मस्त विचार 3276
जो पसंद आए उसे अपने अंदाज़ से और जो ना पसंद आए उसे नज़र अंदाज़ से.
जो पसंद आए उसे अपने अंदाज़ से और जो ना पसंद आए उसे नज़र अंदाज़ से.
हाँ वह ईमानदारी पत्थर की चट्टान की तरह दृढ और अभेद्य होनी चाहिए,
अकेले आपके ईमानदार होने से, घर पास- पड़ौस में, व्यवसाय में और सभी छेत्रों में जहाँ आप प्रवेश करते हैं,
वहीँ, कुछ न कुछ परिवर्तन अवश्य होता है.
_ जिसे भी मौका मिलता है वो पीता जरुर है.
_ लेकिन उसके पीछे प्रेरणा और प्रोत्साहन बहुतों की होती है.
एक बार जब आप अपनी खामियों को स्वीकार कर लेते हैं, तो कोई भी उन्हें आपके खिलाफ इस्तेमाल नहीं कर सकता.
_ दूसरों का मुँह ताकना शर्म की बात है.
_ क्या पता कल को _ अपने हाल पर रोना पड़ जाए !!
दूसरों को देखकर अपने को मत बदलो, सीखते चलो”
_ दौर बुरा हो सकता है, ज़िन्दगी नहीं..