मस्त विचार 4909

कुछ रिश्ते अधूरे रहकर ज़्यादा खूबसूरत लगते हैं..

_ शायद हमारा रिश्ता भी वैसा ही है..

_ जहाँ मिलने की ख्वाहिश से ज़्यादा ना मिलने की कसक ज़िंदा रहनी चाहिए…!

सुविचार 5034

सफलता अपने साथ जलन- ईर्ष्या भी लाती है और कुछ लोग इसी ईर्ष्या के कारण आपकी छवि खराब करने लगते हैं.!!

Quotes by Ishq Banaras

हर तरफ भाग-दौड़ देख रहा हूं, मानों हर किसी ने अपने वर्तमान को गिरवी रख दिया है सिर्फ उस भविष्य के लिए जिसके बारे में कोई भी निश्चित नहीं है.

_ कितनी अजीब बात है कि लोग कल के लिए जीते हैं और आज को ऐसे कुचल डालते हैं जैसे उसकी कोई कीमत ही न हो.

_ जबकि सच यही है कि कौन जाने कल किसका होगा, कौन जिंदा रहेगा और कौन सिर्फ याद बन जाएगा.

_ भविष्य की चिंता में खोए लोग अक्सर वर्तमान के छोटे-छोटे सुख गंवा देते हैं.

_ उनकी आँखों में सिर्फ एक दौड़ होती है जमा करने की, पाने की, सुरक्षित कर लेने की.

_ पर ये सब जमा करके किसके लिए ? किस काम का ?

_ जब आज ही जीने की फुर्सत न मिले, तो कल का खजाना किस काम आएगा ?

_ मुझे लगता है, जो लोग वर्तमान की साँसों को दबाकर भविष्य की थैलियाँ भरने में लगे रहते हैं, वे सबसे बड़े मूर्ख हैं.

_ क्योंकि वे न इस पल के रहते हैं न अगले पल के.

_ जैसे एक प्यासा आदमी जो पानी से भरा घड़ा देखकर भी मर जाए, क्योंकि उसने कभी एक घूंट पीने की फुर्सत ही नहीं निकाली.

_ असल में जीना तो आज है. कल का कोई भरोसा नहीं.

_ लेकिन अफसोस, ये सबसे सरल बात समझने में सबसे कठिन लगती है.

– Ishq Banaras

हम सब शायद अपनी-अपनी ज़िंदगी में कुछ ऐसे दर्द लेकर चल रहे हैं, जिनका ज़िक्र किसी से नहीं करते.

_ चेहरे पर मुस्कान रहती है, आवाज़ में सामान्य होने का अभिनय रहता है और हम दुनिया को यकीन दिलाते रहते हैं कि सब ठीक है.

_ मगर सच तो यह है कि हर मुस्कुराते चेहरे के पीछे एक ऐसी कहानी छिपी हो सकती है, जिसे सुनने वाला शायद ही कोई हो.

_ कुछ दर्द शब्दों में कहे नहीं जाते, बस आँखों में उतर जाते हैं और इंसान उन्हें उम्र भर अपने भीतर लिए घूमता रहता है.

_ मैं अक्सर सोचता हूँ कि आखिर हम उम्मीदों से इतने थक क्यों गए हैं ?

_ शायद इसलिए कि उम्मीद जितनी खूबसूरत होती है, उसके टूटने की आवाज़ उतनी ही गहरी होती है.

_ हम हर बार सोचते हैं—कल बेहतर होगा, कोई हमें समझेगा, कोई लौट आएगा, हालात बदलेंगे, जिंदगी फिर मुस्कुराएगी.

_ लेकिन जब बार-बार हमारी उम्मीदें खाली हाथ लौटती हैं, तो धीरे-धीरे मन किसी चीज़ की प्रतीक्षा करना छोड़ देता है.

_ फिर इंसान दुखी कम और उदासीन ज्यादा हो जाता है ; उसे खुशी की चाह भी डराने लगती है, क्योंकि वह जानता है कि हर उम्मीद के पीछे टूटने का एक डर छिपा है.

_ दिन गुजरते रहते हैं.

_ वही जिम्मेदारियाँ, वही भागदौड़, वही चेहरे और वही औपचारिक बातचीत.

_ हम हँसते हैं, दूसरों की बातें सुनते हैं, उनकी परेशानियों में उनका साथ देते हैं और फिर अपनी परेशानियों को लेकर चुपचाप घर लौट आते हैं.

_ अजीब बात है न—हम दूसरों के आँसू पहचान लेते हैं, लेकिन अपनी आँखों की नमी छुपाने में पूरी उम्र लगा देते हैं.

_ शायद इसलिए कि हमें बचपन से सिखाया गया कि मजबूत बनो, मगर किसी ने यह नहीं बताया कि मजबूत होने का मतलब हर दर्द को अकेले सहना नहीं होता.

_ सबसे मुश्किल वक्त अक्सर रात का होता है.

_ दिन के शोर में इंसान खुद से बचा रहता है, लेकिन रात जब कमरे की दीवारों पर सन्नाटा उतरता है, तब भीतर दबे हुए सारे सवाल जाग जाते हैं.

_ पुरानी बातें याद आती हैं, अधूरे रिश्ते सामने आ खड़े होते हैं, कुछ चेहरे बिना बुलाए आँखों में उतर आते हैं और मन पूछता है—आखिर इतना सब सहकर भी हम किस चीज़ का इंतज़ार कर रहे हैं ?

_ कितनी बार मन करता है कि किसी के सामने बैठकर सब कह दें, बिना कुछ छुपाए, बिना मजबूत बनने का अभिनय किए.

_ लेकिन फिर डर लगता है कि कहीं सामने वाला हमारी कहानी सुनकर भी हमें समझ न पाए और तब शब्द गले में ही रह जाते हैं.

_ धीरे-धीरे इंसान अपने दर्द के साथ समझौता करना सीख लेता है.

_ मुस्कुराना उसकी आदत बन जाता है, चुप रहना उसका स्वभाव और अकेले सह लेना उसकी मजबूरी.

_ बाहर से देखने वाले को लगता है कि वह बहुत संभला हुआ है, मगर भीतर वह हर दिन खुद को थोड़ा-थोड़ा समेट रहा होता है.

_ कभी-कभी तो ऐसा भी लगता है कि सुकून कोई बहुत बड़ी चीज़ नहीं, बस कुछ पल ऐसे मिल जाएँ जहाँ मन को किसी बात का जवाब न देना पड़े, किसी रिश्ते को निभाना न पड़े और किसी के सामने अपने ठीक होने का प्रमाण न देना पड़े.

_ फिर भी जिंदगी पूरी तरह बेरहम नहीं होती.

_ कभी किसी पुराने गीत की धुन अचानक भीतर का कोई बंद दरवाज़ा खोल देती है.

_ किसी किताब की एक पंक्ति अपनेपन का एहसास करा देती है.

_ किसी पुराने मित्र का संदेश, किसी अपने की छोटी-सी चिंता या खिड़की से आती सुबह की हल्की रोशनी यह याद दिला देती है कि जिंदगी में अभी सब कुछ खत्म नहीं हुआ है.

_ शायद सुकून हमेशा बड़ी खुशियों में नहीं मिलता ; कभी-कभी वह उन छोटे-छोटे पलों में छिपा होता है, जिन्हें हम अपनी व्यस्त जिंदगी में देखने से चूक जाते हैं.

_ हम अक्सर सोचते हैं कि दर्द कभी खत्म नहीं होगा.

_ लेकिन शायद हर दर्द का खत्म होना जरूरी भी नहीं होता.

_ कुछ दर्द हमें बदलने आते हैं, कुछ हमें रिश्तों की कीमत समझाने, कुछ हमें अपने भीतर झाँकना सिखाने और कुछ हमें यह बताने कि हम जितना खुद को कमजोर समझते हैं, उससे कहीं ज्यादा सहने की क्षमता हमारे भीतर है.

_ वक्त हर घाव को मिटा दे, यह जरूरी नहीं ; मगर वह उसके साथ जीना जरूर सिखा देता है.

_ शायद जिंदगी का सच यही है कि हममें से कोई भी पूरी तरह बेदाग नहीं है.

_ हर किसी के भीतर कोई अधूरी कहानी है, कोई खोया हुआ रिश्ता है, कोई ऐसा वादा है जिसे निभाया नहीं जा सका, कोई ऐसा अपना है जिसे चाहकर भी रोक नहीं पाए और कोई ऐसा समय है जिसे चाहकर भी वापस नहीं ला सकते.

_ हम सब अपने-अपने हिस्से की खामोशी लिए इस दुनिया में चलते रहते हैं.

_ और शायद इसी का नाम जिंदगी है.

_ टूटकर भी बिखर न जाना, थककर भी अगली सुबह उठ जाना, आँखों में नमी होते हुए भी किसी और के चेहरे पर मुस्कान लाने की कोशिश करना.

_ हम सब अपने भीतर कुछ ऐसा ढो रहे हैं, जिसका वजन दुनिया को दिखाई नहीं देता.

_ फिर भी कदम चलते रहते हैं, दिन गुजरते रहते हैं और उम्मीद की कोई बहुत छोटी-सी लौ कहीं भीतर जलती रहती है.

_ क्योंकि शायद जिंदगी का सबसे खूबसूरत सच यही है कि अँधेरा चाहे कितना भी लंबा क्यों न हो, मन के किसी कोने में सुबह के लौट आने की संभावना हमेशा बची रहती है.

_ बस हमें उस संभावना को पूरी तरह मरने नहीं देना चाहिए.

