम निर्द्वंद जीते थे, कहीं घूम-फिर लें, हमें कतई डर नहीं लगता था.
_ आजकल घर के अंदर घुसे रहते हैं.. तो भी डर लगता है.
_ अपने लिए नहीं तो बच्चों के लिए ही डर लगता रहता है.
_ इससे सिद्ध होता है कि ‘हमारा ज़माना अच्छा था’
– Manika Mohini
नई पीढ़ी के तौर-तरीके सन्न भी करते हैं और सुन्न भी.!!
– Manika Mohini

सुविचार 173

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पाखण्ड, घमण्ड, अभिमान, क्रोध, कठोर वाणी और अज्ञान,

यह सब आसुरी संपदा को प्राप्त हुए पुरुष के लछन हैं.

 

सुविचार – दया – दयालु – करुणा – कृपालु – मर्सी – Mercy – 172

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उन्हें वही ऊर्जा वापस मत दो, गुस्से का जवाब गुस्से से मत दो.

_ इसके बजाय, नर्म तरीके से जवाब दो.
_ दया को चुनो, भले ही वे इसके लायक न हों.
_ यही असली ताकत है.
__ ज्यादातर लोग उम्मीद करते हैं कि आप वही प्रतिक्रिया देंगे.. जैसा वे आपसे व्यवहार करते हैं,
_ लेकिन जब आप शांत रहते हैं, दयालु रहते हैं, और उनके बर्ताव से अपने दिल को बदलने नहीं देते, तो यही वह समय होता है जब आप दूसरों से अलग दिखते हैं.
_ आप दयालु होने के लिए कमजोर नहीं होते, बल्कि आप इस हद तक मजबूत होते हैं कि उनका बुरा दिन आपका बुरा दिन न बने.
_ तो वही व्यक्ति बनिए जो सॉफ्ट और दयालु रहे, चाहे दूसरे कैसे भी व्यवहार करें.
_ यही वह पलटाव है.. जिसे वे कभी नहीं देखेंगे..!!

Quotes by चन्द्रगुप्त मौर्य

जीवन में एक बार जो फैसला कर लिया तो फिर पीछे मुड़ कर मत देखो, क्योंकि पलट- पलट कर देखने वाले इतिहास नहीं बनाते.

सुविचार – हक़, अधिकार – 171

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“अपना हक़ लेने में सकुचाइये मत”

_ वर्ना आपके हिस्से की ज़मीं और आसमाँ निगलने में कोई नहीं सकुचायेगा.!!

जिन मौकों पर हम बड़प्पन दिखाकर बात को जाने देते हैं और खुद को महान साबित करते हैं, वो हर बार महानता नहीं होती.. कई बार वो हमारा डर या कमजोरी भी होती है.

_ हमें ये भी सीखना चाहिए कि कब हठी बनना ज़रूरी है, और हर हाल में अपना हक़ लेना भी उतना ही ज़रूरी है,सिर्फ जाने देना नहीं.!!

Collection of Thought 046

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Life is a dream for the Wise, a game for the Fool, a comedy for the Rich, a tragedy for the Poor.

बुद्धिमानों के लिए जीवन एक सपना है, मूर्खों के लिए एक खेल है, अमीरों के लिए एक कॉमेडी है, गरीबों के लिए एक त्रासदी है.

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