मस्त विचार 3189
— खुद पुकारेंगी मंजिल तो ठहर जाऊंगा…!
वर्ना, खुद्दार मुसाफ़िर हूं ख़ामोशी से गुजर जाऊंगा…!!
वर्ना, खुद्दार मुसाफ़िर हूं ख़ामोशी से गुजर जाऊंगा…!!
जानने वाले में ही कमी है _ सब कुछ सामने ही घटित हो रहा है.
ताकि जवाब भी खूबसूरत सुन सको.
लेकिन ज़्यादातर इंसान आगे बढ़ने की बजाय इस धक्के से गिर जाता है, और फ़िर गिर कर उठने में या तो बहुत देर लगाता है, या उठता ही नहीं…..
_ मगर पीछे धकेलने में कोई कसर नहीं छोड़ते..!!
हम हैसियत देख कर सिर नहीं झुकाते.