| Mar 16, 2014 | सुविचार
“उत्साह,”
परिभाषा के अनुसार, “उत्साह, उत्सुकता, ऊर्जा और रुचि” का अर्थ है.
जीवन के लिए उत्साह का अर्थ है जोश के साथ जीना, अपने आसपास की दुनिया में रुचि लेना, रोमांच की तलाश करना और उत्साह की भावना के साथ जीना.जैसे,
” भूख का भोजन से क्या संबंध है, उत्साह का संबंध जीवन से है
“जीवन के लिए उत्साह और जुनून सबसे सरल सुखों से आते हैं.
जब कोई इंसान अधूरे मन और उत्साह के बिना कोई काम करता है,
_ तो सरल काम भी बहुत मुश्किल हो जाता है..!!
करने का जुनून हो तो कुछ भी हो जायेगा,
_ बैठे बैठे बातें तो कोई भी बना लेता है..!!
सदैव युवा, ऊर्जावान और उत्साही लोगों के साथ रहना चाहिये.
_ बूढ़ों के साथ बैठ कर ताश या कैरम खेलना एक तरह से आपके समय की बर्बादी है.!!
अपने सपनों को उत्साह, साहस, अनुशासन और आशावादी तथा सकारात्मक सोच के साथ स्वीकार करते हुए व अहं और भय का परित्याग कर, यह विश्वास करें कि यदि श्रद्धा हमारे जीवन की नीवं है तो प्रगति हमारे हाथों में है.
जो बातें एक समय हमारे भीतर उमंग भर देती थीं, वही समय के साथ बचकानी प्रतीत होने लगती हैं,
_ जिन भावनाओं में कभी डूबकर हम रोया करते थे, उन्हें आज देखकर मुस्कान आ जाती है, शायद खुद की ही नादानी पर..
_ शारीरिक रूप से बढ़ना प्रकृति का नियम है, लेकिन मानसिक रूप से परिपक्व होना अनुभवों का परिणाम..
_ और जब बचपन के उत्साह को विवेक की दृष्टि से देखने लगो..
_ समझो तुमने सच में बड़ा होना शुरू कर दिया है…!
| Mar 15, 2014 | सुविचार
व्यवहार ……
उस चिराग की तरह बनिए जो गरीब के झोपड़े में भी उतना ही उजाला करता है जितना एक राजा के महल में रौशनी देता है !
_ सबके साथ समान और सम्मान से व्यवहार करिए !
अच्छा व्यवहार लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है,
_ जबकि बुरा व्यवहार लोगों को पीछे हटा देता है.
किसी व्यक्ति के बारे में कोई एक निश्चित राय नहीं बनानी चाहिए,
_ क्योंकि लोग अलग अलग जगह अलग अलग तरह का व्यवहार करते हैं..!!
अपने व्यवहार को सच्चा रखो और बदनामी की परवा न करो.
गंदगी मिट्टी की दीवार पर लग सकती है, पौलिश किए हुए संगमरमर पर नहीं.
कभी-कभी अपने ही कुछ लोगों का व्यवहार इतना निकृष्ट कोटि का होता है कि
_उनका जिक्र करना भी अपनी ही इंसल्ट लगती है..!!
लोगों से बुरा बर्ताव उस तरह मत करें, जिस तरह वो बुरे हैं.
_ बल्कि लोगों से अच्छा बर्ताव उस तरह करें, जिस तरह आप अच्छे हैं.!!
किसी के भी व्यवहार को देख कर जल्दबाजी में कोई प्रतिक्रिया न किया करें.
_ बस जो हो रहा है.. उसे देखते रहो.. उसका आनंद लेते रहो.!!
_ क्यों हो रहा है

कैसे हो रहा है

कब से हो रहा है

हो ही क्यों रहा है

_ इस चक़्कर में न ही फंसे तो हमारे लिए अच्छा होगा.!!
जो सबकी हां में हां मिलाते हैं और ये जताते हैं कि उनका सबसे व्यवहार अच्छा है,
_असल में उनका किसी से व्यवहार होता ही नहीं है..
_ वो तो बस हां में हां मिलाकर अपना उल्लू सीधा करते हैं..
_ और जो सबकी हां में हां नहीं मिलाते.. वो हर किसी को हज़म नहीं होते..
_ अतः व्यवहार बनाए रखना और व्यवहार का दिखावा करना..
_ ये दोनों अलग अलग बातें हैं..!!
सोचने के बजाय काम करना, काम होना महत्वपूर्ण है सो समय मेरे लिए मौसम, समय, घर-परिवार के काम समस्या ही नहीं हैं,
_मुझे लगता है कि आप जैसा व्यवहार, कार्य करते हैं ..परिस्थितियां अपने आप उसके अनुकूल बनने लगती हैं..
_मैं आपको समझता हूं, और मैं आपका मन बदलने का प्रयास नहीं करूंगा.
_मैं दुनिया को बेहतर बनाने की इच्छा रखने के लिए बहुत बूढ़ा हो गया हूं.
_मैं जो सोचता हूं वह आपको बता चुका हूं और बस इतना ही.
_यदि आप मेरी मान्यताओं के विपरीत कार्य करेंगे ..तो भी मैं आपका मित्र बना रहूँगा _और यदि मैं आपसे असहमत हूँ ..तो भी मैं आपकी सहायता करूँगा.
अधिकांश लोग यह सोचते हैं कि अगर किसी का फ़ोन एक बार में उठा लेंगे या किसी के मैसेज का उत्तर समय से दे देंगे तो उनकी वैल्यू कम हो जायेगी.
_ उन्हें लगता है कि तीन चार बार इग्नोर करने के बाद फोन उठायेंगे या मैसेज का रिप्लाई थोड़ा इग्नोर करने के बाद देंगे तो ऐसा करने से उनकी वैल्यू बढ़ेगी और सामने वाला उन्हें बहुत बड़ा इंसान समझेगा.
_ यह भी एक प्रकार की मानसिक बीमारी ही है.. जिसमें लोग अपनी ही काल्पनिक दुनिया में जी रहे होते हैं.
_ जबकि बाहर लोगों में इनकी वैल्यू तो ख़ैर नहीं बढ़ती है.. मगर इनके इस व्यवहार के चलते लोग इन्हें ज़रूर किनारे कर देते हैं.!!
*लोग हमारा बुरा बर्ताव तो याद रखते हैं.. अपना भूल जाते हैं.
_ जब शिकायतें गिनाते हैं, तो हमारी गलती उन्हें क्रमवार याद होती है,
लेकिन उन्होंने हमारे साथ क्या-क्या बुरा किया ? उन्हें याद नहीं रहता..
_ जबकि हमारा बुरा बर्ताव उनके बुरे बर्ताव के एक्शन का रिएक्शन था.
_ पहल हमने नहीं की थी.. – ‘सहन करने की भी एक सीमा होती है’
_ इसलिए, दूसरों की गलतियाँ गिनाने से पहले- अपनी गलतियों पर भी ध्यान दीजिए..
दर्द सबको बराबर लगता है.!!
आप किसी से बातचीत में शालीनता बरतेंगे या आदर में उनके खराब व्यवहार पर भी जवाब नहीं देंगे तो.. सामने वाला अपने को सुपीरियर समझ कर आप पर चढ़ बैठेगा..!!
कुछ लोग सच में बुरे नहीं होते और न ही बुरा सोचते हैं, पर उन्हें एहसास ही नहीं होता कि उनका व्यवहार दूसरे को चोट पहुंचा सकता है.
_ वे संवेदनशीलता के मामले में कमजोर होते हैं.!!
कोई अच्छा इंसान भी एक वक्त तक ही अच्छा रह सकता है,
_ उसके बाद वो लोगों से वैसा ही व्यवहार रखने लगता है, जैसा लोग उसके साथ रखते हैं.!!
हमारा अच्छा व्यवहार भी लोगों को खटकता है और इसलिए वे दूरी बना लेते हैं,
_ क्योंकि इससे उनके अहंकार को ठेस पहुँचती है.!!
अपनी वाणी और व्यवहार में हमेशा स्पष्टता रखो,
_ फिर जिसे आना हो आयेगा और जिसे जाना हो जायेगा..!!
आप चाहते हैं कि लोग आपके साथ सच्चा व्यवहार करें, तो आप खुद सच्चे बनें और अन्य लोगों से भी सच्चा व्यवहार करें.
आपके व्यवहार से ही सामने वाला तय करता है कि आप इज्जत के काबिल हैं या दूरी के.!!
किसी की बात को दिल पर मत लीजिए, जिसका जैसा संस्कार होता है..
_ वैसा ही… उसका व्यवहार होता है..!!
सबके साथ बराबर व्यवहार रखें बिना किसी व्यक्ति विशेष की तरफ झुकाव रख के,
_ अर्थात चाटुकारिता को बढ़ावा ना दें..!!
आप यह नियंत्रित नहीं कर सकते कि दूसरे लोग कैसा व्यवहार करते हैं ; _लेकिन आप यह नियंत्रित कर सकते हैं कि आप इस सब पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं.
_आपकी प्रतिक्रिया में आपकी शक्ति है.
You can’t control how other people behave. But you can control how you respond to it all. In your response is your power.
| Mar 15, 2014 | सुविचार
ज़िंदगी को नए सिरे से ठीक करने के लिए कोई मौका दे तो ..क्या मांगा जाए ?
_ वैसे आप क्या मांगते एक सुकूनदेह ज़िंदगी के लिए ? ?
” शान्ति ” _ वह सब कुछ, जो अच्छा है, उसकी जननी है.
“इस दुनिया में कुछ लोग ही शांत, समर्थ और संतुलित जीवन जीते हैं”
‘मैं अपनी शान्ति का मालिक हूँ, सिचुएशन [Situation] का गुलाम नहीं.’
” शांति का आगमन ज्ञान से ही होता है, _ और शांति आनंद को आश्रय देती है,”
“सुकून बाहर नहीं, भीतर की ख़ामोशी से मिलता है”
_ थोड़ी देर खुद से मिलने बैठिए, जवाब वहीँ मिलेंगे, जहाँ आपने कभी झाँका नहीं.!!
जिसके पास मन की शांति है _वह न तो खुद को परेशान करता है _और न ही दूसरे को.!!
कोशिश यह करना कि सुकून का ताल्लुक़, किसी शख्स से ना जुड़े.!!
मन की शांति सबसे बड़ा धन है, जब मन शांत हो, तभी जीवन सुखमय बनता है.!!
“हमें सुकून वहां मिलता है जहां आपको किसी को कुछ साबित नहीं करना होता.”
ज़िन्दगी की सबसे कीमती चीज़ है – मन की शान्ति, सुकून की नींद, सुलझे हुए रिश्ते, आर्थिक मजबूती, आध्यात्मिक जीवन.!!
कुछ लोग यह नहीं समझते कि अपने घर में अकेले शांति से बैठना, नाश्ता करना और अपने काम से काम रखना अमूल्य [ Priceless ] है.
दूसरों की प्रशंसा करें, इस से उन्हें मानसिक शांति मिलेगी,
_ दूसरों से यह उम्मीद न करें कि, वे आप कि प्रशंसा करेंगे,
_ इस से आप को मानसिक शांति मिलेगी !!
शाश्वत शांति की प्राप्ति के लिए शांति की इच्छा नहीं,
_ बल्कि आवश्यक है इच्छाओं की शांति !!
दूसरों के व्यवहार को अपने मन की शांति को नष्ट करने का अधिकार न दें.
दूसरों से ईर्ष्या करने वाले मनुष्य को _ कभी मन की शांति नहीं मिलती.
मन की शांति दुनिया की किसी भी दौलत से बढ़कर होती है.
मन को तो तभी चैन मिलता है, _ जब ह्रदय शान्त हो.
” सुकून की फिजा में ही, _ मौज़-ए- बहार आती है,”
लोगों की राय से ज्यादा अपनी शांति को महत्व दें.
साधन खरीद सकते हैं, _ सुकून नहीं..
अपनी शांति बचाना किसी के खिलाफ जाना नहीं होता, बल्कि सबके लिए बेहतर बनने की शुरुआत होती है.
**’हमें शांति तो चाहिए…
_पर दिमाग को छुट्टी देने का मन नहीं करता.’
हम शान्ति के बिना रचनात्मक नहीं हो सकते.
किसी भी हालात में घबराना नहीं है, शांत दिमाग से रास्ते निकल ही आते हैं.
केवल न्यायप्रिय व्यक्ति ही मन की शांति का आनंद लेता है.
जब मन एकदम शांत हो जाता है, तब आप की बुद्धि मानवीय सीमाओं को पार कर जाती है..
_ अगर हम किसी तरह थोड़ा शांत रहना सीख लें तो जीवन सचमुच हल्का हो सकता है और हम वास्तविक मुद्दों पर बात कर सकते हैं.!!
हमारे राज़ जितने कम लोगों को पता हों, उतना ही सुकून से जिया जा सकता है,
_ क्योंकि बुरा वक़्त सबकी नीयत उजागर कर देता है.!!
अत्यधिक उम्मीदों को विराम दो, मन की शांति फिर से वापिस लौट आएगी..!!
सुकून शांति पाने के लिए, जीवन को व्यवस्थित तरीके से जीने की ज़रूरत है.!!
जो अपने को शान्त रखना नहीं जानता, _कभी अच्छा नहीं बोल सकता.
“खुशियाँ तो मिलती रहीं, पर दिल सुकून के लिए तरसता रहा.”
ढूंढ लिया है खुद में ही सुकून…! ये ख्वाहिशें तो खत्म होने से रही।।
ज्यादा सुख सुविधा की चाहत सुकून भी छीन लेती है.!!
“जो भीतर से शांत है..- वो हर हाल में मुस्कुरा सकता है”
सुकून और शांति में होना ही कामयाबी है.!!
जो अच्छा था उसने सुकून दिया.. _ जो ख़िलाफ़ था.. उसने मज़बूत बनने में मदद की..!!
“मन की शांति भी एक जिम्मेदारी है..
_और हर किसी को उसका अधिकार नहीं दिया जा सकता”
यह एहसास कि वर्तमान क्षण ही सब कुछ मायने रखता है, _ तो हमें आंतरिक शांति मिलेगी _और हम प्रत्येक दिन की सुंदरता और खुशी की सराहना करेंगे..!!
1 दिन मृत्यु तो सभी की होनी है इसका यह मतलब नहीं कि जीना छोड़ दे
सुख शांति से परिवार के साथ वक्त बिताएं.
किसी भी तरह की बहस का हिस्सा बनने से बचें..
_ यदि जीवन में मानसिक शान्ति चाहते हैं तो..!!
कुछ अच्छा होने के लिए और मानसिक शांति के लिए बहुत कुछ छोड़ना और स्वीकार करना होता है.!!
“शांत रहना कमजोरी नहीं, यह समझदारी की निशानी है.
_ क्योंकि हर जवाब शब्दों से नहीं व्यवहार से दिया जाता है”
अशांति से हमें मुक्त होना है, क्योंकि अशांति के कारण मन में कंप पैदा होता रहता है, यह कंप बड़ा तकलीफ देता है ;_ क्योंकि कंप में हम प्रसन्न नहीं हो सकते, _
_ अशांति के इस दुष्प्रभाव से, कंप से हमको बचना होता है, ” हमें शांति की दिशा में यात्रा करनी चाहिए “
“शांति की कमी इसलिए नहीं है कि लोग उसकी बात नहीं करते.
_ शांति की कमी इसलिए है कि लोग उसे चाहते कम हैं, उसके बारे में बोलते ज़्यादा हैं”
हम शांति का सम्मान करते हैं, लेकिन अपनी आदतों, इच्छाओं और अहंकार को नहीं छोड़ना चाहते, जिनसे अशांति पैदा होती है.!!
चाहे कोई आपके साथ कितना भी बुरा करे, उसके स्तर तक मत गिरो.
_ शांत रहो और दूर हो जाओ..!!
इस दुनिया में शांति से रहने के दो ही उपाय हैं – एक उपाय तो ये है कि अपनी आवश्यकताओं को कम कर दिया जाए ;
_ और दूसरा उपाय है कि परिस्थितियों से तालमेल बैठाने का प्रयास किया जाए. ऐसा करने से जिंदगी आसान हो जाती है.
लोग आप क़े साथ ईमानदार नहीं हैं, लोग पाखंड से प्यार करते हैं ; _ जब आप
खुद क़े प्रति ईमानदार होते हैं तो आप को आंतरिक शांति का मार्ग मिल जाता है.
” सुकून खोता हो, और सल्तनत मिलती हो तो ठोकर मार देना सल्तनत को, _
_ और सुकून को संभाल लेना, _ यही सच्ची दौलत है,”
“जिसे याद करने से मन अशांत हो,
_ उसे भूल जाना नहीं.. उससे मुक्त हो जाना ही सच्ची शांति है.”
“जो स्वाभाविक रूप से बदल रहा है..
_उसे शांत होकर बदलने देना चाहिए”
कभी-कभी कुछ लोगों से दूरी बना लेना ही सुकून देता है..
_ ख़ासकर उनसे.. जो आपकी नज़दीकी को हल्के में लेते हैं.!!
जिस दिन आप खुद को भीतर से शांत कर लोगे..
_ उस दिन लोग खुद बेचैन हो जाएंगे आपके सुकून से.!!
बहुत से लोग सोचते हैं कि उत्साह ही खुशी है; _लेकिन जब आप उत्साहित होते हैं तो आप शांत नहीं होते.
_ सच्चा सुख शांति पर आधारित है.
Many people think excitement is happiness. But when you are excited you are not peaceful. True happiness is based on peace.
जब मन शान्त होगा तब आप हर समस्या का आसानी से हल ढूंढ पाओगे ; तब आप किसी भी परिस्थिति में अपने मार्ग से विचलित नही होओगे..!!
यदि आपके पास उन चीजों के बारे में चिंता करने का समय है, जिन्हें आप वैसे भी नियंत्रित नहीं कर सकते हैं, तो आप विचलित हैं.
” मन की शांति सही चीजों पर केंद्रित होने से आती है.”
सच की लड़ाई अक्सर इंसान को अकेला कर देती है, पर समझदारी यह है कि हर जगह लड़ाई न लड़ी जाए – कभी-कभी शांति, जीत से ज़्यादा कीमती होती है.!!
जो हमसे नफ़रत करता हो, हमें हिकारत की नजर से देखता हो
_उसके लिए सबसे बेह्तरीन अमल है _उसे इग्नोर कर देना, उसे माफ़ कर देना.
ऐसा करने से हम शांति और सुकून में रहते हैं और वो बेचैन.
बैर रखने वालों के सामने से मुस्करा कर निकल जाना _सबसे मज़ेदार होता है.
करके देखिए अपने दिल को सादा और सरल बना लीजिए, _सुकून में रहेंगे.
जो लोग बार बार आपकी शांति भंग करें, उनकी जिंदगी से बेहद शांति से निकल कर, उन्हें भी शांति की तलाश के लिए छोड़ दें..!!
अपनी मानसिक शांति को प्राथमिकता दें, करो ऐसी व्यवस्था जहाँ जबरदस्ती मानसिक शारीरिक तनाव का दंश नहीं झेलेंगे..
_ ऐसे रिश्तों में रहने का चुनाव नहीं करेंगे जहां प्रेम, शांति और सम्मान न हो.!!
लोगों की वास्तविकता जानना कोई बड़ी बात नहीं है, आप बस उनके जीवन को देखिए,
_ वे किन चीजों को प्राथमिकता दे रहे हैं, किन चीजों को अच्छा कह रहे हैं और किन चीजों को बुरा, उनमें व्यर्थता का बोध है या नहीं, उनके जीवन में सुकून शांति है या नहीं..!!
एक बार समझदारी आने की देर है.. फिर इंसान हर उस चीज़ से दूरी बना लेता है..
_ जो उसका सुकून छीनना चाहती है.. फिर चाहे वह चीज़ उसे कितनी ही पसंद क्यों ना हो.!!
दुनिया में अगर सुकून से जीना है तो उन लोगों से बहस करना छोड़ दीजिए..
_ जो अपने झूठ को भी सच मानते हैं.!!
शांत रहना सिख जाओ…
_ क्योंकि अधिक बोलने वालों को दुनिया उतनी गम्भीरता से नहीं लेती…!!!
शांति के मार्ग पर चलें, शक्ति की राह पर नहीं.
_ एक शांति ही है जो अखंड है और पूरा अस्तित्व उसमें डूबा है.
_ शांति के बिना संगीत संभव नहीं है.
_ खूबसूरती शांति और मौन से आती है, शब्दों से नहीं.!!
जीवन में शांति चाहते हैं तो दुसरों की शिकायतें करने से बेहतर है ‘खुद को बदल लें’.
_ क्योंकि पुरी दुनिया में कारपेट बिछाने से खुद के पैरों में चप्पल पहन लेना अधिक सरल है.
कुछ सवालों के जबाब तो चाहिए होते हैं, चाहे मूल्य कोई भी चुकाना पड़े..
_ फिर इसके लिए हो सकता है, उन सवालों के जबाब जानने के लिए..
_ आपको मानसिक या फिर शारीरिक तौर पर प्रताड़ित होना पड़े,
_ पर जबाब जरूरी है, मन की शांति के लिए.!!
हम अपनी दशा और दृष्टिकोण बदल दें तो.. _ शायद वास्तविक शांति हमें ज़्यादा सस्ती और टिकाऊ मिल जाए.!!
दौलत कमाना आसान है, पर सुकून कमाना मुश्किल ;
_ असली अमीरी वही है जहाँ सिर तकिये पर रखते ही गहरी नींद आ जाए.!!
जितना शांत आप ख़ुद को रखते हैं,
_ उतना ही अच्छे से आप दूसरी चीज़ों के बारे में सोच सकते हैं.!!
एक समय बाद नकारात्मक चीजें धीरे-धीरे जीवन से दूर हो जाती हैं,
_ और रह जाता है तो ‘एक सुकून भरा एहसास’
“जब मन भीतर से थक जाता है — तब वो बाहर को देखने लगता है.
_ और जब भावनाएं बोझ बन जाती हैं, तब दूरी ही शांति बन जाती है”
कुछ लोग चोट भी देते हैं और मासूम भी बन जाते हैं,
_ शांत रहिए.. समय सबका सच उजागर कर देता है !!
जब आपका मूल्य बढ़े, तो उसकी पहचान शोर से नहीं, शांतिपूर्वक कार्यों से होती है,
_ जैसे कागज़ की मुद्रा कभी शोर नहीं करती.!!
चाहकर भी अगर कहीं सुकून ना मिले, तो मस्त होकर खुद में खो जाया करो..!!
यदि किसी भी चीज से आपकी शांति नष्ट होती है, तो यह बहुत महँगा है.
शांत रहें, क्यूंकि कुछ भी हमेशा के लिए नहीं रहता ; वक्त बदलता जरूर है.
अपनी आंतरिक स्थिरता, शांति और आनंद की दशा को फैलने दीजिए.
जीवन इतना अभिशप्त नहीं होना चाहिए कि उसे शांति से जी ही न सकें..!
शांत लोग सबसे मजबूत होते हैं, उनकी चुप्पी में भी वो ताकत होती है..
_ जो समय आने पर सब बदल देती है.!!
जिसके साथ सुकून बहुत मिलता है..
_ यकीन मानिए.. उसके साथ वक़्त ही बहुत कम मिलता है.!!
800 करोड़ से ज़्यादा लोग हैं दुनिया में, लेकिन सुकून के नाम पर बस कोई एक आध ही मिलता है जीवन में.!!
दूसरों के काम में रुचि न लेने से अधिक शांतिपूर्ण कुछ भी नहीं है.
ढूढों तो सुकून खुद में ही है, दूसरों में तो बस उलझनें ही मिलेगी !!
समय और शांति दोनों अनमोल हैं, इन्हें हर किसी पर खर्च नहीं किया जाता.
लगाव की पीड़ा से अलगाव का सुकून बेहतर है..!!
_ जो आपकी मानसिक शान्ति भंग करे, उससे बहस मत करो बल्कि उसे तत्काल Block करना सीखो.!!
