सुविचार 3405

किसी भी परिस्थिति को स्वीकार कर के ही उस से निकला जा सकता है, _

_ इसलिए जो भी है उसे स्वीकार कर के बेहतर बनाएँ..

सुविचार 3404

सम्पूर्ण शान्ति वह है जिसमें हम दूसरों के चिढ़ाने या तानों को सहन कर लेते हैं,

हमें इन बातों को ऐसे सहन करना चाहिए जैसे किसी उल्टे घड़े पर पानी उँड़ेला जा रहा हो,

वह घड़ा अपने भीतर पानी को बिलकुल नहीं लेता.

मस्त विचार 3279

एक दिन तुम सोचोगे कि कितने दिन हुए, चलो आज बात करते हैं _

_ और तब तक बात ख़त्म हो चुकी होगी !!

मस्त विचार 3278

बदलते मौसम के ढांचे में ज़िंदगी को ढाल लीजिए जनाब, _

_ वरना इस अनजानी दौड़ में वक़्त बहुत आगे निकल जाएगा ..

मस्त विचार 3276

मुश्किल ज़िंदगी को आसान बनाना पड़ता है,

जो पसंद आए उसे अपने अंदाज़ से और जो ना पसंद आए उसे नज़र अंदाज़ से.

सुविचार 3401

आप यह निश्चित रूप से जान लें कि आपकी अकेली ईमानदारी में बहुत बड़ा बल है,

हाँ वह ईमानदारी पत्थर की चट्टान की तरह दृढ और अभेद्य होनी चाहिए,

अकेले आपके ईमानदार होने से, घर पास- पड़ौस में, व्यवसाय में और सभी छेत्रों में जहाँ आप प्रवेश करते हैं,

वहीँ, कुछ न कुछ परिवर्तन अवश्य होता है.

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