मस्त विचार 4588
न मैं गिरा ना मेरी उम्मीदों के मीनार गिरे,
पर लोग मुझे गिराने में कई बार गिरे..
पर लोग मुझे गिराने में कई बार गिरे..
लेकिन हक़ीक़त में वही बड़ा माना जाता है ” जो ज्ञान में बड़ा है “
_ या तो हार मानकर बैठ जाएं या लड़ें और जीत की गुंजाइश पैदा करें.
परिंदे छत पर आते हैं तो दाना कम नहीं होता…!!
आप की चमक उतनी ही बढ़ जाएगी.
मैं हारा नहीं कभी बस जीतने से रह गया…
भविष्य उनका है जो अपने सपनों की सुंदरता में विश्वास करते हैं.
आने वाला कल जीवन को जीने का दूसरा मौका..