मस्त विचार 4640
“लोग तो आदतन मजबूर हैं…मारेंगे पत्थर ;
क्यूँ न हम शीशे से कह दें…टूटा न करें !”
क्यूँ न हम शीशे से कह दें…टूटा न करें !”
..यदि ना करो तो याद रखते हैं !
तुम पर नजर पड़ी और गुमराह हो गये..!!!
जो चट्टान से ही ना उलझे वो झरना किस काम का..
_ बस जो अनावश्यक था, उसे गिरने दिया..- और उसी में हल्कापन मिला.”
_ जो छोड़ना सीख गया, वही नए साल को सच में जी पाता है.
देखना ये है चराग़ों का सफ़र कितना है..!!
तय करें कि आप क्या चाहते हैं .. विश्वास करें कि आप इसे प्राप्त कर सकते हैं, विश्वास करें कि आप इसके लायक हैं, विश्वास करें कि यह आपके लिए संभव है.