सुविचार 3227
हंसमुख व्यक्ति वह फुहार है, जिस के छींटे सब के मन को ठंडा करते हैं.
हंसमुख व्यक्ति वह फुहार है, जिस के छींटे सब के मन को ठंडा करते हैं.
हंसमुख मनुष्य वह फुहारा है, जिस के शीतल छींटे मन को ठंडा करते हैं.
लेकिन सब पराया पराया, और वही सच भी होता है, “
हम शिकायत कर सकते हैं कि गुलाब की झाड़ियों में कांटें हैं…
या खुश हो सकते हैं कि काँटों की झाड़ियों में गुलाब हैं…!!!
और अगर आकर्षण नहीं होगा तो लक्ष्य भी नहीं होगा.
मंजिलें तो खुद आपका पता पूछते हुए आ जाएँगी.
गिराने वाले एक रोज नहीं, हर रोज मिला करते हैं..
आगे बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि आप चीजों को भूल जाएं _ इसका सीधा सा मतलब है कि आपको जो हुआ उसे स्वीकार करना होगा और जीना जारी रखना होगा.