_ कभी-कभी खुद के लिए भी उतनी ही नरमी बचाकर रखनी चाहिए, जितनी हम दूसरों के दर्द के लिए रखते हैं.

_ हम सब अपने-अपने दर्द के साथ जी रहे हैं.. कोई उसे शब्द दे देता है, कोई आँसुओं में बहा देता है और कोई मुस्कुराकर छुपा लेता है.

_ मगर हर दिल के भीतर कहीं न कहीं एक छोटी-सी पुकार जरूर होती है.

_ कोई हमें भी समझ ले.. बिना कुछ पूछे, बिना कोई फैसला सुनाए.

_ शायद इंसान को हमेशा समाधान नहीं चाहिए होता, कभी-कभी उसे बस इतना चाहिए होता है कि कोई उसके पास बैठकर कह दे !

_ तुम्हें हर वक्त मजबूत बने रहने की जरूरत नहीं है.

– Ishq Banaras

कभी-कभी इस भीड़-भरी दुनिया में कुछ चेहरे ऐसे मिल जाते हैं जो किसी ऊँचाई, किसी प्रसिद्धि, किसी बड़ी जीत की दौड़ में नहीं हैं.

_ उनके जीवन की कोई चमकदार तमन्ना नहीं होती। न किसी मंच की ख्वाहिश, न किसी ताली की चाह.

_ वे बस चाहते हैं कि उनके भीतर जो कोई अनकहा दर्द पल रहा है, वो किसी तरह कम हो जाए.

_ उनकी आँखों में कोई सपनों का समंदर नहीं, बस थोड़ा सा सुकून है जो हर रात की नींद से पहले खोजते हैं.

_ उन्हें दुनिया से बहुत नहीं चाहिए, बस मन का वह बोझ थोड़ा हल्का हो जाए जो हर सुबह उनके कंधों पर चुपचाप चढ़ जाता है बिना पूछे, बिना बताए.

_ कुछ लोग ऐसे होते हैं जो दूसरों की मुस्कान में अपने जीने का कारण ढूंढते हैं, पर खुद की मुस्कान कई बार भूल चुके होते हैं.

_ जिनकी आत्मा रोज़ किसी अनजाने अपराधबोध, किसी अधूरे रिश्ते, किसी भूले हुए वादे या खो चुके समय की टीस से बोझिल हो जाती है.

_ वे रोज मंदिर में नहीं जाते, लेकिन भीतर कोई प्रार्थना हर रात करवटें बदलती है कि एक दिन ऐसा आए जब उनकी आत्मा शांत हो जाए, कि कोई आँसू भीतर बहने से पहले ही किसी की हथेली में थम जाए, कि कोई चुप्पी बस एक बार समझ ली जाए बिना कहे.

_ वे लोग आखिरी विदा से नहीं डरते, बस यह चाहते हैं कि वह विदा सुकून में हो, शांति में हो, ऐसे कि नींद में कोई सोच न जागे, ऐसे कि मृत्यु से पहले जीवन कुछ हल्का लगे.

_ कई बार ऐसे लोग हमारे बहुत करीब होते हैं और हम उन्हें पहचान नहीं पाते, क्योंकि वे बोलते कम हैं, सहते ज़्यादा हैं. _ वे शोर नहीं करते, सिर्फ़ थक कर मुस्कुरा देते हैं.

_ और शायद इस समाज की सबसे बड़ी चूक यही है कि वह उन्हीं की ओर सबसे कम देखता है जो सबसे ज़्यादा थके हुए होते हैं.

– Ishq Banaras

एक उम्र, एक मोड़ ऐसा जरूर आता है, _ जब मन को यह समझाना पड़ता है कि हर उस इंसान के दिल में हमेशा अपनी जगह बनाए रखना संभव नहीं, जिसे हमने कभी अपना समझा था.

_ कुछ लोग हमारे जीवन में बहुत गहराई से आते हैं, हमारी आदतों, हमारी स्मृतियों और हमारी भावनाओं का हिस्सा बन जाते हैं,

_ इसलिए जब उनके भीतर हमारे लिए पहले जैसा अपनापन नहीं बचता, तो सबसे पहले हम खुद को कटघरे में खड़ा कर देते हैं.

_ सोचते हैं—हमसे कहाँ कमी रह गई, हमने क्या कम किया, ऐसा क्या बदल गया कि जो कभी इतने अपने थे, आज इतने दूर हो गए.

_ लेकिन शायद हर दूरी के पीछे कोई गलती नहीं होती.

_ कुछ रिश्ते बस अपने हिस्से की धूप लेकर आते हैं, थोड़ी देर हमारे साथ चलते हैं और फिर समय की किसी अनदेखी राह पर हमसे अलग हो जाते हैं.

_ यह स्वीकार करना कठिन है, मगर जीवन की कुछ सच्चाइयाँ ऐसी ही होती हैं—उन्हें समझने में देर लगती है, पर समझ आ जाएँ तो मन बहुत कुछ छोड़ देना सीख जाता है.

_ हम अक्सर अपने स्नेह को किसी स्थायी वचन की तरह जीते हैं.

_ किसी के लिए अपना समय बचाते हैं, उसकी खामोशियाँ पढ़ते हैं, उसकी परेशानियों में उसके साथ खड़े रहते हैं और मन ही मन मान लेते हैं कि इतनी सच्चाई, इतना अपनापन और इतना समर्पण शायद हमें उसके जीवन में हमेशा के लिए जगह दे देगा.

_ लेकिन रिश्ते केवल हमारे दिए हुए से नहीं चलते; उनमें सामने वाले का मन, उसकी परिस्थितियाँ, उसकी जरूरतें और उसकी बदलती प्राथमिकताएँ भी उतनी ही बड़ी भूमिका निभाती हैं.

_ कभी-कभी हम किसी के जीवन में बहुत जरूरी होते हैं, और फिर एक दिन बिना किसी घोषणा के हमारी जरूरत कम हो जाती है.

_ यही वह क्षण होता है जब हमें अपने प्रेम की कीमत नहीं, उसकी प्रकृति समझनी चाहिए.

_ किसी का बदल जाना हमेशा हमारे कम हो जाने का प्रमाण नहीं होता.

_ कई बार बस इतना होता है कि जिंदगी ने दोनों के रास्तों की दिशा बदल दी होती है.

_ और शायद यही मान लेना, अपने मन को सबसे बड़ी राहत देना है.

_ इस सत्य को देर से स्वीकार करने वाला मन सबसे ज़्यादा टूटता है.

_ वह हर बदलते व्यवहार में अपनी ही कमी खोजता है, हर दूरी को अपनी गलती मान लेता है.

_ वह स्वयं को साबित करने की थकाऊ दौड़ में लग जाता है, ये भूलकर कि प्रेम और अपनापन किसी प्रतियोगिता का परिणाम नहीं होते.

_ जितनी जल्दी ये समझ विकसित हो जाती है कि हर रिश्ता स्थायी नहीं होता, उतनी ही जल्दी मन अनावश्यक अपेक्षाओं से मुक्त होने लगता है.

_ किसी के जीवन से धीरे-धीरे बाहर हो जाना अपमान नहीं है, बल्कि समय का स्वाभाविक क्रम है.

_ लोग हमारे साथ अपनी ज़रूरत के मौसम तक चलते हैं.

_ जब मौसम बदलता है, रास्ते भी बदल जाते हैं.

_ इस बदलाव को स्वीकार न कर पाने से भीतर असंतोष, ईर्ष्या, और आत्मग्लानि जन्म लेती है.

_ जबकि स्वीकार कर लेने से मन में एक ठहराव आता है, एक शांति पैदा होती है कि जो गया, वह अपना काम पूरा कर चुका था.

_ खुद को हर हाल में प्रिय बनाए रखने की कोशिश सबसे बड़ा भावनात्मक बोझ है.

_ इससे व्यक्ति अपने स्वाभाविक स्वरूप को खो देता है, अपनी सीमाओं को अनदेखा करने लगता है.

_ वह अपनी ही तकलीफों को दबाकर दूसरों की स्वीकृति ढूँढता रहता है.

_ जबकि आत्म-सम्मान यही सिखाता है कि जहाँ अपनापन सहज न रहे, वहाँ ठहरना स्वयं के साथ अन्याय है.

_ ये स्वीकार करना कि आप किसी के केंद्र में नहीं हैं, आपको कमजोर नहीं बनाता बल्कि मजबूत करता है.

_ ये आपको सिखाता है कि भावनात्मक सुरक्षा बाहर नहीं, भीतर से आती है.

_ जब आप ये मान लेते हैं कि हर कोई आपके साथ नहीं रहेगा, तब आप उन रिश्तों को अधिक सच्चाई से जी पाते हैं जो वास्तव में मौजूद हैं.

_ तब आप कम लोगों से ही सही पर गहराई से जुड़ते हैं.

_ जीवन में सबसे बड़ा संतुलन यही है कि आप प्रेम करना बंद न करें, पर यह अपेक्षा भी न रखें कि प्रेम का उत्तर हमेशा समान रूप में मिलेगा.

_ किसी के प्रिय न रह जाना जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक नई समझ की शुरुआत है.

_ ये समझ आपको भावनात्मक चोटों से नहीं बचाती, पर आपको टूटने से जरूर बचा लेती है._ अंततः ये समझ लीजिए शांति उसी दिन आती है, जब आप ये मान लेते हैं कि आपका मूल्य किसी के स्वीकार या अस्वीकार से तय नहीं होता.

_ आप जैसे हैं, उतने ही पर्याप्त हैं.

