सुविचार 4899
ज्ञानी का अर्थ है, वह जिसकी नजर ‘दूसरे से हट गई _ न जो दूसरे को दुख पहुंचाने में उत्सुक है और न दूसरे को सुख पहुंचाने में उत्सुक है _ जो अपने को जगाने में उत्सुक है.
क्योंकि यहां हर शख्स अपने आप में स्पेशल है.
और निकल पड़ो ऊँची उड़ान के लिए…एक लंबी राह लिए, मंज़िल की तलाश में…!!!
कितना भी लिखो _ कुछ ना कुछ _ बाकी रह जाता है..
जैसे समय वो गुजर रहा है उसको आप ना बदल सकते हैं और ना ही रोक सकते हैं.
जब आप उन्हें उन्हीं की तरह अनदेखा करना सीख जाओगे.
जो दूसरों को क्षमा नहीं कर सकता, वह उस पुल को तोड़ देता है जिस पर उसे स्वयं गुजरना पड़ता है; क्योंकि हर आदमी को क्षमा करने की आवश्यकता है.
सब भ्रम होते हैं, जो वक्त के साथ टूट जाते हैं..