सुविचार 122

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अगर आप किसी को धोखा देने में कामयाब हो जाते हैं,

तो ये मत सोचिए कि वो कितना बेवकूफ है,

बल्कि ये सोचिए कि उसे आप पर कितना विश्वास है.

हम चाहें तो केवल अपने लिए कोई दीप जला सकते हैं,

लेकिन उसकी रोशनी से यह आग्रह नहीं कर सकते

कि वह केवल मेरे लिए ही प्रज्वलित हो.

 

सुविचार – उपहार – तोहफा – गिफ्ट – प्रेजेंट – 121

स्नेहपूर्वक भेंट किये गये उपहारों में हृदय की विशालता और नेह भावना निहित होती है.

_ ये उपहार जीवनपर्यंत संभाल कर रखे जाते हैं.
_ जब भी इन पर दृष्टि जाती है..
_ उपहार देने वाले की स्मृति जीवंत हो उठती है.
हम कोई भी वस्तु कभी भी खरीद सकते हैं,
_ लेकिन किसी खास मौके पर उपहार में मिली वस्तु का महत्व बढ़ जाता है.
उपहार हमेशा सराहनीय होता है, क्योंकि वह सिर्फ़ वस्तु नहीं होता,
_ बल्कि उसके साथ देने वाले की भावनाएं जुड़ी होती हैं..!!
उपहार को चीज़ मान लेना, उसकी बेकद्री है, उपहार भावना होती है.
जिन लोगों से हमें तोहफा मिलता है,
_ वे उनके दिल का स्वाद और पहचान है ..जो हमारे साथ चलती हैं.

सुविचार – ध्वनि प्रदूषण [noise pollution], गपशप, बकबक, ज्यादा बोलना, निरंतर बातचीत, ज्यादा बातचीत करना, – 120

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ज़्यादातर समय, किसी भी चीज़ के बारे में बात न करना ही बेहतर होता है.

_ यही सबसे अच्छी चीज़ है जो कोई भी कर सकता है.
_ हमने अपने ध्वनि प्रदूषण से उस शांति को नष्ट कर दिया है.
_ हम में से ज़्यादातर लोग नहीं जानते कि इस लगातार बातचीत को कैसे रोकें.
_ अगर कोई नहीं है, तो हम खुद से ही बातें करते रहते हैं.
_ यह ध्वनि प्रदूषण और बकबक करता मन हमारे भीतर की क्रिस्टल जैसी स्पष्टता को नष्ट कर देता है.!!
रिसर्च [Research] करके बोलने वाला अंदर से निश्चिंत और क्लैरिटी ळिए हुए रहता है,

_ सिर्फ़ बोलने के ळिए बोलने वाला अंदर से खाली और खोखला होता है.!!
ज़िन्दगी में इतने काम होते हैं, गपशप करने के लिए वक़्त कोई कहाँ से निकाले ?_गपशप तो छोड़ो, अपने से ही बात करने का समय नहीं मिल पाता..

_ अपने से बात करना, अपने भीतर झांकना, अपने आप से मिलना कितना ज़रूरी है,
_ इस आत्मसुख को जानिए, बहुत सारी उलझनों से मुक्ति मिल जाएगी.!!
केवल गपशप और तुलना करके हम अपना जीवन बर्बाद कर रहे हैं..

_ जिसका हमारे जीवन में कोई अर्थ या मूल्य नहीं है.
_ महत्वपूर्ण बात यह है कि हम अपने आप को देखें, उस दयनीय, ​​तुच्छ अस्तित्व को देखें.. जो हम अपने लिए बना रहे हैं.
_ फिर महत्वपूर्ण बात यह है कि वर्तमान में जीने के महत्व को समझें.
_ हम सभी के लिए अपने भीतर गहराई में जाने और उस क्षमता को पहचानने का समय आ गया है.. जो हमारे भीतर छिपी हुई है, जो छोटी-छोटी गपशप और तुलनाओं द्वारा मन की अंतहीन बकबक से ढकी हुई है. – “”पूर्वाग्रह और निष्कर्ष””
_ जागृत होइए, जीवित बनिए और अपने भीतर की क्षमता को देखना शुरू कीजिए.!!
हमारे यहाँ बोलने पर कोई पाबंदी नहीं है तो कोई भी कुछ भी अनाप सनाप बोलना शुरू कर देता है.

_ बुद्धि और विवेक लुप्त हो गए हैं, यहाँ तक कि वाणी की मर्यादा भी खो गई है.
_ मानसिक संतुलन इतना बिगड़ गया है कि किसी भी विषय पर बोलने से पहले हम यह नहीं सोचते कि कहाँ, क्या, कैसे और कितना बोलना है,
_ क्योंकि हमें तो बस बोलने से मतलब है.!!
आजकल लोग बोलते नहीं, तोलते हैं.. क्योंकि अब बातें नहीं, मतलब निकाले जाते हैं.!!
हर “इसान” अपनी “जुबां” के “पीछे” “छुपा” हुआ है,अगर उसे “समझना” है तो उसे “बोलने” दो….!
जहां मुमकिन ही नहीं, वहां संवाद की कोशिशें सिर्फ फजीहत करवाती हैं.!!

सुविचार- जिंदगी क्या है.. – 119

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जिंदगी के 60 साल बीतने के बाद आप जान पाते है कि जिंदगी क्या है..

_ इसे जीना कैसे था.. क्या करना जरुरी था जो छूट गया और क्या क्या गैर-जरुरी करते रहे..
_ और यही बात अगर 30 साल की उम्र मे जान गये तो समझिये अगले 30 साल मिल जाएंगे.. जिंदगी जीने के लिये.!!

सुविचार – खुदकुशी – ख़ुदकुशी – आत्महत्या – Suicide – 118

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आत्महत्या, अस्थायी समस्या का स्थायी समाधान है.

Suicide is a permanent solution to a temporary problem.

_ Abigail Van Buren

आत्महत्या करके अपना जीवन बर्बाद मत करो…यह एक बकवास तरीका है.

Don’t piss your life away with suicide…it’s a bullshit way out.

