सुविचार 4892
रूपान्तरण परिवर्तन की माँग करता है, विकास भी परिवर्तन की ही माँग करता है.
अपने आप को अपने शरीर से परिभाषित मत करो .. यह अनंत है जो ब्रह्मांड में हर चीज से जुड़ा है.
ये_दुनिया दिखाती शहद है पिलाती ज़हर है.
जीवन में न तो लोग स्थिर हैं न ही यहां की स्थितियाँ…!!
सभी मुझसे अधिक भयावह अनुभव लिए बैठे हैं.
आप अपने आप में क्या देखते हो, वही सब कुछ है.