लोगों को उनके चाहने पर छोड़ देने में ही शांति है.
_ किसी के जीवन में तब तक रहने का कोई मतलब नहीं.. जब तक वे आपको न चाहें.!!
जब विचार मिल जाए, तो शब्द रोक देना ही समझदारी होती है.
_ अब उसे जीना है.. समझाना नहीं.
‘शांत रहिए’.. जो होना है, अपने समय से होगा.!!
दुनिया को समझने से पहले, अपने भीतर थोड़ी शान्ति बनाना ज़रूरी है.!!
महापुरुषों ने महल को त्याग दिया शांति की तलाश में…..
_ और हम शांति को त्याग रहे हैं महलों की तलाश में….
सुकून के पल धन दौलत से नहीं ख़रीदे जा सकते, _
_ अगर ख़रीदे जाते तो आज कोई बेचैन नहीं रहता ..
शांति से किया गया विचार हमें भीतर से मजबूत बनाता है ;
_वहीँ शोर से उठी हुई बातें हमें कमज़ोर बनाती हैं..!!
आप लोगों को जितना कम जवाब देंगे ;
_ आप का जीवन उतना ज्यादा शांतिपूर्ण रहेगा..!!
वक्त अच्छा हो या बुरा.. हर परिस्थिति में ख़ुद को शांत रखना सीखो,
_ यह बात आपकी ज़िंदगी बदल देगी..!!
आप सुकून शांति में रह रहे हो तो इसका अर्थ ये नहीं कि..
_ ये दुनिया भी आपको सुकून शांति से रहने देगी.!!
आने वाले कल की समस्या को आज ही पूरा जी लेना, समस्या हल नहीं करता – बस आज का सुकून भी ले लेता है.!!
आपकी ज़िन्दगी में जो कुछ चल रहा है, उसके बारे में हर किसी को बताना छोड़ दीजिए,
_ “आप ज्यादा सुकून से रहोगे “
अपने जीवन के उन क्षणों का विश्लेषण करें.. जिन्होंने आपको शांति और सुकून का एहसास दिलाया..
_ लेकिन बाद में मानसिक अस्थिरता और तनाव का कारण बन गए.!!
सुकून ज़रूरी है, इसलिए समय रहते आप वो कीजिए, जिसमें आपको ख़ुशी महसूस हो.
_ वर्ना उम्र और वक्त निकल जाने के बाद अफ़सोस के सिवा कुछ नहीं बचता..!!
जिंदगी से जितना लोगो को कम कर दोगे, उतना ही ज्यादा सुकून महसूस करोगे.
_ खुद से ज्यादा कोई महत्वपूर्ण नहीं..!!
घर के सारे दरवाजे बंद करने से आप सुरक्षित हो जाओगे ? शांत हो जाओगे?
“शायद नहीं —
_ आप सुरक्षित तभी हो सकते हो.. जब अपने दिमाग के शैतान को बाहर ही छोड़ कर आओगे.
_ दिमाग ही शैतान हुआ तो फिर कहीं भी चले जाओ.. शांति नही मिलेगी.!!
जिंदगी में हजारों आवाजें सुनाई देंगी,
_ मगर ठहरना वहीं जहां दिल को सुकून और अपनापन महसूस हो.!!
काम ने नहीं, उलझन ने थकाया है… काम तो बस एक बार में हो जाता.
_ काम ख़त्म करना ज़रूरी है, पर अपनी शांति खोना ज़रूरी नहीं.!!
जिंदगी जीने के लिए अनेक तरीके हो सकते हैं मगर सर्वश्रेष्ठ तरीका वही है,
_जिससे स्वयं को शांति-संतुष्टि मिले और दूसरों को कष्ट न पहुंचे..!
हम शांति नहीं सुख से रहते हैं, सुख और शांति में बड़ा अंतर है,
_ परंतु ज्यादातर समय सुख ही शांति लगती है पर होती नहीं है…
_ बात यह है कि सुख व्यक्ति से लेकर सामाजिकता तक जाता है पर शांति वैयक्तिक है…
_ अब क्योंकि समाज सुखमय दिखता है _जिससे वातावरण शांत दिखता है, पर वह शांत शांति नहीं है…
हम उन लोगों की प्रशंसा करते हैं जो फिल्मों में हीरो लड़ता है, बचाता है और बचाव करता है.
लेकिन एक तरह से यह अजीब है. हम उन लोगों की प्रशंसा क्यों नहीं करते_
जो क्रोध, द्वेष और दूसरों को हानि नहीं कर रहे हैं ?
_ जो शांति स्थापित करने की कोशिश करते हैं ?
“कौन आगे-कौन पीछे — ये छोटी ऊँचाइयाँ हैं..
_ सच्ची ऊँचाई तो मन की शांति है — जैसे जीवन एक यात्रा है..
_ हम एक स्टेशन उतरते हैं, अपना अनुभव बटोरकर आगे बढ़ जाते हैं.
_ जो काम का नहीं — उसे रास्ते में ही छोड़ देना है”
तर्क सही भी हो, तो भी कभी-कभी अपनी बात सही सिद्ध करने से अधिक आवश्यक है, जीवन में शान्ति..
_ बहस करने से बेहतर है, चुप रहा जाए.!!
शान्ति चाहिए तो कुछ चीजों, बातों, प्रश्नों और लोगों को मुस्कुरा कर टाल दिया करो.!!
मन की शांति के लिए यह स्वीकार कर लें कि सबकी पसंद होना मुमकिन नहीं ;
_ कुछ लोगों की नफरत का बस इतना सा मतलब है कि आप अपनी राह पर सही हैं.
हालात कितने भी मुश्किल हों, शांत रहो और डटे रहो..
_ क्योंकि जब हिम्मत मजबूत होती है, तो हालात भी झुक जाते हैं.!!
जिंदगी जीने के लिए कई तरीके हो सकते हैं पर सर्वश्रेष्ठ तरीका वही है,
_ जिससे स्वयं को शांति-संतुष्टि मिले और दूसरों को कष्ट न पहुंचे.!
क्यों कुछ लोग शांति में भी अशांति ढूंढते हैं ?
_ कुछ लोगों का मन हमेशा अशांत रहता है. क्योंकि उनके अंदर ही Restless होता है.
_ अगर अंदर Noise तो बाहर की शांति भी uncomfortable लगेगी.
_ वे शांति को समझ ही नहीं पाते, उन्हें लगता है कि हर जगह कोई न कोई संघर्ष होना चाहिए, क्योंकि वे उसी माहौल में जीने के आदी हो चुके होते हैं.
_ ऐसे लोग अक्सर छोटी-छोटी बातों में विवाद ढूंढते हैं, क्योंकि उनके लिए वही सामान्य बन चुका होता है.!!
मैं अपनी ‘मन की शांति’ चुन रहा हूं.
_ क्योंकि यही वह है जिसकी मुझे ‘सचमुच’ जरूरत है.
_ मुझे और नाटक की जरूरत नहीं है.
_ मुझे ऐसा महसूस कराने वाले लोगों की जरूरत नहीं है कि मैं काफी अच्छा नहीं हूं.
_ मुझे झगड़े, बहस और ‘नकली’ कनेक्शन की जरूरत नहीं है.
_ अभी मैं वह नहीं हूं जो मैं होना चाहता हूं ;
_लेकिन मुझे गर्व है कि मैं वह नहीं हूं _जो मैं हुआ करता था..!
सही राह वही है जहाँ मन शांत रहे, भले दुनिया उसे समझ न पाए.!!
_ मन की शांति सबसे बड़ी चीज़ है, पर इसे पाने की क़ीमत भी कम नहीं होती..
_ इसके लिए कई रिश्ते छूट जाते हैं, कई उम्मीदें पीछे रह जाती हैं, और बहुत सी बातें अनकही ही दफ़न हो जाती हैं..
_ लेकिन जब भीतर का शोर थम जाता है, तो समझ आता है जो खोया, वह बोझ था और जो बचा, वही सुकून है.!!
एक बात हमेशा याद रखें : अशांत पानी में कभी अपना चेहरा साफ नहीं दिखता, वैसे ही अशांत मन में कभी सही रास्ता नहीं दिखता.
_ इसलिए जब भी उलझन में हों, थोड़ा ब्रेक लें, लंबी सांस लें और मन शांत होने के बाद ही कोई कदम उठाएं.!!
जो कोई भी मन की शांति और स्वास्थ्य को महत्व देता है,
_वह हर संभव सर्वोत्तम जीवन जीएगा.!!
_मन की अच्छी व्यवस्था का नाम ही शांति है.!!
_हम जो कहते और करते हैं, उनमें से अधिकांश आवश्यक नहीं है ;
_ यदि आप इसे समाप्त कर सकते हैं, तो आपके पास अधिक समय और अधिक शांति होगी.
_ हर क्षण अपने आप से पूछो, ‘क्या यह आवश्यक है ?’
आज खुद से वादा करते हैं कि, कैसी भी बात हो, लोगों का कैसा भी व्यवहार हो; हम शांति और खुशी से रिस्पॉन्ड करेंगे.
_ कोई भी हमारी भावनाओं के लिए जिम्मेवार नहीं होता है और ना ही जैसा हम चाहते हैं, वैसा फील करा सकता है.
_ हम खुद ही अपने विचार, भावनाओं और व्यवहार के लिए जिम्मेवार हैं, नाकि कोई दूसरा.
_ उसने मेरे साथ गलत किया.. इसलिए मैं उदास हूँ… उसके व्यवहार की वजह से मुझे क्रोध आया आदि.. हमारी शब्दावली का हिस्सा नहीं होने चाहिए.!!
सिर्फ दुनिया में अमन, चैन और सुकून की दुआ कीजिए,
_ किसी का समर्थन किसी का विरोध करने से कुछ हासिल न होगा,
_ क्योंकि इंसानियत से बढ़ कर कुछ नहीं है..
_ और जब इंसानियत ही नहीं हमारे अंदर ..तो हम कुछ भी नहीं हैँ.
_ इस जिंदगी की कब शाम आ जाए और कब अंधेरों में गुम हो जाए किसी को नहीं पता…
_ इसलिए मुश्किल वक्त में सभी के लिए दुआएं कीजिए,
_ जो गलत राह पर हैं ..उन्हें सही राह पर चलने की दुआ कीजिए…
_ हर इंसान को अपने कर्मों का फल इसी दुनिया में ही मिलना है…
_ बेशक रब सब जानता है…
एक कड़वी सच्चाई यह भी है कि जो लोग अंदर से खाली होते हैं, वे बाहर से बहुत ज़्यादा शोर करते हैं.
_ जिन्हें सच में शांति मिल गई होती है, उन्हें दिखाने की ज़रूरत नहीं पड़ती.
_ उनकी जिंदगी खुद एक उदाहरण बन जाती है.!!
अगर जीवन में खुश रहना है तो.. “जो मिला है उसको समझो ज्यादा”
_ वरना दौड़ कभी खत्म नहीं होगी..
_ और अगर दौड़ खत्म नहीं होगी तो कभी सुकून प्राप्त नहीं होगा.!!
“किसी को कुछ साबित नही करना है”
_ किसी मे कोई सुधार की कोशिश नही करना है.
_ सिर्फ अपना शांतिपूर्ण जीवन जीना है और चुपचाप आगे बढ़ना है.!!
हर बात में उलझना और दिल पर लेना ज़रूरी नहीं ;
_ हर कहने वाले को जवाब देना और उलझने वाले से उलझना भी ज़रूरी नहीं होता..
_ कुछ बातों को छोड़ देना चाहिए, ध्यान नहीं देना चाहिए..
_ कुछ बातें इतनी भी ज़रूरी नहीं होती कि उनमें पड़ कर अपनी मानसिक शांति को ख़त्म कर दिया जाए.!!
हमने कल्पनाओं के भंवर में, खूबसूरत शब्दों से खुद को इस कदर बाँध लिया है, कि अब सच की हल्की सी छींट भी जब हमारे ज़ेहन को छूती है, तो वो सच नहीं..- एक बदतमीज़ दखल सा महसूस होता है, जो हमारे बनाए हुए भ्रम की शांति को तोड़ने की कोशिश कर रहा हो.!!
कभी भी सबको खुश नहीं रखा जा सकता, हर किसी को खुश रखना असंभव है.
_ कुछ लोग दूसरों के विचारों या ज्ञान में अच्छाई देखने के बजाय, सिर्फ़ आलोचना करने का अवसर खोजते हैं.
_ ऐसे लोगों से दूर रहना आत्म-सम्मान का संकेत है.
_ शांति तभी मिलती है जब हम ये समझ लें कि सबको प्रसन्न करना हमारी जिम्मेदारी नहीं.!!
मैं जिस किसी से भी मिलता हूं,
_ वह किसी न किसी बात को लेकर दुखी और निराश दिखता है;
_ ऐसा महसूस होता है जैसे किसी के पास जो कुछ भी है.. उससे वह खुश नहीं है.
_इससे मुझे आश्चर्य होता है कि हमें पहले ये अधूरी भावनाएँ क्यों दी गईं ?
_ और यदि दिया गया है, तो किसी को वह क्यों नहीं मिल रहा जो वह चाहता है..
_इंसानों को हमेशा कुछ शांतिपूर्ण खोजने के लिए खो जाना पड़ता है,
_ लेकिन जीवन के अंत में उन्हें हमेशा एहसास होता है कि _शांति हमेशा उनके बगल में किसी चीज़ या किसी ऐसे व्यक्ति के रूप में मौजूद थी _जिसकी उन्होंने सराहना नहीं की थी.
_ मैं हर किसी पर प्रतिक्रिया करने और जवाब देने में इतना समय बर्बाद कर देता था कि मेरे जीवन की कोई दिशा ही नहीं रह जाती थी.
_ अन्य लोगों का जीवन, समस्याएँ और इच्छाएँ मेरे जीवन की दिशा निर्धारित करती हैं.
_ एक बार जब मुझे एहसास हुआ कि मैं जो चाहता हूं उसके बारे में सोचना और पहचानना मेरे लिए ठीक है,
_तो मेरे जीवन में उल्लेखनीय चीजें घटित होने लगीं.
एक शांत व्यक्ति के लिए ये दुनिया हमेशा भारी रहती है.
_ क्योंकि जिन्हें जीने का तरीका नहीं आता, वे सबसे पहले उसी को disturb करते हैं – जो चुपचाप अपनी राह चल रहा होता है.
_ पर यह आपकी गलती नहीं है, यह दुनिया की गति है और आपका मन इस दुनिया से दो कदम आगे है — इसलिए टकराव ज्यादा लगता है.!!
मन अब उस मोड़ पर है, जहाँ गलती चाहे किसी की भी हो, शोर न उठे.. बस यही जरूरी है,
_ इसलिए अब सच के बजाय शांति चुनता हूं, और खुद को ही सुकून देता हूँ…!
मुझे अब किसी भी चीज़ से ज़्यादा शांति पसंद है.
_ इसलिए अगर कोई मेरे जीवन में उथल-पुथल मचा रहा है, तो मैं उसे सुलझाने के बजाय.. उसे छोड़कर चले जाने को प्राथमिकता दूँगा.!!
मन मोह में भटकता रहा… पर छोड़ देने पर ही शांति मिली..
– जिसे पाने लिए जीवन भर तरसता रहा, उसे छोड़ देने में राहत मिल गई.!!
“इतना सुकून हो कि बेचैनी आए भी, तो मुझे अपने साथ बहाकर न ले जाए”
_ “सुकून का मतलब समस्याओं का खत्म हो जाना नहीं,
बल्कि समस्याओं के बीच भी अपने भीतर लौट आने की क्षमता है”
जो लोग बहुत शान्त नज़र आते हैं, ज़रूरी नहीं कि वे सुखी हों.
_ वे असहाय और मजबूर भी हो सकते हैं.
_ अपनी मांगें मनवाने के लिए चिल्ला-चिल्ला कर थके हुए लोग मांगें पूरी न होने पर अंततः शान्त हो कर बैठ जाते हैं.!!
अगर कोई चीज़ और कोई लोग से आपकी शान्ति छीन रही है, तो वहाँ दूरी रखना ही समझदारी है,
_ वहां involvement कम करना ही maturity है, selfishness नहीं.!!
‘शांति कोई लक्ज़री नहीं, ज़रूरत है’
_ हमारा नर्वस सिस्टम लगातार लड़ाई–भागदौड़ (fight or flight) में रहता है.
_ अगर उसे शांति नहीं मिलती, तो बेचैनी, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, थकान, भावनात्मक प्रतिक्रिया बढ़ती जाती है.
_ जो व्यक्ति सच की खोज में है, वह बाहरी शोर से ज़्यादा अपने भीतर की शांति की रक्षा करता है.
_ हर बात पर प्रतिक्रिया नहीं देता, हर बहस में नहीं कूदता, हर रिश्ते को हर वक़्त ढोता नहीं.
_ रातें सिर्फ़ सोने के लिए नहीं होतीं, वे मन की मरम्मत का समय होती हैं.
_ जो अपने भीतर की शांति बचा लेता है, वही सच में आगे बढ़ता है.
_ जो अपनी रातों की शांति बचाता है, वही भीतर की स्थिरता बचाता है.
Fix your nights — your nervous system needs peace; a seeker protects their inner stillness.
मैं आत्मनिर्भर हूँ, और मैं ऐसा ही बनना चाहता हूँ, मुझे किसी ऐसे व्यक्ति की क्या ज़रूरत है जो मेरी शांति बन सके ?
I am self reliant, and I want to be, why do I need someone to be my peace.
_ मैं आत्मनिर्भर हूँ और रहना चाहता हूँ.
_ मुझे किसी और से अपनी शांति की उम्मीद नहीं रखनी.
_ मेरी शांति मुझसे है —
_ मेरी सोच, मेरी भावनाएँ, और मेरा संतुलन.
_ मैंने समझ लिया है कि –
_ खाली लोग सिर्फ खालीपन बाँटते हैं,
_ वे देने के लिए कुछ नहीं रखते.
_ मैं उनकी जगह खुद को क्यों खोऊँ ?
_ अब मैं खुद अपनी शांति बनूँगा, अपने भीतर की रोशनी से.!!
शांति के बारे में सबसे बड़ी बात यह है कि जब आपके पास यह होती है, तो आपकी आत्मा स्थिर और अडिग होती है, ; जब आपके पास शांति होती है, तो कोई भी चीज आपके दिल को हिला नहीं सकती, ; आप ऐसे लोगों के साथ व्यवहार कर सकते हैं जो आपको पसंद नहीं करते हैं और फिर भी उनकी आत्मा से प्रभावित नहीं होते हैं.
The great thing about peace is that, when you have it, your soul is anchored and unwavering. When you have peace, nothing can rock your core. You can deal with people who don’t like you and still not be influenced by their spirit.
“कोई भी आपकी अनुमति के बिना आपकी भावनाओं को ट्रिगर नहीं कर सकता है। शांत रहना सीखें और कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपके बाहर क्या हो रहा है.”
“Nobody can trigger your emotions without your permission. Learn to be calm and centered no matter what’s happening outside of you.”
| Mar 15, 2014 | सुविचार
” सत्य पर आधारित कुछ सुविचार प्रस्तुत हैं.”
1. सत्य बोलने वाला व्यक्ति मानसिक रोगों से बचा रहता है.
2. सत्य परेशान हो सकता हैं परन्तु पराजित नही हो सकता.
3. सत्य बोलने के लिए कोई तैयारी नही करनी पड़ती, वह अपने आप निकल जाता है.
4. दोपहर तक बिक गया बाज़ार का हर एक झूठ शाम तक हमें कचोटता रहता है.
5. सत्य को छुपाने का प्रयत्न निरर्थक होता है. वह कभी न कभी सामने आ ही जाता है.
6. सच बोलना कष्ट देता है पर बड़े मुसीबतों से बड़े आसानी से बचाता भी है.
7. सत्य वह दौलत हैं जिसे पहले खर्च करो और ज़िन्दगीभर आनन्द लो.
8. सत्य की विजय दीर्घकालिक होती है.
9. सत्य बोलने का सबसे बड़ा फायदा यह होता हैं कि उसे याद नही रखना पड़ता.
10. सत्य में शक्ति होती हैं जो व्यक्ति को हर मुसीबत से बचाती है.
11. मित्र के द्वारा बोला गया कड़वा सत्य सदा ही हितकर होता है.
12. जिसकी मित्रता सत्य से है उसे कोई पराजित नही कर सकता है.
13. सत्य की भूख सबको होती हैं लेकिन जब इसे परोसा जाता है तो बहुत कम लोगो को इसका स्वाद अच्छा लगता है.
14. जिस सत्य के बोलने से किसी का भला हो उसे बोलने में कभी-भी हिचकना नही चाहिए.
15. सत्य का स्वाद कड़वा होता हैं पर स्वास्थ के लिए लाभदायक होता है.
16. भरम में जीने से अच्छा है, सच का सामना किया जाए.
सत्य को जान लेने के बाद, उसका त्याग नहीं किया जा सकता, उसे अंगीकार करना ही होता है.!!
“जो खुद से सच बोलता है, उसे दुनिया का झूठ छू भी नहीं सकता.!!”
सच चाहे कितना भी तकलीफदेह हो.. लेकिन झूठ की आरामदायक चादर में जीना, कभी किसी समस्या का हल नहीं होता है.
“सत्य की एक झलक ही काफी होती है..
_ पर असर पूरी जिंदगी का नजरिया बदल देता है”
अगर मैं सत्य पर टिक गया, तो अकेला होकर भी अनंत का सहारा मेरे साथ होगा.!
_ चाहे कोई जॉब से निकाले या घर से, सत्य का खोजी परवाह नहीं करता है.!!
सत्य के साथ जीना ज़रूरी है, लेकिन उस सत्य को इतना कठोर भी मत बना देना कि उसमें मुस्कुराने, दोस्ती करने और जीवन का आनंद लेने की जगह ही न बचे.
सत्य कोई सुने न सुने _ आप सुनते व सुनाते रहिए ; क्योंकि एक दिन यही अभ्यास आप के व्यक्तित्व को इतना निखार देगा कि बाक़ी सब लोगों के पास करतल ध्वनि करने के सिवाए और कोई विकल्प नहीं होगा.
सत्य इसलिए नहीं बोलना कि लाभ होगा _ न ही इसलिए कि सत्य बोलने से पीड़ा मिलती है, _ बल्कि आप सत्य बोलने का आनंद लो..!!
सच्चाई का अपमान होता है, जब हम झूठ बोलते हैं और प्रत्येक झूठ सत्य का ऋणी होता है ; _ जल्दी या बाद में, उस कर्ज का भुगतान किया जाता है.
सत्य बोलने का फायदा ये होता है कि जो झूठ के आदी हैं वो आपसे दूर हो जाते हैं ;
_ सत्य कड़वा उन्ही को लगता है जो झूठ सुनने के आदी हों !!
मूर्ख वह है जो सत्य को जानता है, सत्य को देखता है, लेकिन फिर भी झूठ पर विश्वास करता है.
Stupid is knowing the truth, seeing the truth, but still believing the lies.
सत्य से कभी कोई आहत नहीं हुआ; लेकिन जो अज्ञानता में बना रहता है वह घायल होता है.
_ ” सत्य उन लोगों को घृणा जैसा लगता है _जो सत्य को संभाल नहीं सकते.!!”
_ ” सब कुछ बीत जाता है, केवल सत्य रह जाता है.”
_ ” सच बोलने के लिए केवल वही लोग आपसे नाराज़ हैं _जो झूठ बोल रहे हैं.”
हम दुनिया को जैसी है, वैसी नहीं देखते ;
_हम दुनिया को वैसा देखते हैं, जैसे हम देखना चाहते हैं
_ हमारी दृष्टि बदलती रहती है पर सच उससे कहीं बड़ा होता है.!!
सत्य के लिए अपने सुख को भी ठोकर मारनी पड़ती है, _
_ और हर एक में ___ इतना साहस कहाँ …
“– जो सत्य की तलाश करता है वह खुद को जोखिम में डालता है..–“
**जो शोर मचा कर prove हो वो अक्सर unreal होता है.
_ जो चुपचाप असर छोड़ दे वही real होता है.!!