-Gerard Way

जब जीने की इच्छा खत्म हो जाये और कोई चाहत ना बची हो तो..

_ अपनी ज़िंदगी उन लोगों के नाम कर दें, जिनको आपकी जरूरत है.

जीने की इच्छा खत्म होने पर भी जीते जाना बड़ी बहादुरी का काम है.

_ वे अनेक पल जब आपने मरना चाहा, से ज़्यादा काबिल है वह एक पल जब आपने जीना चाहा.!!
मरना तो सबको एक दिन है, लेकिन जानबूझकर मौत को गले लगाना समझ से परे है, जिंदा रहते तो देश के, समाज के, परिवार के कुछ काम ही आते.!!
“सुसाइड की जरुरत नहीं, संन्यास लो !”

एक शिष्य ने ओशो से कहा की वह जिंदगी से तंग आ कर आत्महत्या करना चाहता है, इस पर ओशो बोले :-
तुम सूइसाइड क्यों करना चाहते हो ? शायद तुम जैसा चाहते थे, लाइफ वैसी नहीं चल रही है ? लेकिन तुम ज़िन्दगी पर अपना तरीका, अपनी इच्छा थोपने वाले होते कौन हो ? हो सकता है कि तुम्हारी इच्छाएं पूरी न हुई हों ? तो खुद को क्यों खत्म करते हो, अपनी इच्छाओं को खत्म करो। हो सकता है तुम्हारी उम्मीदें पूरी न हुई हों और तु परेशान महसूस कर रहे हो।
जब इंसान परेशानी में होता है तो वह सब कुछ बर्बाद करना चाहता है। ऐसे में सिर्फ दो संभावनाएं होती हैं, या तो किसी और को मारो या खुद को। किसी और को मारना खतरनाक है और कानून का डर भी है। इसलिए, लोग खुद को मारने का सोचने लगते हैं। लेकिन यह भी तो एक मर्डर है।तो क्यों न ज़िन्दगी को खत्म करने के बजाए उसे बदल दें।
संन्यास ले लो फिर तुम्हें आत्महत्या करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि संन्यास लेने से बढ़कर कोई आत्महत्या नहीं है और किसी को आत्महत्या क्यों करनी चाहिए? मौत तो खुद-ब-खुद आ रही है, तुम इतनी जल्दी में क्यों हो ?
मौत आएगी, वह हमेशा आती है। तुम्हारे न चाहते हुए भी वह आती है। तुम्हें उससे जाकर मिलने की जरूरत नहीं है, वह अपने आप आ जाती है, लेकिन विश्वास करो तुम अपने जीवन को बुरी तरह से मिस करोगे। तुम गुस्से या चिंता की वजह से सूइसाइड करना चाहते हो। मैं तुम्हे असली सूइसाइड सिखाऊंगा। बस संन्यासी बन जाओ। वैसे भी साधारण सूइसाइड करने से कुछ ख़ास होने वाला भी नहीं है।
आप फौरन ही किसी दूसरे की कोख में कहीं और पैदा हो जाएंगे। इस शरीर से निकलने से पहले ही तुम किसी और जाल में फंस जाओगे और एक बार फिर तुम्हें स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी जाना पड़ेगा, जरा इसके बारे में सोचो। उन सभी कष्ट भरे अनुभवों के बारे में सोचो। यह सब तुम्हे सूइसाइड करने से रोकेगा।
दुनिया में बहुत से लोग सूइसाइड करते हैं और साइकोएनालिस्ट कहते हैं कि बहुत कम लोग होते हैं, जो ऐसा करने का नहीं सोचते। दरअसल, एक आदमी ने इन्वेस्टिगेट करके कुछ डाटा इकठ्ठा किया, जिसके अनुसार हर इंसान जीवन में कम से कम चार बार सूइसाइड करने की सोचता है, लेकिन यह पश्चिमी देशों की बात है, पूरब में चूंकि लोग पुनर्जन्म को मानते हैं, इसलिए कोई सुइसाइड नहीं करना चाहता है।
क्या फायदा, तुम एक दरवाज़े से निकलते हो और किसी दूसरे दरवाजे से फिर अंदर आ जाते हो। तुम इतनी आसानी से नहीं जा सकते। मैं तुम्हें असली आत्महत्या करना सिखाऊंगा, तुम हमेशा के लिए जा सकते हो। हमेशा के लिए जाना ही तो बुद्ध बन जाना है।
– ओशो
किसी की आत्महत्या की खबर मुझे विचलित करती है,

_ क्योंकि आत्महत्या गहरे सदमे का परिणाम होती है.

खुद को मार लेने से ज्यादा साहस, जिन्दा रहने के लिए चाहिए होता है.
ऐसी जगह को ही छोड़ दीजिए.. जहां आपके मन में ये ख्याल आने लगे कि नहीं – अब इससे ज्यादा नहीं हो पायेगा.. कम से कम जान तो बची रहेगी,

_ किसी भी चीज़ का हल जिंदा रहकर ही.. जी हां जिंदा रहकर अपनी बात रखिए,, लड़ाई करिए.. हिम्मत से काम लीजिए.. पर मृत्यु का चुनाव बिल्कुल नहीं.. Be Brave.
हर मृत्यु जीवन की क्षति है किंतु ..आत्महत्या या खुदकुशी !

_ यह तो सभ्य समाज पर प्रश्नचिन्ह है..

_यह जानना ही चेतना को सुन्न कर देता है कि किसी ने स्वयं से मुंह मोड़ लिया..

_ मरने से पहले मरने वाला कितना बेबस और अकेला होता होगा, उस वक़्त वह क्या सोचता होगा ?

..इतना निराश कि _ एक संघर्षमय अतीत के बाद ..चमकता वर्तमान ..और लोगों को ईर्ष्या हो उठे ..ऐसा भविष्य.. _ जब सामने हो तो बन्दा उठे और चुपचाप दृश्य से ओझल हो जाये..!!

_ यह सोचते हुए कि रखो तुम अपनी ख़ूबसूरत दुनिया, यह मेरे काम की नहीं..