_ जो लोग आपके जीवन में रहना चाहेंगे, वे बिना शर्त रहेंगे, और जो जाना चाहेंगे, उन्हें रोके रखना आपके सम्मान के विरुद्ध होगा.

_ इस सत्य को जितनी सहजता से स्वीकार कर लिया जाए, जीवन उतना ही हल्का, संतुलित और सच्चा हो जाता है.!!

-Ishq Banaras

एक उम्र के बाद धीरे-धीरे यह समझ आने लगता है कि हम हर किसी के लिए हमेशा उतने ही ख़ास नहीं रह सकते, जितने कभी हुआ करते थे.

_ कुछ रिश्ते वक़्त के साथ बदल जाते हैं, कुछ लोगों की प्राथमिकताएँ और कुछ के मन में हमारे लिए बची हुई जगह.

_ जो कभी हमारी आवाज़ सुनने के लिए बेचैन रहते थे, वे एक दिन हमारी ख़ामोशी को भी अनदेखा करने लगते हैं.

_ और सबसे ज़्यादा तकलीफ़ तब होती है, जब हमें यह एहसास होता है कि जिसे हमने अपने जीवन का अहम हिस्सा माना, उसकी ज़िंदगी में हम धीरे-धीरे एक मामूली-सा हिस्सा बनकर रह गए.

_ दिल इस बदलाव को आसानी से स्वीकार नहीं कर पाता, क्योंकि हम रिश्तों को केवल निभाते नहीं, उनमें अपनी भावनाएँ, अपनी उम्मीदें और अपने होने का एक हिस्सा भी छोड़ आते हैं.

_ हम अक्सर यह सोचकर किसी से जुड़ते हैं कि हमारा सच्चा अपनापन, हमारी परवाह और हमारा निस्वार्थ प्रेम एक दिन उसके दिल में हमारे लिए ऐसी जगह बना देगा, जिसे वक़्त भी नहीं बदल पाएगा.

_ हम उसकी ख़ुशी में ख़ुश होते हैं, उसके दुःख को अपना समझते हैं और कई बार अपनी परेशानियों को भी इसलिए छिपा लेते हैं, ताकि उसकी मुस्कान फीकी न पड़े.

_ हमें लगता है कि जिस रिश्ते में हमने इतना कुछ सच्चे मन से दिया है, वह रिश्ता हमें कभी पराया नहीं होने देगा.

_ लेकिन ज़िंदगी हमेशा हमारी भावनाओं के हिसाब से नहीं चलती.

_ कभी-कभी हम किसी के लिए उतना सब कुछ होते हैं, जितना वह उस वक़्त चाहता है, और फिर एक दिन उसकी ज़िंदगी बदलती है, उसकी ज़रूरतें बदलती हैं और हमारे लिए उसके भाव भी पहले जैसे नहीं रहते.

_ तब समझ आता है कि किसी को सच्चे दिल से चाहना हमारे हाथ में है, लेकिन उसके दिल में हमेशा वही जगह बनाए रखना हमारे हाथ में नहीं.

_ हम अक्सर ये मान बैठते हैं कि हमारा दिया हुआ समय, हमारी ईमानदारी, हमारा समर्पण किसी के जीवन में हमें स्थायी स्थान दिला देगा.

_ पर सच ये है कि किसी के प्रिय बने रहना हमारी योग्यता या नीयत पर नहीं, बल्कि सामने वाले की ज़रूरतों, मनःस्थिति और स्वार्थों पर भी निर्भर करता है.

_ जब तक आप किसी के लिए उपयोगी हैं, समझे जाते हैं ; और जिस दिन आपकी भूमिका बदल जाती है, उसी दिन भावनाएँ भी बदलने लगती हैं.

_ यह व्यक्तिगत असफलता नहीं है, यह मानवीय स्वभाव है.

_ इस बदलाव को स्वीकार करना आसान नहीं होता.

_ मन बार-बार बीते हुए दिनों में लौटता है, पुराने व्यवहार में आज के अपनापन को तलाशता है और उन सवालों के जवाब ढूँढ़ता रहता है, जिनका शायद कोई जवाब होता ही नहीं.

_ हम सोचते हैं कि आख़िर हमसे ऐसी क्या कमी रह गई, हमने कहाँ गलती की, हमारी कौन-सी बात बदल गई.

_ कभी-कभी तो हम सामने वाले के बदले हुए व्यवहार के लिए भी ख़ुद को ही ज़िम्मेदार मानने लगते हैं.

_ हम और अधिक समझने, और अधिक निभाने और ख़ुद को बार-बार साबित करने की कोशिश करते हैं, जबकि सच यह है कि हर बदलते रिश्ते के पीछे हमारी कोई गलती हो, यह ज़रूरी नहीं.

_ कुछ दूरियाँ किसी शिकायत से नहीं, वक़्त के साथ बदलती भावनाओं से पैदा होती हैं. _ और कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं, जिन्हें बचाने की कोशिश में हम ख़ुद से ही दूर होने लगते हैं.

_ किसी के जीवन से धीरे-धीरे बाहर हो जाना अपमान नहीं है, बल्कि समय का स्वाभाविक क्रम है.

_ लोग हमारे साथ अपनी ज़रूरत के मौसम तक चलते हैं.

_ जब मौसम बदलता है, रास्ते भी बदल जाते हैं.

_ इस बदलाव को स्वीकार न कर पाने से भीतर असंतोष, ईर्ष्या और आत्मग्लानि जन्म लेती है.

_ जबकि स्वीकार कर लेने से मन में एक ठहराव आता है, एक शांति पैदा होती है कि जो गया, वह अपना काम पूरा कर चुका था.

_ शायद जीवन की सबसे कठिन सीख यही है कि हर उस इंसान को रोकना ज़रूरी नहीं, जिसके जाने से हमारा दिल दुखता है.

_ कुछ लोगों को हम जितना भी समझ लें, वे हमें समझने की कोशिश नहीं करते.

_ कुछ रिश्तों में हम जितना भी अपना मन लगा लें, सामने वाला उतनी गहराई से जुड़ नहीं पाता.

_ ऐसे में बार-बार अपनी अहमियत याद दिलाना, अपने प्रेम का प्रमाण देना और अपने होने की वजह समझाना मन को भीतर तक थका देता है.

_ प्रेम वह जगह है, जहाँ इंसान को बार-बार यह साबित नहीं करना चाहिए कि वह भी मायने रखता है.

_ जहाँ हर बार अपने हिस्से का अपनापन माँगना पड़े, वहाँ एक दिन ख़ामोशी से ख़ुद को सँभाल लेना ही बेहतर होता है.

_ खुद को हर हाल में प्रिय बनाए रखने की कोशिश सबसे बड़ा भावनात्मक बोझ है.

_ इससे व्यक्ति अपने स्वाभाविक स्वरूप को खो देता है, अपनी सीमाओं को अनदेखा करने लगता है.

_ वह अपनी ही तकलीफ़ों को दबाकर दूसरों की स्वीकृति ढूँढ़ता रहता है.

_ जबकि आत्मसम्मान यही सिखाता है कि जहाँ अपनापन सहज न रहे, वहाँ ठहरना स्वयं के साथ अन्याय है.

_ इसका अर्थ यह नहीं कि हम लोगों से उम्मीद करना छोड़ दें, किसी से प्रेम न करें या रिश्तों से अपना विश्वास उठा लें.

_ इसका अर्थ केवल इतना है कि हम प्रेम करें, लेकिन ख़ुद को खोकर नहीं ;

_ किसी की परवाह करें, लेकिन अपनी भावनाओं को अनदेखा करके नहीं ;

_ किसी के साथ चलें, लेकिन इस डर में नहीं कि उसके बिना हमारा रास्ता अधूरा हो जाएगा.

_ रिश्ते जीवन को ख़ूबसूरत बनाते हैं, लेकिन हमारी पूरी ज़िंदगी केवल किसी एक रिश्ते के सहारे नहीं टिकी होती.

_ जब यह बात भीतर उतरने लगती है, तब हम दूसरों के बदलने से दुखी तो होते हैं, मगर उनके बदल जाने को अपनी कमी समझकर ख़ुद को सज़ा देना बंद कर देते हैं.

_ जीवन में सबसे बड़ा संतुलन यही है कि आप प्रेम करना बंद न करें, पर यह अपेक्षा भी न रखें कि प्रेम का उत्तर हमेशा समान रूप में मिलेगा.

_ किसी के प्रिय न रह जाना जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक नई समझ की शुरुआत है.

_ यह समझ हमें भावनात्मक चोटों से पूरी तरह नहीं बचाती, लेकिन इतना ज़रूर सिखा देती है कि हर चोट के बाद ख़ुद को समेटना है, हर दूरी के बाद अपनी अहमियत याद रखनी है और हर बिछड़ाव के बाद जीवन में आगे बढ़ने की गुंजाइश बनाए रखनी है.

_ आख़िरकार, शांति तब आने लगती है, जब हम यह स्वीकार कर लेते हैं कि हमारा मूल्य किसी के स्वीकार या अस्वीकार से तय नहीं होता.

_ किसी का हमें चाहना सुखद है, लेकिन किसी का हमें न चाह पाना हमारी अहमियत का अंत नहीं.

_ जो लोग हमारे जीवन में रहना चाहते हैं, वे अपने व्यवहार से अपने होने का एहसास कराते हैं.

_ और जिन्हें किसी और दिशा में आगे बढ़ना है, उन्हें रोकते रहने से न तो रिश्तों में पहले जैसा अपनापन लौटता है, न मन को वह सुकून मिलता है, जिसकी उसे तलाश होती है.