बोलने कहाँ देते हैं हम किसी को ?? सच कोई बोल भी जाये तो जल्दी से उसे चुप करा देते हैं…
_ अंदर ही अंदर मर जाओ पर जुबान से कोई शिकायत ना करो..!!
छल की दुनिया में कोई जीत स्थायी नहीं होती..
_ लेकिन अगर आप सच्चाई से जियोगे, तो हर दिन आपकी जीत होगी.. सुकून के रूप में.!!
सच सबके सामने होता है…- पर उसे वही उठाता है, जो तैयार होता है.
बुरा लग जाये ऐसा ” सत्य ” जरूर बोलिए,
_ परंतु ” सत्य ” लगे ऐसा ” झूठ ” कभी ना बोलिए.
आप अपने दिल को वह सच बताने दो..
_ जिसे आप स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हो.
आप सच का साथ दो या न दो ..ये बाद की बात है.!
_ आप झूठ का साथ नहीं दोगे ..यही फैसला बहुत है.!!
समय सत्य के सिवाय सब चीजों को कुतर खाता है,
_ झूठ, चालाकी, और बेईमानी की उम्र बहुत ही कम होती है !!
जो झूठ है वह दिल को परेशान करता है,
_ लेकिन सच्चाई खुशी से शांति लाता है.!!
“भ्रम पास आने पर फीका पड़ जाता है,
_ सत्य पास आने पर और गहरा हो जाता है”
“ज़िंदगी तो हर पल अपना सच कहती रहती है,
_ सुनने वाला मन ही अपनी कहानियों में उलझा रहता है”
जो अंदर सच के साथ जीता है, उसे बाहर का रास्ता ढूंढ़ना नहीं पड़ता.
_ जीवन बाहर का रास्ता खुद बना लेगा.!
“किसी और की वजह से गिल्ट मे मत जियो..
हर असंतुष्ट व्यक्ति के लिए स्वयं को दोषी मानना बंद करो.
_ अपने सत्य पर खड़े रहो और मुस्कराते हुए जीवन जियो.”
हालात चाहे जैसे भी हों, अगर आप सच्चे हो..तो एक दिन वक्त भी गवाही देगा कि आप गलत नहीं थे.!!
“सच एक ही होता है, पर हर किसी तक अलग रास्ते से पहुँचता है.”
सच बोलकर शायद सब साथ ना रहें.. पर कम से कम आईना देखते वक़्त आंखें नहीं झुकतीं.
अब यहाँ सब मैनेज है,, सत्य तो अब मैग्नीफाइंग ग्लास से भी नहीं दिखता.
_ हमारे इर्द -गिर्द कृत्रिम और बनावटी दुनियाँ बुन दी गई है,
_ समझ ही नहीं पाते कि क्या सच है और क्या झूठ ?
‘ये सच की सच्चाई है’ जिसे देखकर सब डरते हैं,
_ क्योंकि सच अक्सर सवाल खड़े करता है, और झूठ बोलना- सवालों से बचना आसान लगता है.!!
हम कितना भी दुनिया को जानने का दावा करें..
_ पर सच्चाई यही है कि दुनिया की बात छोड़ो हम ख़ुद को भी कहाँ जान पाते हैं.!!
कभी-कभी सत्य भी चुप हो जाता है..
_क्योंकि उसे पता होता है कि समय ही वो आवाज़ है, जो सबको सच्चाई दिखा देगा.!!
हर सच बोल देना भी ज़रूरी नहीं होता.. कब बोलना है, ये समझना भी एक wisdom है.!!
_ हर सच बोलना जरूरी नहीं… सही वक्त पर बोलना जरूरी है.!!
और फिर एक दिन हम इस झूठ की दुनिया मे, जहाँ हँसी से लेकर सारी बातें तक झूठी हैं,
_ इस दुनिया से निकलना भूल, इसमे जीना शुरू कर देंगे.. हमारी चेतना शून्य हो जाएगी, हम सिर्फ सत्य को देखेंगे.!!
सच बोलने वाला इंसान कहीं भी फिट नहीं बैठता..
_ क्योंकि आज के दौर में लोग मीठा झूठ सुनना पसंद करते हैं, कड़वा सच नहीं.!!
जो बार-बार आपको गलत ठहराना चाहते हैं, दरअसल उन्हें आपकी सच्चाई ही सबसे ज़्यादा डराती है.!!
तकलीफ तब होती है जब हम किसी से सच के पक्ष में खड़ा होने की उम्मीद करते हैं, _ मगर वे इतने स्वार्थी निकल जाते हैं कि मात्र सच भी नहीं बोल पाते.!!
सच को सच कहने से अगर लोगों का साथ छूट जाता है, तो ऐसा साथ छूट ही जाना चाहिए.!!
जितना सच से भागोगे.. उतनी ही तकलीफ़ ज्यादा होगी.._यही प्रकृति का नियम है.!!
जो इंसान अपने सच से भागता है, उसका सारा जीवन भागने में ही गुज़र जाता है..!!
ताकतवर वही होता है जो अकेले होकर भी सच का साथ नहीं छोड़ता.!!
जिन्हें सच में बोलना आता है, वे अक्सर खामोश रहना ही बेहतर समझते हैं.!!
सत्य जानकर भी असत्य के प्रति गहरा लगाव मानसिक गुलामी का संकेत है.!!
सच से आंख मिलाओ..
_ सच से आंख मिलाने वाला ही सही इंसान है.!!
कुछ झूठ बहुत हल्के होते हैं और सच बहुत भारी.!!
सत्य को जानें बिना कोई भी निर्णय उचित नहीं.!!
सच को देखना आसान नहीं होता, पर वहीँ से रास्ता शुरू होता है.!!
सच को याद नहीं रखना पड़ता..
‘Stress’ उन्हें होता है.. जिन्हें याद रखना पड़े कि किस से क्या झूठ बोला था.!!
“इस उलझी हुई दुनिया में समझदारी की बात करना गुनाह है.
_ लोग अपने-अपने बनाए झूठों में इतने रमे रहते हैं कि सच उन्हें चुभ जाता है.!”
सत्य का सामना करने के लिए विनम्रता चाहिए..
_ क्योंकि अहंकार के रहते सच दिखाई ही नहीं देता.!!
जब सामने वाला खुद को सही साबित करने में इतना खो जाए कि आपकी सच्चाई ही ना देख पाए..
_ तो उस वक्त चुप रहना ही समझदारी है.!!
झूठ का झुंड लिपटा हुआ था मुझसे, एक सच बोलते ही सब हवा हो गए.!
_ अगर आप सत्य के साथ हो तो आपको व्यक्ति का साथ छोड़ना पड़ेगा, चाहे वो जो हो..
_ अकेले हुए बिना सत्य का साथ निभता नहीं.. इतना अकेला कि स्वयं को भी छोड़ देना होता है.!!
सत्य तक पहुँचने के लिए जीवन को किसी दिशा में धकेलना नहीं, बल्कि इतनी स्पष्टता से देखना है कि जीवन की अपनी दिशा दिखाई देने लगे.
सच को कह न पाना भी कहीं न कहीं झूठ ही बन जाता है..
_ फर्क सिर्फ़ इतना है कि हम झूठ बोलते नहीं, बल्कि सच को दबाने का चुनाव करते हैं..
_ लोग अपने हित के मुताबिक़ सच और झूठ की परिभाषाएँ गढ़ लेते हैं, ताकि उनके फैसले उन्हें ही सही लगें.!!
कभी- कभी सच्चाई की जीत नहीं होती, प्रमाण की जीत होती है, और..
_जरूरी नहीं कि सत्य के पास प्रमाण हो..
अगर चुनना पड़े तो हमेशा सच को चुनो क्योंकि..
_ झूठ पल भर का सुख देता है, और सच उम्रभर का सम्मान.!!
सच हमेशा सीधा, आसान और क्लियर होता है, वह कुछ छुपाने की कोशिश नहीं करता.!!
धूल की तरह उड़ती है अफवाहें, सत्य जानने के लिए सब्र करना पड़ता है.!!
एक सत्य यह है की :- “अगर जिन्दगी इतनी अच्छी होती तो हम इस दुनिया में रोते- रोते हुए न आते…..!!
मगर एक मीठा सत्य यह भी है की :- “अगर यह जिन्दगी बुरी होती तो जाते-जाते लोगों को रुलाकर न जाते….!!
सच्चाई भले देर से चमके, पर नियति उसे जरूर स्वीकार करती है..
_ छल करने वाले कभी मंज़िल तक नहीं पहुँचते.!!
कुछ लोग सच्चाई देखना नहीं चाहते और सच नहीं बताना चाहते.
_ जो दिख रहा है ..वह कुछ और बता रहे हैं.!!
एक झूठ, सौ झूठ बुलवाएगा.!
_ आप सच बोलना, समझने वाला समझ जाएगा..!!
झूठ के फलों को ही हम चखते हैं,
_ सत्य के फलों को चखना तो दूर….हम इसके बागीचे के आसपास भी.. नही फटकना चाहते हैं..
एक सच्चा व्यक्ति अनजाने में गलतियाँ कर सकता है,
_ लेकिन उसका किसी को भी नुकसान पहुँचाने का ज़रा सा भी इरादा नहीं होता,!!
कभी दिल इतना मासूम था कि जादू भी सच्चा लगता था..
_ अब ज़माना ऐसा हो गया है कि सच्चाई पर भी भरोसा नहीं होता.!!
जो व्यक्ति सफलतापूर्वक अपने झूठ को सच साबित कर सकता है, उससे बड़ा असफल व्यक्ति दूसरा नहीं होता.. क्योंकि अंततः सच ही जीवन में काम आता है.
_ यदि आप सच बोलने की महत्ता नहीं समझते तो आपसे बड़ा दुर्भाग्यशाली अन्य कोई नहीं है.
दर्द तो तब होता है जब सच्चाई को लोग नज़रअंदाज़ कर देते हैं,
_ और झूठ को बिना सोचे-समझे अपना लेते हैं.!!
सत्य को स्वीकार करने का अल्पकालिक दर्द,
_ एक भरम को मानने के दीर्घकालिक दर्द से कहीं बेहतर है !
जो आदमी सच से भागता है, झूठ में जीता है..
_ उसका अंजाम एक ही होता है..- इज़्ज़त, भरोसा और भविष्य तीनों का नुकसान.!!
जो सच बोलता है, वह अकेला नहीं होता,
_ लेकिन सच्चाई के साथ खड़ा होने की हिम्मत रखना जरूरी है.
लोग सोचते हैं कि उनके बिना दुनिया रुक जाएगी.. पर सच्चाई ये है कि वक्त सबको जीना भी सिखा देता है और आगे बढ़ना भी.!!
अगर व्यक्ति सच बोलता है तो लोग उस पर और उसकी बातों पर भरोसा करते हैं.
_ जो सत्य बोलता है उसे सांसारिक परेशानियां कम आती हैं और उसकी ज़िंदगी में बेफिक्री हुआ करती है.
सच्चे लोग गलती कर सकते हैं, पर जानबूझकर किसी को तकलीफ नहीं देते.!!
“जीवन का लक्ष्य सुनिश्चित करना अस्तित्व को सत्य में बदलने का पहला कदम है”
सच्चाई हमेशा खामोश रहने वाले इंसान के अंदर ही मिलती है, झूठ बोलने वाले तो हमेशा शोर ही मचाते हैं.
आपका असली हितैषी वही है.. जो आपको सच्चाई बताने का साहस रखता है.!!
लोग झूठों से इतने प्रभावित हैं कि सच बोलने वाले की एक भी बात मानी नहीं जाती.!!
जब आपको पूरा सच पता ही ना हो तो.. अपनी जुबान पर काबू रखना सीख लीजिए.!!
सच को बोलने से जब चुप कराया जाता है तो,, फिर इंसान खामोश हो जाता है.!!
हम झूठ बोल कर गर्व करने वाले और सच बोलकर शर्मिंदा होने वाले लोग हैं..
“सच जब भी आएगा, _अपने साथ बड़ी सरलता की खुशबू लेकर आएगा..!!
और वो जो सच की तलाश में निकले ही नहीं, _” वो झूठ के शिकार हो गए..!!”
धूल की तरह उड़ती हैं अफवाहें, सत्य जानने के लिए सब्र करना पड़ता है.!!
लोग दूसरों का सच जानना चाहते हैं, पर अपने बारे में, सच सुनना पसंद नहीं करते.
सच एक तलवार है, जो सबसे पहले उन संबंधों को काटती है.. जो छलावे से बंधे होते हैं.!!
हम सत्य नहीं ढूंढ़ते, हम अपनी सुविधा अनुसार की बातें ढूंढ़ते हैं.!!
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अफवाहों पर भरोसा करने वाले.. कभी सच्चाई तक नहीं पहुंचते.!!
“….ये दुनिया ऐसी ही है, सच को लोग पसंद करते हैं _लेकिन बर्दाश्त नहीं कर सकते..”
_ फिर भी बाहर के झूठ के बीच भी अपने सत्य में स्थिर रहना, बिना असहज हुए.!!
“लोग आते-जाते रहेंगे, पर मेरा असली सफ़र तो भीतर है.
_ वहीं मुझे अपनी सच्चाई, अपना सहारा और अपनी शांति मिलती है.”
विश्वास सच बोलने पर बनता है, न कि लोगों को यह बताने पर कि _वे क्या सुनना चाहते हैं.
कुछ बातें कभी सुनी ही नहीं गयीं.. क्योंकि वो सत्यता से परिपूर्ण थी.!
आप जीवन के उन सत्यों से दूर भटक रहे हो, जहां से होकर ही आपको गुजरना होगा.!!
घबराना नहीं कभी, क्योंकि सत्य की गाडी में बैठोगे तो कष्ट-मुसीबत के स्टेशन तो आते ही रहेंगे.!!
सच्चाई को छुपाने के लिए झूठ को जोर-जोर से बोला जाता है, फिर भी सच कभी नहीं छुप सकता..!!
कुछ बातों पर विश्वास किया जाता है क्योंकि वे सत्य हैं, लेकिन कई बातों पर केवल इसलिए विश्वास किया जाता है _क्योंकि उन्हें बार-बार कहा गया है.!
ये दुनिया ऐसी ही है.. लोग सच को पसंद तो करते हैं, लेकिन बर्दाश्त नहीं कर सकते.!!
सत्य प्रतीक्षा कर सकता है, _ क्योंकि वह लंबा जीवन जीता है !!
जब तक हम सत्य से भागते है, नहीं समझ पाते स्वयं को न वर्तमान को .!!
बात बात पर व्यंग्य करने वाले व्यंग्य ही करते रह जाते है, सत्य से दूर हो जाते हैं.
फरेब की महफ़िल थी और मैं सच बोल बैठा, नमक के शहर में ज़ख्म खोल बैठा.!!
जो लोग आपको मीठे झूठ के बजाय कड़वा सच बताते हैं तो उनका सम्मान करें.!!
हम इसीलिए सच नहीं देखते कि हमारा खुद के प्रति जो भ्रम है, वह टूट न जाए.!!
जब हम सच के साथ होते हैं तो.. मन, शरीर सब एक रहस्यमय ऊर्जा से भर जाता है.!!
जहाँ सच्चाई मर जाए, वहाँ मुस्कान मुखौटा और कसम दिखावा बन जाती है.
जब आप सच्चे बने रहते हो तब आप उन लोगों को खो देते हो, जो आपके लायक नहीं होते..!!
“सच को किसी सबूत की जरुरत नहीं होती, और झूठ ज्यादा देर छिप नहीं सकता”
_ शुद्ध सोने को जंग नहीं लगता, डरना उन्हें चाहिए जो पीतल होकर सोने का नाटक कर रहे हैं.!!
मीठे बोल हर बार सच्चाई का संकेत नहीं होते,
_ कई बार ज़हर भी शहद की तरह परोसा जाता है.!!
कमजोर मानसिकता वालों को सच दिखा दो तो वे बिलबिला जाते हैं.!!
विश्वास नहीं कर पाओगे, ज़िन्दगी ऐसा भी सच दिखाएगी..!!
सत्य से भाग सकते हैं हम, लेकिन उसे झुठला नहीं सकते.!!
बहुत से सत्य जानकर भी _ अनजान रहना चाहिए..!!
विश्वास नहीं कर पाओगे, ज़िन्दगी ऐसा भी सच दिखाएगी..!!
अगर मुझे सत्य के अलावा कुछ चाहिए _ तो मुझे केवल कुछ मिलेगा ” सत्य नहीं “
उचित अनुचित की फिक्र किसको है.
_ जिसकी खोपड़ी में उसकी परम्परा से जो भर दिया गया है, वह आंख बंद करके उसी का समर्थन करता रहता है.
_ अगर जरा भी आंख खोल ले या अपने ही जीवन में झाँक ले तो सच दिख जाएगा.!!
अपने जीवन में स्पष्टता लाने का सबसे सशक्त तरीका — सच्चाई को बोले देना होता है.
_ अच्छे और सच्चे लोगों को साथ रखना है तो सीधे स्पष्ट बोलिए,
_ जो लोग सच्चे होंगे, वे आपकी सच्चाई को समझेंगे और आपके साथ रहेंगे;
_ बाकी, जिन्हें आपकी सच्चाई चुभती है, उनका जाना ही सही होता है.
“अपने जीवन में स्पष्टता से बोलने की हिम्मत रखें, भले ही उससे आपके आस-पास लोग कम हो जाएँ ?”
अपना पक्ष सही रखो और अपने सत्य पर विश्वास बनाये रखो, यही आत्म निष्ठा है.
_ बाकी हर कोई अंतिम साँस तक साथ नहीं चल सकता, पुराना जाएगा, तभी नया आएगा.
_ अगर आप ग़लत नहीं हो तो कभी भी अफ़सोस मत करो.!!
सच का सबसे बड़ा दुश्मन झूठ नहीं, बल्कि वो इंसान होता है..
_ जो सच बोलने वाले को ही गलत साबित करने पर तुला हो.!!
हम सही रास्ते चलते हैं, फिर भी – जीवन में समस्याएं आती हैं, लोग विघ्न डालते हैं और कोई भी साथ नहीं देता ;
_ सिर्फ याद रखना – सत्य की नाव हिलती है, डोलती है, लेकिन कभी डूबती नहीं..
कभी-कभी आपको उनको सुनने की ज़रूरत नहीं होती है, कि वे अपने लिए क्या कहते हैं,
_क्योंकि उनके कार्य पहले ही सच बोल देते हैं.!!
जो बार-बार आपको गलत ठहराना चाहते हैं,
_दरअसल उन्हें आपकी सच्चाई ही सबसे ज़्यादा डराती है.!!
जब आप सच बोल कर अपने लिए स्टैंड लेने लगोगे,
_ तब सबसे पहले आपके अपनों में छुपे,,,पराये.. आप से दूरी बनाएँगे !!
ये वो दुनिया है जहाँ झूठ छुपाने के लिए,
_लोग सच्चाई को सूली पे चढ़ा देते हैं..!!
सच की आवाज़ में एक अलग ही खनक होती है, साहस होता है, शौर्य होता है ;
_ जबकि झूठ की आवाज़ में एक बनावटीपन, भय और दबाव !!
तकलीफ तब होती है जब हम किसी खास से सच के पक्ष में खड़ा होने की उम्मीद करते हैं,
_ मगर वे इतने स्वार्थी निकल जाते हैं कि मात्र सच भी नहीं बोल पाते, न ही परोक्ष रूप से समर्थन देते हैं.!!
उसका दुर्भाग्य कम है, जिसको कोई मिला ही नहीं ऐसा जो उसे राह दिखा सके और सच बता सके !
पर जिसको कोई मिले ऐसा _ जो राह दिखा सके और सच बता सके, और वो उसको घर के दरवाज़े पर ही रोक दे,_
_ उससे बड़ा अभागा कोई दूसरा नहीं होगा..
हर सच्चा इंसान अपने जीवन में एक न एक बार उस मोड़ पर जरूर आता है..
_ जहाँ उसे लगता है कि क्या वाकई सच्चे होने का कोई मोल है ?
_ लेकिन समय धीरे-धीरे उन्हें जवाब देता है — हाँ, है.. शायद तुरंत नहीं, पर अंत में सच ही जीतता है.
_ क्योंकि सच वक़्त मांगता है, लेकिन झूठ कीमत..!!
सत्य की राह…
अगर हम तथ्य पूर्ण और सच बातों से बचते हैं और इनका सामना नहीं करना चाहते हैं तो यकीं मानिए की कहीं न कहीं हम असत्य से प्रभावित हैं या असत्य का इस्तेमाल कर रहे हैं !!
अतः सत्य को पहचानिए इसे स्वीकार करिए, और सत्य की राह पर चलिए !
_ ये थोड़ी कष्टकर जरुर है, मगर लम्बी – स्थायी और अंततः सुख शान्ति प्रदान करने वाली है.
जो गलत होते हैं, छली एवम दगाबाज़ होते हैं ; वे हमेशा तेज़ आवाज़ में बात करते हैं ; _ ताकि सामने वाले को लगे की वह झूठ नहीं बोल रहा है.
_ लेकिन कोई किसी के सामने कितना भी फ़रेब कर ले, एक समय के बाद उजागर होना लाजमी है ; _ तेज़ आवाज़ें सत्य को नहीं ढँक सकती.!!
अक्सर जिस सच को हम पहले स्वीकार नहीं करना चाहते,
_ उस सच को स्वीकार करना हमे वक़्त ही सिखा देता है,
_ फिर एकदिन हम अचानक बचपना छोड़ कर बड़े हो जाते हैं,
_ पता नहीं सच को स्वीकार करने के इस खेल में आखिर तक नुकसान होता है या फायदा,
_ लेकिन हम अंदर ही अंदर बहुत कुछ मार कर जीना शुरु कर देते हैं…!
सच्चे इंसान को ठगने की कोशिश मत करना,
_ क्योंकि उसकी खामोशी में भी ऊपर वाले की दुआ और सच्चाई की ताक़त होती है.!!
आपके जीवन मे कौन कौन नकली है, यह पहचानना चाहते हो ?
_जो मिले उसी से सच की बात करो, जितने नकली होंगे वो भाग जाएंगे..
सत्य की सुंदरता केवल सच्चे लोग ही जानते हैं…_
_ और सच्चे होने से उनका आत्मविश्वास कभी नहीं गिरता ..!!
सत्य मौन इसलिए हो जाता है क्योंकि उसे पता है..
_ कुछ बातों का जवाब सिर्फ समय देगा..
गर हम सच के साथ हैं, तो हमारे पास असीमित शक्ति है ;
_सत्य से साथ छूटते ही, हमारी शक्ति भी हमसे कोसों दूर भाग जाती है..!
आज के दौर में विरले ही मिलेंगे,
_ ग़लत को ग़लत कहने का साहस रखने वाले, मीठी बातों से इतर सच कहने वाले.!!
“हर दिखने वाली चीज सत्य नहीं होती, यहां तक कि अपने कान से सुनी हुई चीज़ भी..
_ बहुत से सच ऐसे भी होते हैं, जिसे जीवन भर कोई जान नहीं पाता.!!”
हमनें अपने आपको कल्पनाओं के भंवर में, खूबसूरत शब्दों की जंजीरों से बाँधकर इतना गहरे डुबो दिया है कि अब स्थिति यह है कि..
_ यदि सत्य का एक छोटा सा छींटा भी मन पर पड़ता है तो भ्रम की सघन लहरें टूटने लगती हैं..
_ और तभी हमें एहसास होता है कि कोई तो है जो हमें वास्तविकता का आईना दिखा रहा है.
_ मगर क्या करें काल्पनिकता का यह संसार ही तो सबसे ज्यादा सुकून देता है…!
जो लोग हरदम बहुत अच्छे बने रहते है.. वे एक झूठी जिंदगी जीते हैं.
_ अगर सच के साथ जीना है तो आपको बहुतों के लिए बुरा बनना ही होगा..