_ यूँ जाना नहीं चाहिए किसी को …पर उससे ज़रूरी है कि ..हमें ऐसा वातावरण, ऐसा समाज बनाना चाहिए.. _ कि हम ही न जाने दें किसी को..

.. पकड़ लें हाथ कि दोस्त, भाई …सुनो …तुम बेहद ज़रूरी हो ..सबके लिए..

… नहीं तो कम से कम मेरे लिए..मत जाओ न.. हम हर परेशानी से मिलकर निपट लेंगे..!!

_पर नहीं हम करते क्या हैं.. ?

_ जब कोई परेशान हो, अवसाद में हो, कभी आत्महत्या की बात करे तो ..उसे अपनी महानता, संघर्ष के क़िस्से सुनाते हैं, उस पर तंज करते हैं, कायर, कमज़ोर कहते हैं या उसे अवॉयड करते हैं..

.. हम उसे न सुनते हैं, न समझते हैं न गम्भीरता से लेते हैं..

_ हमारे समाज में वह ज़िन्दगी ज़्यादा कीमती, ज़्यादा तवज्जो [ attention ] पाती है.. जो जीवित नहीं..

_ हमने जितना प्यार गुज़र चुके लोगों को किया .. उसका शतांश भी ज़िंदा लोगों को किया होता तो…

_ वह यूँ चुपचाप असमय न चले जाते…

_ ज़िंदा लोगों के लिए क़ब्र खोदने वाला समाज .. मरे हुओं पर आंसू बहाते हुए ..असल में अपनी शर्मिंदगी को छुपाता है..

_ ज़िन्दगी तुझे तो हम समझ ही नहीं पाए … पर मौत तू कितनी दिलकश है ..

..जो यूँ सितारे तुझे गले लगा लेते हैं..!!

बुरे हालातों में जब हमारा ही धैर्य हमारा साथ छोड़ रहा होता है, जब हमारा ही मन कई तरह की आशंकाओं से भरा होता है.

_ उन मुश्किल हालातों में अक्सर हम यह मान लेते हैं कि समस्या हमारे और हमारे अपनो के बीच है.

_ जबकि असल सच्चाई यह होती है की वही हमारा अपना हमारी नजरों से कहीँ दूर एक लड़ाई और भी लड़ रहा होता है और शायद वह उस लड़ाई में खुद से हार भी रहा होता है.
_ इसका एक औऱ दुखद पहलू यह भी है की अपनी कुछ आशंकाओं के चलते या अपने किसी डर के चलते वह किसी भी दूसरे को अपनी इस लड़ाई में शामिल तक नही करना चाहता,
_ इसलिए वह किसी भी तरह की मदद लेने से इनकार करता रहता है और एक दिन इसी जद्दोजहद में वह अपने ही खिलाफ अपनी ही ज़िन्दगी की सबसे बड़ी लड़ाई हार जाता है.
_ एक इंसान होने के नाते, उसका क़रीबी होने के नाते हमारा यह फ़र्ज़ बनता है कि हम अपनी आंखें हमेशा खुली रखें और इस बात का ध्यान रखें की कहीं कोई हमारा अपना ऐसी ही कोई लड़ाई तो नही हार रहा है ?
_ कहीं ऐसा तो नही की उसे हमारी मदद की जरूरत है और हम अपने गुस्से के चलते हम यह सब कुछ अनदेखा कर रहे हैं ?
_ कहीं ऐसा तो नही की वह हमें पुकारना तो चाहता है लेकिन अपने ही किसी डर की वजह से वह हमें पुकार नही पा रहा है ?
_ कहीं ऐसा तो नही की हम अपने ही शिकवे शिकायतों में इतने उलझे हुए हैं की हम यह भी नही देख पा रहे की हमारा ही कोई अपना अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी लड़ाई हार रहा है ?
मानसिक तनाव इस हद तक हावी होने लगा है कि अब मासूम छोटे 11 वी 12 वी के बच्चे आत्महत्या करने लगे हैं, वास्तविक गलती किसकी है, ये समझ के ही बाहर है.

_ जब किसी व्यक्ति के मन में ऐसे नकारात्मक विचार हावी होते हैं, तो उसे किस प्रकार से नियंत्रित करना चाहिए, इसका समाधान बताने वाले बहुत कम लोग है इस दुनिया में..!!
_ कौन व्यक्ति किस दौर से गुजर रहा है, इसकी जानकारी लेने से किसी को कोई मतलब नहीं, लोगों को मतलब है तो सिर्फ पद, प्रतिष्ठा, रूप रंग सौंदर्य से,
_ बहुत आसान है ये बात लिखना,
_ दुखद या rest in peace, पर काश कोई व्यक्ति उस आत्मा तक पहुंच कर उसके मन की पीड़ा को समझ सकता..!!
_ ताकि कोई इस प्रकार के कदम न उठाता.

सुविचार – भरोसा – यकीन – 117

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बड़े मुश्किल से मिला हूँ मैं खुद से..

_ अब मैं लोगों की बातों पर भरोसा नही करता..!!

मैं लोगो पर भरोसा इसलिए नहीं करता कि वो भरोसे के लायक हैं,

_ बल्कि इसलिए करता हूँ कि _ मेरे पास और ऑप्शन [Option] नहीं है !!
_ मैं भरोसा करता हूँ, आँख बंद करके नहीं — बल्कि आँख खुली रखकर.
_ हम इसलिए भरोसा करते हैं. क्योंकि अकेले रहकर जीवन चल नहीं सकता.
_ हर दरवाज़ा खुद नहीं खोला जा सकता और हर बोझ खुद नहीं उठाया जा सकता..
और इसमें कोई कमजोरी नहीं है.
_ लेकिन एक सूक्ष्म फर्क याद रखना ज़रूरी है.. भरोसा देना और अपनी ज़िम्मेदारी सौंप देना, दो अलग बातें हैं.!!
“किसी सही व्यक्ति को बार-बार आज़माना,