_ इसलिए किसी के बदल जाने पर अपने भीतर के प्रेम को ग़लत मत समझिए.

_ आपने किसी को सच्चे मन से चाहा, उसकी परवाह की और अपनी तरफ़ से रिश्ता निभाया, तो यह आपकी भावनाओं की सच्चाई है.

_ सामने वाला उसे समझ पाया या नहीं, यह अलग बात है.

_ हर अधूरा रिश्ता आपकी कमी की कहानी नहीं होता और हर बिछड़ाव आपकी हार नहीं होता.

_ कभी-कभी ज़िंदगी हमें उन लोगों से दूर करके नहीं, बल्कि उनके बिना जीना सिखाकर भी बहुत कुछ समझाती है.

_ धीरे-धीरे हम फिर से अपनी छोटी-छोटी ख़ुशियों में लौटने लगते हैं, अपने मन की सुनने लगते हैं और यह जानने लगते हैं कि सुकून केवल किसी के साथ होने में नहीं, अपने साथ सहज होने में भी है.

_ तब किसी की याद आती है, तो दिल उदास ज़रूर होता है, मगर हम अपनी पूरी दुनिया को उस याद के हवाले नहीं कर देते.

_ आख़िर में बस इतना याद रखिए कि हर किसी की ज़िंदगी में हमेशा ख़ास बने रहना संभव नहीं, लेकिन किसी के बदल जाने की वजह से ख़ुद की नज़रों में कम हो जाना भी ज़रूरी नहीं.

_ कुछ लोग हमारी ज़िंदगी से चले जाते हैं, कुछ के मन में हमारी जगह बदल जाती है, मगर इन सबके बीच हमें ख़ुद का साथ नहीं छोड़ना चाहिए.

_ क्योंकि रिश्तों के बदलने का दुःख वक़्त के साथ हल्का पड़ सकता है, लेकिन ख़ुद को भुलाकर किसी की स्वीकृति पाने की कोशिश हमें भीतर से थका देती है.

_ इसलिए जो साथ हैं, उन्हें पूरे मन से सँभालिए ;

_ जो दूर हो रहे हैं, उन्हें समझने की कोशिश कीजिए.

_ और जहाँ बार-बार ख़ुद को साबित करना पड़े, वहाँ अपने मन को थोड़ा आराम दीजिए.

_ हर किसी के लिए प्रिय बने रहना ज़रूरी नहीं, अपने लिए सम्मान और सुकून बचाए रखना ज़रूरी है.!!

– Ishq Banaras

किसी को अपने जीवन में बनाए रखने की ज़िद को प्रेम समझ लेना, शायद मनुष्य की सबसे गहरी भावनात्मक भूल है.

_ प्रेम किसी के पैरों में बाँधी गई वह बेड़ी नहीं, जिसे कसकर हम उसके ठहरने का भरोसा कर लें.

_ प्रेम तो वह विश्वास है, जिसमें सामने वाले को पूरी आज़ादी देकर भी उसके लौट आने की उम्मीद से मन का एक कोना रोशन रहता है.

_ किसी का हाथ थामना प्रेम है, मगर उस हाथ को अपनी मुट्ठी में कैद कर लेना मोह है.

_ जो रिश्ता बार-बार यह साबित करने की माँग करे कि तुम मुझे छोड़कर नहीं जाओगे, वहाँ प्रेम से अधिक खो देने की आशंका पल रही होती है.

_ क्योंकि जो मन से आपका है, उसे हर पल अपने होने का प्रमाण नहीं देना पड़ता, और जो मन से जा चुका है, उसे हज़ार वादों, हज़ार आँसुओं और हज़ार मिन्नतों से भी अपने पास नहीं रखा जा सकता.

_ इसलिए जब कोई आपके जीवन से जाने का निर्णय कर ले, तो उसके पीछे अपनी पूरी दुनिया लेकर मत भागिए.

_ किसी के लौट आने की प्रतीक्षा में अपने भीतर के उस इंसान को मत खो दीजिए, जो कभी हँसता था, सपने देखता था और छोटी-छोटी खुशियों में भी जीवन का अर्थ खोज लेता था.

_ याद रखिए, किसी के चले जाने से आपका प्रेम असफल नहीं हो जाता, न ही आपकी अहमियत कम हो जाती है.

_ कुछ लोग हमारे जीवन में साथ निभाने नहीं, हमें जीवन का कोई कठिन सत्य समझाने आते हैं.

_ उनके जाने का दुःख अपनी जगह है, लेकिन उस दुःख के कारण स्वयं से दूर हो जाना उससे भी बड़ी त्रासदी है.

_ किसी के लिए आँखें नम होना स्वाभाविक है, मगर उन्हीं आँखों में अपने भविष्य के सारे सपने बुझा देना ज़रूरी नहीं.

_ जो आपको छोड़कर चला गया, उसे जाने दीजिए.

_ अपने भीतर उस व्यक्ति को बचाकर रखिए, जिसने कभी पूरे विश्वास से प्रेम करना सीखा था.

_ जीवन में कभी-कभी हम किसी के लिए अपना समय, अपनी ऊर्जा, अपनी भावनाएँ, अपने सपने और अपना सर्वस्व तक समर्पित कर देते हैं.

_ हम उसके संघर्ष में साथ खड़े रहते हैं, उसके अंधेरों में दीपक बनते हैं, उसकी असफलताओं में सहारा बनते हैं.

_ लेकिन फिर एक दिन वही व्यक्ति सफलता की सीढ़ियाँ चढ़कर पीछे मुड़कर देखना भी आवश्यक नहीं समझता.

_ वह आगे बढ़ जाता है, और पीछे छूट जाता है वह इंसान जिसने उसकी यात्रा में अपना बहुत कुछ लगा दिया था.

_ ऐसी स्थिति में अधिकांश लोग टूट जाते हैं.

_ वे सोचते हैं कि उनके साथ अन्याय हुआ है, उन्हें धोखा मिला है, उनकी निष्ठा का अपमान हुआ है.

_ यह पीड़ा स्वाभाविक है, लेकिन यदि थोड़ी गहराई से देखा जाए तो शायद यह कहानी उतनी दुखद नहीं, जितनी दिखाई देती है.

_ यदि किसी ने आपके समर्पण के बदले विश्वासघात चुना, तो उसने आपके चरित्र को छोटा नहीं किया, उसने अपने चरित्र का परिचय दिया है.

_ आपके द्वारा किया गया प्रेम, आपकी निष्ठा, आपका त्याग आज भी उतना ही पवित्र है, जितना उस दिन था जब आपने उसे निभाया था.

_ किसी दूसरे के कर्म आपकी अच्छाई को कम नहीं कर सकते. और सच मानिए, कभी-कभी किसी का छोड़कर चले जाना भी एक प्रकार की मुक्ति होता है.

_ जो व्यक्ति आपके मूल्य को नहीं समझता, जो आपके प्रेम का सम्मान नहीं करता, जो आपके समर्पण को केवल एक सीढ़ी की तरह उपयोग करता है, उसका दूर हो जाना शायद जीवन की उन व्यवस्थाओं में से एक है, जिन्हें हम पहले दुख समझते हैं और बाद में वरदान मानने लगते हैं.

_ इसलिए जब कोई आपको छोड़कर जाए, तो हर बार उसे अभिशाप मत दीजिए.

_ मन ही मन उसे धन्यवाद भी दीजिए कि उसने भ्रम समाप्त कर दिया.

_ उसने आपको उस दरवाज़े के सामने खड़े रहने से बचा लिया, जो कभी खुलने वाला ही नहीं था.

_ उसने आपको यह समझा दिया कि आपका जीवन किसी एक व्यक्ति की स्वीकृति पर निर्भर नहीं है.

_ कर्म का विधान बड़ा अद्भुत है.

_ संसार में कोई भी व्यक्ति अपने कर्मों के परिणाम से हमेशा बचा नहीं रह सकता.

_ जो छल करेगा, उसे अपने छल के परिणामों का सामना करना पड़ सकता है.

_ जो विश्वास तोड़ेगा, वह कभी न कभी विश्वास की कीमत समझ सकता है.

_ जो प्रेम का अपमान करेगा, वह किसी दिन प्रेम की अनुपस्थिति का शून्य भी महसूस कर सकता है.

_ इसलिए किसी के लिए न्यायाधीश बनने की आवश्यकता नहीं है.

_ समय और कर्म, दोनों अपना कार्य करते हैं ; हमें हर परिणाम का हिसाब अपने हाथों में लेने की आवश्यकता नहीं.

_ आपका काम केवल इतना है कि आप अपने हिस्से की सच्चाई निभाइए.

_ प्रेम करिए तो पूरी ईमानदारी से करिए.

_ मित्रता निभाइए तो पूरे मन से निभाइए.

_ किसी का साथ दीजिए तो बिना हिसाब-किताब के दीजिए.

_ लेकिन बदले में क्या मिलेगा, इसकी अपेक्षाओं की गठरी अपने कंधों पर मत रखिए.

_ क्योंकि अपेक्षाएँ जितनी बड़ी होती हैं, निराशाएँ भी उतनी ही गहरी हो सकती हैं.

_ जीवन का सबसे सुंदर मार्ग शायद यही है कि हम अपने कर्मों को अपनी पहचान बनाएँ, उनके परिणामों को नहीं.

_ फूल जब खिलता है तो यह नहीं सोचता कि उसकी सुगंध किस तक पहुँचेगी.

