मस्त विचार 4023

मैं जीतने वालों से बेशक हार गया…

_ पर कोशिश न करने वालों से जीत गया..!

जो खेल __ खेल रहे हो आप _ क्या गँवाओगे क्या पाओगे ;

_ हम हार इस कदर जाएंगे कि आप जीत कर भी पछताओगे !!

सुविचार 4148

बहस में ज्ञानी और सच्चे लोग अक्सर मौन हो जाते हैं,

_ अज्ञानी और झूठे लोग खुद को सही साबित करने के लिए जरुरत से ज्यादा दलीलें पेश करते हैं.

दो इंसान कभी एक जैसा सोच नहीं सकते..- इसलिए सारी बहसें अर्थहीन हैं.!!
वो अपने झूठे मद में चूर है, दिमाग ठिकाने आएगा तब तक वक़्त आगे बढ़ चूका होगा !!
मैं फालतू बहस नहीं करता, क्योंकि मुझे अच्छी तरह पता है कि ऐसी बहस में उतरते ही इंसान खुद ही अपनी समझ पर सवाल खड़े कर देता है.!!

मस्त विचार 4022

“तुम्हारे साथ खामोश भी रहूं तो बातें पूरी हो जाती है,

_ तुम में, तुम से, और तुम पर ही मेरी दुनिया पूरी हो जाती है !!

सुविचार 4147

सिवाय हमारे विचारों के हमें कोई और नहीं बांधता.

_ सिवाय हमारे डर के हमें कोई और नहीं रोकता, सब कुछ हमारे अंदर ही है..

Collection of Thought 990

According to your plan live your life, not according to what others want you to do….

अपनी योजना के अनुसार अपना जीवन जिएं, न कि उस अनुसार जो दूसरे आपसे चाहते हैं..

सुविचार 4146

इस बात को कम महत्व दें कि दूसरे लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं:

_ दूसरे लोग आपके नियंत्रण से बाहर होते हैं..

मस्त विचार 4021

बहोत दिनो बाद हँसी आई, _ कम्बख्त अपने ही हाल पर !!
जब हँसी असली न हो तो..

_हम हँसते हुए खाली डिब्बे की तरह बजते हैं..!!

जब मैं बहुत ज़्यादा, बेबात हँसने वाले लोगों को देखता था तो सोचती था कि उनमें ज़रूर पागलपन के कुछ तत्व हैं.

_ यह अहसास मुझे बहुत बाद में हुआ कि थोड़ा पागल होने में कोई बुराई नहीं है,

_ कभी-कभार बेबात भी हँस लेना चाहिए.

_ (वेरी स्ट्रेंज). धीरे-धीरे हँसने की आदत पड़ जाएगी तो आपकी हँसी चाहे ऊपरी हो, लोग आपसे खुश रहेंगे.

मस्त विचार 4020

सही की पहचान नही है मुझको,,

_ मुझे गलत कहने वाले तेरी बात में दम है.

सब कुछ सरसरी सुनते हैं आप,

_ कभी तो सही से जानिए कि.. “क्या हुआ था”

सुविचार 4145

बहुत फ़र्क होता हैं जरुरी और जरुरत में,

_ कभी-कभी हम जरुरत होते हैं ज़रूरी नहीं.!!

मस्त विचार 4019

तुम्हे खोजते-खोजते लापता हो गया हूँ खुद में ही…

_ कहीं मिल जाऊँ तो मुझे जरूर बता देना..!!

इक रोज़ उसे एहसास होगा कि उसने क्या खो दिया है,

_ लेकिन तब उस खोए हुए को चाहकर भी नहीं खोज पाओगे..

जो रुक गए, वे यह नहीं समझते कि रुकने से उन्होंने कितना कुछ खो दिया.!!
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