सुविचार 5002
यदि व्यक्ति के मन में चलने की चाह हो तो, _
_ उसे रास्ता अंधेरे में भी दिख जाता है.
_ उसे रास्ता अंधेरे में भी दिख जाता है.
_ वह दूसरों का भरोसा भी कायम रखने में समर्थ होता है.
_ लेकिन पर्याप्त पुल नहीं बांध सके ..
_ और समझदार लोग उसे पढ़ते हैं.
_ क्यों ना सफर थोड़ा हँस कर गुज़ार लिया जाए।।
_ वो भी कागजो व प्लानिंग पर लिखी जाने वाली ज़िन्दगी से अलग.!!
_ वर्षा को सहन करना ही होगा ..
_ तो विजय पा लो या फिर डर को अपने ऊपर हावी होने दो ..
_ उसने दुनिया को जीत लिया,,,,
_ कभी वक़्त मिले तो हमसे भी मुलाकात करना..
” जो कहा गया है उसकी जांच करें, न कि कौन बोल रहा है “