मस्त विचार 3871

अच्छा नहीं लगता बार बार किसी को अपनी याद दिलाना,

_अगर अहमियत होगी तो लोग खुद याद कर लेंगे..

मस्त विचार 3870

“हमले हमेशा कमजोरों पर ही किये जाते हैं,

ताकतवर से सभी संधि चाहते हैं, यही दुनिया का रिवाज़ है “

सुविचार 3995

किसी व्यक्ति के कार्य से यदि आपको घृणा है तो आपको अधिकार है कि उसे ठीक करें, _ लेकिन उस व्यक्ति से घृणा न करें. व्यक्ति और उसके कार्य दो अलग- अलग चीजें हैं.

मस्त विचार 3869

वो बिलकुल ठीक हैं अपनी जगह,

_ बस मैं ही ज़रूरत से ज़्यादा उम्मीद कर बैठा.

यह जवाब देना कि “मैं ठीक हूँ” और “ठीक होने में” बड़ा फासला होता है !!
ज़िंदगी में जिस चीज़ की आपको सबसे ज़्यादा ज़रूरत होगी,

_ वही चीज़ आपको कभी आसानी से नहीं मिलेगी.!!

सुविचार 3994

यदि मन में समभाव की स्थिति आ जाए तो फिर परिस्थितियों और वातावरण का उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता और भीतर भी कोई खलबली नहीं होती.

Collection of Thought 960

You can’t control people’s actions. All you can control is how you react to those actions.

आप लोगों के कार्यों को नियंत्रित नहीं कर सकते, _ आप केवल यह नियंत्रित कर सकते हैं कि आप उन कार्यों पर कैसे प्रतिक्रिया करते हैं.

सुविचार 3993

दूसरों को इज्जत देने और स्वयं को तुच्छ समझने वाले की सभी इज्जत करते हैं.

_इसे यूँ समझें कि अपनी इज्जत आपको खुद ही अर्जित करनी पड़ती है.

मस्त विचार 3868

हमारा अपना भी एक रूतबा है ” जनाब “……!!

_आप कोई भी हो, हमें फर्क नहीं पड़ता.

ख़ुद को दूर रखना दुनिया के जाल से ;

_ यहां किसी को फर्क नहीं पड़ता तेरे हाल से..!!

सुविचार 3992

कर्म का उद्देश्य जीवन को अभिव्यक्त करना है. यदि जीवन प्राकृतिक रूप से और बिना किसी को हानि पहुँचाए अभिव्यक्त होता है तो इसमें न तो कोई पाप है और न ही कोई पुण्य.

कई कर्म स्वाभाविक रूप से होते हैं लेकिन बाद में पता चलता है कि वे गलत थे.

_ स्वाभाविक रूप से मन में गलत कर्मों का अपराधबोध भी बना रहता है.

_ जो हो गया उसे मिटाया तो नहीं जा सकता लेकिन इंसान को हर दिन अपराध बोध की आग में जलने को मजबूर होना पड़ता है.

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