नासमझ ही रहते तो ठीक था, _ उलझने बढ़ गयी हैं जबसे समझदार हुए.
मस्त विचार 3834
यूँ ही तो नहीं, हर ज़ख्म हमारे हिस्से आया होगा,
_ हमारी ही खताओं ने ज़रूर, इन्हें बुलाया होगा.
सुविचार 3959
कड़वा है लेकिन सच है कि इंसान सबसे ज्यादा ज़लील अपनी पसंद के लोगों से ही होता है.
कड़वा है लेकिन सच है कि इंसान सबसे ज्यादा ज़लील अपनी पसंद के लोगों से ही होता है.
मस्त विचार 3833
काश इंसान भी नोटों की तरह होते,
_ रोशनी की तरफ करके_देख लेते असली है या नकली..
सुविचार 3958
यदि जीवन के प्रति हम अपने विचारों को बदल लेते हैं तो _ हमारी व्यर्थ कि चिंताएँ स्वतः दूर हो जाएँगी.
यदि जीवन के प्रति हम अपने विचारों को बदल लेते हैं तो _ हमारी व्यर्थ कि चिंताएँ स्वतः दूर हो जाएँगी.
चिंता पूरी तरह से समय की बर्बादी है. _ यह कुछ भी नहीं बदलता है. बस यही है कि यह आपका आनंद चुरा लेता है और आपको कुछ भी न करने में व्यस्त रखता है.
Worry is a total waste of time. It doesn’t change anything. All is does it steal your joy and keep you very busy doing nothing.
Collection of Thought 953
“Men do not part from anything without regret, and even the places, things and people that have made them the most unhappy, they do not abandon them without suffering.”
“मनुष्य बिना पछतावे के किसी भी चीज़ से अलग नहीं होते हैं, और यहां तक कि जिन जगहों, चीज़ों और लोगों ने उन्हें सबसे अधिक दुखी किया है, उन्हें भी वे बिना कष्ट सहे नहीं छोड़ते हैं”
Never regret anything that has happened in your life, it cannot be changed, undone or forgotten.
So take it as a lesson learned and move on.
आपके जीवन में जो कुछ भी हुआ है उस पर कभी पछतावा न करें, इसे बदला नहीं जा सकता, पूर्ववत नहीं किया जा सकता या भुलाया नहीं जा सकता.
इसलिए इसे सीखे गए सबक के रूप में लें और आगे बढ़ें.
Every happening is a lesson, a message.
हर घटना एक सबक है, एक संदेश है.
मस्त विचार 3832
वक्त के मुट्टी से जैसे हर पल जिंदगी छूट रही है,
_ मै वो दरख़्त हूं जिसकी रोज एक शाख़ टूट रही है…
सुविचार 3957
मन को इतना मजबूत बनाओ कि, किसी के भी व्यवहार से मन की शांति भंग न होने पाये..!!
मन को इतना मजबूत बनाओ कि, किसी के भी व्यवहार से मन की शांति भंग न होने पाये..!!
मस्त विचार 3831
एक उम्र गुज़र गयी तुझे चाहते चाहते ..,
_ तुझे एक पल नही लगा किसी ग़ैर को अपना बनाते.!!
सुविचार 3956
हमारी नियति को गढ़ने के लिये मन ही एकमात्र उपलब्ध साधन है.
हमारी नियति को गढ़ने के लिये मन ही एकमात्र उपलब्ध साधन है.






