सुविचार 3555
वृद्धि, परिवर्तन और रूपान्तरण ही क्रमिक- विकास है.
वृद्धि, परिवर्तन और रूपान्तरण ही क्रमिक- विकास है.
_ उसे करते समय बदले में कुछ भी पाने की मंशा न रखते हुए, इसे अपने दिल से करें.
_ जिंदगी बहुत खूबसूरत है, अगर आदत हो मुस्कुराने की..
_ खुद ही खुद की जरुरत होती है.
सकारात्मक सोच रखने से चीजें बदल जाएंगी..
_ हर किसी को अपने लिए परखा नहीं करते…
_ जो कहते हैं हमेशा तेरे साथ हूं..
_ लोग ज़रूरत पर ही याद करते हैं !!