दरअसल अपने ही भरोसे को हर बार तोड़ना है.”
_ “क्या मैं दूसरों की निष्ठा पर शक करके
दरअसल अपनी ही शांति को खो नहीं देता ?”
_ “क्या भरोसा करने की हिम्मत मेरे भीतर अब भी जीवित है ?”
जीवन में इतनी बार धोखा खाया हूं कि कोई मेरे साथ कितना भी अच्छा करता है, भरोसा करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता हूं,

_ क्योंकि भरोसे ने हर बार मुझे यही भरोसा दिलाया है कि खुद के अलावा किसी पर भरोसा नहीं करना.!!
भरोसा किसी भी संबंध का आधार है’

_ जब हम किसी पर अपनी जिंदगी का एक हिस्सा रख देते हैं, तो हम अपना एक सच, एक कोमल पहलू उसके हवाले कर देते हैं.
_ पर एक बात याद रखिए – किसी और के व्यवहार पर हमारा पूरा नियंत्रण नहीं होता,
_ पर हम अपने अंदर इतनी मज़बूती ला सकते हैं कि अगर कभी भरोसा टूटे भी, तो हम खुद बिखर ना जाएं.
: “जहाँ भरोसा है, वहाँ संभावना है; पर अपना आधार कभी किसी और के कंधों पर मत रखो”
जब भी आप किसी परिस्थिति में बहुत परेशान हो जाओ और आपको पता न चले कि उसमें से कैसे निकलना है तो सोचो मत,

_ बस गहरे निर्विचार में चले जाओ और अपने अंतर्विवेक को अपना मार्गदर्शन करने दो.
_ शुरू-शुरू में तो आपको भय लगेगा, असुरक्षा महसूस होगी – पर जल्दी ही जब आप ठीक निष्कर्ष पर पहुंचोगे, जब आप ठीक द्वार पर पहुंच जाओगे, आपमें साहस आ जाएगा और आप खुद पर भरोसा करने लगोगे..
_ याद रखना खुद पर भरोसा करने का नाम ही जिंदगी है.!!
विश्वास करने वाला व्यक्ति कभी अंधा नहीं होता, लेकिन धोखेबाज हमेशा अंधा होता है.

_ उसे सिर्फ अपने स्वार्थ और लालच ही दिखाई देते हैं.
_ वह दूसरे व्यक्ति के विश्वास और प्रेम को नहीं देख पाता.
_ धोखे से अंधा होकर वह एक भरोसेमंद व्यक्ति को खो देता है..?
किसी के लिए अच्छा सोचना सबसे बड़ा गुनाह बन जाता है,

_ क्योंकि कई बार यही अच्छाई इंसान के लिए नुकसानदेह साबित होती है,
_ हम बिना किसी स्वार्थ के सामने वाले के बारे में अच्छा सोचते हैं, पर बदले में अक्सर वही संवेदना और ईमानदारी नहीं मिलती..
_ धीरे-धीरे यही अच्छाई हमारी कमजोरी समझ ली जाती है, और हम समझ ही नहीं पाते कि कब भरोसा बोझ बन गया..
_ अंत में नुकसान किसी और का नहीं, उस इंसान का होता है जो दिल से अच्छा सोचता रहा.!!
आज कल यही हो रहा है, आज के लोग दूसरे को सहारा देकर उसका भरोसा जीत के उसे अपनी आदत लगा लेते हैं फिर ऐसे उसे तोड़ देते हैं कि उस इंसान की पूरी जिंदगी अंधेर में खो जाती है.

_ फिर उस इंसान के सारे सपने, सारी दुनिया से भरोसा उठ जाता है.
_ और जो जाता है वो ऐश मौज कर रहा होता है किसी और के साथ..
_ ऐसा क्यों होता है ?
_ क्या रब नहीं देखता है कि आज का इंसान इतना गिर गया है कि अपनी अच्छी जिंदगी जीने के लिए दूसरों की जिंदगी खराब करे, उसका सारा कुछ छीन के..
_ और आज का इंसान को किस चीज़ का घमंड है, जबकि उसका शरीर भी उसका नहीं है.!!
लोगों की राय बदलती रहती है, इसलिए उनकी प्रशंसा या तानों पर नहीं, बल्कि खुद पर भरोसा रखें.!!
हर बात पर तुरंत भरोसा मत कीजिए ..क्योंकि झूठ हमेशा सच से तेज़ दौड़ता है.!!
कैसे करू भरोसा गैरों के प्यार पर,  अपने ही मजा लेते हैं अपनों की हार पर..!!
छल कपट करने वाले लोग अपने ही भरोसे का दरवाजा बंद कर लेते हैं.!!
फ़िक्र करने वाले रात भर जागते हैं, लेकिन भरोसा रखने वाले रब की गोद में चैन से सो जाते हैं.
जैसे ही आप खुद पर भरोसा करेंगे,

_ आप को पता चल जाएगा कि “कैसे जीना है” !!

बिना पूरी बात जाने किसी पर भी भरोसा मत करो,

_ क्योंकि कुछ लोग दूसरों की छवि ख़राब करने में बहुत माहिर होते हैं.!!

भरोसा करो मगर किसी के भरोसे मत रहो.

“हमें दूसरों पर भरोसा करने की जगह खुद पर भरोसा करना चाहिए”

किसी पर भरोसा मत करो, भरोसे का जमाना नहीं है..
_ आंखें और कान खुली रखें.. खुद सोचो और समझो.!!
हर इंसान पर बहुत सोच समझ ही भरोसा कीजिएगा..!

_ क्योंकि वो कहता कुछ है, करता कुछ है और दिखाता कुछ और है.!!

आशा और भरोसा…और थोड़ा धैर्य !

_ ये वे मानवीय गुण हैं जो किसी को हार जाने से बचा लेते हैं.!!

आँख बंद कर के यकीन करने से पहले थोड़ा ठहरिए -परखिए..

_ क्योंकि इंसान परतों में खुलता है, हम समझते क्या हैं वो निकलता कुछ और है.!!

भरोसा तोड़ने वाले से बड़ा मूर्ख कोई दूसरा नहीं हो सकता..