_ नदी जब बहती है तो यह नहीं गिनती कि उसने कितनों की प्यास बुझाई.

_ सूर्य जब प्रकाश देता है तो यह अपेक्षा नहीं रखता कि कौन उसका धन्यवाद करेगा.

_ वे अपना स्वभाव निभाते हैं, और शायद मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म भी यही है.

_ अपने स्वभाव की अच्छाई को बनाए रखना.

_ इसलिए यदि कोई चला गया है, तो उसे जाने दीजिए.

_ यदि किसी ने धोखा दिया है, तो उसे उसके कर्मों के साथ छोड़ दीजिए.

_ यदि किसी ने आपका मूल्य नहीं समझा, तो स्वयं को उसके निर्णयों की कसौटी पर मत तौलिये.

_ किसी का आपको न चुनना इस बात का प्रमाण नहीं कि आप प्रेम के योग्य नहीं हैं.

_ हर व्यक्ति की दृष्टि में आपकी कीमत एक जैसी हो, यह आवश्यक नहीं.

_ लेकिन किसी की दृष्टि आपको छोटा कर दे, यह स्वीकार कर लेना भी आवश्यक नहीं.

_ अपने भीतर कड़वाहट नहीं, शांति रखिए.

_ शिकायत नहीं, अनुभव रखिए.

_ प्रतिशोध नहीं, प्रार्थना रखिए.

_ जीवन से यह शिकायत मत कीजिए कि उसने आपको गलत व्यक्ति से मिलवा दिया.

_ कभी-कभी एक गलत ठहराव ही हमें अपने सही रास्ते की पहचान कराता है.

_ जो चला गया, उसके साथ बिताए अच्छे पलों को झुठलाइए मत, मगर उन यादों को अपने वर्तमान की सज़ा भी मत बनने दीजिए.

_ अतीत को सम्मान दीजिए, उससे सीखिए और फिर अपने आज को जीने की अनुमति स्वयं को दीजिए.

_ क्योंकि जीवन का अर्थ केवल किसी का होकर रह जाना नहीं है, बल्कि किसी के चले जाने के बाद भी अपने भीतर मनुष्यता, विश्वास और प्रेम को जीवित रख पाना है.

_ टूटे हुए भरोसे के बाद भी सच्चाई पर विश्वास करना, मिले हुए छल के बाद भी छल को अपना स्वभाव न बनने देना और बिछड़ने के बाद भी किसी के प्रति नफ़रत से अपना हृदय न भर लेना, _ शायद यही भीतर से समृद्ध होने की सबसे कठिन साधना है.

_ याद रखिए, हर रिश्ता जीवन भर साथ रहने के लिए नहीं आता और हर विदाई किसी हार की घोषणा नहीं होती.

_ कुछ विदाइयाँ हमें वापस अपने पास ले आती हैं.

_ कुछ बिछड़ने हमें सिखाते हैं कि दूसरों के लिए दीपक बनते-बनते अपने भीतर के उजाले को बुझने नहीं देना चाहिए.

_ आप किसी के जीवन में क्या बनकर रहे, यह उसके व्यवहार से तय नहीं होता.

_ यह आपके प्रेम, आपकी निष्ठा और आपके आचरण से तय होता है.

_ इसलिए कर्म करते रहिए, प्रेम करते रहिए, सच्चाई पर चलते रहिए.

_ किसी के बदल जाने के कारण अपने स्वभाव की सुंदरता मत बदलिए.

_ किसी की बेवफ़ाई को अपने हृदय की भाषा मत बनने दीजिए.

_ और जब कभी बीते हुए रिश्तों की याद मन को उदास करे, तो स्वयं से बस इतना कहिए.

_ मैंने अपनी ओर से प्रेम में कोई कमी नहीं रखी.

_ अब जो मेरे हाथ में नहीं था, उसके लिए स्वयं को दोषी ठहराना भी छोड़ता हूँ.

_ आख़िरकार, जीवन में सबसे बड़ी जीत किसी को रोक लेने में नहीं, बल्कि किसी के चले जाने के बाद भी अपने भीतर के अच्छे इंसान को बचाए रखने में है.

_ क्योंकि लोग आपके जीवन से जा सकते हैं, आपकी स्मृतियों का अर्थ बदल सकता है, आपके सपने कुछ समय के लिए ठहर सकते हैं ;

_ लेकिन यदि आपने अपने भीतर की सच्चाई को बचाए रखा, तो दुनिया का कोई भी बिछोह आपसे आपका सबसे अनमोल हिस्सा नहीं छीन सकता.

_ प्रेम कीजिए, मगर स्वयं को खोकर नहीं.

_ साथ निभाइए, मगर अपने स्वाभिमान की कीमत पर नहीं.

_ और किसी को विदा करना पड़े, तो इस विश्वास के साथ कीजिए कि जीवन की कहानी किसी एक व्यक्ति के चले जाने से समाप्त नहीं होती.

_ जो चला गया, उसे जाने दीजिए.

_ जो बचा है, उसे सँभालिए.

_ क्योंकि अंततः आपको जीवन भर जिस इंसान के साथ रहना है, वह आप स्वयं हैं.!!

– Ishq Banaras

यहाँ हर चेहरे पर मुस्कान है, मगर कौन जाने कितनी आँखें रात के अँधेरे में चुपचाप भीगती हैं.

_ कितने लोग हैं जो दिनभर दुनिया को हँसाते हैं और रात को अपने ही सवालों के सामने निःशब्द बैठ जाते हैं.

_ जिनकी ज़िंदगी देखकर तुम्हें अपनी ज़िंदगी अधूरी लगने लगती है, हो सकता है वे खुद अपने हिस्से की ख़ुशियाँ जाने कब की खो चुके हों.

_ किसी ने मोहब्बत में अपना सबसे क़ीमती रिश्ता खोया है, किसी ने अपनों की उम्मीदें पूरी करते-करते अपने ही सपनों को दफ़न कर दिया है.

_ कोई घर की ज़िम्मेदारियों के नीचे दबा है, कोई भविष्य की चिंता में अपना वर्तमान खो रहा है, तो कोई सबको सँभालते-सँभालते इस क़दर बिखर चुका है कि अब उसे ख़ुद को समेटने का भी वक़्त नहीं मिलता.

_ अजीब दुनिया है यह !

_ यहाँ टूटे हुए लोगों से भी उम्मीद की जाती है कि वे मुस्कुराएँ, थके हुए कंधों से भी कहा जाता है कि वे और बोझ उठाएँ, और उदास आँखों को भी समझाया जाता है कि ज़िंदगी बहुत ख़ूबसूरत है.

_ मगर कोई यह नहीं पूछता कि उस ख़ूबसूरती को महसूस करने की ताक़त बची भी है या नहीं.

_ कितने लोग हैं जो हर रोज़ दूसरों के सामने सामान्य होने का अभिनय करते हैं, सिर्फ़ इसलिए कि उनकी ख़ामोशी से किसी को परेशानी न हो.

_ वे अपने दर्द को शब्द नहीं देते, क्योंकि उन्हें डर है कि कहीं उनकी तकलीफ़ किसी के लिए बोझ न बन जाए.

_ और इस तरह, धीरे-धीरे, वे सबके अपने बने रहते हैं, मगर ख़ुद से ही दूर होते चले जाते हैं.

_ कभी-कभी लगता है, यह दुनिया जितनी आबाद बाहर से दिखाई देती है, भीतर से उतनी ही वीरान होती जा रही है.

_ हर इंसान के पास अपनी एक कहानी है, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं ;

_ हर दिल में कोई अधूरा ख़्वाब है, मगर उसे समझने वाला कोई नहीं.

_ लोग अपनी उपलब्धियों की तस्वीरें साझा करते हैं, अपनी कामयाबी के क़िस्से सुनाते हैं, अपनी ख़ुशियों को दुनिया के सामने सजाकर रखते हैं, लेकिन उन तस्वीरों के बाहर छूट गए आँसुओं का हिसाब कौन रखता है ?

_ कौन देखता है उस पिता को, जो अपनी संतान के भविष्य के लिए अपनी इच्छाओं को उम्रभर टालता रहता है ?

_ कौन समझता है उस माँ को, जो पूरे घर की ख़ुशियों का ख़याल रखते-रखते अपनी उदासी का नाम तक भूल जाती है ?

_ कौन पूछता है उस नौजवान से, जो सबकी नज़रों में सफल है, मगर अपने ही जीवन से संतुष्ट नहीं ?

_ हमने इंसान की क़ीमत उसके भीतर की अच्छाई से नहीं, उसकी बाहरी चमक से आँकनी शुरू कर दी है.

_ अब किसी का दर्द सुनने से ज़्यादा दिलचस्प हमें उसकी कामयाबी जानना लगता है.

_ शायद इसीलिए चेहरे सँवरते जा रहे हैं और दिलों की थकान बढ़ती जा रही है.

_ हम एक-दूसरे को देखने में इतने व्यस्त हैं कि एक-दूसरे को महसूस करना ही भूल गए हैं. यह दुनिया अब आत्माओं का कब्रिस्तान है, जहाँ हर कोई अपने ही बनाए भ्रम में दफ़्न है.

_ यहाँ दिखावे की एक ऐसी परत चढ़ चुकी है कि सच्चाई अब असहज कर देती है.

_ लोग इंसान नहीं, ब्रांड बन गए हैं.

_ वे मुस्कुराते हैं ताकि कोई उनकी पीड़ा न देख सके.

_ वे सफल दिखते हैं ताकि कोई उनकी बेचैनी न समझ सके.