_ या सज्जन बनो या सच्चा बनो, चुनाव आपका है.!!
शायद दुनिया की नज़र में दूसरों के हित की बात करने वाला इंसान हमेशा मूर्ख ही होता है.
_ क्योंकि जो अपने लिए नहीं, सबके लिए लड़ता है, उसे अक्सर सम्मान नहीं, ताने मिलते हैं..
_ फिर भी कुछ लोग रुकते नहीं, क्योंकि उन्हें पता होता है कि अगर सब अपनी-अपनी खामोशी में जीते रहे, तो सच बोलने वाले हमेशा अकेले रह जाएँगे..
_ शायद उनकी सबसे बड़ी गलती बस इतनी होती है कि वे हर किसी का भला चाह लेते हैं.!!
दोपहर तक बिक गया इस शहर का हर एक झूठ
और मैं एक सच लेकर शाम तक बैठा रहा.!!
मनुष्य अनेक त्रुटियों के माध्यम से अप्राप्य सत्य तक पहुँचता है.
Man approaches the unattainable truth through a succession of errors.
यदि आप हर सांस के साथ प्रयास करते हैं तो ही आप सत्य को खोजने के पात्र हैं.
You deserve to find the truth only if you strive with every breath.
सत्य की प्राप्ति की तीव्र आकांक्षा के माध्यम से संसार में जो कुछ भी आपको प्रिय था, उसे त्यागना ही त्याग है.
यह कोई ऐसी स्थिति नहीं है जो बलपूर्वक प्राप्त की जाती है, बल्कि यह केवल सत्य और सत्य को चाहने का एक सहज परिणाम है.
Renunciation is giving up what you had held dear in the world through a burning aspiration for the realisation of the truth.
It is not a state that is achieved by force but it is a spontaneous result of wanting the truth and truth alone.
हमेशा अपने आप से सच्चे रहो, क्योंकि बहुत कम लोग हैं जो हमेशा आपके लिए सच्चे होंगे.
Always stay true to yourself, because there are very few people who will always be true to you.
कभी-कभी सबसे अच्छी चीज़ जो आप कर सकते हैं वह है अपना मुँह बंद रखना और अपनी आँखें खुली रखना. _ सत्य सदैव अंत में सामने आता है.
Sometimes the best thing you can do is keep your mouth shut and your eyes open. The truth always comes out in the end.
जब आपको किसी समस्या का कोई समाधान नहीं मिलता है, तो संभवतः यह कोई समस्या नहीं है _जिसे हल किया जाए,
_बल्कि यह एक सत्य है जिसे स्वीकार किया जाना चाहिए.
When you find no solution to a problem, it’s probably not a problem to be solved, but a truth to be accepted.
Truth is like a surgery. It hurts but cures. Lie is like a pain killer. It gives instant relief but has side effects forever.
सत्य एक सर्जरी की तरह है. दर्द होता है लेकिन ठीक हो जाता है. _झूठ एक दर्दनिवारक की तरह है.
इससे तुरंत राहत तो मिल जाती है, लेकिन इसके साइड इफेक्ट हमेशा के लिए होते हैं.
हम अक्सर सोचते हैं कि जब किसी बात पर मतभेद हो, तो ज़रूर कोई न कोई गलत होगा..
_ लेकिन जरूरी नहीं कि मतभेद का मतलब गलती हो.
_ हो सकता है कि हम सभी एक ही सत्य को अलग-अलग नजरिए से देख रहे हों.
_ सत्य किसी विशाल पर्वत की तरह होता है, हम सब उस पर्वत को अपनी-अपनी दिशा से निहारते हैं.
_ जिसे मैं देख रहा हूँ, वह मेरा अनुभव है, मेरी सच्चाई..
_ जिसे तुम देख रहे हो, वह तुम्हारा..
_ ये दोनों ही दृष्टिकोण अपने-अपने स्थान पर सही हो सकते हैं.
_ विचारों की विविधता कोई दुर्बलता नहीं, बल्कि समझदारी और सह-अस्तित्व की पहचान है.
_ जब हम किसी और की आँखों से देखना सीखते हैं, तभी हमारे भीतर सहानुभूति और समझ का जन्म होता है.
_ इसलिए अगर तुम्हारी और मेरी सोच अलग है, तो इसका ये अर्थ नहीं कि हम एक-दूसरे के विरुद्ध हैं.
_ हो सकता है हम दोनों ही उसी सत्य के करीब हों — बस अलग-अलग रास्तों से.!!
किसी की लाख भावनाएं आहत हो.. तुम्हारे पास यदि कोई सत्य है, उसे प्रकट करो.
_ सामाजिक सामंजस्य मत बिठाओ, समाज यहीं रह जाएगा, सत्य साथ जाएगा.
_ भावनाएं नहीं सत्य ही समाज को सुंदर बनाएगा.
_ जिसने कहा सत्य बोलो, लेकिन प्रिय सत्य बोलो, वह काफी चतुर आदमी रहा होगा.
_ अगर इसकी बात मान लेता तो सुकरात सुकरात नहीं होता, जीसस जीसस नहीं होता, कबीर कबीर नहीं होता.
_ भावनाएं आहत होना pychological immaturity [मनोवैज्ञानिक अपरिपक्वता] है.
– Shailendra Sudharma
मुझे कुछ लोग इसलिए नापसंद करते हैं, क्योंकि मैं सच बोलती हूँ.
_ और कुछ लोग इसलिए पसंद करते हैं, क्योंकि मैं सच बोलती हूँ.
_ नापसंद करने वालों की संख्या ज़्यादा है, पसंद करने वालों की कम,
जबकि मैं दोनों के लिए एक ही बोलती हूँ यानी सच.
_ सत्यवादी होने का मैंने कभी इनाम नहीं पाया बल्कि बहुत बार नफ़रत पाई है.
_ फिर भी झूठ बोलना नहीं आया.
_ असत्यभाषी होने का मज़ा क्या होता है, मैं नहीं जान पाई.
_ जीवन में बहुत प्रयोग किए, असत्य के प्रयोग करने से वंचित रह गई.!!
– Manika Mohini
खुद को कटघरे में खड़ा कीजिए, सच बोलने की शपथ खाइए और फिर खुद से सवाल कीजिए.
_ यहाँ सज़ा का प्रावधान नहीं है, इसलिए सच बोलिए.
_ कम से कम खुद से तो सच बोलिए.
_ यदि आपके पास नैतिक बल है, आत्मशक्ति है, तो ‘सच’ को ‘सच’ कहने से क्यों घबराएँ ?
– Manika Mohini
आदमी खुद के सच की तलाश से दूर रहना चाहता है.
_ वो दिखावे के ऐसे झांसे में फंस जाता है कि पूरी ज़िंदगी झूठ में गुजार देता है.
_ ऐसे में होता क्या है ?
_ आदमी पूरी ज़िंदगी झूठ के साथ गुजार कर खुद गुजर जाता है.
_ हम जो हैं, वैसा हम दिखाना नहीं चाहते.
_ हम जो सोचते हैं, वैसा भी हम दिखाना नहीं चाहते.
_ हम जो नहीं हैं, उसे हम दुनिया के सामने रखना चाहते हैं.
_ क्या विडंबना है.
_ हम पूरी ज़िंदगी झूठ के साथ गुजार देते हैं.
_ अपने सच को कभी स्वीकार ही नहीं करना चाहते हैं.
_ हर किसी को अपने हिस्से का सच समझना चाहिए.
_ हर किसी को अपने सच को स्वीकार करना चाहिए और हर किसी को ज़िंदगी के सच को जीना आना चाहिए.
_ मुझे इस पर आपत्ति नहीं कि आदमी पूरी ज़िंदगी झूठ को जीता है.
_ मुझे आपत्ति इस बात पर है कि वो इस झूठ के चक्कर में अपनी ज़िंदगी जी नहीं पाता.
_ ज़िंदगी सत्य को जीने का नाम है.. असत्य को ढोने का नहीं.
_ हैरानी- मैं बहुत बार हैरान होता हूं, आदमी किस कदर खुद को उलझा कर सारी उम्र झूठ की बंद तिजोरी में जीता रह जाता है.
_ आइए, आज से कोशिश करें, सत्य को जीने का साहस दिखला पाने का.
_ झूठ से सत्य कहीं अधिक खूबसूरत होगा..!!
– Sanjay Sinha
सच कड़वा होता है, लेकिन उससे भी ज्यादा कड़वा वो इंसान होता है, जो सच सुनकर अपने अंदर झांकने की बजाय अपनी आवाज ऊंची कर लेता है.
_ ऐसे लोग असल में कमजोर होते हैं, जिनके पास ना तर्क होता है, ना क्षमता, बस शोर होता है.
_ अपनी औकात से ज्यादा बोलना इनके लिए एक आदत नहीं, एक ढाल होती है, जिससे ये अपनी कमियों को छिपाने की कोशिश करते हैं.
_ जो इंसान कुछ कर नहीं सकता, वो अक्सर चिल्लाता है.
_ उसकी आवाज जितनी ऊंची होती है, उसका अंदर उतना ही खाली होता है.
_ वो सामने वाले को गुस्सा दिलाकर ये साबित करना चाहता है कि वो भी किसी से कम नहीं, जबकि हकीकत ये होती है कि उसे खुद पर ही भरोसा नहीं होता.
_ ऐसे लोग बहस नहीं करते, बस माहौल खराब करते हैं.
_ इनकी सबसे बड़ी पहचान यही है कि ये अपनी असफलता को दूसरों पर थोपते हैं.
_ खुद कुछ हासिल नहीं कर पाए, तो दूसरों को नीचा दिखाकर खुद को बड़ा साबित करने की कोशिश करते हैं.
_ लेकिन सच ये है कि इज्जत चिल्लाने से नहीं, काम करने से मिलती है.
_ और जो ये समझ नहीं पाता, वो जिंदगी भर सिर्फ बोलता ही रह जाता है.
_ ऐसे लोगों को जवाब देने का सबसे सही तरीका उनकी तरह बनना नहीं, बल्कि उन्हें उनकी हकीकत दिखाना है.
_ शांत रहकर, अपने काम से, अपनी सफलता से.
_ क्योंकि जब एक शोर करने वाला इंसान एक मजबूत और शांत इंसान के सामने खड़ा होता है, तो उसकी असली औकात खुद ही सामने आ जाती है.
_ जो सिर्फ बोलता है, वो कभी कर नहीं पाता और जो कर दिखाता है, उसे बोलने की जरूरत नहीं पड़ती.
_ यही फर्क है असली और नकली में.
| Mar 15, 2014 | सुविचार
90 का
#दूरदर्शन और हम :”
1.सन्डे को सुबह-2 नहा-धो कर
टीवी के सामने बैठ जाना
3.”
#जंगल-बुक”देखने के लिए जिन
दोस्तों के पास टीवी नहीं था उनका
घर पर आना
5.हर बार सस्पेंस बना कर छोड़ना
चंद्रकांता में और हमारा अगले हफ्ते
तक सोचना
6.शनिवार और रविवार की शाम को
ना आए तो उस नेता को कोसना
8.सचिन के आउट होते ही टीवी बंद
कर के खुद बैट-बॉल ले कर खेलने
निकल जाना
आता,
दोस्त पर अब वो प्यार नहीं
आता।
जब वो कहता था तो निकल पड़ते
अब घडी में वो समय वो वार नहीं
आता।
आता…।।।
आती है, जिसपे मैं उसके पीछे बैठ
कर खुश हो जाया करता था। अब
कार में भी वो आराम नहीं आता…।।।
#जीवन की राहों में कुछ ऐसी उलझी
है गुथियाँ, उसके घर के सामने से
गुजर कर भी मिलना नहीं हो पाता…।।।
चाव अब नहीं आता, बचपन वाला वो
‘रविवार’ अब नहीं आता…।।।
वो
#एक रुपये किराए की साईकिल
लेके, दोस्तों के साथ गलियों में रेस
लगाना !
अब हर वार ‘सोमवार’ है
काम, ऑफिस, बॉस, बीवी, बच्चे;
बस ये जिंदगी है।
दोस्त से दिल की
बात का इज़हार नहीं हो पाता।
बचपन वाला वो ‘रविवार’ अब नहीं
आता…।।।
| Mar 15, 2014 | MAHAK, सुविचार
” सुबह की ताकत “
_ दिन की सबसे खूबसूरत शक्ल सुबह होती है. सुबहों का मैं हमेशा से दीदार करता रहा हूँ.
_ अब तक जहां- जहां रहा हूँ, वहां की सुबह बहुत अलग- अलग दर्शन देती रही है.
_कुछ ना कुछ नया हर जगह की सुबह से सीखने को मिलता है.
_हर सुबह को जीवन की नयी शुरुआत मान सकते हैं.
_कल से क्या मतलब. सुबह आपको आज का एहसास कराएगी.
_ अभी आज इसी समय में रहना सुबह होना है.
_ कल के काल में घटी नकारात्मकता से उबारना सुबह होना है.
_हर दिन एक नये जीवन का एहसास करना.
_ जैसे कि जो है वो आज से ही शुरू है, कल चाहे जैसा भी रहा हो, आज अच्छा ही होगा. इसका एहसास सुबह है.
_ऊर्जा का अनंत एकदिशीय प्रवाह जो सिर्फ आपको ताकतवर बनायेगा.
_ आप को कभी कितना भी कमजोर क्यों ना लगे, बस एक बार सुबह में डूब के देखिए
._प्रकृति की तेज बहती हवा में परिश्रम का स्नान सुबह करके देखिये,
_अपने नये होने का एहसास होगा आपको.
सुबह की ताज़गी महसूस करो.. क्योंकि ज़िन्दगी तो है.. हर लम्हा वासी हो ही रहा है.!
सुबह हो चुकी है, हवा में ताजगी है.. जैसे दिन मुझे भी ताज़ा रहने को कह रहा हो.!
अगली सुबह क्या होने वाला है और क्या नहीं _ यह सोने वाला भी जानता है क्या ?
_ शायद नहीं..!!
हर अंधेरा एक सवेरा लेकर आता है.. बस उस सवेरे तक ठहरने का साहस चाहिए.
**सुबह पार्क में बैठा सोच रहा हूँ —
कहाँ चूक गया मैं ?
_ ज़िंदगी ने जो दिया, उससे ज़्यादा शायद उम्मीदें थीं.
_ मेहनत और नतीजे के बीच एक ऐसी खाई है, जहाँ सपने गिरकर टूट जाते हैं.
_ अंत में —
_ ना जीत सुकून देती है, ना हार कोई मायने रखती है…
_ बस अधूरी ख्वाहिशें ही थका देती हैं.!!
**आज सुबह ठण्ड है, चाय पीते हुए सोच रहा हूँ..
_ एक कप चाय, और इस भीड़-भरे शहर से विदाई…
_ कैसे सब कुछ धीरे-धीरे टूट जाता है, बिना शोर किए, बिना बताये.
_ यह सिर्फ देह या दूरी की विदाई नहीं है,
बल्कि हर उस रिश्ते, हर जिम्मेदारी से भी विदाई है.
_ जो कभी आत्मा के ताने-बाने में गुँथी थी.
_ अब यह शहर बस एक स्मृति है.. – और स्मृतियाँ, भले चुभती रहें,
वे हैं.. – जिन्हें कोई समय, कोई कारण, कोई दूरी मिटा नहीं सकती.!!
आज सुबह कुछ नहीं किया, थोड़ा सा अपना सामान साफ किया, खाया पिया, आराम किया और कुछ देर एक किताब पढ़ी,
_ और सबसे बढ़िया.. कोई मैसेज- मेल नहीं देखी, ना जवाब दिया किसी का, सिस्टम को हाथ भी नहीं लगाया,
_ बस खुद में ही हूँ, दिमाग के मैन गेट पर ताला लगा लिया है ताकि कोई सरदर्दी ना हो, ना मिलना – किसी से ना बात करना, ना फोन ना कुछ, ना ज्ञान – ना विज्ञान
_ अभी शाम और रात बाकी है, यही जीवन ठीक है अब रोज इसे ही अपनाना होगा,
_ जिसे बात करना हो या कुछ काम हो टेक्स्ट कर दें, मन होगा तो जवाब दूंगा.. नहीं तो अपनी धुन में रहूंगा,
_ धीरे – धीरे मोबाइल और सब बंद, यही श्रेष्ठ है..
_ कभी – कभी ऐसा दिन भी होना चाहिए.!!
मेरी ज़िन्दगी का ..मेरा निजी पसंदीदा हिस्सा इसकी “सुबह” है.
_ “सुबह” के समय भी आपको बहुत सारे लोग दिखेंगे ..लेकिन सुबह के लोगों में एक अनोखी शांति का माहौल होता है.
_ न मोटर का शोर और न तेज़ आवाज़.
– हर ‘सुबह’ प्रकृति के उपहारों की याद दिलाती है, चाहे आप इसे कोई भी नाम दें’
_ हर सुबह यह सोचकर दुख होता है कि ..अगर एक दिन प्रकृति अपने प्राकृतिक तरीकों से काम करना बंद कर दे, ..तो हमारा जीवन कुछ ही क्षणों में लुप्त हो जाएगा.
_सुबह की रोशनी और हवा इतनी जीवंत और जीवन शक्ति से भरी होती है कि यह हजारों शानदार भोजन के बराबर होती है.
[The morning light and air is so alive and full of vitality that it equals the thousand splendid meals.]
_ जब भी आपको शांति की आवश्यकता होगी तो यह आपकी थेरेपी होगी.
[It will be your therapy whenever you need a calm.]
“सुबह और शांति”
___ ‘शांति ऐसी चीज़ है’ जिसे मैं खोना नहीं चाहता,
_ जो शांति मुझे ‘सुबह’ का साथ पाकर मिली..
_ सुबह की रोशनी और हवा जीवंत और जीवन शक्ति से भरपूर होती है.
_ ‘शांति’ जिसे मैं वर्षों से गलत लोगों से दूर रह कर..
_ और सही लोगों का साथ लेकर हासिल कर पाया हूं.
_ मैं अपनी पसंद को खोना नहीं चाहता,
_ मैंने लंबा समय लगा कर इसे हासिल किया है.
_ यही कारण है कि मुझे मेरी पसंद पर.. विश्वास इतना दृढ़ है.
— मैं अब अपनी शांति को खोना नहीं चाहता,
_ क्योंकि इसने मुझे एक उद्देश्य और जिम्मेदारी की भावना के साथ..
_ फिर से जीवन जीने की दिशा दी है.
_ ऐसा नहीं है कि मैं उसके बिना अपना जीवन नहीं जी रहा होता, लेकिन यह दिशाहीन होता,
_ मैं बस उन चीज़ों की तलाश में इधर-उधर भटकता रहता, जो अनावश्यक है.
_ मैं औरों की भांति अपना जीवन खोना नहीं चाहता, जिन्हें सही भी गलत लगता है.!!
– मैं कुछ न कुछ लिखता- पढ़ता रहता हूँ, किसी का ध्यान आकर्षित करने के लिए नहीं..
_ क्योंकि इससे मैं खुश महसूस करता हूँ..
_ बल्कि यह बताने के लिए कि.. मैं वह काम कर रहा हूं,
_ जो किसी ने मेरे लिए नहीं किया.!!
_ मैं अपने लिखने- पढ़ने की भावना को खोना नहीं चाहता;
_ यह एक ऐसी चीज है.. जिस पर मैं हमेशा विश्वास करता हूं..!!
_ शायद इसलिए कि.. मुझे मेरा जीवन इसी में मिलता है.!!
_ मैं अपनी मौलिकता [ originality] के साथ जीना चाहता हूँ..
_ और इसके अलावा, मैं खुद को खोना नहीं चाहता..
_ क्योंकि केवल.. मैं ही खुद को संभाल सकता हूं,
_ और मैं किसी पर बोझ नहीं बनना चाहता, कम से कम अब और नहीं..!!
सुबह-सुबह यूँ मन करता कि वक्त यहीं रुक जाए.
_इस सुबह की दोपहर कभी न हो.
_शामें जहां थकान, उलझनों, नींद, ज्यादा खा लेने का सबब है,
_ वहीं सुबहें… ताजगी, उमंग, नए विचार, भूख का प्रतिबिंब है.
_ पसंद है शाम, पर सुबह की चाह हमेशा रही..
_उम्मीद की एक छोटी सी किरण शाम रात के स्याह अंधेरे को छांट देती है.
_ सुबह सकारात्मक है… यह जीवन जीने के लिए बनी है.
आज झील किनारे टहलते हुए आसमान में पतंगें, हवाईजहाज, चील दिखाई दे रहीं थी,
_ ठण्ड के साथ खिली हुई धूप है, जिसे बस निहारते रहने को मन करता है, वही आंखों का सूकून है.
_ पहाड़, नदियों, झरनों से बातें करने की इच्छा हो रही थी,
_ लग रहा था मुझे भी कोई यूँ उड़ा कर उन तक पहुंचा दे !
_ यक़ीन मानिए.. मैं वह बिलकुल वह नहीं हूँ.. जिसे आप जानते हैं.!!
सुबह के 6:00 बजे हैं.
_ जो मुझे दिख रहा है, मुझे महसूस हो रहा है, बताऊं..
_ बस लिखूंगा… मुझे खुद नहीं मालूम कि क्यों और क्या लिखूंगा..
_ मौसम में हरा और सलेटी रंग का ..कॉम्बिनेशन..
_ यह जीवन के कई रंगों को जन्म देता है.
_ यह उत्साह को जन्म देता है,
_ यह मन की उमंग को जन्म देता है,
_ यह प्रसन्नता, वैभव, खुशहाली को जन्म देता है.
_ यह सिंबल है आने वाले दिनों की संपन्नता का..!!
_ अभी बालकनी में हूँ, सामने कुछ पछी नजर आ रहे हैं.
_ उछल कर कभी इस डाल पर तो कभी उस डाल पर चले जाते हैं..
_ और ऊपर आकाश में बादल इधर से उधर आ- जा रहे हैं..
– शीतल, मंद हवा चल रही है.. घनघोर घटा छायी है,
_इस छटा का आनंद वही ले सकता है, जो जल्दी उठता हो,
_जिसमें प्रकृति को ग्रहण करने की क्षमता हो.
__ अभी अभी कोई पछी की आवाज आई.
_ कोई बनावटी आवाज सुनाई नहीं दे रही.
_ सिर्फ कुछ पंछियों की आवाज है.
_ किसी ट्रैफिक या रसोई से बर्तन खड़कने की आवाज नहीं.
_ कानों में एक सीटी सी बज रही है, इतनी शांति की आदत नहीं इन कानों को..
_ मै भाग्यशाली हूं ..जो अक्सर ऐसी सुबह ..किसी ऐसी जगह होता हूं..!!
सुबह होने ही वाली है,
_ पेड़ों से चिड़ियों के कलरव की ध्वनि मेरे कानों को गुदगुदा रही है,
_ मेरे चारों और शांति है और मैं अकेला बैठा विचारमग्न हूँ,
_ कभी-कभार अव्यवस्थित मन घबरा उठता है,
_ ऐसे में मेरी डायरी के कोई पन्ने को पढ़ कर मुझे शांति की आश्वस्ति होती है,
_ विचलित मन को आराम सा मिलता है,
_ पढ़ते हुए ऐसा लग रहा है ..
_ जैसे मेरी आवाज़ को सुंदर शब्दों से बुन दिया गया हो..!!
**आज सुबह थोड़ी ठंड है, तिसपर आज बारिश भी मेहरबान है ..
_ बालकनी में लगे गमलों में से फूलों कि मिलीजुली गंध मन को मदहोश करने को काफ़ी है,
_ इनके पास जाते ही अतींद्रिय [extrasensory] अनुभव होता है …
_ दवाओं और ध्यान के असर से अब सुख और दुख दोनों में मन थिर रहने लगा है,
_ साथ में अतिव्यस्तता कुछ सोचने का अवसर ही नहीं देती,
_ सुख, दुःख, सदभाव, लाभ, आनंद, उल्लास जैसी अनुभूति होती है.
