मस्त विचार 003
एक अर्से बाद
अपनों से मुलाकात हुई
वे वैसे नहीं लगे
जैसे मेरी याद में हैं
अब तो अपनों से मिलना भी
अपने आप को दुःखी करना है
यह सब जानते हुए भी
एक मुलाकात अपनों से कर ली.
एक अर्से बाद
अपनों से मुलाकात हुई
वे वैसे नहीं लगे
जैसे मेरी याद में हैं
अब तो अपनों से मिलना भी
अपने आप को दुःखी करना है
यह सब जानते हुए भी
एक मुलाकात अपनों से कर ली.
रिश्ते वो भी नहीं, जिस में रोज साथ हो.
रिश्ते तो वो हैं जिस में, कितनी भी दूरियाँ हों,
लेकिन मन में हमेशा उन की याद हो.
_ सच कहूँ तो सिर्फ़ कहा ही करते थे…