_ उनके जीवन में सब कुछ है—पैसा, पहचान, प्रतिष्ठा—पर चैन नहीं, सुकून नहीं, आत्मीयता नहीं.

_ यहाँ हर कोई दौड़ रहा है, पर किसी को नहीं पता कि मंज़िल कहाँ है.

_ महत्वाकांक्षा अब ज़हर बन चुकी है.

_ लोग अपनी सीमाओं को भूल गए हैं, अपने भीतर की थकान को झुठला रहे हैं, बस दूसरों से बेहतर दिखने की होड़ में खुद को खपा रहे हैं.

_ किसी को लगता है सारा समाज दोषी है, कोई किस्मत को गाली देता है, कोई व्यवस्था को कोसता है ;

_ पर असल में इस गंदगी के निर्माण में हमारा भी हिस्सा है.

_ हमने अपने भीतर की सच्चाई को दफ़न कर दिया और झूठ को सोने के फ़्रेम में सजाकर दीवार पर टाँग लिया.

_ हर घर अब एक मंच है, जहाँ अभिनय चल रहा है.

_ पति मुस्कुरा रहा है क्योंकि समाज को मुस्कुराहट चाहिए, पत्नी ख़ुश दिख रही है क्योंकि दुनिया को ख़ुशियाँ चाहिए, बच्चे हँस रहे हैं क्योंकि सबको दिखाने के लिए कुछ चाहिए.

_ सच्चा दुख अब लाइक नहीं लाता, सच्ची बातें अब वायरल नहीं होतीं.

_ इसलिए सब झूठ में जी रहे हैं और यही झूठ अब उनका सच बन चुका है.

_ माता-पिता अपनी खो चुकी जवानी के पछतावे में हैं, बच्चे अपनी नक़ली आज़ादी के भ्रम में.

_किसी को एक-दूसरे की ज़रूरत नहीं, बस सहूलियत चाहिए.

_ रिश्ते अब आत्मीयता नहीं, लेन-देन बन गए हैं.

_ प्यार अब एक सीन है, नीयत अब एक समझौता और फिर भी लोग कहते हैं, “हम ठीक हैं” नहीं, शायद हममें से बहुत-से लोग ठीक नहीं हैं.

_ फ़र्क़ बस इतना है कि किसी ने अपना दर्द दबा लिया है, किसी ने उसे अपनी पहचान बना लिया है, और किसी ने मुस्कुराहट के पीछे छिपना सीख लिया है.

_ इसलिए अब दूसरों को देखकर ख़ुद को मत तौलो.

_ मत बनो किसी और की कॉपी, क्योंकि हर चमकती ज़िंदगी के पीछे की कहानी तुम्हें नहीं मालूम.

_ जो चमक तुम्हें अपनी ओर खींचती है, हो सकता है उसके पीछे भी कोई ऐसी उदासी हो, जिसे दुनिया ने कभी देखा ही न हो.

_ जिसे तुम अपनी प्रेरणा समझ रहे हो, वह भी शायद अपने जीवन के किसी मोड़ पर जवाब तलाश रहा हो.

_ किसी की बाहरी कामयाबी को अपनी नाकामी का पैमाना मत बनाओ.

_ तुम्हारी ज़िंदगी की अपनी गति है, अपनी परिस्थितियाँ हैं, अपने संघर्ष हैं.

_ तुम्हें किसी और की तरह बनने की नहीं, अपने भीतर के इंसान को पहचानने की ज़रूरत है.

_ सच्ची प्रेरणा वही है जो तुम्हारे भीतर से उठे, जब तुम ख़ुद से ईमानदारी से बात करो, जब अपनी कमज़ोरियों को स्वीकारने और अपनी सच्चाई के साथ जीने की हिम्मत रखो.

_ क्योंकि यह दुनिया तुम्हें छल सकती है, चकाचौंध तुम्हें बहका सकती है, और दूसरों की ज़िंदगी से अपनी तुलना करते-करते तुम उस ख़ुशी को भी खो सकते हो, जो पहले से तुम्हारे पास है.

_ एक दिन ऐसा भी आता है, जब इंसान सब कुछ हासिल कर लेने के बाद पीछे मुड़कर देखता है और सोचता है कि इस दौड़ में उसने आख़िर अपने लिए क्या बचाया ?

_ कितने अपने पीछे छूट गए, कितनी छोटी-छोटी ख़ुशियाँ अनदेखी रह गईं, कितनी शामें बेवजह की चिंताओं में गुज़र गईं और कितनी सुबहें किसी बेहतर कल की प्रतीक्षा में बीत गईं.

_ इसलिए ठहरो, सोचो और फिर ख़ुद को सँभालो.

_ किसी और की परछाईं बनने के बजाय अपने भीतर की लौ को पहचानो.

_ अपने मन की सुनो, अपनों को वक़्त दो, अपनी थकान को स्वीकारो और ज़रूरत पड़े तो किसी अपने के सामने बिखर जाने से मत डरो.

_ हर वक़्त मज़बूत बने रहना ज़रूरी नहीं ; कभी-कभी अपनी कमज़ोरी स्वीकार कर लेना भी ख़ुद से मोहब्बत करने का सबसे सच्चा तरीक़ा होता है.

_ याद रखना, ज़िंदगी का अर्थ हर किसी से आगे निकल जाना नहीं है.

_ कभी किसी के दुःख में उसके पास बैठ जाना, बिना किसी स्वार्थ के किसी का हाथ थाम लेना, अपनों के साथ दो पल सुकून से बिता लेना और रात को सोने से पहले अपने ज़मीर के सामने शर्मिंदा न होना भी बहुत बड़ी कामयाबी है.

_ दुनिया की नज़रों में सफल होने से पहले अपनी नज़रों में इंसान बने रहना ज़रूरी है.

_ क्योंकि जिस दिन तुम्हारे पास सब कुछ होगा, मगर महसूस करने के लिए संवेदना नहीं बचेगी, उस दिन तुम्हारी सारी उपलब्धियाँ भी तुम्हारे भीतर के ख़ालीपन को नहीं भर पाएँगी.

_ यहाँ सब दिखावे में डूबे हैं.

_ सब जिए जा रहे हैं, मगर अपने भीतर की आवाज़ सुनना भूलते जा रहे हैं.

_ तुम कोशिश करना कि भीड़ में शामिल होकर ख़ुद को मत खो देना.

_ अपनी हँसी को किसी की स्वीकृति का मोहताज मत बनाना, अपने सपनों को दूसरों की अपेक्षाओं के नीचे मत दबाना और अपने मन की शांति को दुनिया की वाहवाही के बदले कभी मत बेचना.

_ तुम कोशिश करना, सिर्फ़ ज़िंदगी गुज़ारने की नहीं, उसे महसूस करने की.

_ सिर्फ़ साँसें पूरी करने की नहीं, हर साँस में थोड़ा-सा सुकून बचाए रखने की.

_ सिर्फ़ दुनिया को यह दिखाने की नहीं कि तुम ख़ुश हो, बल्कि अपने भीतर सचमुच ख़ुश होने की वजह तलाशने की.

_ क्योंकि आख़िर में तुम्हारे पास वही पल बचेंगे, जिनमें तुमने किसी को दिल से चाहा होगा, किसी के आँसू समझे होंगे, किसी के लिए बिना किसी स्वार्थ के कुछ किया होगा और कभी दुनिया की तमाम आवाज़ों के बीच अपने दिल की आवाज़ सुनी होगी.

_ ज़िंदगी बहुत छोटी है, इसे दूसरों को प्रभावित करने में मत गँवाना.

_ इसे इस तरह जीना कि जब कभी तुम ख़ुद से आँखें मिलाओ, तो तुम्हें अपने ही भीतर एक ऐसा इंसान मिले, जिसके साथ तुम्हारा मन शांति से रह सके.!!

-Ishq Banaras

सुविचार 5033

रोटी भले सादी हो, पर अगर खुद कमाई हो तो इज़्ज़त बची रहती है..

_ क्योंकि औरों से मांगी हुई चीज़ कभी सुकून नहीं देती.!!

Quotes by Travel Point

कुछ लोग जब दुखी होते हैं, तो अपनी तकलीफ़ बता देते हैं.

_ लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो टूटकर भी किसी को अपनी टूटन का एहसास नहीं होने देते.

_ वो शिकायत नहीं करते, हिसाब नहीं मांगते और न ही सामने वाले को उसकी गलती का एहसास कराने की कोशिश करते हैं.

_ बस धीरे-धीरे अपने भीतर से उस रिश्ते को समेटने लगते हैं, जिसे उन्होंने कभी पूरे मन से जिया था. _ उनकी सबसे बड़ी खूबी यही होती है कि चोट खाने के बाद भी उनके भीतर की अच्छाई खत्म नहीं होती.

_ वो वही नरमी रखते हैं, वही अपनापन रखते हैं और दूसरों के दर्द को समझते रहते हैं.

_ फर्क बस इतना आता है कि अब वो अपना दर्द हर किसी के सामने रखना बंद कर देते हैं. _ एक दिन आपको लगेगा कि सब पहले जैसा ही है.

_ वो बात करेंगे, मुस्कुराएंगे, आपकी मदद भी करेंगे.

_ लेकिन उनके भीतर कहीं एक दरवाज़ा बंद हो चुका होगा.

_ ऐसा दरवाज़ा जिसे उन्होंने गुस्से में नहीं, बार-बार निराश होने के बाद बंद किया होगा.

_ किसी अच्छे इंसान को खोना अक्सर किसी रिश्ते के खत्म होने जैसा नहीं दिखता.