_ अब न शिकवा, न गिला, न इंतज़ार न उम्मीद ..किसी चीज़ की जरूरत ही नहीं महसूस होती है..
_ अक्टूबर से फरवरी मेरा मौसम होता है,
_ तन के करीब, मन के करीब और जीवन के करीब ..
_ जब मैं अधिक जीवंत और अधिक खुश रहता हूं..
_ हर चीज़ के प्रति कृतज्ञ, हर चीज़ के प्रति प्रेम से भरा..
_ गर्मी मुझे नापसंद, इस मौसम में ..मैं जीवित नहीं रहता हूं, बस जीने का अभिनय करता हूं..
सुबह-सुबह खिले हुए फूल मुझे तेरी याद याद दिलाते हैं..
– सूर्य की चमक की पहली किरण के साथ तुम कितने सुंदर दिखते हो ;
_ मुझे आश्चर्य होता है कि ..मैंने कभी तुम्हारे सुबह के लुक की प्रशंसा कैसे नहीं की,
_ जबकि तुम बिल्कुल स्वाभाविक थे, सुंदर बनने की कोशिश नहीं कर रहे थे..
_ इस अनभिज्ञ दृष्टि ने मुझे झकझोर कर रख दिया कि.. भले ही मुझे पता नहीं हो कि अपना दिन कैसे बिताऊंगा,
_ फिर भी तू मुझे अपने साथ चाहता है.
_ ‘अपने दिन में एकमात्र चीज’ मैं इन पलों को बार-बार जीने में भाग्यशाली महसूस करता हूँ.
_ और मैं उन्हें फिर से जीने के लिए कुछ भी करूंगा, भले ही इसके लिए मुझे ऐसा व्यक्ति बनना पड़े..
_जो दुनिया की पहुंच से बाहर हो ..लेकिन हमेशा तेरे पास हो.
_ क्योंकि मुझे पता है ..तुम चाहोगे कि मैं तुमसे ऊपर रहूँ, जैसा कि तुमने हमेशा किया है.
— इसीलिए फूल मुझे तुम्हारी याद दिलाता है;
_ उन्हें कभी इसकी परवाह नहीं होती कि.. उनकी पत्तियाँ उनके ऊपर हैं,
_ क्योंकि अंदर से वे नहीं जानते थे कि.. यह उनके अपने भले के लिए है.
_ यह उन्हें सूरज की तेज़ किरणों से बचाने के लिए है;
यह सब उनके लिए ढाल बनने के बारे में है.
_ ठीक वैसे ही जैसे मैं तुम्हारे लिए था !!
आज सुबह 5:30 बजे पछियों की आवाज से मेरी आंख खुली..
_ मुझे लगा की ये मुझे बुला रहे हैं, बुला क्या चिढ़ा रहे हैं.
_ और उठकर देखा तो वे इस डाल से उस डाल डोल रहे थे,
_ यूँ लगा जैसे मुझसे कह रहे हों.. ठंड लग रही है क्या ? चाय बनवाऊं.? साथ में बिस्किट भी खा लेना..
_ यही तो है आप इंसानों का…
_ हमे देखो, न कफ़ न बलगम, न जोड़ों का दर्द न सांस फूलने की बीमारी, न पकाने का झमेला न स्वाद की चाहत…
— जाओ.. दिवाली आने वाली है,
_ फिर दिखावे करना..
_ हमारी न ईद न दिवाली… हमारे सिर्फ मौसम त्यौहार हैं,
_ जो असल में ईश्वर ने बनाए हैं.
_ जीवन आपसे कम है पर सुकून है.
_ हमने न सड़क बनाई न मशीनें, न जहाज.
_ शायद हमें जरूरत ही नहीं.
_ हमारे पास पासपोर्ट भी नहीं.
_ हमे किसी की इजाजत भी नहीं चाहिए.
—- वास्तव में उनकी की बातों में सच्चाई है.
_ इंसान ने विकास कर सब बर्बाद कर दिया.
_ परिंदों को न गठिया है न इन्हें स्ट्रोक आता है, और आता भी होगा तो इल्म नहीं.
_ हमने जान कर क्या उखाड़ लिया.
_ लालच बढ़ा, बीमारी बड़ी, समस्या बढ़ी, ईगो बढ़ी, प्रभुत्व बढ़ा… पर हमने अपनी स्वच्छंदता खो दी.
_ हमने अपना मूल खो दिया.
_ अब हम केवल जो सामान बनाया था, उसी को निभा रहे हैं.
_ पहले बीमारी बनाई, फिर उसका इलाज बनाया.
_ अब उस इलाज को अपना विकास बता रहे हैं..!!
आज सुबह उठा तो बाहर अँधेरा है ..पर बिल्कुल अंधेरा भी नहीं है.
_ लग रहा था हवा शीत और पारदर्शी है ..एकदम हल्की फूल जैसी..
_ बॉलकनी में खड़ा हूँ तो ठंडी हवा देह को छूती है और ऐसी मीठी सी सिहरन होती है..
_ जिसे कोई नाम नहीं दिया जा सकता..
_ बिना चिंता, बिना किसी तनाव के बॉलकनी से ठंड को महसूस करते हुए आसमान में धुंधले से दिखते तारों को देखते हुए सोचता हूं कि ..आख़िर सुख क्या है !!
_ इस मीठी, शीतल, निर्भार हवा में चुपचाप आकाश ताकना …क्या सुख नहीं है !
_ ..याकि अलग अलग फूलों की गंध को पहचानने की कोशिश करना सुख नहीं है !!
_ गंध की लिपि को आँखें बंद करके ही पढ़ा जा सकता है,
_ क्योंकि खुली आँखें तो रंग की लिपि में उलझ जाती हैं..
_ आस-पास लगे हजारों पेड़ों की गंध, उसके फूल पत्तों की गंध..
_ सारी गंध एकसाथ गड्ड मड़्ड होकर ..मन को सुख में डुबा देती हैं…,
— मन खुश है, संतुष्ट है, निहाल है,,,
_ क्योंकि यह उसके मन को भाने वाला मौसम है..
_ यह सर्दी का मौसम है…
ये सुबह होते ही नींद का खुल जाना,
_ कई ख्याल मंडराने लगे हैं दिल में,
_ वो ख्याल जो मुझे हर रात सपनों में जगाते रहते हैं…
_ ये घड़ी की टिक-टिक…जो सिर्फ रात को ही सुनाई देती है..
_ ये अँधेरा मुझे वक़्त का एहसास कराता है,
_ और मेरे और आपके बीच की दूरियां..
_ जहाँ मुझे सब कुछ सामान्य दिखता है,
_ जैसे सब आसपास ही घटित हो रहा है,
_ और वो बाहर खिड़की, जहां मेरी नजर अभी अभी गई है,
_ वहां से बहती हुई हवा ..कुछ समझा रही है मुझे..
_ कि किसी को जीवित रखना ..सिर्फ मेरा काम नहीं…
_ तुम्हारा भी योगदान होना चाहिए…
सुबह का जादू हकीक़त है, छलावा नहीं है..
_ ये खूबसूरत और मनमोहक है..
_ मैंने देखा है और महसूस किया है..
_ कि वाक़ई सुबह बेहद हसीन होती है,
_ मैंने महसूस किया है सुबह का स्वाद..
_ सब से आला और निराला होता है,
_ सुबह की हलचल एक अलग दुनियां का एहसास कराता है,
_ मैंने देखा है कि सुबह अपनी जेब में ज्यादा ही ताज़गी रखता है..
_ ये जो प्रकृति है ..ये हर पल जादू कर रही है,
_ ये हर पल अपनी खूबसूरती को और निखार रही है,
_ आपको हर पल बदलते हुए नजारे मिलते हैं,
_ हर जगह अपने आप में खूबसूरत है.. ये जादू है,
_ मैं हर वक्त इस जादुई दुनियां से घिरा रहना चाहता हूं,
_ इसमें जीना चाहता हूं.!!
” सुबह का जादू”
_ अब सुबह हो गई है, मगर यह सुबह धुंध लिपटी हुई है,
_ उजाला फैला तो सही, मगर उसकी ठंडक में सुकून है,
_ हवा कितनी सुंदर, कितनी शीतल है एकदम पारदर्शी और निर्भार..
_ दुआर पर सूखे पत्तों की कालीन बिछी है,
_ हवा के एक झोंके ने.. उन्हें उस डाल से बिलगा दिया.. जहां उनका जन्म हुआ था..
_ और चिड़ियों का इतना बोलना, लगता है ये आपस में बातें करती होंगी..
_ घासों की नोक पर ओस की बूंदे ऐसी ठिठकी हैं.. जैसे आंखों की कोर में ठहरे आँसू.. चमकती हुई, झिलमिलाती हुई..
_ अभी बस सूरज की किरणें निकलेंगी और इन बूंदों को अपने आंचल से पोंछ देंगी..
आज फिर सुबह हो गई..
_ हर रात यही सोचते बीत जाती है कि आखिर ‘मैं यहां क्यों हूं’
_ ज़िंदगी जैसे एक पुरानी, घिसी हुई फिल्म बन गई है,
_ जिसे देखने का मन नहीं करता, लेकिन रुक भी नहीं सकता !!
_ सुबह हो चुकी है..
_ बाहर लोग अपने-अपने काम में लग गए हैं,
_ लेकिन मैं अंदर ही अंदर कहीं अटका हुआ हूँ.
_ शायद खुद से, या शायद उस सवाल से जो हर सुबह मुझे घूरता है..
_ “आगे क्या ?”
सुबह हो गई है,
_ मैं एकांत में शांत बैठा हूँ और हर तरफ बस सन्नाटा है,
_ तभी दिमाग में कोई अनचाहा विचार आ गया, मैंने उसे पूरी शक्ति से भगाना चाहा और वो दोगुनी ताकत से मुझ पर हावी होता है,
_ मैं जब ऐसी बुरी स्मृति को भुलाना चाहता हूँ, और वो सब सामने ऐसे नाचता है..
_ जैसे आज की ही बात हो..
_ अंदर भावनाओं का भूचाल आ जाता है.. हृदय कचोटने लगता है..
_ उस बुरी स्मृति से निकलने की कई सालो की कोशिश क्षण भर में व्यर्थ हो जाती है, खैर !!
मैंने आज सुबह को महसूस किया, आरामदायक लेकिन ठंडा..!!
_ मैं कामना करता हूं कि यह हमेशा ऐसा ही बना रहे, क्योंकि मुझे इसी की जरूरत है.
_ मुझे एक शांतिपूर्ण जगह की जरूरत है,
_ जहां मैं अपना दिमाग बंद कर सकूं और जब चाहूं सो सकूं..
_ मैं जागकर.. लोगों में शांति की तलाश नहीं करना चाहता.
_ बहुत हो गया; मैंने यह किया है; यह मेरे लिए अच्छा नहीं है.
_ तो चलिए.. बस मैं तुम्हारी इतनी प्रशंसा करूंगा, जितनी पहले कभी किसी ने नहीं की.
_ लोग कहेंगे या तो मैं पागल हूँ या सुबह से प्यार करता है.
_ कोई भी सच हो सकता है.
_ आइए एक-दूसरे का ख्याल रखने और एक-दूसरे की शांति बनने के बारे में एक समझौता करें..!!
सुबह की पहली किरण जब आंखों में पड़ती है, तो सबसे पहले मैं सांस लेता हूं…फिर मुस्कुराता हूं.!
_ कारण ? बस इतना कि मैं हूं… मैं ज़िंदा हूं.
_ रात और सुबह के बीच एक पतली-सी डोर होती है, जो सबको पार नहीं करने देती.
_और मैं… खुली आंखों से यह नया दिन देख पा रहा हूँ.
_ क्या यह किसी चमत्कार से कम है ? “नहीं”
_ यह तो रोज़ मिलने वाला एक अनमोल तोहफ़ा है, जिसे हम अक्सर खोलना ही भूल जाते हैं
_ मैं चारों तरफ देखता हूं – कोई अपना दिख जाए तो उसकी तरफ मुस्कुराहट भेज देता हूं.
_ क्योंकि पता है, एक दिन आएगा जब या तो मैं नहीं रहूंगा, या वो नहीं रहेंगे.
_ उस दिन की उदासी से बचने का एक ही तरीका है, आज के साथ को पूरे दिल से जीना.
_ बाहर पेड़ों पर ओस टपक रही होती है,पत्तों पर हल्की धूप खेल रही होती है.
_ ये भी कल रात सोए थे, और आज मेरे साथ उठे हैं.
_ जीवन हर सुबह हमें चुपचाप यह कहता है, तुम्हारे पास एक और दिन है.
_ प्यार करने का, गले लगाने का, धन्यवाद कहने का, और हां… मुस्कुराने का..
_ कुछ नया सीखने का, अपने काम को कल से थोड़ा और बेहतर करने का,
_ और अपने सपनों को हकीकत के एक कदम और करीब लाने का।
_ क्योंकि एक दिन ऐसा भी आएगा,
_ जब सुबह तो होगी… लेकिन हम नहीं होंगे.
_ इसलिए आज का दिन पूरे दिल से जी लो, जैसे यही तुम्हारी आख़िरी सुबह हो.!!
“सुबह खूबसूरत है” उठो, खिलो, चहचहाओ, जीवन एक भोर है.!
_ आसमान से खुशनुमा हवा आ रही है और इसे महसूस करते हुए..
_ मुझे फिर से बचकाना होने की याद आती है.
_ जब तुम नहीं होते तो.. मैं नहीं हंसता.
_ ऐसा नहीं है कि मेरे आसपास लोग नहीं हैं; वे हैं.
_ लेकिन मुझे उनके साथ अच्छा नहीं लगता;
_ शायद मैं उनके साथ जीवित महसूस नहीं करता.
_ मुझे तुम्हारे आसपास रहने की याद आती है,
_ जहां हम बिना घड़ी या विषय पर ध्यान दिए.. घंटों तक लगातार बात करते हैं.
_ हमारी बातें अनावश्यक हैं, लेकिन वे जीवन से भरपूर हैं.
_ तुम्हारी मौजूदगी में “मैं अकेले अपने साथ का आनंद भी उठाता हूँ,”
_ इस एहसास के साथ कि तुम यहां हो.!!
_ अब, मैं सब कुछ सिर्फ इसलिए करता हूं.. क्योंकि यह आवश्यक है;
_ कुछ भी करने में कोई मज़ा नहीं है. हर चीज़ समय की बर्बादी लगती है.
“मुझे नहीं पता कि यह कैसे काम करता है,
_ लेकिन मुझे लगता है कि मैं खुद से ज्यादा ‘सुबह’ और ‘आकाश’ से जुड़ा हुआ हूं.”
मैं आज सुबह ऐसी जगह बैठा हूं:
_ जो हर सुबह और शाम पक्षियों के गायन को सुनने के लिए बहुत शांत है.
_ एक ऐसी जगह जो मौसमों से भरी है, और मैं उनमें से हर एक के साथ खुद रह सकता हूं.
_ मैं बहुत ठंडी हवा के साथ अपनी सर्दियों का आनंद ले सकता हूं और फिर भी हर दोपहर सूरज देख सकता हूं.
_ एक ऐसी जगह.. जहां मैं कभी भी, हर समय आकाश देख सकता हूं, और यह हमेशा की तरह सुंदर है.
_ एक ऐसी जगह.. जहां मुझे रोजाना चंद्रमा देखने को मिलता है,
_ यह एक ऐसी जगह है, जहां मुझे ख़ुशी ढूंढने के लिए भागना नहीं पड़ता;
_ वरना हर जगह हर कोई आता है और पूछता है कि.. मैं जीवन में क्या कर रहा हूं.
_ एक ऐसी जगह.. जहां मैं अपनी सुबह का उतना ही आनंद ले सकता हूं,
_ जितना मैं अपने दिन या रात का आनंद ले सकता हूं.
_ एक ऐसी जगह.. जहां मुझे हर शाम खूबसूरत सूर्यास्त देखने को मिलता है.
_ एक ऐसी जगह.. जहां मुझे भागदौड़ या कुछ न कुछ करना नहीं पड़ता.
_ बस बैठ सकता हूं, कुछ नहीं कर सकता और जीना चुन सकता हूं.
_ एक ऐसी जगह.. जो मेरे द्वारा देखी गई दुनिया से भी अधिक जीवंत है.!!
अभी सुबह होने वाली है, हुई नहीं है..!!
_ बालकनी के बाहर बल्ब की रोशनी में आस-पास का धुंधला दिख रहा है..
_ लेकिन मन में उजाला है.!
_ इस समय घरों में सब गहरी नींद सो रहे हैं, रब उनकी सुबह सुंदर करे.
_ अभी थोड़ी देर बाद सूरज दिखेगा.. और आंखें चमक जाएंगी,
_ अभी मन शांत है, बालकनी से आने वाली रोशनी और अंधेरे का खेल देख रहा हूँ.
_ पीठ हजार करवट सोते जागते थक चुकी है..
_ अब आँखों को ठंडक चाहिए.!!
_ आसमान से ओस झर रही है, हवा में ठंडक है..
_ आस-पास के दीखते पेड़ आश्वस्त कर रहे हैं.
_ अब मैं हूँ जमीन पर और मन आसमान पर..!!
सुबह-सुबह धरती पर सूर्य की किरणें बिखर रही हैं,
_ प्यासे पेड़-पौधों पर ओस की बूंदें टपक रही हैं,
_ पत्तियों पर ओस थिरक रही है..
_ चहुं ओर हरियाली महक रही है..
_ बहती हवा में रुनझुन सुनाई दे रही है..
_ डगमगाते मन में उम्मीद भर रही है..
_ याद दिला रही है ‘जीओ मस्ताना जीवन’
_ जी लो अपने आज को, अपने हासिल को..
_ अपना जीवन समझ, जी भरकर जी लो..
_ क्योंकि यह पल, हर पल न रहेगा..!!
**आज सुबह ठंड बहुत है..
_ मैं बालकनी में गया तो लगता है.. हवा जमा देगी मुझे,
_ लेकिन मेरे अन्दर का अलाव अचानक से दहक उठता है..
_ और मन करता है.. कोई जीवन भर की चुप्पी मुझमें उतर जाए..
_ बस किसी से कुछ भी न कहूं, कोई शिकायत न करूं, न किसी बात का रोना मुझे छूकर गुजरे..
_ तो मैं इस भाव से चुप बैठा रहूँ, कोरा और भावना शून्य हो जाऊं.!
_ अपनी नसों में उबलते हुए खून को, मस्तिष्क में दौड़ते हुए सवालों को और पैर में पड़ी जंजीरों को महसूस कर ही न पाऊँ.!!
_ अपने ज्ञान का पूरा भंडार खाली कर दूं,
_ बन जाऊं एक प्राण रहित-भाव रहित पत्थर का टुकड़ा..!!
आज सुबह हल्की-हल्की बारिश हो रही है,
_ सामने बादलों का झुंड दिख रहा है तो धुंधलका और बढ़ गया, कुछ साफ नहीं दिख रहा..
_ बारिश की बूंदों से मुझे परहेज नहीं, गालों पर बूंद के छींटे का अहसास हो रहा है..
_ बादलों की गड़गड़ाहट से मौसम में संगीत का एहसास हो रहा है..
_ मुझे भीगना पसंद है, ठंडे हाथों से चेहरे को पोंछने में अच्छा लगता है..
_ गीले पैरों से सामने न दिखते पहाड़ पर जाने को जी करता है..
_सर्द हवा, वो मसाला चाय… मेरे पास कुछ और वक्त होता तो यहीं रुक जाता..!!
“सुबह के गतिशील रंगों का संयोजन”
[“Combination of dynamic colors of the morning”]
… मानो रब आसमान के कैनवास पर हर रोज़ नया चित्र बनाता है.. हमको विस्मित करने के लिए !;
_ आसपास का सन्नाटा ऐसा लगता.. मानो सब कुछ थम गया हो और सिर्फ फुसफुसाहट सुनाई दे रही है..
_ मैं इतना हल्का महसूस कर रहा हूँ कि.. फुसफुसाहट धीमे स्वर में सुनाई दे रही है.. और बहती हवा में जैसे एक मिठास हो..!
_ ऐसा लगता है.. जैसे धरती और आकाश ने दूरियां मिटाकर एक-दूसरे को समेट लिया हो..
_ जब हम अच्छा महसूस करते हैं, तो शब्द कम पड़ जाते हैं ; आंखें भाषा बन जाती हैं.!!
मैं जब सुबह – सुबह नींद से जागता हूँ तो.. जो पहली याद जेहन में उभरती है वो ‘सुबह’ ही होती है.
_ वक्त बदल गया, हालात बदल गए, इंसान बदल गए, पर सुबह अब भी नहीं बदली.
_ ‘सुबह’ अब भी पहले की ही तरह हर सुबह आती है.
_ मैं बालकॉनी के बाहर पेड़- पौधों पर फुदकती -चहचहाती चिड़ियों को निहारता रहता हूँ.. एक ख़ालीपन लिए.!!!
_ ‘सुबह’ मेरे पूरे जेहन में उतरकर खुशियाँ बिखेर देती है और एक मधुर एहसास से भर देती है..
_ ‘सुबह’ एक तुम्हीं तो हो.. जो हर हालात में हर जज्बात में और हर खयालात में साथ बनी रहती हो..!
_ मैं आगे बढ़ता रहा और कितना कुछ जिंदगी से गुजरता चला गया,
_ लेकिन तुम आज भी पूरी शिद्दत से मेरे साथ चल रही हो..
_ सुबह ने मेरी कितनी ही यादों को तह लगाकर मेरे अंदर समेट रखा है..
_ ना जाने कितनी मुलाकातें तुमने मुझमें दर्ज की हैं.
_ कैसे भूल सकता हूँ उन पलों को.. जब अपने एकांत से मैं थक जाता हूँ या परेशान हो जाता हूँ,
_ तब ‘सुबह’ मुस्कुराती हुई आती है और हौले से मेरे कानों में कहती है – पगले, परेशान क्यूँ होते हो ,मैं हूँ ना..!!!
_ “सुबह’ जिंदगी के अनगिनत पलों के ना जाने कितने एहसासों को मैंने तेरे संग जिया है.
_ कहने को तो बहुत कुछ है तुम्हारे बारे में.. लेकिन बस इतना कहूँगा सुःख हो या दुःख तुम हमेशा साथ रहना,
_ चुपके से सच्चे साथी की तरह एहसासों को समेटती रहती हो !!
बीते साल की उदासी आज नए साल की सुबह में उतर आई है,
_ मानों वह गुजरना ही नहीं चाह रहा हो.!
_ मन बीते साल की उदासी में खो कर ना जाने कहां भटक जाता है.
_ आज नए साल के आने पर लगता है कि..
_ जिन्दगी ने जो एकमुश्त एक साल दिया था, वह खत्म हो गया है।
_ बाहर कोहरा अपनी बाहें फैलाकर दिन के उजाले को ढ़क लेना चाहता है,
_ बाहर सबकुछ बदल रहा है, हवाएँ सर्द होती जा रही हैं और धूप नर्म..
_ मौसम की सर्द रातें लम्बी हो चली हैं..
_ ये लम्बी राते उस बुढ़ापे की तरह होती हैं, जो खत्म होने का नाम ही नहीं लेता..
_ दिन जवानी के दिनों की तरह सिमटता जा रहा है..
_ जिन्दगी मे उतार पर तो रिश्ते की गर्माहट भी कमजोर होने लगती है और भावनाएं जम कर ठहर सी जाती हैं.
_ प्रकृति बदल रही है, लेकिन मन ठहरा है.
_ ऐसा लगता है जैसे.. मुझे नया या पुराना जो भी साल हो.. इस से कोई लेना देना नहीं है.
_ जिसने जीवन की नश्वरता को स्वीकार कर लिया हो..
_ बीतता साल प्रतीक है उतरान का, ढ़लान का, अवसान का..
_ जीवन के पड़ाव पर ठहर कर आगे बढ़ने का संकेत है..!!
—- कुछ भी नया नहीं लगता..!!!
