सुविचार 3491
फिर से प्रयास करने से मत घबराना, _ क्योंकि इस बार शुरुआत शून्य से नहीं अनुभव से होगी.
फिर से प्रयास करने से मत घबराना, _ क्योंकि इस बार शुरुआत शून्य से नहीं अनुभव से होगी.
शुरुआत अंत भी हो सकती है अगर इसका ध्यान न रखा जाए.
अपनी खुशी की चाबी किसी और की जेब में मत डालो.
_ परिंदा पिंजरे में पिंजरा हवा में रक्खा गया..!
_ यह प्यार नहीं, आराम और आदत का मामला है..!!
_ क्योंकि बता देने से फ़ैसले होते हैं, ना बताने से फ़ासले….
_ न मानो तो कौन किसी का क्या लगता है…
_ तुमको आसान बात लगती है ..!!
_ मैं पन्ना पलटता हूँ तो ये किस्सा ही बदल देती है !!