_ वो बिना किसी आखिरी लड़ाई के दूर हो जाता है.

_ उसकी आवाज़ में नाराज़गी नहीं होती, बस पहले जैसी गर्माहट नहीं रहती.

_ उसकी मौजूदगी होती है, लेकिन उसमें पहले जैसा अपनापन नहीं होता.

_ और शायद सबसे गहरी बात यही है कि सच्चे दिल वाले लोग हमेशा आपको छोड़ना नहीं चाहते.

_ वो बहुत देर तक रिश्ते को बचाने की कोशिश करते हैं.

_ आपकी गलतियों को समझते हैं, आपकी मजबूरियों को जगह देते हैं और कई बार अपने हिस्से का दर्द भी खुद उठा लेते हैं.

_ लेकिन हर दिल की भी एक सीमा होती है.

_ जिस दिन उन्हें महसूस हो जाता है कि उनके होने और न होने से अब कोई फर्क नहीं पड़ता, उसी दिन वो भीतर से विदा लेना शुरू कर देते हैं. _ फिर उनका जाना अचानक नहीं होता.

_ वो तो बहुत पहले अपने मन में दूर हो चुके होते हैं, बस आपको पता देर से चलता है.

_ इसलिए किसी ऐसे इंसान को बार-बार मत आज़माइए, जो आपको पूरे दिल से अपना मानता है.

_ क्योंकि भरोसा कांच की तरह टूटकर हमेशा आवाज़ नहीं करता.

_ कभी-कभी वह बस इतना करता है कि इंसान आपके सामने खड़ा रहता है, लेकिन अपना दिल आपसे वापस ले लेता है.

_ और जब कोई सच्चा दिल अपना दरवाज़ा बंद कर लेता है, तो उसे खोलने के लिए पछतावा भी कई बार बहुत देर से आता है.!!

– Travel Point

हम अक्सर ऐसे इंसान की तलाश में रहते हैं, जो हमारी अधूरी जिंदगी को पूरा कर दे.

_ कोई ऐसा जो हमें समझे, हमारे डर को पहचान ले और हमारे बिखरे हुए हिस्सों को समेट दे.

_ लेकिन शायद हम यह भूल जाते हैं कि जिस सहारे की तलाश हमें है, उसकी जरूरत सामने वाले को भी हो सकती है.

_ हम चाहते हैं कि कोई हमें बदल दे, हमें मजबूत बना दे, हमारे भीतर उम्मीद जगा दे.

_ लेकिन खुद किसी के अंधेरे में एक छोटी सी रोशनी बनने की कोशिश बहुत कम लोग करते हैं.

_ हम दूसरों से वो हिम्मत मांगते रहते हैं, जिसे अपने भीतर पैदा करने से डरते हैं.

_ सच तो यह है कि कोई भी इंसान पूरी तरह मुकम्मल होकर हमारी जिंदगी में नहीं आता.

_ हर किसी के भीतर कुछ टूटे हुए सपने होते हैं, कुछ अनकहे डर होते हैं और कुछ ऐसी लड़ाइयां होती हैं, जिनके बारे में दुनिया को कुछ पता नहीं होता.

_ शायद रिश्तों का मतलब किसी परफेक्ट इंसान को ढूंढ लेना नहीं, बल्कि दो अधूरे लोगों का एक-दूसरे की कमियों के साथ चलना सीखना है.

_ किसी को बदल देना नहीं, बल्कि उसके भीतर छिपे उस इंसान पर भरोसा करना है, जिसे वह खुद भी कभी-कभी भूल जाता है.

_ हम सब चाहते हैं कि कोई हमारा हाथ थामे, लेकिन जिंदगी शायद तब खूबसूरत होती है जब हम किसी का हाथ थामने की शुरुआत खुद करते हैं.

_ किसी के डर का मजाक उड़ाने के बजाय उसके साथ खड़े होना, किसी की कमजोरी गिनाने के बजाय उसे अपनी ताकत पहचानने में मदद करना और किसी के गिरने पर यह कहने के बजाय कि तुम कमजोर हो, बस इतना कहना कि चलो, एक बार फिर कोशिश करते हैं.

_ क्योंकि बेहतर इंसान मिलने से जिंदगी बेहतर नहीं होती, कई बार किसी के साथ चलते-चलते हम खुद बेहतर इंसान बन जाते हैं.

_ शायद जिंदगी का सबसे खूबसूरत हिस्सा यही है कि हमें किसी मुकम्मल इंसान का इंतजार नहीं करना चाहिए.

_ हमें खुद इतना बेहतर बनने की कोशिश करनी चाहिए कि किसी और की जिंदगी में हमारे होने से उसे अपने भीतर थोड़ा और उजाला दिखाई देने लगे.

_ आखिर में, किसी बेहतर इंसान की तलाश से ज्यादा जरूरी है, किसी के लिए बेहतर इंसान बनने की कोशिश.!!

– Travel Point

किसी अच्छे इंसान को चोट पहुँचाने की सबसे खतरनाक बात ये नहीं होती कि वो रोएगा या आपसे लड़ाई करेगा…

_ असली बात ये होती है कि एक दिन वो चुप हो जाएगा.

_ वो आपको दोष नहीं देगा. सवाल नहीं करेगा. बदला लेने की कोशिश भी नहीं करेगा.

_ बस धीरे-धीरे अपने उस हिस्से को आपसे वापस ले लेगा, जो कभी पूरी तरह आपका हुआ करता था.

_ पहले आपके एक संदेश का इंतज़ार करने वाला इंसान, आपके जवाब का इंतज़ार करना छोड़ देगा.

_ आपकी छोटी-सी परेशानी पर बेचैन होने वाला इंसान, एक दिन आपकी परेशानियों से अनजान रहने लगेगा.

_ और सबसे अजीब बात… आपको पता भी नहीं चलेगा कि ये दूरी कब शुरू हुई.

_ क्योंकि अच्छे लोग अक्सर रिश्ते तोड़ते नहीं हैं… वे पहले उम्मीदें छोड़ते हैं.

_ वे कई बार खुद को समझाते हैं कि शायद सामने वाला बदल जाएगा.

_ शायद उसे अपनी गलती समझ आएगी.

_ शायद अगली बार वो उस दिल को नहीं दुखाएगा, जिसने हमेशा उसका साथ दिया.

_ लेकिन हर बार थोड़ा-थोड़ा टूटने के बाद एक दिन भीतर कुछ बिल्कुल शांत हो जाता है.

_ फिर शिकायत खत्म हो जाती है, इंतज़ार खत्म हो जाता है.

_ और वो इंसान, जो कभी आपको खोने के ख्याल से डरता था, आपको खोकर भी शांत रहने लगता है.

_ ये नफ़रत नहीं होती.

_ ये वो पल होता है जब इंसान समझ जाता है कि किसी को अपना समझना और किसी का आपके अपने होने की कद्र करना… दोनों अलग बातें हैं.

_ उसके बाद वो आपके खिलाफ कुछ नहीं करेगा.

_ शायद आज भी आपकी खुशी चाहेगा.

_ शायद मुश्किल वक्त में मदद भी कर दे. लेकिन उसके दिल में आपके लिए जो जगह कभी घर जैसी थी, वहां अब सिर्फ एक बंद दरवाज़ा होगा.

_ और सबसे दर्दनाक बात ?

_ उस दरवाज़े पर दस्तक देने के लिए शायद आप बहुत देर कर चुके होंगे.

_ क्योंकि कुछ दूरियां अचानक नहीं बनतीं, वो उन छोटी-छोटी चोटों से बनती हैं जिन्हें सामने वाला बार-बार अनदेखा करता रहा.

_ इसलिए अगर आपकी ज़िंदगी में कोई ऐसा इंसान है, जो आपकी गलतियों के बावजूद आपको समझता है, आपकी खामोशी पढ़ लेता है और बिना मांगे आपका साथ देता है… तो उसकी सहनशीलता को उसकी कमजोरी मत समझिए.

_ क्योंकि कुछ लोग जब चले जाते हैं, तो उनके जाने की आवाज़ नहीं होती.

_ बस एक दिन आपको एहसास होता है कि जिस इंसान को आप हमेशा अपने पास समझते थे, वो अब आपके पास होकर भी आपके जीवन में नहीं है.

_ और तब शायद पछतावा बहुत होगा… लेकिन वो दिल, जो कभी आपके लिए दरवाज़ा खोलकर बैठा था, शायद तब तक अंदर से हमेशा के लिए बंद हो चुका होगा.

_ सबसे मुश्किल बात ये नहीं होगी कि वो आपसे दूर हो गया, बल्कि ये होगी कि आप चाहकर भी उस पुराने रिश्ते को वापस नहीं ला पाएंगे.

_ क्योंकि कुछ रिश्ते टूटने के बाद खत्म नहीं होते… बस उनमें लौटने का रास्ता हमेशा के लिए खो जाता है.

– Travel Point

जिंदगी में सबसे खतरनाक गलती शायद वह नहीं होती जब हम कोई गलत फैसला लेते हैं, बल्कि वह होती है.. जब कोई अपना हमारे लिए सही फैसला ले रहा हो और हम उसे गलत समझ बैठें.

_ कुछ लोग हमारी हर इच्छा पूरी करने के लिए नहीं, बल्कि हमें उन मुश्किलों से बचाने के लिए हमारे साथ होते हैं, जिनका अंदाजा हमें उस वक्त नहीं होता.

