मस्त विचार 3204
लेकिन अफसोस _ तब तक हम अपना ताला बदल चुके होते हैं…
लेकिन अफसोस _ तब तक हम अपना ताला बदल चुके होते हैं…
वो खुद मिलने आयें _ नए नए बहाने से.
छूट जाती थीं, _ अब चीजें बटोरने में खुशियाँ छूट जाती हैं.!!
_ हमें सोचते रहने की लत जो लगी हुई है..
_ हम खुल कर विलाप भी नहीं कर पाते हैं…
_ अगर ऐसा तुम्हारे साथ किया तो _ तुम पर क्या गुजरेगी..
_ जो साथ है, उसके साथ सुकून से जी लिया जाए.
कभी-कभी आपको यह साबित करने के लिए अकेले खड़ा होना पड़ता है कि आप अभी भी खड़े हो सकते हैं.