_क्योंकि वो अपने स्वार्थ के लिए एक अच्छे इंसान को खो देता है..!!

भरोसा तोड़ने वाले के लिए, बस एक यही सज़ा काफ़ी है,

_ उसको जिंदगी भर की ख़ामोशी तोहफ़े में दे दी जाए.!!

भरोसा करिए.. मगर आंख बंद करके नहीं..

_ क्योंकि फिर चोट तोड़ने वाले को नहीं…टूटने वाले को लगती है.

“जो इंसान हर बात पर अपनी ही बात बदल दे..

_ उस पर भरोसा करना, खुद को धोखा देने जैसा है.
_ क्योंकि जो आज अपने शब्दों का नहीं है, वो कल किसी का नहीं होगा”
ध्यान रखें, जब किसी का भरोसा टूटता है, तो सिर्फ एक शब्द ‘भरोसा’ नहीं टूटता..

_ इंसान टूट जाता है.!!

किसी को माफ करना आसान है, लेकिन उसपर पहले जैसे भरोसा कर पाना.. हद से ज़्यादा मुश्किल..!!
अगर किसी का भरोसा टूट जाए, तो उसे इतनी चोट लगती है कि वह अंदर से टूट जाता है.!!
ऐसे दिखाओ कि आपको लोगों पर भरोसा है लेकिन भरोसे किसी के मत रहो !!
किसी को माफ़ बेशक कर देना, लेकिन उस पर दोबारा भरोसा करके मूर्खता का परिचय भूलकर भी मत देना.
किसी पर भी भरोसा सोच समझकर किया करो, अगर कोई आपसे किसी और के बारे में बात करता है

_ तो वह किसी और से आपके बारे में भी बात करता ही होगा.!!
आम आदमी इस दुनिया में भरोसे के दम पर जीता है.

_ अगर भरोसा खत्म हो जाए, तो इंसान खत्म हो जाता है.!!

वो सब हो सकता है, जो आप सोचते हो ;

_ किसी का बुरा मत कीजिये और रब पर भरोसा रखिये.

भरोसा प्रकाश पर किया जाता है, प्रकाश को बिखेरने वाले दीपक पर नहीं.

_ जिन्हें रोशनी पर विश्वास हो जाए, उनके लिए रोशनी के आधार की क्या ज़रूरत ?

हमको गलत समझने वालों को हमने बाहर 👉 का रास्ता दे दिया..

_ क्योंकि जहां भरोसा होता है, वहां सफ़ाई देने की जरूरत नहीं पड़ती..
_ और ज़्यादा सफाई देनी भी नहीं चाहिए..!!
जिंदगी की हर ठोकर ने सीखाया है कि रास्ता चाहे जैसा भी हो भरोसा हमेशा अपने पैरों पर ही रखना.!!!
अपनी अच्छाई पर भरोसा रखो, जो आपको खोयेगा यकीनन रोयेगा.
हमें उन पर भरोसा था, उन्हें लगा हम उनके भरोसे हैं..!!
लूट लिया ये कह कर “भरोसा रख मुझ पर’
यकीन करो, यकीन ने ही मारा है..!!

सुविचार – वादा, वायदा – वादे, वादें – Promise – 116

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कुछ लोग आदतन हर बात में वादा कर लेते हैं _और पूरा करने के वक्त भूल जाते हैं

_या गायब हो जाते हैं..
_उन्हें नहीं पता होता कि _उनके वादे की डोर पकड़कर _यदि कोई कुछ करना चाहेगा तो
_उसका क्या हाल होगा..
_ऐसे लोगों की हां से ज़्यादा ज़रूरी है _उनका ना करना..
_ख़ासकर जरूरतमंद लोगों से कोई वादा सोच समझकर ही करना चाहिए..
झूठे वादे किसी का दिल तोड़ सकते हैं, उसकी उम्मीदें और हिम्मत छीन सकते हैं.
_ इसलिए किसी को वादा करने से पहले अच्छी तरह सोचें कि आप उसे निभा भी पाएंगे या नहीं.!!
A Clear Rejection Is Always Better Than A Fake Promise.

यदि न निभा सको तो झूठा वायदा करने से बेहतर है साफ़ इंकार कर दो.
_ ज़्यादातर यही देखा गया है कि लोग झूठे वादे करते हैं, इस तरह लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं.
_ क्या सच बोल कर किसी के दिल को नहीं जीता जा सकता ?
_ या अपना काम नहीं निकाला जा सकता ?
_ क्या सच के साथ इस दुनिया में नहीं जीया जा सकता ?
जितनी जल्दी हो सके समझ लें कि हर कोई आपको देर-सबेर छोड़ देगा,
_ भले ही उन्होंने हमेशा आपके साथ रहने का वादा किया हो..!!
कोई वादा तभी करें, जब आप उसे निभाने का इरादा रखते हों.!!
कोशिशें मायने रखती हैं, क्योंकि वादे तो अक्सर टूट जाते हैं.!!
छोटी छोटी बातों की, बड़ी बड़ी सी यादें हैं,,
_ निभाते हैं वो भी शिद्दत से, जो करते नहीं कोई वादें हैं !!
बड़े वादों से बेहतर है, एक छोटा सा साथ,

_ दूरियां तो उनमें भी हैं. जिनका हाथों में हाथ है.!!

सुविचार – अपेछा- आशा – उम्मीद – उम्मीदें – 115

जब आप किसी से अपेछा नहीं रखेंगे, तो फिर आपको किसी से शिकायत भी नहीं रहेगी..

_ जो लोग शिकायत शून्य हैं, वे ही तो सहनशील हैं..!!

लोग आप से अच्छा बनने की उम्मीद तो करते हैं ; ख़ुद अच्छा बनने से परहेज़ है उन्हें..!!
मसला ये नहीं कि लोग परवाह क्यों नहीं करते, मुद्दा ये है कि हमें उनसे इतनी उम्मीद क्यों है !!
जब मन थक जाए, तो उम्मीद छोड़ना भी समझदारी है.!!
तुझे जैसे चलना है वैसे चल ज़िन्दगी, मैंने तो तुझसे हर उम्मीद ही छोड़ दी है !!
ज़िन्दगी से ज्यादा उम्मीद न रखो तो ज़िन्दगी अच्छी है, बहुत अच्छी है.!!
उम्मीद की किरण के सिवा कुछ नहीं यहाँ..

