सुविचार 4126

जीवन में वही व्यक्ति उन्नत्ति कर सकता है,,

_ जो स्वयं ख़ुद को उपदेश देना जानता हो,,

मस्त विचार 4000

लफ्जो की दहलीज पर, घायल ज़ुबान है……!!

_ कोई तन्हाई से तो कोई, महफ़िल से परेशान है..!!

ज़ुबान अगर तेज़ हो तो खंजर से भी गहरा दर्द करती है.

सुविचार 4125

धरती पर जीवन क्रमिक- विकास के लिए है.

_ हर जीवन में ज्ञान, कौशल और मनोभावों का विकास होता जाता है.

सुविचार 4124

कभी कभी धागे बड़े कमजोर चुन लेते हैं हम,

_ और फिर पूरी उम्र गांठ बांधने में ही निकल जाती है..

कभी-कभी हम गलत धागे चुन लेते हैं,

_ ज़िन्दगी सुलझाने में ही बीत जाती है !!

सुविचार 4123

जिंदगी की किताबों में भी वो सबक दर्ज नहीं होता, जो एक गलती सिखाती है.
जो आप सीखने में विफल रहते हैं वह आपको सबक सिखा सकता है.
कुछ लोग कभी भी हमारे नहीं हो सकते,

_वो तो बस किसी सबक के तौर पर हमारी ज़िंदगी में आते हैं.

चीजों को सही बनाने के लिए बहुत कुछ की आवश्यकता नहीं होती है,

_ जीवन के रास्ते में अगर सबक सीखना है तो ..छोटी छोटी बातों से सीखना चाहिए.

सुविचार 4122

अंधेरे को हटाने में समय बर्बाद मत करिये परंतु दिये को जलाने में समय लगाइये ;

_ दूसरों को नीचा दिखाने में नहीं, खुद को ऊँचा उठाने में समय लगाइये.

मस्त विचार 3997

रास्ते खुद ब खुद मंज़िलो के पते बताते हैं,

_ मील के पत्थर, जब हमसफ़र बन जाते हैं..

ये जग एक सराय है मंज़िल नहीं, मुसाफिर की तरह रहो..!!
आपको कोई रास्ता तो दिखा सकता है, लेकिन मंज़िल तक तो खुद ही पहुंचना होगा.

_ मगर सही रास्ता दिखाने में लगी effort को भी लोग appreciate नहीं करते.!!
रास्ता जितना कठिन होता है, मंज़िल पर पहुंच कर उतनी ही राहत मिलती है.

(मंज़िल चाहे जैसी भी हो.)

मस्त विचार 3996

अगर बुरी आदतों को सही समय पर नही बदला जाता है,

_तो वे आपके सही समय को गलत में बदल देगी.

जब तक आप अपनी आदतें नहीं बदलेंगे,

_ तब तक आप अपना जीवन नहीं बदल सकते.!!

कुछ आदतें बिना किसी पीड़ा में फंसे छोड़ देनी चाहिए, बिना उसके किसी विकल्प के.. “बस संकल्प के साथ.”

_विकल्प से छूटी आदतें पीछा करती हैं.

_ दंश से छूटी आदत यादों के सीने में खंजर चुभोती हैं, लेकिन जिसे हम सहजता से छोड़ देते हैं, वो मन में गौरव पैदा करती है.

_आदमी कुछ भी छोड़ सकता है. “कुछ भी”

 _बस चाहना होता है..!!

“अब ज़िंदगी अच्छे- बुरे में विकल्प नहीं देती,

_ विकल्प देती है बुरे या बहुत बुरे में.. और कभी कभी हम ख़ुद बहुत बुरा होना चुनते हैं.!!

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