मस्त विचार 3997
_ मील के पत्थर, जब हमसफ़र बन जाते हैं..
(मंज़िल चाहे जैसी भी हो.)
_ मील के पत्थर, जब हमसफ़र बन जाते हैं..
(मंज़िल चाहे जैसी भी हो.)
_तो वे आपके सही समय को गलत में बदल देगी.
_ तब तक आप अपना जीवन नहीं बदल सकते.!!
_विकल्प से छूटी आदतें पीछा करती हैं.
_ दंश से छूटी आदत यादों के सीने में खंजर चुभोती हैं, लेकिन जिसे हम सहजता से छोड़ देते हैं, वो मन में गौरव पैदा करती है.
_आदमी कुछ भी छोड़ सकता है. “कुछ भी”
_बस चाहना होता है..!!
_ विकल्प देती है बुरे या बहुत बुरे में.. और कभी कभी हम ख़ुद बहुत बुरा होना चुनते हैं.!!
यदि आपके पास धैर्य की कमी है, तो आप एक छोटी सी बाधा का भी सामना करने पर भी साहस खो देते हैं, _ सबर रखो, _ आस्था या विशवास रखो _ आप बहुत दूर जाओगे.
_कब आपको हंसना हैं, और कब आपको रोना हैं...
_बल्कि हमारे साथ जुड़े लोगों की पहचान करवाने आती हैं !!
_ लेकिन जो उसने सिखाया, उसे कभी मत भूलो !!
_जो कहते थे तुम कुछ भी कहो अच्छा लगता है !!
_अपने ही संबंध में सोच लेना, वही काफी है !!
_तराशने पर कोई एक आध ही अपना निकलता है…!!
_जो था ही नहीं अपना उसे खोना कैसा..!!