_ हमारे यहाँ रोशनी का यही इंतज़ाम है.!!

जितनी उम्मीदें कम रखोगे, उतना मन शांत रहेगा..
_ क्योंकि ज़रूरत से ज़्यादा अहमियत अक्सर दर्द दे जाती है.!!
मन की शांति चाहिए तो ‘उम्मीद’ का दामन छोड़ दो ;

_ यही वो बोझ है जो इंसान को चैन से जीने नहीं देता.!!

खुद के साथ मजबूती से खड़े रहने वाले दौर में खुद से नाउम्मीदी रखना ठीक बात नहीं है.!!
आशा, चाहे कितनी ही कम क्यों न हो, निराशा से बेहतर है..!!
अगर उम्मीदें दुख की वजह हैं तो जीने की वजह भी उम्मीदें ही हैं.
जिंदगी से ज्यादा उम्मीद न रखो तो जिंदगी अच्छी है, बहुत अच्छी है.!!
आशा बनाए रखिए.. क्योंकि हर नया सवेरा कुछ अनजानी खुशियां लेकर आता है.
“जिंदगी है तो उम्मीद ही उम्मीद है.!!”
हमनें उम्मीद बहुत लगा रखी है, फिर सोचते हैं कि दुःख की वजह क्या है.!!

_ जीवन बिना किसी से खास उम्मीद लगाए जीने का नाम है.!!

उम्मीदों की बैसाखी छोड़ो और अकेले चलो..

_ जो खुद से जुड़ता है, उसे दुनिया के मतलब से फर्क नहीं पड़ता.!!

कभी-कभी हम गलत लोगों से, सही उम्मीदें लगा बैठते हैं.!!
जब आप औरों से उम्मीद लगाना छोड़ देते हो तो फिर वो आपकी भावनाओं को ठेस कभी नहीं पहुँचा सकते.!!
जितना आप लोगों के लिए करते हो, अगर उतने की ही आप उनसे उम्मीद भी रखते हो तो.. आप हमेशा निराश ही होने वाले हो.!!
दूसरों से उम्मीद न रखें, क्योंकि जब कभी उम्मीद टूटती है तो बहुत ठेस पहुँचती है. _ किसी से लेने की इच्छा रखने के बजाय कुछ देने की सोचें, अधिक खुशी मिलेगी.
लोग ऐसे हैं कि एक गिलास पानी पिलाने का एहसान के बदले..

_ पूरा कुआं लेने की उम्मीद रखते हैं..!!

कभी-कभी भरोसा करना भी ज़रूरी होता है, पर पूरी उम्मीद किसी और से बाँध लेना.. _ यही हमारी सबसे बड़ी भूल बन जाती है.
जब सब कुछ ठीक नहीं हो तब भी न घबराएं,

_ बस आप को पता होना चाहिए कि.. टूटी उम्मीदों से चीजों को कैसे सुलझाना है.

कुछ जगह जिंदगी में कभी नहीं भरती, खाली रहती हैं, क्योंकि आपने उन्हें स्वयं बनाया है,

_ आप उन चीजों की उम्मीद कैसे कर सकते हैँ, जिन्हें आपने दूर धकेल दिया है ?

बिना किसी उम्मीद के.. साफ़ दिल के साथ हर चीज़ करते चले जाओ..

_ यकीन मानो आपको इस बात का ज़िंदगी में कभी अफ़सोस नहीं होगा.!!

सच कहकर किसी का दिल दुखाना बेहतर है..

_ बजाय उस झूठ के जो किसी को उम्मीद देकर अंत में तोड़ दे.!!

दुनिया अजीब है – लोग दुख में जीते हैं, फिर भी उम्मीद से भरे रहते हैं.
_ शायद इसी उम्मीद के सहारे ही यह खेल चलता रहता है.
दूसरों से उम्मीदें कम और खुद पर यकीन ज़्यादा रखें ; यही वो छोटा सा मंत्र है जो आपकी ज़िंदगी को सुकून भरा और बेहद हल्का बना देगा.!!
जब उम्मीदें अपनों से जुड़ी होती हैं, तब उनका टूटना सबसे ज़्यादा तोड़ता है,

_ और जब वो अपना अचानक पराया लगने लगे, तब अंदर से जो खालीपन पैदा होता है, उसे शब्दों में बयां कर पाना मुश्किल होता है…!

अपनी असहाय अवस्था में, जब हमें कोई रास्ता नज़र नहीं आता, हम दूसरों के पास अपनी समस्या लेकर जाते हैं, इस उम्मीद में नहीं कि वह उसका समाधान कर देगा..

_ बल्कि इस उम्मीद में कि दिल की बात कह देने से हमारा मन हल्का हो जाएगा.!
_ समस्याओं के समाधान केवल बुद्धि से निकाले जाते हैं.. और कुछ समस्याओं के समाधान तो होते ही नहीं, समस्याओं को वहीँ छोड़ कर आगे बढ़ जाना ही एकमात्र निदान होता है.!!
उम्मीद से कम मिलने का दर्द मन में इस कदर समा जाता है कि हम कभी देख ही नहीं पाते कि हमें जरूरत से कितना ज्यादा मिला है,

_ ना जाने बदऩसीबी के इस लेवल में ये कैसी कशिश है कि हम खुशनसीब होते हुए भी खुद को बदनसीब मानने की जिद ठान लेते हैं…!!
उन सब चीजों को ना कहना ठीक है, जिनके साथ आप सहज नहीं हैं.

_ उन लोगों के शोर को ब्लॉक करना ठीक है, जो आपका भला नहीं करते हैं.
_ कभी कभी नकारात्मकता से खुद को अलग करना ठीक है.
_ अन्य लोगों की उम्मीदों के साथ बहुत अधिक फंस न जाएं..
_ आप स्वयं निर्णय करने के लिए स्वतंत्र हैं..!!
लोग आपको तभी पसंद करते हैं.. जब आप उनकी उम्मीदों के मुताबिक रहते हैं.!!

