सुविचार 4664
जब हमें लगता है हम कुछ नहीं कर सकते,
तब भी हम उम्मीद तो कर ही सकते हैं..
तब भी हम उम्मीद तो कर ही सकते हैं..
किसी व्यक्ति को उसके उत्तरों के बजाय उसके प्रश्नों से आंकें..
तब थोड़ा संभलने से, संभल जाता है बहुत कुछ..
जितना आँखें बंद करके देख लेते हैं.
पर जो गिरा है उसे उठाने के लिए कोई नही झुकना चाहता.
जबकि इस भाग-दौड़ का मक़सद, एक स्थायी पते की तलाश था.
कि वो तुम्हारे बगैर ही जीना सीख जाए.