सुविचार – जनसंख्या – आबादी – Population – 131
आज समूचा विश्व कई समस्याओं से जूझ रहा है, सृष्टि अपने सबसे भयानक दौर में है.
_ अगर सभी समस्याओं के मूल में जाएं, तो अत्यधिक आबादी को पायेंगे.
_ पृथ्वी की छमता सीमित है और मनुष्य की आबादी असीमित.
_ इतने सुंदर ग्रह को हमने बर्बाद कर दिया और रहने लायक नहीं छोड़ा है.
_ हम ग्लोबल वार्मिंग, प्रदूषण, बढ़ते समुद्री जल स्तर, ओजोन लेयर में छेद, भुखमरी, आतंकवाद, परमाणु खतरा इत्यादि समस्याओं से घिरे हैं.
_ इन सबकी जड़ में जनसंख्या है.
_ अगर हम अपना अस्तित्व बचाये रखना चाहते हैं, तो सोच समझकर इस दुनिया में बच्चे लाएं और उनके लिए अच्छी दुनिया छोड़ जाएँ.
_अगर जनसंख्या इसी तरह बढ़ती रही तो हमारे पास आर्थिक, सामाजिक और व्यक्तिगत रूप से भी ज्यादा बेहतर भविष्य नहीं है.
इस धरती पर आठ सौ करोड़ की जनसँख्या destructive [विनाशकारी] है.. प्रकृति के लिए, जो पहले कभी नहीं थी.
_ चाहे जैसे हो, चाहे जिस विधि से हो, जनसंख्या एक बार कम हो और होनी ही चाहिए.!!
प्रकृति अपना संतुलन स्थापित स्वयं करती है और संभावना है कि प्रकृति आने वाले कुछ वर्षों में जनसंख्या संतुलन भी अपने दम पर कर लेगी.!!
बाजारवाद और जनसंख्या विस्फोट ने मनुष्य से सब कुछ छीन लिया है.!!
आज आबादी का ये हाल है कि चाहे कितनी भी ट्रेनें, बसें और हवाई जहाज चला लें,
_ कहीं जगह नहीं है.
_ स्कूल और कालेज खोल दिए जाएं,- सीट नहीं है,
_ हर जगह भीड़ ही भीड़ और चारों ओर पसरी अव्यवस्था..!!
प्राइवेट जॉब में कब जॉब चली जाए, पता नहीं.!
_ दूसरी कब मिलेगी, मिलेगी भी या नहीं, पता नहीं..
_ सभी कुछ व्यवसाय कर पायें, संभव नहीं..
_ इसीलिए सारी मारामारी और समस्यायें..
_आबादी पर नियंत्रण, कानूनन और समुचित औद्योगिकीकरण ही राहत दे सकता है.!!
अगर एक नाव में जरुरत से ज्यादा लोगों को बैठाते हैं तो उसका डूबना तय है,
_ तो अत्यधिक जनसंख्या ले कर विकसित होना कैसे सोचा जा सकता है.
आप 100 रूपए 10 लोगों में बांटते हैं, और अगर वही 100 रूपए 100 लोगों में बांटते हैं तो एक के हिस्से कितने आएंगे,
_ बस यही है जनसंख्या का गरीबी से रिश्ता.
सुविचार – स्मृति, स्मृतियाँ, स्मृतियां, स्मृतिया, यादें, यादों, याद, फोटो, तस्वीर, तसवीर, तस्वीरें – 130
सुविचार – खुशबू, इत्र, महक, सुवास, सुरभि, सुगंध – 129
सुविचार – प्रेम – प्यार – मोह – 128
सुविचार – रोटी – Bread – 127
सुविचार – आंसू – आँसू – रोना – 126
सुविचार – आँख- आँखें – आँखों – नजर – नज़र – नज़रें – 125
रख लो आईने हज़ार तसल्ली के लिए,, पर सच के लिए आंखें मिलानी पड़ेंगी..
जरूरतों को देखने के लिए अपनी आँखों का उपयोग करें, और उन्हें पूरा करने के लिए अपनी प्रतिभा का उपयोग करें.
Use your eyes to see the needs, and use your talents to meet them.
“दो दिखने वाली आँखों के अलावा भी _ कुदरत ने इंसान को कई आँखें दी है,
_ जरूरत इतनी ही है कि उनको खुला रखा जाये”
बहुत कुछ है जीवन में .. जो नजर आता है.. जो नज़र नहीं आता इसका मतलब ये नहीं कि वो नहीं है ..