_ जब संसार से हमे कुछ चाहिए होता है.. हम ढूँढने निकलते है ;
_ इस चक्कर में जिन्हें हमसे कुछ चाहिए होता है.. वह हमे ढूँढ लेते है.!!
हमारे बुरे वक्त में जो हमें उम्मीदें देते हैं, लेकिन जब बाद में वो गैर होने का अहसास कराने लगते हैं,

_ तब उन उम्मीदों का टूटना भी स्वाभाविक है,
_ तभी हमारा दिल दुखता है, लेकिन इससे उस इंसान कोई फर्क नहीं पड़ता,
_ क्योंकि अब वो आपके साथ वैसे नहीं, जैसे कभी हुआ करता था…!
वो लोग जो हमें उम्मीदें देकर करीब लाते हैं, वही जब अचानक परायेपन का एहसास कराने लगते हैं, तो उन उम्मीदों का टूटना स्वाभाविक है..

_ दिल भी वहीं आहत होता है, जहाँ उसने सबसे ज्यादा भरोसा किया हो,
_ पर सच्चाई ये है कि इससे उस इंसान को कोई फर्क नहीं पड़ता,
_ क्योंकि अब वो पहले जैसा.. आपके साथ होता ही नहीं…!
पहले उम्मीद खत्म होती है, फिर शिकायतें खत्म हो जाती है.

_ उसके बाद खोने और पाने का मोह भी खत्म हो जाता है..
_ फिर कुछ नही बचता न रिश्ता, न किसी प्रकार का संबंध.. सबकुछ खत्म हो जाता है.!!
अक्सर हम जैसा सोचते हैं वैसा होता नही, लेकिन कई बार सच्चाई ये भी होती है कि जिस चीज़ की उम्मीद हम करते हैं, उसके लिए हम खुद कोई कोशिश नहीं करते..

_ हम सिर्फ कल्पनाओं में परिणाम ढूँढते रहते हैं, जबकि कुछ चीज़ें सिर्फ चाहने से नहीं, लगातार प्रयास करने से हासिल होती हैं.!!
इंसानों से उम्मीद लगाना, रेगिस्तान में मछली पकड़ने जैसा है ;
_ आपको न मछली मिलेगी, न पानी, बस धूप मिलेगी.!!
मैंने जीना सीखा है.. उस सच्चाई के साथ.. जिसे लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं..

_ कि हर मुस्कुराहट के पीछे एक थकान होती है, हर मजबूती के पीछे कोई टूटा हुआ पल..
_ लोग कहते हैं उम्मीद ज़िंदा रखती है, पर मुझे तो लगता है उम्मीदें ही सबसे ज़्यादा तोड़ती हैं और मौत…?
_ वो तो बस एक विराम है इस लंबे असहनीय वाक्य का, जो जीवन कहलाता है अब ना डर बचा है, ना इनकार..
_ बस एक शांति है उस अनजाने अंधेरे के प्रति जिसे मैंने अपना कह दिया है…!
भरोसा ओर उम्मीद जीवन सही तरीक़े से बिताने के साधन हैं, पर कुछ लोग इसका दुरूपयोग अपने स्वार्थ के लिए करते हैं ना तो वो किसी के मन की व्यथा को समझते हैं, और ना ही उन्हें उनकी वजह से हुए परिणाम की फ़िक्र होती है..!
कई बार मीलों का सफर तय करने के बाद यह लगता है कि हमें इस सफर में होना ही नहीं चाहिए था…!

_ कभी-कभी लगता है हमारा जन्म हुआ ही इसलिए है ताकि हम औरों की उम्मीदों पर खरे उतर सकें..
_ औरों के सपने साकार कर सकें और औरों की इज़्ज़त बढ़ा सकें.!!
उम्मीद खुद से रखो, इंसान कब बदल जाए पता नहीं..!
_ जीवन में किसी के सहारे मत रहो, लोग ऐसी जगह साथ छोड़ेंगे कि आप यकीन भी नहीं कर पाओगे.!!
ज़िंदगी ऐसी ही है —
थोड़ी सी हँसी, थोड़ा सा संघर्ष, और बहुत सारी उम्मीद..
_ जो चलना नहीं छोड़ता, वही सबसे अलग नज़र आता है.!!
जब इंसान उम्मीद खो देता है, तब वो लड़ना छोड़ देता है शिकायत करना बंद कर देता है, कि चीज़ें ठीक हो सकती हैं, कोई सुन लेगा, कुछ बदल जाएगा..
_ पर जब वो विश्वास ही नहीं बचता कि कुछ बदलेगा, तब शिकायत भी चुप हो जाती है और यही चुप्पी पता नहीं कैसी होती है…!
“अब कोई उम्मीद नहीं है इस जमाने से..

