मस्त विचार 3871
_अगर अहमियत होगी तो लोग खुद याद कर लेंगे..
_अगर अहमियत होगी तो लोग खुद याद कर लेंगे..
ताकतवर से सभी संधि चाहते हैं, यही दुनिया का रिवाज़ है “
_ बस मैं ही ज़रूरत से ज़्यादा उम्मीद कर बैठा.
आप लोगों के कार्यों को नियंत्रित नहीं कर सकते, _ आप केवल यह नियंत्रित कर सकते हैं कि आप उन कार्यों पर कैसे प्रतिक्रिया करते हैं.
_इसे यूँ समझें कि अपनी इज्जत आपको खुद ही अर्जित करनी पड़ती है.
_आप कोई भी हो, हमें फर्क नहीं पड़ता.
_ यहां किसी को फर्क नहीं पड़ता तेरे हाल से..!!
_ स्वाभाविक रूप से मन में गलत कर्मों का अपराधबोध भी बना रहता है.
_ जो हो गया उसे मिटाया तो नहीं जा सकता लेकिन इंसान को हर दिन अपराध बोध की आग में जलने को मजबूर होना पड़ता है.