_ और ना ही लगता है कि अरे ये क्या हुआ कैसे हुआ,
_ मन पीड़ाओं और तमाम सुखों की अनुभूतियों से ऊपर उठकर उपेक्षा के गर्त में इस कदर डूब चुका होता है कि..
…. ना ही यह चौंकता है ना ही आतंकित और ना ही अचंभित, बस जो भी है अच्छा है.!!
मुझे ढलता हुआ सूरज बहुत पसंद है,
_ आसमाँ में दूर तक फैली हुई लालिमा आँखों को सुकूँ से भर देती है,
– इसे देख कर ऐसा लगता है जैसे शाम ने दिन भर की थकान से खामोशी की चादर ओढ़ ली हो
— ताकि.. फिर सुबह किसी सूरजमुखी के फूल जैसे खिल सके…!!
देर से उठकर सुबह को छोटा मत करो, या उसे अयोग्य कामों या बातों में बर्बाद मत करो; _ इसे जीवन की सर्वोत्कृष्टता के रूप में, कुछ हद तक पवित्र के रूप में देखें.
_शाम बुढ़ापे की तरह है: हम सुस्त, बातूनी, मूर्ख हैं. _ हर दिन एक छोटा सा जीवन है: हर जागता और उठता हुआ एक छोटा सा जन्म, हर ताज़ा सुबह एक छोटी सी जवानी, हर आराम और नींद के लिए जाता हुआ एक छोटी सी मौत.- Arthur Schopenhauer
Do not shorten the morning by getting up late, or waste it in unworthy occupations or in talk; look upon it as the quintessence of life, as to a certain extent sacred. Evening is like old age: we are languid, talkative, silly. Each day is a little life: every waking and rising a little birth, every fresh morning a little youth, every going to rest and sleep a little death. – Arthur Schopenhauer
पक्षियों की चहचहाहट और हवा की फुसफुसाहट के साथ जागना हमेशा सुखदायक होता है, जब आप जागते हैं तो आप कैसे जागते हैं ? क्या आप मौन में जागते हैं, या क्या आप प्रश्नों और करने वाली चीजों की एक सूची के साथ जागते हैं ?
जागने के बारे में मुझे जो सबसे खूबसूरत चीज पसंद है, वह है इससे निकलने वाली खामोशी ; सुबह में, मेरे पास कोई प्रश्न या कोई खोज नहीं है; इसलिए, मैं हमेशा इस क्षण में हूं.
सुबह हमेशा इस बात की याद दिलाती है कि मैं अपनी प्राकृतिक अवस्था में कैसा हूं ; _ अक्सर जब मुझे नहीं पता कि क्या करना है, तो मैं सुबह के क्षण में खुद के बारे में सोचता हूं, और उस शांति की स्थिति से, मुझे हमेशा एक प्रतिक्रिया मिलती है जो सांस लेने या हवा के रूप में स्वाभाविक होती है ;
सुबह हमेशा एक गहरी, अधिक वास्तविक स्वयं की भावना में प्रवेश करने का अवसर बनाती है ; _ तो, इस तरह सुबह की शुरुआत हुई..
जिनको गहरी नींद नहीं आती वो समझ पाते हैं कि दुनिया में सुबह से अच्छा कुछ होता ही नहीं.!!
आप जिस तरह से अपने दिन की शुरुआत करते हैं, उससे आपके बाकी दिन पर बहुत फर्क पड़ता है.
_सुबह जल्दी उठने और सुबह अच्छा मूड रखने से आप पूरे दिन खुश महसूस करेंगे ;
_ भोर की शांति आपके दृष्टिकोण में अद्भुत आकर्षण का भाव ला सकती है.
_ भोर दिन का सबसे सुंदर और शांत समय होता है ; जैसे ही सुबह की हवा आपके चेहरे पर आती है, पक्षियों की गुनगुनाहट सुनने की शांति और दुनिया को रोशनी से भरते देखना आत्मा में एक अकथनीय आशा और शांति लाता है.
_ “सुबह की रोशनी दिन भर के काम के लिए आपकी भावना और उत्साह को नवीनीकृत कर देती है.”
_ “भोर एक नए और आशापूर्ण दिन को जन्म देते हुए चमकती है.”
_ “भोर सभी के लिए एक ताजगी लेकर आती है.”
रात चाहे कितनी भी लंबी क्यों न हो,
_ सवेरा एक वादा निभाता है.. फिर से लौट आने का.!!
चटख सुबहों के बाद मटमैली दोपहरें भी देखने की आदत डाल लेनी चाहिए दिल को.!!
| Mar 15, 2014 | सुविचार
हताश न होना सफलता का मूल है और यही परम सुख है. उत्साह मनुष्य को कर्मों में प्रेरित करता है और उत्साह ही कर्म को सफल बनाता है.
कभी किसी का दिल ना दुखाओ, क्योंकि अगर उसने सब्र कर के _
_ रब पर छोड़ दिया तो तुम्हारे लिए कहर बन जायेगा..
सब्र का घूंट दूसरों को पिलाना कितना आसान लगता है, _
_ लेकिन जब खुद को पीना पड़ता है तब कतरा कतरा जहर लगता है..
ज़िन्दगी सब्र के अलावा कुछ भी नहीं है, _
_ मैंने हर शख्स को यहाँ, खुशियों का इंतज़ार करते देखा है !!
सब्र की एक बात बहुत अच्छी है, _
_ जब आ जाता है, __ तो किसी की तलब नही रहती..
सहने वाले को अगर सब्र आ जाए तो _
_ कहने वाले की औकात दो टके की रह जाती है.
जरूरी नही की किसी की बद्दुआएं ही आपको तबाह करे,
_ किसी का सब्र भी आपको बर्बाद कर सकता है,,
किसी के सब्र की अत्यधिक परीक्षा नहीं लेनी चाहिए,
_ कोई भी तिनका आखिरी तिनका हो सकता है.
सब्र और सहनशीलता कोई कमजोरियां नहीं होती हैं, _
_ ये तो अंदरूनी ताकत है जो केवल मजबूत लोगों में होती है.
हम इंसान बड़े अजीब हैं, कुछ ना मिले तो सब्र नहीं करते _
_ और अगर मिल जाये तो फ़िर उसकी कद्र नहीं करते.
अगर जिन्दगी में कुछ बुरा हो तो थोड़ा सब्र रखना, _
_ क्यूँकि रोने के बाद हँसने का मजा ही कुछ और होता है.
सबर कर बन्दे मुसीबत के दिन भी गुज़र जायेंगे…
_ हसी उड़ाने वालो के भी चेहरे उतर जायेंगे..
सब कुछ मिला है हमको फिर भी सबर नहीं, _
_ बरसों की सोचते हैं पल की खबर नहीं..
जब सहने वाला सब्र करना सीख जाए,
_ तब कहने वाले की अहमियत खुद-ब-खुद खत्म हो जाती है.!!
सब्र कर बन्दे ..मुसीबत के दिन गुजर जायेंगे !!
_ आज जो तुझे देख के हंसते हैं, वो कल तुझे देखते रह जायेंगे !!
गुस्सा अकेला आता हैं, मगर हमसे सारी अच्छाई ले जाता हैं !
_ सब्र भी अकेला आता हैं, मगर हमें सारी अच्छाई दे जाता हैं !!
जो सब्र के साथ इंतजार करना जानते हैं, _
_ उनके पास हर चीज़ किसी ना किसी तरीके से पहुँच जाती है.
पलकों की हद से टूट कर मेरे दामन पे आ गिरा…
_ एक आँसू मेरे सब्र की तौहीन कर गया….
वक़्त ने कहा…..काश थोड़ा और सब्र होता !!!
सब्र ने कहा….काश थोड़ा और वक़्त होता !!!
” जो तेरे पास है उसी में सबर कर, और उस की कदर कर, _
_ यहां तो आसमान के पास खुद की जमीन नहीं ”
सब्र की चादर ओढ़िए..
_बुरे वक्त के बाद ही अच्छे दिनों की रौशनी आती है.!!
सब्र की जड़ें चाहे जैसी भी हों, इसके फल सदैव मीठे होते हैं.
जो खोया है उससे भी बेहतरीन पायेंगे, _सब्र रख दिन तेरे भी आयेंगे.
जो लोग सब्र करते है… __ या तो वो जीत जाते हैं या सीख जाते हैं.
सब्र कोई कमज़ोरी नहीं होती, ये वो ताकत है, जो सब में नहीं होती !!
ज़िन्दगी में कुछ रास्ते सब्र के होते हैं और कुछ रास्ते सबक के..!!
सबर रखो, समय का न्याय सबसे सटीक होता है..
_ और उसे किसी गवाह की भी जरूरत नहीं पड़ती.!!
सब्र रखो हर चीज़ आसान होने से पहले ” मुश्किल ” होती है.
सब्र के लिए इतना काफी है कि हम इस क्षण में जीवित हैं.
” सब्र करना ” दुनिया के सामने रोने से __ बेहतर है..
मिल जाए तो शुक्र करो, _ ना मिले तो सब्र करो.
वांछित के लिए बेसब्र न होने की कला और अवांछित को दूर करने की कला यदि आप सीख लें तो आप हमेशा खुश रहेंगे.!!
समझ न आया ऐ जिंदगी तेरा ये फलसफा, _ एक तरफ कहती है _ सबर का फल मीठा होता है
_ और दूसरी तरफ कहती है वक़्त किसी का इंतजार नहीं करता…
जिंदगी को धीरे धीरे करीब से जाना तो पता चला कि जिंदगी सब्र के सिवा कुछ नहीं..
_ किसी ने किरदार पर उंगली उठाई तो सब्र, कोई बिछड़ गया तो सब्र, कोई रूठ गया तो सब्र कुछ माँगा और वो ना मिला तो सब्र..!!
जब कोई सब कुछ देखते हुए भी चुप रहे___तो उसे बार-बार इतना परेशान न करें कि वह आपके लिए नासूर बन जाए !!
_क्योंकि समय के साथ सब्र टूट जाता है !!
सबर आने तक का खेल है सब..
_ना फिर किसी से मिलने की ख़ुशी रहती है और ना किसी से बिछड़ने का गम.!!
ये ज़िंदगी एक सफ़र है,
इस सफ़र में सबर रख के चल,
जो कहना है तुझको वो कह के ही उठ,
ना दिल में ज़रा भी कसर रख के चल,
खिंचा आए ”काबा” जहाँ सर झुके,
तू सज़दे’ में इतना असर रख के चल…….
| Mar 15, 2014 | सुविचार
शुक्र कीजे कि मौत है वरना ज़िन्दगी से हमें बचाता कौन – Shakir Dehlvi
मरने वाले के साथ मरा नहीं जाता,
_ पर अहाने-बहाने उसके लिए कोई रीत निभा कर उसके साथ जीने को महसूस किया जा सकता है.!!
– Manika Mohini
तबियत देने लगी है रोज इशारे, क्यों न सफ़र के लिए सामान समेटा जाए.!!
एक दिन कहानी बन कर रह जाएंगे हम सब, कोशिश करें कि कहानी अच्छी रहे.!!
ये इतना घमंड किस बात का है, मालूम है ?
_ एक वक़्त आएगा जब शरीर को स्थिर हो जाना होगा, उस क्षण से पहले आपने क्या किया होगा, क्या नहीं किया होगा- सब व्यर्थ रह जाएगा.
_ कोई भी बात मायने नहीं रखेगी, बस अचानक से आप ख़त्म सब कुछ ख़त्म.!!
मौत हमेशा द्वार पर खड़ी है.. जितनी देर बचे रहे.. उसी को हम जिंदगी कह कर काम चला लेते हैं.!!
मृत्यु बुढ़ापे तक सीमित नहीं, मृत्यु हर उम्र में मौजूद है.!!
एक दिन विशिष्ट से तुच्छ हो जाएंगे, मैं, आप, हम सब विलुप्त हो जाएंगे.!!
_ जो लोग चले जाते हैं — वो पलट कर कहाँ आते हैं ?
वो सब जा चुके हैं जिन्हें तुम जानते थे, जो तुम्हें जानते थे..
_ अब तुम्हें भी चलना चाहिए अब वक़्त बर्बाद मत करो और जब मुझे होश आएगा,
तब तक मैं भी किसी वक़्त में ख़त्म हो चुका रहूँगा…!
चाहे जितना उड़ लो.. बस दो दिन की ज़िन्दगी है दो दिन का मेला.!!
अपनी आंखों को आश्चर्य से भर लें, फिर दुनिया देखें,
_ऐसे जिएं जैसे कि “एक दिन, आप इस दुनिया को छोड़ देंगे”;
_ यह किसी भी सपने से ज्यादा शानदार है..!!
कुछ सवाल उम्रभर अनसुलझे ही रहते हैं ; और इंसान खाली हाथ पैदा होता है,
_ पर जाता हमेशा अपने अनकहे दर्द और रहस्यों की गठरी लेकर ही है.!!
हम पैदा होते हैं खाली हाथ और जाते भी वैसे ही हैं,
_ जो इस सत्य को जान लेता है, वह कभी घमंड नहीं करता.!!
हमें लगता है कि आम तौर पर लोग सोचते हैं कि वे मरने से डरते हैं,
_ लेकिन वास्तव में लोग जीने से अधिक डरते हैं.!!
कल की जिसे थी फ़िक्र वो आज चल बसा..!
_ इसलिए आज में जी लो यारों.. कल का किसी को क्या पता..!!
काल के आगे सभी लाचार हैं, ज़िन्दगी का एक कोना दर्द से भरा होता है..
_ फिर भी जीने की जिद में ज़िन्दगी मुस्कुराती ही रहती है.
कई लोग सोचते हैं कि वे आरामदायक जीवन जीने के लिए काम कर रहे हैं,
_ जबकि वास्तविकता में, वे आरामदायक मृत्यु पाने के लिए काम कर रहे हैं !!
कोई इंसान मर जाए तो उसकी कीमत बढ़ जाती है;
_ अगर वह जिंदा रह गया तो दुनिया उसे जिंदा रहने की सजा देती है..!!
अगर आपको पता चल गया ना कि लोग कितनी जल्दी मरने वालों को भूल जाते हैं,
_ तो आप लोगों को प्रभावित करने के लिए जीना बंद कर दोगे..!!
जब हमारा कोई करीबी मरता है तो हमें दुख होता है, लेकिन जब कोई पराया मरता है तो हमें उतना दुख नहीं होता.
_ यानी दर्द की वजह मौत नहीं, बल्कि संबंध होते हैं.!!
आजकल भावनाएँ भी अजीब हो गई हैं,
_ किसी इंसान की मौत की खबर अब मन को नहीं छूती, बस एक पल की खामोशी और फिर वही दिनचर्या.!!
किसी की मृत्यु के बाद उसके बारे में ओछी बातें कहना, मृतक को ओछा नहीं बनाता..
_ चाहे इंसान ओछा रहा हो या महान, मृतक सिर्फ दो ही चीज़ें डिज़र्व करता है श्रद्धांजलि या मौन.!!
जब लोग जीवित रहते हैं लोगों को मुगालता रहता है कि वह सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं.. कि वह नहीं होंगे तो उनका घर, उनका परिवार, उनका कार्य स्थल सब अनाथ हो जाएंगे, बर्बाद हो जाएंगे..!
_ पर कटु सत्य यह है कि कुछ लोगों को छोड़ दें तो आपके होने न होने से कहीं कुछ भी नहीं रुकता, न बर्बाद होता है..
_ जीवन की सबसे अच्छी या सबसे बुरी बात यही है कि यह चलता रहता है, किसी के साथ भी, किसी के बिना भी..!!
जीते जी तो हम आदमी को भुला कर रखते है,
_ उसके दुख सुख की कभी जानकारी भी नहीं लेते, मर जाने पर बड़ा याद करते है.
_ काश ! हम जिंदा आदमी की परवाह करनी सीख जाय तो मरने का इतना अफसोस भी न हो.!!
उस व्यक्ति के लिए जीवन में कुछ भी भयानक नहीं है जो यह जान लेता है कि मृत्यु में कुछ भी भयानक नहीं है.
There is nothing terrible in life for the man who realizes there is nothing terrible in death.
यदि मरने के बाद मृत्यु आपको कोई पीड़ा नहीं पहुँचाती है, तो अब उसके भय को आपको पीड़ा पहुँचाने की अनुमति देना मूर्खता है.
If death causes you no pain when you’re dead, it is foolish to allow the fear of it to cause you pain now.
अच्छे से जीने की कला और अच्छे से मरने की कला एक ही है.
The art of living well and the art of dying well are one.
मुझे मौत से क्यों डरना चाहिए ?
यदि मैं हूं तो मृत्यु नहीं है.
यदि मृत्यु है, तो मैं नहीं हूँ.
मुझे उस चीज़ से क्यों डरना चाहिए _जिसका अस्तित्व तभी हो सकता है _जब मैं नहीं हूँ ?
मौत के सामने हम लाचार हैं, मजबूर हैं.
_ कोई कितना भी ताकतवर हो, मज़बूत हो वो मौत को नहीं टाल सकता है.
_ बस एक लम्हा आएगा और सब ख़त्म.._ कोई कुछ नहीं कर सकता, कोई किसी को बचा नहीं सकता.
_ये दुनिया फरेब है, ये रिश्ते धोखा हैं._ हकीकत सिर्फ़ ओ सिर्फ़ मौत है, जो सच है.!!
क्षमा करें, लेकिन जब आप मरेंगे तो आपके घर वाले एक ही दोपहर में आपके सारे सामान को कूड़ेदान में फेंक देंगे ;
_वे जल्द से जल्द उस सामान से घर को साफ़ कर देंगे ;
_ वे आपका कबाड़ नहीं चाहते..
—- कुल मिलाकर वे आपका घर और पैसा चाहते हैं ;
_ कड़वी सच्चाई है, लेकिन सच है __ इसलिए _ उनके लिए इसे बचाने का बहाना न बनाएं.
जिंदगी क्या है, मौत क्या है ?
_ दरअसल हर चीज़ व्यर्थ ही है..
_ अच्छा किया जाए तब भी और बुरा किया जाए तब भी,
_ मृत्यु के बाद सब कुछ यहीं धरा रह जाता है, क्योंकि मृत्यु के आगे सब बराबर हो जाते हैं.
_ इसलिए शायद बिना अच्छाई-बुराई के फर्क में उलझे जीवन जी लेना चाहिए.!
आप निर्वस्त्र आये थे आप निर्वस्त्र ही जायेंगे.
_ आप कमज़ोर आये थे आप कमज़ोर ही जायेंगे.
_ आप बिना धन-संपदा के आये थे आप बिना धन-संपदा के ही जायेंगे.
_ आपने पहला स्नान भी स्वंय नहीं किया आपका अंतिम स्नान भी आप स्वंय नहीं कर पायेंगे, यही सच्चाई है..
_ फिर किस बात का इतना अभिमान किस बात की इतनी नफरत.
_ किस बात की इतनी दुर्भावना, किस बात की इतनी खुदगर्जी.
_ इस धरती पर हमारे लिए बहुत ही सीमित समय है, और हम इन मूल्यहीन बातों में बर्बाद कर रहे हैं.!!
जीवन तो जैसे तैसे सामाजिकता ढ़ोते बीत रहा पर अपनी मृत्यु के लिए मैं बहुत सख़्ती से अपने घरवालों को कहूँगा कि मेरे मरने के बाद शोक संदेश, मृतक भोज और तेरह दिन का टिटिम्मा नहीं करें..
_ मेरी मुक्ति के लिए कोई उपाय करने की ज़रूरत नहीं..
_ क्योंकि जिसपल मेरी मृत्यु होगी मेरी आत्मा उसी पल लोगों से और लोग मुझसे मुक्त हो जाएंगे..
==मैं पलटकर झांकने नहीं आऊंगा,
_क्योंकि मैंने देख लिया है कि परिवार और कुछ नजदीकी लोगों को छोड़कर किसी को भी आपके होने न होने से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता..
_हो सकता है कि मेरी बात लोगों को असंवेदनशील लगे पर आजकल शोक को भुनाना ट्रेंड में है..
_अब शोक लोगों को स्तब्ध, अवाक नहीं करता ..बल्कि वह लोगों को न केवल मुखर बना रहा बल्कि नए नए प्रयोग करने को भी उकसा रहा,
तुम्हारे शोकोत्सव से ज़्यादा भव्य मेरा शोकोत्सव है यह चलन में है..
_तेरहवीं में पूरा परिवार एक रंग के कपड़े पहनेगा..दर्ज़नों प्रकार के पकवान बनेंगे..सेल्फ़ी ली जाएगी..मृतक की तस्वीर के इर्द गिर्द की सजावट इतनी भव्य होगी कि जयमाल का स्टेज शरमा जाए..
_स्त्रियाँ पूरे मेकअप में होंगी.. पुरुष उसी तल्लीनता और निश्चिन्तता से राजनीति ,खेल और मौसम पर चर्चा करते हुए ठंडा/गर्म पेय पियेंगे ..जैसे वह ऑफिस,नुक्क्ड़ या किसी अन्य पार्टी में जाने पर करते हैं..
_कुछ लोग वीतरागी की तरह फ़ोन चलाते हुए खाना शुरू होने का इंतज़ार करेंगे..
_बस बच्चे अपने सहज स्वाभाविक रूप में दौड़ते, भागते, खेलते, खाते दिखेंगे..
— यहाँ शोक में गरिमा नहीं होती _ख़ासकर स्त्रियों को देखता हूँ कि ..वह मृतक के घर यह जांचती हैं कि ..कौन कितना चीखकर विलाप किया,
_आप मौन विलाप नहीं कर सकते ..क्योंकि उसमें उन्हें मज़ा नहीं आता..
_ वह आपको रोते चीखते, बेहोश होते देखने को आतुर रहेंगी..
_कई जगह मैंने देखा कि ..मृतक के जीवित रहते उसके नज़दीकी रिश्ते से भले बातचीत तक बन्द रही हो ..पर उसके मरते ही वे बेहोश हो जाते हैं,
_कई तो ऐसे चीखेंगे कि ..आसमान थर्रा उठे और पांच मिनट बाद ही सब ऐसे सामान्य हो जाएंगे ..जैसे कुछ हुआ ही नहीं,
_किन्तु जैसे ही कोई नया रिश्तेदार, नातेदार आया नहीं कि ..फ़िर गगनभेदी चीखें उठने लगेंगी और मृतक के बच्चे कोने में सहमे यह सब तमाशा देखते रहेंगे..
— रिश्तेदार जिस निस्पृह भाव से तिलक बरीक्षा में ऐन मौके पर जीमने पहुंचते हैं, ..उसी तटस्थता से वह तेरहवीं में भी एकदम ठीक समय पर आते हैं,
_रस्मन बातचीत और भोजन के बाद सब निकल लेते हैं..
_पीछे शोक में, थकन में, चिंता में डूबा परिवार अकेला बचता है..
_माँ, बाप, भाई को खोने के समय हमने यह देख लिया कि किसी को हमारी फ़िक्र नहीं थी,
_फ़िक्र थी तो यह कि कब यह संयुक्त परिवार टूटकर बिखरेगा ..क्योंकि परिवार के स्तंभ ढह चुके थे..
— हालांकि लोग मृतक भोज की प्रशंसा यह कहकर कहते हैं कि ..यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई ..ताक़ि लोग तेरह दिन इतने व्यस्त रहें कि ..वह अपने दुख को भूले रहें..
_पर अपने माता पिता, पति या पत्नी अथवा बच्चे को खोने के बाद इतनी अधिक सामग्रियों को इकट्ठा करना, इतनी रस्मों को निभाना एक प्रकार की क्रूरता है..
_ दान के राशन, बर्तन, कपड़े, गहने को कहीं नाऊ झगड़ रहा कहीं पंडित..
_कोई न बुलाये जाने पर नाख़ुश है तो कोई परोसा न मिलने पर नाराज़..
_इन सब व्यवहार से वितृष्णा होती है..