सब छोड़ जाते हैं किसी ना किसी बहाने से..”
हमारा एक बड़ा जीवन परेशानियों और निराशा मे बीत जाता है..
– इसका एक बड़ा कारण उम्मीदें होती हैं..
– कुछ उम्मीदें हम खुद से पाले होते हैं और कुछ उम्मीदें हम दूसरों से रखते हैं..
– ज़्यादातर आपको यही समझाया जाएगा कि दूसरों से उम्मीदें न पालो, ये दुखदाई होता है,
– लेकिन मनुष्य होकर ऐसा लगभग असंभव है कि आप दूसरों से उम्मीदें न पालें.
– हर पल आपके आस पास आपके रिश्तेदार, मित्र, जीवनसाथी इत्यादि होते हैं और उनमे से कोई न कोई आपसे उम्मीदें या आप उनसे उम्मीदें रखते ही हैं.
– उम्मीदें रक्खे बिना जीवन संभव ही नहीं है.!!
_ तो उम्मीदें रखना दुखदाई होगा और उम्मीदें रक्खे बिना जी भी नहीं सकते..
_ तो ऐसे मे कोशिश ये कर सकते हैं कि अधिकतर उम्मीदें स्वयं से रक्खें न कि अन्य आस पास के लोगों से..
_ दुख समाप्त तो नहीं होंगे लेकिन कुछ कम अवश्य हो जाएंगे..
_ ऐसा कोई भी काम.. जो आप दूसरों से expect करते हैं.. उसको सोच कर देखें कि यदि वो आप स्वयं कर लेंगे तो क्या ज्यादा बेहतर नहीं होगा..
_ और यदि आपसे नहीं हो सकता तो क्या आप उस कार्य के न होने पर भी एडजस्ट कर सकते हैं.
_ उम्मीदें थोड़ी थोड़ी करके कम करते जाने से थोड़ा अकेलापन लग सकता है लेकिन जीवन एकदम सही हो जाएगा.!!
_ यदि जीवन में इंसान की आवश्यकता सीमित हो और किसी अन्य से कोई उम्मीद और अपेछा न करे तो बेहद _ खुश जीवन आराम से जीया जा सकता है..!!
–उसे कोई कैसे दुखी कर सकता है, जिसकी किसी से कोई उम्मीद ही ना हो !!
“उम्मीद का दिया”

_ एक घर मे पांच दिए जल रहे थे, एक दिन पहले दिए ने कहा – ‘इतना जलकर भी मेरी रोशनी की लोगो को कोई कदर नही है तो बेहतर यही होगा कि मैं बुझ जाऊं ‘ और वह दीया खुद को व्यर्थ समझ कर बुझ गया.
_ जानते है वह दिया कौन था ? वह दीया था उत्साह का प्रतीक.
_ यह देख दूसरा दीया जो शांति का प्रतीक था, कहने लगा, मुझे भी बुझ जाना चाहिए… निरंतर शांति की रोशनी देने के बावजूद भी लोग हिंसा कर रहे है और शांति का दीया बुझ गया.
_ उत्साह और शांति के दीये बुझने के बाद, जो तीसरा दीया हिम्मत का था, वह भी अपनी हिम्मत खो बैठा और बुझ गया.
_ उत्साह, शांति और अब हिम्मत के न रहने पर चौथे दीए ने बुझना ही उचित समझा.
_चौथा दीया समृद्धि का प्रतीक था,, सभी दीए बुझने के बाद केवल पांचवां दीया अकेला ही जल रहा था.
_ हालांकि पांचवां दीया सबसे छोटा था.. मगर फिर भी वह निरंतर जल रहा था.
_ तब उस घर मे एक लड़के ने प्रवेश किया, उसने देखा कि उस घर मे सिर्फ एक ही दीया जल रहा है, वह खुशी से झूम उठा … चार दीए बुझने की वजह से वह दुखी नही हुआ बल्कि खुश हुआ, यह सोचकर कि कम से कम एक दीया तो जल रहा है.
_ उसने तुरंत पांचवां दीया उठाया और बाकी के चार दीए फिर से जला दिए.
_ जानते है वह पांचवां अनोखा दीया कौन सा था ? वह था उम्मीद का दीया ..
_ इसलिए अपने घर मे अपने मन मे हमेशा उम्मीद का दीया जलाए रखिये.
_ चाहे सब दीए बुझ जाए, लेकिन उम्मीद का दीया नही बुझना चाहिए.
_ ये एक ही दीया काफी है बाकी सब दीयों को जलाने के लिए ….
_ क्योंकि हमारे आज में जो उम्मीद जगती है.. वही उम्मीद हमारे भविष्य का निर्माण करती है.!!
– Neha Chandra

सुविचार – शिक्षा – 114

शिक्षा सबसे अच्छी मित्र है, एक शिक्षित व्यक्ति हर जगह सम्मान पाता है.
जब आप सबकुछ गवा बैठे तो _ उससे प्राप्त शिक्षा को न गंवाएं.
” हमारे जीवन में जितनी आवश्यकता धन की है,उतनी ही शिक्षा का होना भी आवश्यक है ताकि हम अपने जीवन को बेहतर तरीके से जी सकें, सकारात्मक व लोकहित के कार्य कर सकें ….

_ सार, यह है कि जीवन के लिए दोनों महत्वपूर्ण है.!!

सुविचार – जोखिम – रिस्क – Risk – 113

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सीख कहीं से भी हासिल की जा सकती है, बशर्ते कि हम अपने मस्तिष्क के दरवाजों को खुला रखें.
सोचना आसान होता है, कर्म करना कठिन होता है, लेकिन सबसे कठिन कार्य अपनी सोच के अनुसार काम करना होता है.
अगर आप रिस्क उठाना नहीं जानते हो तो आप हमेशा किसी ऐसे व्यक्ति के लिए नौकरी करते रहोगे, जो रिस्क उठाना जानता है.!!
जो लोग जल्दी शुरुआत करते हैं, शायद वे बस किसी बनी बनाई राह पर चल रहे होते हैं.

_ जो आप अपना रास्ता खुद बना रहे हैं, उन्हें जोखिम और साहस रखना होगा.
_ देर से शुरुआत करने वाला व्यक्ति जीवन में पीछे नहीं रह जाता.
_ आप बस देर से जागे हैं – और स्वेच्छा से जागना जबरदस्ती शुरू करने से कहीं अधिक शक्तिशाली होता है.!!
अपने जीवन में जोखिम उठाएं ; यदि आप जीतते हैं, तो आप नेतृत्व कर सकते हैं ; _यदि आप हार जाते हैं तो आप मार्गदर्शन कर सकते हैं.

Take a risk in your life. If you win, you can lead. If you lose you can guide.

यदि आप सामान्य जोखिम उठाने को तैयार नहीं हैं, तो आपको सामान्य से समझौता करना होगा.

If you are not willing to risk the usual, you will have to settle for the ordinary.

बड़ी सफलता के लिए, आपको कभी-कभी बड़े जोखिम उठाने पड़ते हैं,

_ रिस्क लो या फिर अवसर गंवाओ..!

To achieve great success, you sometimes have to take big risks,_ Take the risk or lose the opportunity..!

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