_ उदाहरण के तौर पर हवा … और ऐसे ही हजार चीज होगी जिसे रब ने बनाया तो है जो हमें दिखाई नहीं देती.!!
सबके पास समान आंखें हैं, लेकिन सब के पास समान दृष्टिकोण नहीं..
_ बस यही बात इंसान को इंसान से अलग करती है.!!
जीवन में जब सब अच्छा ही अच्छा होता है तो हम अंधे बन जाते हैं,
_ उस वक़्त क्या ज़्यादा ज़रूरी है, वो साफ़- साफ़ नज़र नहीं आता.!!
कुछ ऐसा ख़ुद को बना लिया मैंने..
_ आँखों के आंसुओं को होठो की हँसी में छुपा लिया..!!
खाता मुंह है, झुकती आंखें हैं.
_ जिन आखों में झुकने की शर्मिंदगी हो, उन्हें खाने से डरना चाहिए.!!
ख़याल रखो कि तुम किस तरफ देख रहे हो.
_ क्योंकि जिनकी आँखें भटकती हैं, उनका मन भी भटकता है.!!
जिसने दूसरों की आँखें नम की हैं, उसके हिस्से में भी कभी ना कभी वही दर्द आता है, यही कर्म का फ़ैसला होता है.!!
तर्क किए बिना किसी बात को आँखें मूंद कर मान लेना भी एक प्रकार की गुलामी है.
जीवन उसका ही सुधरेगा, जो आँख बंद होने से पहले आँख खोल लेगा.
आपकी आँखें जो देखती हैं, वह हरदम सच नहीं हो सकता.
फेर लेते हैं सब के सब नज़रें, आप जब काम के नहीं रहते.!!
वो नज़रें सलामत रहे, जिन्हें हम अच्छे नहीं लगते..!!
चेहरे पढ़ने वाला नहीं, आँखें पढ़ने वाला ढूंढो.!!
अक्सर लोग ख़ुद से नज़र मिलाने से डरते हैं,
_ क्योंकि वहां जवाब नहीं सवाल होते हैं;
_ और अगर सवाल गहरे हो जाएं, तो पूरी ज़िन्दगी हिल सकती है.
_ इसलिए दुनिया की बातों में उलझे रहना आसान है,
_ “ख़ुद को असलियत से बचाने का तरीका”
_ “लोगों ने दुनिया जीत ली, पर अपने आप से हार गए – इसलिए उनके पास जानकारी तो है, पर जीवन नहीं.!!”
दूसरों की नज़रों से खुद को मत देखो.
_ तुम्हारे पास आँखें हैं; तुम अंधे नहीं हो.
_ और तुम्हारे पास अपने आंतरिक और बाहरी जीवन के तथ्य हैं.
_ तुम्हारी अपनी आँखें ही असली “मैं” का रास्ता है.!!
“मेरी आँखें चुप हैं… पर भीतर की दृष्टि सब काली लकीरें पढ़ लेती है”
“मेरी चुप्पी मेरी ताक़त है—
मैं कहे बिना भी सब पहचान जाता हूँ”
“मुझे किसी से मिलने में कोई आपत्ति नहीं,
_ पर मैं आँखों के पर्दों में छुपी चालाकियाँ पढ़ लेता हूँ.
_ मुंह पर कुछ कह नहीं पाता, यह मेरी खामोशी है..
_ लेकिन भीतर से मैं हर काली लकीर पहचान जाता हूँ..
_ मेरी चुप्पी कमजोरी नहीं, बल्कि मेरी गहराई है—
_ जो देखती है, समझती है, और चुपचाप याद रखती है”
“मैं चुप रह जाता हूँ, पर मेरी अंतर-दृष्टि उन काली लकीरों को पहचान चुकी होती है.”
सुविचार 124
ज़िन्दगी के 3 आसान नियम-
1. जो आप चाहते हो उसके पीछे नहीं भागोगे तो मंज़िल नहीं मिलेगी.
2. अगर आप कभी पूछोगे नहीं तो जवाब हमेशा “ना” ही रहेगा.
3. अगर आगे नहीं बढ़ोगे तो जहाँ थे, वहीँ रह जाओगे !!