_ वे हमारी बातों से ज्यादा हमारी हालत समझते हैं, इसलिए कई बार हमें वह नहीं देते जो हमें अच्छा लगता है, बल्कि वह करते हैं.. जिसकी हमें सच में जरूरत होती है.

_ मुश्किल यहीं से शुरू होती है.

_ जो मिला है, उसकी खुशी अक्सर जल्दी खत्म हो जाती है, लेकिन जो नहीं मिला उसका दर्द लंबे समय तक पीछा करता रहता है.

_ फिर हम उन्हीं हाथों को कसूरवार समझने लगते हैं, जिन्होंने हमें संभालने के लिए जाने कितनी बार खुद को पीछे किया था.

_ हमें उनकी चिंता दिखाई नहीं देती, उनकी मजबूरी दिखाई नहीं देती, उनके त्याग का अंदाजा नहीं होता.

_ दिखाई देता है तो बस अपना अधूरा सपना.

_ धीरे-धीरे यही अधूरापन इतना बड़ा हो जाता है कि सामने खड़ी पूरी जिंदगी छोटी लगने लगती है.

_ सबसे अजीब बात यह है कि दिल के किसी कोने में हमें यह एहसास भी होता रहता है कि शायद गलती हमारी है.

_ कभी अकेले में मन पूछता है कि क्या सच में मेरे अपने मेरे खिलाफ हैं, या मैं ही उनकी मोहब्बत को समझ नहीं पा रहा ?

_ लेकिन उस सवाल का जवाब स्वीकार करना आसान नहीं होता.

_ अहंकार हमें रोकता है और अपनी चाहतों के आगे बाकी सब कुछ छोटा दिखाई देने लगता है.

_ फिर एक दिन वही इंसान दूर हो जाता है.

_ और तभी उसकी डांट में छिपी चिंता, उसकी रोक-टोक में छिपा डर और उसके फैसलों के पीछे छिपी मोहब्बत समझ आने लगती है.

_ तब एहसास होता है कि जिसे हम अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी कमी समझ रहे थे, शायद वही हमें किसी बड़ी परेशानी से बचा रहा था.

_ जिसे हम अपना दुश्मन समझ बैठे थे, वह शायद आखिरी इंसान था जो हमारे गिरने से पहले हमें पकड़ने की कोशिश कर रहा था.

_ हर किसी को जिंदगी में ऐसा इंसान नहीं मिलता.

_ इसलिए अगर आज कोई आपकी हर इच्छा पूरी नहीं करता, लेकिन आपकी जरूरत के वक्त आपके साथ खड़ा रहता है, तो उसकी कद्र कीजिए.

_ क्योंकि जिंदगी में सबसे बड़ा पछतावा किसी चीज के न मिलने का नहीं होता, सबसे बड़ा पछतावा तब होता है जब हमें समझ आता है कि जिसे हम रोकने वाला समझते रहे, वही हमें टूटने से बचा रहा था… और तब तक वह हमारे पास नहीं रहता.!!

– Travel Point

कभी-कभी जिंदगी हमें किसी इंसान से नहीं, बल्कि अपनी ही उम्मीदों से हरा देती है.

_ हम सोचते हैं कि कोई हमारे साथ हमेशा खड़ा रहेगा, कोई हमारी खामोशी समझ लेगा, कोई मुश्किल वक्त में हाथ नहीं छोड़ेगा.

_ लेकिन जब वक्त करवट लेता है, तब पता चलता है कि जिन कंधों को हमने अपना सहारा समझा था, वे भी कभी रास्ते में छूट सकते हैं.

_ शायद इसी का नाम जिंदगी है, जहां उम्मीदें खूबसूरत तो बहुत होती हैं, लेकिन हर उम्मीद का पूरा होना जरूरी नहीं.

_ उम्मीदें अक्सर धोखा देती हैं.

_ हम किसी को जितना अपना समझते हैं, जरूरी नहीं कि वह भी हमें उतना ही अपना समझे.

_ हम किसी रिश्ते को जिंदगी भर निभाने का सपना देखते हैं, लेकिन सामने वाला शायद उस रिश्ते को कुछ दूर तक का सफर ही मानता हो.

_ सबसे ज्यादा दर्द तब होता है जब हम किसी से कुछ मांगते भी नहीं, बस इतना चाहते हैं कि वह वक्त आने पर हमारे साथ खड़ा रहे.

_ और जब वही इंसान पीछे मुड़कर चला जाता है, तो उसके जाने से ज्यादा उस भरोसे के टूटने की आवाज सुनाई देती है, जिसे हमने बड़ी खामोशी से अपने भीतर बनाया था.

_ ऐसे पल इंसान को अंदर तक हिला देते हैं, लेकिन यही पल उसे एक ऐसी सच्चाई भी सिखाते हैं, जिसे किताबों में नहीं पढ़ाया जा सकता.

_ हर किसी से उम्मीद मत रखो, क्योंकि हर कोई आपकी तरह महसूस नहीं करता.

_ किसी के साथ चलो तो दिल से चलो, लेकिन अपनी पूरी जिंदगी का रास्ता उसके कदमों पर मत छोड़ो.

_ क्योंकि जिंदगी का सबसे बड़ा रोमांच शायद यही है कि जब अपने समझे हुए लोग भी रास्ते में छूट जाएं, तब इंसान अकेला आगे बढ़ना सीखता है.

_ और एक दिन पीछे मुड़कर देखता है तो समझ आता है कि जिसे वह अपना अंत समझ रहा था, वही उसके एक नए सफर की शुरुआत थी.!!

– Travel Point

एक दिन सब पीछे छूट जाएगा… फिर आज किस बात का इतना मोह है ?

_ सोचो, तुम एक अनजान रास्ते पर निकल पड़े हो.

_ सामने ऊंचे पहाड़ हैं, नीचे गहरी खाई और दूर तक फैला जंगल.

_ तुम्हारे साथ चल रहा कोई मुसाफिर अचानक कहता है, “मुझे अब तुम्हारे साथ नहीं चलना”

_ तुम क्या करोगे ? उसकी राह में बैठकर अपनी पूरी यात्रा रोक दोगे, या अपना बैग उठाकर आगे बढ़ जाओगे ?

_ बस, जिंदगी भी कुछ ऐसी ही है.

_ लोग मिलेंगे, वादे करेंगे, तुम्हारे साथ सपने देखेंगे और फिर किसी मोड़ पर रास्ता बदल लेंगे.

_ कुछ तुम्हें बिना वजह छोड़ेंगे, कुछ तुम्हारी हजार कोशिशों के बाद भी तुम्हें नहीं समझेंगे.

_ लेकिन उनकी पसंद को अपनी किस्मत का फैसला बना लेना, यह तुम्हारी सबसे बड़ी भूल होगी.

_ दुनिया बहुत बड़ी है.

_ किसी एक इंसान के बदल जाने से यहां के रास्ते खत्म नहीं होते, आसमान से तारे गायब नहीं हो जाते और सुबह होना बंद नहीं हो जाता.

_ तुम उन लोगों के पीछे अपनी रातें क्यों बर्बाद कर रहे हो, जिन्हें तुम्हारी सुबह की परवाह तक नहीं ?

_ एक बार अपने भीतर झांककर देखो.

_ तुमने कितने सपने सिर्फ इसलिए टाल दिए, क्योंकि तुम्हारा मन किसी के लौटने की उम्मीद में अटका रहा.

_ कितनी जगहें नहीं देखीं, कितने फैसले नहीं लिए और कितनी बार अपनी खुशी को किसी दूसरे के व्यवहार से जोड़ दिया.

_ अब जरा उस जिंदगी की कल्पना करो, जिसमें तुम्हें किसी के जवाब का इंतजार नहीं, किसी के बदलते मिजाज का डर नहीं और किसी को अपनी अहमियत समझाने की मजबूरी नहीं.

_ सुबह उठो, अपना बैग उठाओ और उस रास्ते पर निकल पड़ो, जहां तुम्हारा दिल जाना चाहता है.

_ कभी पहाड़ों में खो जाओ, कभी किसी अनजान गांव की गलियों में घूमो, कभी नदी किनारे बैठकर खुद से बातें करो.

_ दुनिया को अपनी आंखों से देखो, न कि किसी एक इंसान की नजरों से.

_ क्योंकि एक दिन उम्र का यह सफर भी पीछे छूट जाएगा.

_ तब शायद तुम्हें इस बात का अफसोस नहीं होगा कि कौन तुम्हारे साथ नहीं चला, बल्कि इस बात का होगा कि तुम किसी के इंतजार में खुद कितना कम जिए.

_ इसलिए किसी को अपनी जिंदगी से बांधकर मत रखो और खुद भी किसी की बेरुखी की जंजीरों में मत बंधो.

_ जिसे जाना है, उसे जाने दो- तुम्हें अभी बहुत दूर जाना है.

_ याद रखना, मुसाफिर की सबसे बड़ी हार रास्ते में अकेला रह जाना नहीं है.

_ उसकी सबसे बड़ी हार है, किसी के साथ छूट जाने के डर से अपनी मंजिल तक पहुंचने का सफर ही छोड़ देना.!!

– Travel Point

सुविचार 5032

कुछ ज़ख़्म हरे ही अच्छे हैं, क्योंकि वो हमें बार-बार याद दिलाते हैं कि हमने कभी गहराई से जिया था..

_ अगर हर चोट भर जाए, तो यादें भी धुंधली हो जाएँगी..

_ हरे ज़ख़्म ही तो वो निशान हैं.. जिनसे हम अपनी सच्चाई, अपने रिश्ते, और अपने एहसास पहचानते हैं….!

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