मस्त विचार 4783
चार दिन की ज़िंदगी मैं किस किस से कतरा के चलूँ,
ख़ाक हूँ मैं, ख़ाक पर क्या ख़ाक इतरा के चलूँ..
ख़ाक हूँ मैं, ख़ाक पर क्या ख़ाक इतरा के चलूँ..
ख़ुशी के लिये ही अब ये तलाश बंद कर दी.”
दुःख इस बात का होता है, कि वह हमें भूल गया है… जिसे हम याद कर रहे हैं….
अपनी आवाज न उठाएं, _ अपने तर्क में सुधार करें.
जिसे हमारे होने से फ़र्क पड़ता है _ _ और ना होने से भी..
यदि _ संतान को सब कुछ _ माता_पिता से ही मिल जाएगा,
तब सन्तान को _ अपने आप को _ साबित करने का _ मौका ही नहीं मिलेगा,
यह भी एक प्रकार की _ नाइंसाफी है.