मस्त विचार 201
एक साथ खुलते- बंद होते हैं,
एक साथ रोते हैं, और एक साथ ही सोते हैं.
वो भी जीवन भर एक दूसरे को देखे बगैर …………!
एक साथ खुलते- बंद होते हैं,
एक साथ रोते हैं, और एक साथ ही सोते हैं.
वो भी जीवन भर एक दूसरे को देखे बगैर …………!
निकलते ही “रिश्तों” का वजन कम कर देते हैं..
मजा ले ले ज़िन्दगी का. खुशियों की तू तलाश न कर.
ग़मों से दूर हो कर, तेरी तक़दीर भी बदल जाएगी.
मुस्कुराना सीख ले, उस की वजह की तलाश न कर.
जैसे अँधेरे में प्रकाश जा के ज्योति की आस जगा दे.
मेरी आँखों को निखरना आ गया.
…………इस समय तो पाँव कीचड़ में सने हैं.
मरने के बाद तो लोग तो सिर्फ तारीफ करते हैं.
बहुत कुछ खो चुका हूँ,
अब कुछ भी खोने की ताकत नहीं मुझमे.
या रब, मेरे यार को मेरा ही रहने दे.
हम इंसान अपने रिश्तों में सबसे बड़ी गलती करते हैं; हम आधा सुनते हैं, चौथाई समझते हैं, शून्य सोचते हैं और दोहरी प्रतिक्रिया करते हैं.
ये फैले हुए उनके पर बोलते हैं;
वो लोग रहते हैं खामोश अक्सर,
ज़माने में जिनके हुनर बोलते हैं.