_लोग आ रहे, लोग जा रहे तो बस इसलिए कि ..लोकाचार की बही में अपनी उपस्थिति दर्ज़ करवा सकें ..न कि इसलिए कि ..वह आपके दुख से दुखी हैं..
नोट- यह सार्वभौमिक सत्य नहीं है ..बस समाज के बदलते व्यवहार पर एक टिप्पणी मात्र है.
अगर कल आप मर जाते हो तो अंतिम संस्कार में आपके रिश्तेदार चाय पी के चले जाएंगे.
_ एक हफ्ते में ही ऑफिस वाले आपकी पोजीशन के लिए कैंडिडेट ढूंढने लग जाएंगे।
_ दो दिन तक कुछ दोस्तों की इंस्टा स्टोरी में रहोगे.. उसके बाद सबकी अपनी अपनी लाइफ चालू हो जाएगी।.
_ आपका पार्टनर भी आपसे आगे बढ़ जाएगा.
_ आपकी फैमिली भी कुछ टाइम बाद फिर से नॉर्मल हो जाएगी.
_ कुछ पल का मातम फिर हंसते लगेंगे लोग – जीना सीख जाते हैं, किसी के बिना मरते नहीं है हम.
_ आपके म्युचुअल फंड को क्लेम करने नॉमिनीस फॉर्म भरेंगे.
_ डेथ सर्टिफिकेट बनवाने के लिए लाइन में लगेंगे.
_ दुनिया चलती रहेगी..- जैसे चल रही है.
_ धीरे-धीरे आपके परिवार को भी आपकी नामौजूदगी की आदत हो जाएगी.
_ “जो कह रहे थे मर जाएंगे तुम्हारे बिना” देखना उन्हें कितनी जल्दी किसी और से मोहब्बत हो जाएगी.
_ जहां धड़कन रूकी.. वहां आपका नाम भी खत्म.
_ कुछ लोग जिनको आप अजीज समझते हो.. वह आपके अंतिम दिन भी नहीं आएंगे.
_ कुछ लोग तुम्हारी तारीफ के पुल बांध रहे होंगे और कुछ लोग अभी भी आप पर हंस के चले जाएंगे.
_ आप आंगन में पड़े होंगे और बातें पॉलिटिक्स की चल रही होगी,
_ आपको किस डायरेक्शन में लेटाना है.. इस बात पर बहस हो रही होगी.
_ लोग खाना खाकर चले जाएंगे.. किसी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा.
_ आप इतने जरूरी नहीं थे.. किसी के लिए.. तब सब पता चलेगा ;
_ इसलिए खुद के लिए जीया करो – किसी और के लिए नहीं.
_ किसी के चले जाने से दुनिया नहीं रुकती..
_ लोग चले जाते हैं.. फिर बस तस्वीर देखकर याद करते हैं लोग – याद में रखना बंद कर देते हैं.
_ तो आज से अपनी खुशी के लिए काम करो.. अपने लिए जियो.
_ खुद को प्रायोरिटी दो.. नहीं तो दूसरों को खुश करते-करते मर जाओगे.!!
अगर हम मृत्यु को ठीक से पहचान लें, तो इस पृथ्वी पर वैर का कारण न रह जाए.
_ जहां से चले जाना है, वहां वैर क्या करना ?
_ जहां से चले जाना है, वहां दो घड़ी का प्रेम ही कर लें.
_ जहां से विदा ही हो जाना है, वहां गीत क्यों न गा लें, गाली क्यों बकें ?
_ जिनसे छूट ही जाना होगा सदा को, उनके और अपने बीच दुर्भाव क्यों पैदा करें ?
_ कांटे क्यों बोए ? थोड़े फूल उगा लें, थोड़ा उत्सव मना लें, थोड़े दीए जला लें !
_ वास्तव में यही सच्चा धर्म है इस पृथ्वी का और उसके मनुष्य का.
_ जिस व्यक्ति के जीवन में यह स्मरण आ जाता है कि मृत्यु सब छीन ही लेगी; यह दो घड़ी का जीवन, इसको उत्सव में क्यों न रूपांतरित करें !
_ इस दो घड़ी के जीवन को प्रार्थना क्यों न बनाएं ! पूजन क्यों न बनाएं !
_ झुक क्यों न जाएं-कृतज्ञता में, धन्यवाद में, आभार में! नाचें क्यों न, एक-दूसरे के गले में बांहें क्यों न डाल लें !
_ मिट्टी मिट्टी में मिल जाएगी.
_ यह जो क्षण-भर मिला है हमें, इस क्षण-भर को हम सुगंधित क्यों न करें !
_ इसको हम धूप के धुएं की भांति क्यों पवित्र न करें, कि यह उठे आकाश की तरफ, ईश्वर की गूंज बने !
– OSHO
जीवन अपने हिसाब से जिएं, यूँ तो जीवन छोटा लगता है, महज साठ – सत्तर बरस की यात्रा – जो सभ्यता के बरक्स बहुत कम कालावधि है, पर जब जीने को हम उतरते है तो एक – एक पल भारी होता है,
_ इसमें हम हर किसी को खुश नहीं रख सकते, हर किसी को नाराज नहीं कर सकते,
_हम हर किसी के हीरो या हीरोइन नहीं बन सकते – ना ही किसी के खलनायक भी
_ एक टेढ़ा – मेढ़ा रास्ता है – धूल, कंकड़, गुबार और अंधड़ से भरा हुआ और बस गुजरना है – अपनी इच्छाओं को पूरा करते हुए या त्याग करते हुए
_ अपने आप से बार बार कहता हूँ कि एक ही जीवन है – बगैर किसी की अपेक्षा पर खरे उतरे या किसी बड़ी महत्वकांक्षा को पूरी करने के ख्वाब को संजोए – बस जी लो, अपने पसंद की कर लो,
_ यदि तुम्हे लगता है कि यह करने से खुशी मिलती है, या संतुष्टि तो कर लो एक बार अपनी वर्जनाएं और डर छोड़कर..
_ मरते समय छाती पर कोई तमगा होगा तो भी धू – धू कर जल जाएगा, बस यह याद रहेगा कि इसने जीवन कैसे जिया, जीवन को कैसे आनंदित भाव से पूर्ण किया – बाकी सब तो माया है,
_ हम जानते ही है, सब छोड़ दो यश, कीर्ति, पताकाएं और वो सब जो जीने से रोकता है.
– Sandip Naik
जिस दिन तुम मृत्यु को प्राप्त होगे उस दिन लोग तुम्हारा नाम भूल जायेंगे और तुम्हें अर्थी के नाम से संबोधित करेंगे। चारों तरफ़ तुम्हें उस घर से श्मशान ले जाने हड़बड़ी मची होगी, जिस घर को तुमने कभी बहुत शिद्दत से बनाया था। जो लोग तुम्हारे जीते जी तुमसे कभी मिलने नहीं आये वो भी औपचारिकता निभाने आयेंगे और इंतज़ार करेंगे कि जल्दी जल्दी सब हो और वो लौटकर वापस जाएं।
फ़िर तुम्हारा अंतिम संस्कार हो जाएगा और तुम्हारी चिता की राख ठंडी होने से पूर्व लोगों के आँसू सूख जाएंगे। जब लोग श्मशान से लौटकर आएंगे तो तुम्हारे परिवार के लोग उनके चाय नाश्ते के इंतज़ाम में जुट जाएंगे। तुमसे संबंधित सभी चीज़ों को घर से बाहर कर दिया जाएगा और धीरे -धीरे लोग अपने कामों में व्यस्त हो जाएंगे और धीरे धीरे तुम्हें भूल जाएंगे।
तुम जब तक जीवित हो तभी तक तुम सोच रहे हो कि सब अपने हैं मगर वास्तविकता यह है कि यह सब अस्थाई है। जिस दिन तुम चले जाओगे, उस दिन के बाद तुम्हारे अपने घर में भी तुम्हारा जिक्र कभी नहीं किया जाएगा क्योंकि अब तुम्हारा अस्तित्व समाप्त हो चुका है और तुम किसी के किसी भी काम नहीं आने वाले हो। यही संसार का सत्य है इसे समझ लो और रिश्तों के मोह से बाहर निकलकर अपने जीवन का आनंद लो।
मणिकर्णिका!
_ मुझे नहीं पता कि तुम किस शहर में रहते हो, किसी दिन बैग में एक-काद कपड़े रख के निकल पड़ो बनारस.
_ कहतें हैं कि मुम्बई मायानगरी है, जहाँ छोटे-छोटे इंसानों के बड़े बड़े सपने पूरे हुए हैं !
_ पर बनारस..
_ ये वो जगह है, जहाँ पर इंसान बड़े से बड़े सपने को जलते हुए, मिट्टी में खाक होते हुए देखता है..
_ एक चद्दर रख लेना साथ में या फिर बनारस सिटी स्टेशन के बाहर से 10 रुपये में बिकने वाली पन्नी ले लेना और पहुँच पड़ना सीधे मणिकर्णिका.
_ ये वो जगह है, जहां इंसानी लाशों के जलते हुए उजाले में सिर्फ और सिर्फ सच्चाई दिखाई देती है.
_ एक रात के लिए भूल जाना कि तुम्हारे क्रेडिट कार्ड के लिमिट कितनी है, तुम्हारे डेबिट कार्ड में कितने पैसे पड़े हैं, जिन्हें तुम अभी निकाल के 5 स्टार होटल बुक कर सकते हो,
_ भूल जाना अपने पैरों में पड़े हुए जूते की कीमत या कलाई में टिक-टिक करती हुई घड़ी की कीमत और पन्नी बिछाकर बैठ जाना एक कोने में और देखना चुप चाप वहाँ का तमाशा.
_ तुम्हें सिर्फ और सिर्फ सच दिखाई देगा.
_ तुम देखोगे की कैसे वो लोग जिन्होनें अपनी जिंदगी सबकुछ भूलकर अपने सपनों को पूरा करने में बिता दी, कैसे यहाँ औंधे मुँह पड़े हैं.
_ वो लोग जो जिनके पास कभी समय नही रहा लोगों के लिए उन्हें कैसे लोग जलते हुए ही छोड़ कर चला जाया करते हैं,
_ वो लोग जिन्होंने अपने ईगो में आकर किसी के सामने झुकना नहीं स्वीकारा, वो कैसे अभी गिरे हुए हैं,
_ और इस कदर गिरे हुए हैं कि बिना चार लोगों के उन्हें उठाया भी नही जा सकता.
_ वो लोग जिन्हें गुमान था, अपने हुस्न अपनी हर एक चीज़ पर आज कैसे कुछ घंटों के बाद उनका यहाँ कुछ भी अपना नहीं रहेगा.
_ हमेशा हमेशा के लिए, वो लोग जिन्होंने ठोकर मार दी उनको, जिन्होंने उन्हें सबसे ज्यादा चाहा और आज उनके पास कोई आखिरी लौ बुझने तक साथ बैठने वाला तक नहीं,
_ वो लोग जिन्होनें पहनी महंगी घड़ियाँ पर आज पता चला कि समय क्या है,
_ वो लोग जिन्होंने पूरी जिंदगी दूसरों को दुःख दिया, उनकी आवाज आज उनकी चटकती हड्डियों से कैसे निकल रही हैं,
_तुम देखोगे की यहाँ जो हो रहा है वही सच है, बाकी सब झूठ.
_ तो सुनो न यार !
_ कभी भी किसी को दुःख मत दो !
_ हाँ पता है कि दुनिया के सबको खुश नही रखा जा सकता, पर हर कोई आपसे दुखी भी नही हो सकता,
_ अभी मैं कुछ भी कर दूँ, कितना भी बुरा, उससे दुनिया के बड़े-बड़े सेलेब्रिटी को कोई फर्क पड़ने वाला है क्या ?
_ नही!
_ तो वही तुमसे दुःखी होगा जो तुमसे प्यार करता हो, जो तुमसे जुड़ा हुआ है.!!
– Ishq Banaras
| Mar 15, 2014 | MASTO
” मन हो नया “
नये वर्ष के नये दिन पर पहली बात तो यह कहना चाहूंगा कि दिन तो रोज ही नया होता है, लेकिन रोज नये दिन को न देख पाने के कारण हम वर्ष में कभी- कभी नये दिन को देखने की कोशिश करते हैं. हमने अपनी पूरी जिंदगी को पुराना कर डाला है. उसमें नये की तलाश मन में बनी रहती है, तो वर्ष में एकाध दिन को हम नया दिन मान कर अपनी इस तलाश को पूरा कर लेते हैं, सोचनेवाली बात है- जिसका पूरा वर्ष पुराना होता हो, उसका एक दिन कैसे नया हो सकता है ? जिसकी आदत एक वर्ष पुराना देखने की हो, वह एक दिन को नया कैसे देख पायेगा ? हमारा जो मन हर चीज को पुरानी कर लेता है, वह आज को भी पुराना कर लेगा. फिर नये का धोखा पैदा करने के लिए नये कपड़े हैं, उत्सव हैं, मिठाइयां हैं, गीत हैं. लेकिन न नये कपड़ों से कुछ नया हो सकता है, न नये गीतों से कुछ हो सकता है.
नया मन चाहिए ! और नया मन जिसके पास हो, उसे कोई दिन कभी पुराना नहीं होता. जिसके पास ताजा मन हो, फ्रेश माइंड हो, वह हर चीज को ताजी और नयी कर लेता है. लेकिन ताजा मन हमारे पास नहीं है. इसलिए हम चीजों को नयी करते हैं. मकान रंगते हैं. नयी कार लेते हैं. नये कपड़े लेते हैं. हम चीजों को नया करते हैं, क्योंकि नया मन हमारे पास नहीं है.
कभी सोचा है कि नये और पुराने होने के बीच में कितना फासला होता है ? चीजों को नया करने वाली इस वृत्ति ने जीवन को कठिनाई में डाल दिया है. भौतिकवादी और अध्यात्मवादी में यही फर्क है. अध्यात्मवादी रोज अपने को नया करने की चिंता में लगा है. क्योंकि उसका कहना है कि अगर मैं नया हो गया, तो इस जगत में मेरे लिए कुछ भी पुराना न रह जायेगा, और भौतिकवादी कहता है कि चीजें नयी करो, क्योंकि स्वयं के नये होने का तो कोई उपाय नहीं है. नया मकान बनाओ, नयी सड़कें, नये कारखाने, नयी व्यवस्था लाकर सब नया कर लो. लेकिन अगर आदमी पुराना है और चीजों को पुराना करने की तरकीब उसके भीतर है, तो वह सब चीजों को पुराना कर ही लेगा. हम इस तरह नयेपन का धोखा पैदा करते हैं.
“मन से बाहर फिसल जाइए, और आप जान लेंगे कि यह क्या है: वह जो आदि रहित और अनंत है.
_ मन का आदि है और अंत भी है, इसलिए मन और वास्तविकता कभी नहीं मिल सकते. मन शाश्वत को नहीं समझ सकता.
…
_ और यदि आप सचमुच समझना चाहते हैं, तो आपको मन को खोना पड़ेगा.
_ आपको मन को खोने की कीमत चुकानी पड़ेगी.
_ लेकिन यदि आप ज़िद करेंगे, ‘मुझे तो मन के माध्यम से ही समझना है,’ तो केवल एक ही चीज़ संभव है — मन धीरे-धीरे आपको यकीन दिला देगा कि कुछ भी ऐसा नहीं है जो आदि रहित हो, कुछ भी ऐसा नहीं है जो अंतहीन हो, कुछ भी ऐसा नहीं है जो अज्ञेय हो.
…
_ धीरे-धीरे, वास्तविकता से संपर्क करने की कला सीखिए, बिना मन के बीच में आने के.
_ कभी-कभी जब सूरज अस्त हो रहा हो, बस बैठ जाइए और सूरज को देखते रहिए, उसके बारे में सोचिए मत — केवल देखिए, मूल्यांकन मत कीजिए,
_ यहाँ तक कि यह भी मत कहिए ‘कितना सुंदर है !’
_ जिस क्षण आप कुछ कहते हैं, मन बीच में आ जाता है.
…
_ यदि आप सचमुच समझना चाहते हैं, तो आपको मन को खोना पड़ेगा.
_ आपको मन को खोने की कीमत चुकानी पड़ेगी.
_ लेकिन यदि आप मन का ही उपयोग करने पर ज़ोर देंगे, तो केवल वही ज्ञान मिलेगा, केवल वही चीज़ें मिलेंगी जिन्हें मन समझ सकता है.
_ आप माया में ही बने रहेंगे.”
~ ओशो
“Slipping out of the mind, and you will know what it is: the beginningless, the endless. The mind has a beginning and an end, hence the mind and reality cannot meet. The mind cannot comprehend the eternal.
…
And if you really want to understand, you will have to lose the mind. You will have to pay the price of losing the mind. But if you insist, ‘I have to understand through the mind,’ then only one thing is possible. The mind will convince you, slowly slowly, that there is nothing which is beginningless, nothing which is endless, nothing which is indefinable, nothing which is unknowable.
…
Slowly slowly, learn the art of contacting reality without the mind interfering. Sometimes when the sun is setting, just sit there looking at the sun, not thinking about it—watching, not evaluating, not even saying, ‘How beautiful it is!’ The moment you say something, the mind has come in.
…
Viraj, if you really want to understand, you will lose the mind. You will have to pay the price of losing the mind. But if you insist on using the mind, then only knowledge, only things that can be understood by the mind will happen. You will remain in illusions.”
“जीवन की ताज़गी”
_ जीवन बासी नहीं है, हम इसे बासी बनाते हैं—कल का बोझ और कल की चिंता ढोकर.
_ लेकिन सच तो यह है कि हर पल अछूता है, एकदम नया..
_ बिल्कुल इस सांस, इस हवा, इस खामोशी की तरह..
_ कभी-कभी मैं इसे गहराई से महसूस करता हूँ—जब मैं पुरानी खुशियों को दोहराने या नई खुशियों का पीछा करना बंद कर देता हूँ.
_ जब मैं बस होता हूँ..
_ एक नदी की तरह जो कभी भी एक ही तरह से दो बार नहीं बहती..
_ आसमान की तरह.. जो कोई याद नहीं रखता.
_ इसमें कुछ आज़ादी है.
_ बिना उम्मीद के काम करना, बिना ज़रूरत के प्यार करना.
_ मैं यह देखने लगा हूँ कि असली जीवंतता ज़्यादा करने में नहीं, बल्कि ज़्यादा पूर्णता से पहुँचने में है.
_ बीते कल में नहीं, आने वाले कल में नहीं..
_ लेकिन अभी—दोनों पैरों के साथ वर्तमान में..
_ यही वह जगह है.. जहाँ जीवन सबसे ज़्यादा जीवंत लगता है.
_ यही वह जगह है.. जहाँ मैं खुद को सबसे ज़्यादा महसूस करता हूँ.
_ “जीवन ताजा ही है”
मन का संचालन दिमाग से होता है,
_ अगर दिमाग सही दिशा पकड़ ले तो मन अच्छा काम करता है.
मन तो सबका होता है कि मन का हो..
_ पर हमेशा मन का हो ये ज़रूरी नहीं.!!
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ये मन का स्वभाव हैं कि जिन चीजों से वो परिचित होता है, उससे ऊब पैदा हो जाती है -और जो कुछ अनजाना है वो रोमांचित करता है !
_ चीजों का जानने की नहीं बल्कि जीने की फिराक में रहो.!!
_ जो जान लिया जाता है, वो तो पुराना, बासी हो जाता है और जो जिया जाता है _ वो हमारे व्यक्तित्व में कुछ नए अहसास, कुछ नई उमंग ओर कुछ नया गीत जोड़ देता है.
_ जितना इस अस्तित्व से मिले उसके लिए धन्यवाद का भाव उठना चाहिए.!!
_ शिकायतों में अक्सर हम इस जगत से पाने की योग्यता धुंधली कर लेते हैं; _ शिकायत का भाव हमारी अपात्रता दर्शाता है.
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रोज दिन होता है. _ रोज रात के बाद सवेरा होता है. _ नया क्या है ? कुछ भी नही..!!
_ परेशानियां, उदासियां, खालीपन और अवसाद किसी नये साल के आने से खत्म नही हो जाते.
_ जो इस दौर में हैं. _ उनके लिए कुछ भी नया नही है. _ ज्यादातर चेहरों पर खुश दिखने की एक परत है.
_ एक दिन की खुशफहमी से बाकी बचे 364 दिन बदल नही जाएंगे.
_ क्या ही उछल-कूद करना क्या ही बधाई और शुभकामनाएं देना.
_ छः महीनों से जिस शख्स ने पुराना मैसेज सीन नही किया था _ उसने भी हैप्पी न्यू ईयर का मैसेज भेज दिया है.
_ बीते साल में जिसके पास कॉल करने का वक्त नहीं था _ वो भी फोन करके शुभकामनाएं दे रहा है.
_ एक दिन में साल नही सिमट सकता है, _ कैसे समझाया जाए ऐसे लोगों को समझ नहीं आता..!!
_ एक दिन का अपनापन दिखाने के लिए इतनी जद्दोजहद क्यों है ?
_ मैं ये प्रश्न दूसरे से क्यों करूं, _ मुझे खुद से करना चाहिए..!!
मेरे सेम टू यू कह देने भर से मेरा या आपका कुछ ठीक हो जाता है तो चलिए कह देता हूं, _ सेम टू यू !!
_ जिस उत्साह से भरभर के शुभकामनाएं जिसे भेजी गयी हैं _ उसे तो ये पता ही नहीं होगा कि _ मैं जिसे ये शुभकामनाएं भेज रहा हूं. __ एक वक्त पर उसे आपकी जरूरत थी _ आपके समय की जरूरत थी._ तब आप साथ नहीं थे.
__ आज आपके इस अपनेपन से उसे खीज उठ रही है.__ ये कोई नहीं समझता है.
__ यकीन मानिए..!! “सब फौरी बाते हैं”_ उम्मीद पालना एक फितरत बन गयी है कि सब ठीक हो जाएगा.
_ किसी के साथ होने से किसी की शुभकामनाएं मिल जाने से जिंदगी पूरे साल गुलजार रहेगी.
_ अगर ऐसा होता तो दुनिया में दुःख ही नहीं होता _ हर रोज उत्सव ही होता..!!_ अफसोस ऐसा होता नही है.
_ इसलिए बचा जाना चाहिए इस दिखावे से..!!
_ “दिन मेरा है” _ ठीक एक साधारण दिन की तरह, _ कैलेंडर बदला है. _ लोग नहीं बदलेंगे ये माहौल नहीं बदलेगा..!!
_ बदलना है तो खुद को बदलिए _ खुद के साथ मजबूती से खड़े रहने के संकल्प के साथ..!!
_ खुद को शुभकामनाएं दीजिए कि खुद ही सब ठीक कर देंगे..!!
_ किसी के हैप्पी न्यू ईयर कह देने या सुन लेने से कुछ नहीं बदलने वाला है..!!
_ समय के साथ यही रह जाना है. __ बकिया कुछ भी नहीं._ सच है मैंने स्वीकार किया है ; _ आप भी इसे मान लीजिए कोई जबरदस्ती थोड़े है..!!
_ जो इस दुनिया की भीड़ में होकर भी खुद के साथ मजबूती से खड़े हैं ; _ ऐसे लोगों को मेरा प्यार..!!
_ इस साल उनको _ उनके हिस्से का जहां मिले, प्यार मिले, खुशियां मिले, आजादी मिले..!!
_ इससे बढ़कर कोई दुवाएं नहीं है मेरे पास, _ रख लीजिए..!!
– पथिक मनीष
हर किसी की जिंदगी मे लो पॉइंट आता है !
हम थक चुके होते है इस भीड़ का हिस्सा बन के, हमे लगता है ये सूरज रोज निकलता है शाम होते ही ढल जाता है, उसके बाद गुप अंधेरे मे खिड़की से चांद को देखना तारों से बातें करना एक आम बात होती है, अकेलेपन मे होने वाली घटनाओं पर ये घिसीपिटी बाते है !
