मस्त विचार 4709
सफ़लता के बाद ही लोग हमे गम्भीरता से लेते हैं….
उसके पहले हमारी कोई औक़ात नहीं होती..!!
उसके पहले हमारी कोई औक़ात नहीं होती..!!
*मगर…लहरों को…सुकून क्यूँ नहीं_____*
किसी की कहानी में शायद मैं भी गलत हूँ….
इसलिए सफर जारी रखिए..!!
बज तो रहा है मगर ….फिर भी बेआवाज़ है….
इसके बीच में मैं जितना हो सके स्वयं को व्यस्त रखता हूं.”
” अतीत को केवल इसलिए मिटाने की कोशिश नहीं की जा सकती है और नहीं करना चाहिए क्योंकि यह वर्तमान के अनुकूल नहीं है “
रोज नही तो उस पल हम याद तुम्हे आएंगे..
यही परेशानीयों की खास वज़ह भी है “