मस्त विचार 4716
बर्बादियों का शोक मनाना फिजूल था,
बर्बादियों का जश्न मनाता चला गया..
बर्बादियों का जश्न मनाता चला गया..
जब हम अंदर बाहर दोनों तरह से मजबूत हों हर बात के प्रति जागरूक हों.
” जीवन के सभी अंधकार मिटा देती है “…
” बैठना और नोटिस करना आसान है, जो मुश्किल है वह है उठना और कार्रवाई करना “
ख़ुद की बताने का मन नहीं करता…
अमीर की बकवास पर भी “हां जी : हां जी” होय..
_ फैसला लेकर उसे सही साबित करना काबिलियत है…
उससे कहीं ज्यादा आपको मजबूत बना देती हैं…
डरना नही यारा, धीरे धीरे निखर भी रहे हो तुम..
देखना नदियां खुद ही मिलने आएंगी..