हमारी जिंदगी की जो घटनाएँ हमे सबसे ज्यादा तोड़ देती है, हम उन्हें याद करते ही उनमें घुसते ही सब भूल जाते है कि जिंदगी बड़ी खूबसूरत है और कुछ खूबसूरत घटनाएं घटेंगी अभी हां हमे बिना बताए बिना कहे !
जिंदगी डिफरेंट मोड़ पर कब आएगा ये डिफरेंट क्या होता है और कितनी देर के लिए होता है ?
मै स्कूल मे पढ़ रहा था तो दुनिया भी पढ़ ही रही थी ना मेरे स्कूल मे हजारों बच्चे थे ये एक स्कूल की बात थी उस हिसाब से दुनिया मे उस समय करोड़ों अरबों बच्चे पढ़ रहे थे !
पढ़ाई के बाद नौकरी ढूंढना यहां न्यूजपेपर से लेकर वैकेंसी वाले वेबसाइट पर लाखों नौकरियां थी जिनको अप्लाई करने वाले करोड़ों थे, तो फिर करोड़ लोग एक साथ नौकरी के लिए भाग रहे थे !
शादी हाँ एक ही दिन शहर के कई गली नुक्कड़ से बारात निकल रही थी यानि रोज लाखों शादीयां हो रही थी, इन सबमे डिफरेंट कहा है यहा तो सब कॉमन ही है !
पैसा घर परिवार जिम्मेदारी सामाजिकता मे पिसता हुवा इंसान जिसकी जिंदगी मे वो लो पॉईंट है वो सोच रहा था ये डिफरेंट होना क्या होता है ? कब होता है ?
कठिनाइयों में डूबे हुवे व्यक्ति का सहारा वही कठिनाइयाँ ही है, उन परिस्थितियों मे शरीर मे बसने वाली आत्मा छूट के भाग जाने की जिद पर अड़ जाती है और शरीर असामान्य रूप से ढीला पड़ जाता है और फिर यहीं से कहानियां बनती है, जिन्हें हमे तराश के उतारना पड़ता है,
ज़िन्दगी के पन्नों पर फिर यही कहानियां हमे सहारा देती है और आपके बचे रहने का कारण यही कहानियां होंगी, ये कहानियां जिंदगी की वास्तविकता से गुजर कर जब डायरी के पन्नों पर आएंगी ना ये आपको उलझा के नही सुलझा के रखेंगे ताऊम्र।
उस लो पॉईंट मे ये डिफरेंट पॉइंट आता नही है लाना पड़ता है।
मेरे बहुत से दोस्त हैं. फ्यूचर के बारे में बात करते वक्त अक्सर कहते हैं.
_ खूब पैसा कमाना है, बड़ा घर बड़ी गाड़ी पत्नी बच्चे समेत पूरा परिवार सब मिलकर सुकून से रहेंगे और फिर जिंदगी आराम से बीत जाएगी.
_ मैं खुश हो लेता हूं, चलो सबके पास कुछ प्लान है.
_ सबने एक टारगेट सेट कर रखा है.. होना भी चाहिए.
_ जिंदगी जीने का एक मकसद होना अच्छी बात है.
_ सारी बात घुमा-फिरा जब मेरे जवाबदेही का वक्त आता है.. मैं मौन हो जाता हूं.
_ मैं क्या जवाब दूं.. कोई प्लान नही है.
_ एक शहर में बहुत ज्यादा दिन तक टिक नहीं पाता हूं.
_ जॉब एक साल के बाद मुझे बहुत परेशान करने लगती है.
_ घूमने-फिरने के लिए कोई प्लान नही करता हूं, जब मन किया झोला उठाया और निकल लिया.
_ ऐसे में क्या टारगेट सेट करूं फ्यूचर का.. कुछ समझ में नही आता है.
_ इन सब बातों के बाद बैंक बैलेंस चेक करता हूं तो पता चलता है कि बस इतना बचा है कि किसी एक शहर में एक महीने से ज्यादा गुज़ारा नहीं होगा.
_ और जब पैसे कमाए तो किये क्या तो पता चलता है कमरा ट्रैवलिंग से जुड़े सामानों से पटा पड़ा है.
_ एक कैमरा है, सात/आठ बैग हैं, बहुत सारे जूते हैं, ढेर सारी किताबें हैं, डायरी है और इससे ज्यादा कुछ नही है.
_ देखकर मुझे सुकून मिलता है.
_ कुछ ना होकर बहुत कुछ है मेरे पास.. यही सोच के खुद की पीठ थपथपा लेता हूं. आत्ममुग्धता भी जरूरी है ना ?
_ एक सच बताऊं.. नही चाहिए बड़ा घर.
_ कंक्रीट के जंगल में मुझे एक वक्त के बाद उफनाहट होने लगती है.
_ बहुत सारा पैसा रख के क्या ही करना है..
_ पैसे जीवन में सुख दे तो देंगे पर स्वार्थ वाले रिश्तों की भीड़ भी इन्हीं पैसों की वजह से है.. लोगों से मिला अनुभव है.
_ वक्त आ गया है.
_ फिर से शहर बदल जायेगा.. अब खानाबदोश जिंदगी से धीरे-धीरे प्यार हो गया है.
_ और हां बुद्ध का दिन है आज, बुद्ध को पढ़ ही रहा था.
_ भीतर उमड़े द्वंद्व का जवाब मुझे बुद्ध से बेहतर कोई नही दे सकता था.
_ उचाट मन को भी लिखना कभी-कभी सुकून देता है.
_ इसलिए लिख रहा हूं.. बस इतना ही.!!
नया साल कितना नया होता है पता नहीं.. सिवाय यह मानने के कि नया साल है…
_ मुझे लगता है कि नया है तो प्रतिपल नया है और पुराना है तो प्रतिपल पुराना है…
_ हम जस के तस रह जाते हैं…
_ पीछे साल हमसे हमारा समय जा चुका होता है आगे साल समय में होते हैं उसके जाने के इंतजार में…
_ फिर भी उत्साह तो होता है आस पास को देखकर, उत्साह बना रहे इसके लिए नया साल शुभ हो, चेतन की अवस्था और उर्ध्वगामी हो…
– अमित तिवारी
जाम की लम्बी लम्बी कतारें, टूट चुके पहाड़, चमकीली रोशनियों से अंधे हो चुके कबूतर रात को सो नहीं पाते, न ही सो पाते हैं गौरैया के बच्चे| सारे जानवर भी हैरान हैं हमारी अंधी दौड़ और उब भरी ज़िन्दगी से पैदा हुए जश्न को देखकर |
कोई भी ख़ास उपलक्ष हो या यह नया साल, बस एक ही चीज दिखती है लोग भागना चाहते हैं कहीं और जाकर जश्न में खुद को डुबो देना चाहते हैं |
चाहे उस जश्न में कुर्बान कर दिए गए हों हजारों लाखो जानवर और उनकी बोटी को चबा लिया गया हो या बीयर और शराब की बोतलें फूट गयी हों सड़कों पर या पहाड़ों के सबसे शांत क्षेत्र में भी बियर और शराब की बोतल ने दस्तक दे रखी हो |
एक समय था जब सिर्फ़ मस्ती करने वाली जगह पर ही लोग मस्ती करने जाते थें बाकी जगहें छूटी रहती थी |
उदहारण के तौर पर शराब पीने के लिए ज्यादातर उसके एक निश्तित स्थान पर भीड़ इकट्ठी होती थी, धर्मस्थल कम से कम छूटे रहते थें.
आज की स्थिति क्या है ? चाहे बनारस हो या हरिद्वार और ऋषिकेश सब जगह लोग पार्टी करने जा रहे हैं |
धर्म और अध्यात्म की जगह से कोई सरोकार नहीं है, सरोकार है तो बस कुछ पल जोर जोर के संगीत के साथ शराब के नशे में झूम लेने से और एक साथ ‘हैप्पी न्यू इयर’ बोलकर सुबह फिर से बेसुध उबासी भरी जिंदगी में वापस लौट जाने से..
आख़िर हम इतने बेसुध कब से हो गए कि किसी भी ख़ास दिन के लिए इतनी पार्टी करनी पड़े |
पार्टी करना और पार्टीजीवी होना दोनों अलग अलग बाते हैं |
पार्टी की संस्कृति को अपनाते अपनाते पार्टीजीवी हो गए हम सबके सब |
सबको अब एक अच्छी और धमाकेदार पार्टी करनी है |
चाहे उसके लिए कोई बियर बार हो, निरीह पहाड़ हों या धर्मस्थल |
अभी कुछ वर्षों पूर्व तक यदि शांति चाहिए तो लोग पहाड़ों का रुख करते थें |
अब पहाड़ लम्बे लम्बे जाम के पर्याय बन गए हैं | कई किलोमीटर तक लम्बा जाम लग जाता है |
पहाड़ों पर रास्ते सकरे होते हैं | पहाड़ एक साथ इतनी जनसँख्या को बर्दाश्त करने के लिए नहीं हैं|
इससे न सिर्फ वहां की भीड़ बढ़ रही है बल्कि पूरा का पूरा वातावरण, पूरी प्रकृति प्रभावित हो रही है
जितने ज्यादा लोग होंगे उतनी अधिक मात्रा में संसाधनों की आवश्यकता होगी और उतना ही अधिक अपशिष्ट एवं अन्य दूषित पदार्थ वहां जमा होगा, जिससे पूरी की पूरी हवा बदल जाएगी या यूँ कहें की बदल रही है |
पहाड़ श्रापित हो रहे हैं, जो हमें शांति दे सकते थें अब वही शोर में समां गए हैं |
यह एक तरीके से प्रलय का आगमन है, जहाँ मानव सभ्यता किंकर्तव्यविमूढ़ हो चुकी है |
सबको बस जश्न मनाना है |
नए साल में इस जश्न का रोग और भी अँधा हो जाता है |
लोग समझ ही नहीं पा रहे हैं कि नयी तिथि के आगमन का स्वागत कैसे किया जाये |
सभी जश्न मना रहे हैं, पार्टी कर रहे हैं तो हमें भी करना है |
ढेर सारा पैसा खर्च करो, नहीं है तो भी जश्न मनाने के दबाव में पैसा खर्च करो |
जहाँ भीड़ है वहां जाकर भीड़ का हिस्सा बन जाओ और स्वयं को मनोरंजन दो |
कितनी बार तो लोगों का चेहरा देखने पर आभास होता है कि अमुक व्यक्ति को कुछ ख़ास आनंद आ नहीं रहा है इस तरीके के मनोरंजन में _परन्तु क्यूंकि यह पता ही नहीं इस नए दिन को कैसे मनाये, इसका स्वागत कैसे करें, तो बाकि दुनिया जैसा कर रही है वैसा काम करने में सम्मलित हो जाओ और उसी जश्न का हिस्सा बन जाओ |
यह जानने की कोशिश किये बिना कि क्या इस स्वागत को किसी और तरीके से भी मनाया जा सकता है ? जिसमें जीवन की सार्थकता निहित हो | जिसका उदगम जीवन की बोरियत या उबासी नहीं बल्कि सहजता हो |
सहजता एक सतत प्रक्रिया है संवेदना की, जितना व्यक्ति संवेदनशील होगा उतनी ही सहजता उसमें उतरती जाएगी |
जितना असंवेदनशील होगा उतनी असहजता एवं अंधे जश्न को मनाने की तीव्रता का बढ़ती जाएगी |
संवेदनशीलता आती है जागरूकता से, जागरूकता यह नहीं की ज़माने में क्या चल रहा है उसके बारे में हमें सब पता है, जागरूकता यह भी नहीं की राजनीती या फिर व्यापर या तकनिकी में आजकल क्या चल रहा है, उसके बारे में भी हमें सबकुछ पता है,
बल्कि जागरूकता है कि यह सब जो चल रहा है वह क्यूँ चल रहा है | क्या यह सब जो चल रहा है उसकी वाकई आवश्यकता हमको है या बस हमें बाज़ार का हिस्सा बनाकर हमारा दोहन किया जा रहा है |
जागरूकता है स्वयं का दोहन न होने देने से बचाना, जागरूकता तभी आएगी जब ज़िम्मेदारी होगी और जिम्मेदारी किस बात की जानने और समझने के इच्छा की, तो जब तक इस बात की जिम्मेदारी नहीं की हमें जानना या समझना है तब तक जागरूकता नहीं होगी और जागरूकता के न रहने पर संवेदना भी नहीं रहेगी |
एक असंवेदनशील व्यक्ति का जीवन सिर्फ़ उबासी से भरा रहेगा |
उबासी से भरा व्यक्ति उस उबासी को मिटाने के लिए कुछ भी कर सकता है,
वह नदी, पहाड़, मंदिर, धर्मस्थल, आसपास का वातावरण सबकुछ के दोहन के लिए तैयार रहेगा |
वह यह सबकुछ करेगा क्यूंकि उबासी में अशांति होती है, परन्तु व्यक्ति को शांति चाहिए,
वह इन दोहन के तरीके से शांति पाना तो चाहता है, जीवन को सार्थकता में जीना तो चाहता है
परन्तु वह ऐसा करने में अक्षम रहता है,
क्यूंकि शांति तो संवेदना में है, जो आती है जागरूकता से और यह व्यक्ति व्यस्त है मनाने में अँधा जश्न…
अब यह हमारे हाथ में है की हम अंधे जश्न का शिकार होते रहते हैं या फिर एक दिन जागरूक होने की कसम खाते हैं और संवेदना को जन्म देते हैं स्वयं के ही अंतर में, जिससे दोहन से अधिक सृजन के भागीदार बनें और बने रह सकें एक पूर्ण इन्सान बने रहने की यात्रा में,
यह यात्रा ही निरंतरता है जिसमें कोई भी अँधा जश्न विलीन हो जाता है…बस चुनना है तो यात्रा का मार्ग…
– अमित तिवारी
साल बीता, अच्छा बीता, बहुत कुछ मिला, बहुत कुछ फिसला भी, सीख मिली..
_ नए लोग मिले, कुछ से पहचान गाढ़ी हुई, कुछ से फीकी..
_ पढ़ा ख़ूब, लिखा भी, सुना बहुत, बोला भी, कमाया भी, गंवाया भी, मोह हुआ, मोहभंग भी..
_ भावुकता से अतिरेक घटाने में कुछ और सफल रहा..
_ हर बात साझा न करने का प्रयास किया, हर बात पर प्रतिक्रिया न देने का भी..
_ क्या नहीं करना, यह और अच्छे से जाना..
_ समय का मूल्य और अधिक समझा..
_ यात्राएँ की, मीठा कम किया, स्वास्थ्य के प्रति सचेत हुआ..
_ ख़ूब हँसा, रोया भी, ग़लतियाँ की, माफ़ी भी मांगी..
_ कुल मिलाकर थोड़ा और इंसान होने की कोशिश की..!!
हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी कुछ छूट गया, रह गया,
किसी का वादा अधूरा रहा।
किसी की मुलाकात अधूरी रही।
किसी से सोहबत अधूरी रही।
किसी की मोहब्बत अधूरी रही।
किसी की सपने अधूरे रहे।
किसी के अपने अधूरे रहे।
हुए पूरे वो जिन्होंने समय की मांग को भांप कर समय रहते खुद को सचेत कर लिया।
परिवर्तन संसार का नियम है, इसी रीत को आगे बढ़ाते हुए परिवर्तन स्वीकार करते हुए नए साल को दिल खोल के गले लगाइए…..आप कमाल हैं, बेमिसाल हैं, होनहार हैं
आप बहुत खूबसूरत हैं, प्यारे हैं, खुद से प्यार कीजिए…………
इस ऊलजुलूल दुनियां में अपने आप को बचा के रखिए………..खुद को प्राथमिकता दीजिए, खुद से बढ़कर कुछ नहीं (खूब ख्याल रखिए अपना)
तरक्की इतनी भी न कर लीजिए कि अपने लोग नजर ना आएं……दुनिया बहुत छोटी है*
हम आज हैं कल नहीं, जब तक धड़कन चल रही…… मौज काटिए
– मस्त मौला
साल भर की सीख
१ अतीत को भूल जाओ, हम सबके अतीत में कीचड़ के सिवा कुछ नहीं, वो जो बड़े है – वो कीचड़ से सने है और जो छोटे है – कीचड़ से अटे है, बेहतर है अतीत का ना गुणगान सुनो, ना कहो और ना ही याद रखो.
२ जीवन एक ही है, पण्डो पुजारियों, मौलवियों, फादर्स और गुरुओं ने पिछले और अगले जन्म की बात की है, स्वर्ग – नर्क की कपोल कल्पना को थोपा है ,सब भूलकर जिंदगी का आज जियो और अभी, बाकी जीवन अनिश्चित है.
३ जिंदगी में असफल होने, बदनाम होने, अकर्मण्य होने या अकेले होने से मत डरो, यह सब वे ही भोग सकते है – जो अलग है और बेहतर है, सबके समान होने में कोई नयापन नहीं है, अलग होना ही और भीड़ से अलग रहना ही चुनौती है और अक्सर बहादुर लोग ही इस गली में आते है.
४ असफल होने का अर्थ जीवन में सब कुछ खत्म हो जाना नहीं है, आपकी असफलता ही दूसरों की सफलता है, सबसे नीचे वाली सीढ़ी ना हो तो शिखर एक झटके ढह जाएगा, नींव मजबूत ना हो तो कोई भी कलश शिखर पर स्थापित नहीं हो सकेगा, असफल लोग ही सफलता को स्थापित करके नए सोपान बनाते है.
५ अपने आप पर विश्वास रखें – भले ही आप सबके साथ अपनी नज़र में भी एक समय के बाद किसी मोड़ पर गलत साबित हो जाएं, पर यह ध्यान रखिए कि सही – गलत कुछ होता नहीं, कोई भी यह तय नहीं कर सकता और ये सिर्फ सापेक्षता की बातें है – इसलिए अपने आप पर विश्वास रखें और वहीं करें – जो आपको भाता है और आप कर सकते है.
६ आपको जीवन में माता-पिता से लेकर बंधु-बांधव, कुनबा और दोस्तों के समूह – समाज मिलता है, पर आपको यह ध्यान रखना होगा कि आपका साथ सिर्फ आप ही निभा सकते है, सबसे मिलकर रहिए – क्योंकि साठ-सत्तर साल तक के जीवन में हर पल आपको दूसरों की जरूरत पड़ती है, पर इसका अर्थ यह नहीं कि आप पूर्णतया किसी पर निर्भर हो जाएं, सिर्फ अपने आपसे बातें करके अपनी जरूरतों को न्यूनतम करते जाइए – ताकि निर्भरता खत्म हो जाएं और आप स्वयं में सक्षम होकर सुकून से जी सकें, यह याद रखिए कि दिनभर नाराज रहो, झगड़ा करो – पर सूर्यास्त के समय सब भूल जाओ और रात का खाना सब एकसाथ टेबल पर खाओ.
७ अपने आपको कभी भी कम नहीं आंके, क्योंकि संसार के सारे सूत्र आपके होने से ही इर्द-गिर्द गुम्फित है और बुने हुए है, आपकी खामोशी या आपकी वाचालता ही आपके होने का सबूत है, इसलिए जरूरी हस्तक्षेप किसी भी माध्यम से करते रहिए, जब आपको लगें कि आपके हस्तक्षेप का कोई अर्थ नहीं, जवाब नहीं है तो चुप रहिए और इंतजार तब तक करिए – जब तक दूसरे छोर से कोई स्पंदन ना हो और फिर भी कोई हरकत ना हो तो बेहतर है आगे से रिस्पॉन्स करना बंद कर दीजिए, संसार कम से कम एकांकी मार्ग पर नहीं चल सकता, ट्रैफिक में ठोस विकल्पों के बाद ही एकांकी मार्ग की घोषणा की जाती है.
८ धीरे – धीरे उन सभी जगहों से खारिज करने की कला सीखिए – जहां आपको लगता है कि संत्रास, पीड़ा, तनाव, अवसाद या अपराध बोध महसूस होता है, आपके होने से परिवाद कायम हो सकते है, अनुतोष या प्रतिफल की हिस्सेदारी में संकट होने लगते हो और यह किसी भी स्तर का हो सकता है, खारिज होना या अंग्रेजी में कहते है Withdraw कर लेना एक दीर्घकालिक समझ और परिणामों का आईना बन सकता है.
९ बहुत ज़्यादा झगड़े और विवाद आपको बेचैन कर सकते है, बेहतर है जब सांस लेने में तकलीफ़ होने लगे तो वातावरण और जगह बदल देना चाहिए, खासकरके रिश्तों में यह कटुता सबसे पहले होती दिखती है, फिर घर एवं समाज के स्तर पर और अंत में प्रोफेशनल स्तर पर जिसके लिए कई विकल्प होते है, पर रिश्तों, घर, परिवार और समाज में कोई विकल्प नहीं होते, इसलिए स्वयं को सारी जगहों से विच्छेद करके अपनी हवाई और एकांत की दुनिया में जीने के लायक बना लेना चाहिए और सिर्फ मृत्यु या कोई आवश्यक अवसर पर ही आने – जाने का संबंध निर्वाह करने का कड़ा इरादा करना और क्रियान्वित करना चाहिए़, बाकी प्रोफेशनल स्तर पर तो कुछ सोचने – विचारने की जरूरत नहीं है संसार बहुत बड़ा है.
१० जीवन में बहुत थोड़े और छोटे सिद्धांत और मूल्य बनाए रखने चाहिए, ज़्यादा आदर्शवाद और अनुशासन दिखावा है, असल में जब तक हम अपनी ही सीमाओं और वर्जनाओं को नहीं तोड़ेंगे – तब तक हम जी ही नहीं पाएंगे, गंभीरता घातक है और संसार में मरे हुए लोगों की संख्या आज के जीवित लोगों से ज्यादा है, निश्चित ही वे सब भी गंभीर और बड़े मूल्यपरक या सिद्धांतवादी लोग रहें होंगे – पर आज हमको अपने से पहले की तीन पीढ़ी के लोगों के कर्म तो दूर – नाम भी याद नहीं, तो क्या ही कहा जाए, बस मजे से रहिए तनाव और अवसाद के बगैर.
नये साल का आना मतलब सिर्फ कैलेंडर बदलना ना हो जाएं, अभी तक की मस्ती को बरकरार रखते हुए जीते चले जाइए जब तक जीवन है आपका, और इसे मृत्यु के अलावा कोई नहीं छीन सकता यह विश्वास रखिए.
[ आपको लगता है कि इन सीखों में कुछ और जोड़ना चाहिए तो कमेंट्स में लिखिए मैं भी सीखूंगा ]
– Sandip Naik
| Mar 15, 2014 | सुविचार
जब भी विपरीत परिस्थिति आपके सामने आए, दो मिनट रुक कर सोचें कि
मेरी कौन- सी प्रतिक्रिया मुझे सही दिशा में ले जाएगी.
इंसान के असफल होने का एक प्रमुख कारण _
_उसका बिना सोचे समझे _ प्रतिक्रिया देने की आदत है.
जब आप प्रतिक्रिया करने से पहले रुकते हैं तो _
_ आप दस गुना अधिक शक्तिशाली हो जाते हैं..
शांत होकर सोचने से हर समस्या का समाधान मिल जाता है.
जीवन में आगे बढ़ने के लिए किसी भी बात पर तुरंत रिएक्ट करने की जगह.. सोच- विचार कर प्रतिक्रिया देनी चाहिए.
जीवन एक बड़ी यात्रा है, अतः हमें हर किसी को जवाब देने की..
_ और प्रत्येक चीज़ पर प्रतिक्रिया करने की कोई जरुरत नहीं है,,
_ जिस यात्रा का चुनाव हमने स्वयं किया हो, उसके उतार चढ़ाव हमें ही स्वीकारने होंगे..!!
किसी भी बात पर अपनी प्रतिक्रिया देने के लोभ को यदि कुछ वक़्त के लिए टाल दिया जाए, तो बाद में सोचने पर अपनी तुच्छता/महत्वहीनता को आसानी से स्वीकार किया जा सकता है.
_ क्योंकि जब हम लोगों को समझने लगते हैं तो शांत होने लगते हैं.!!