मस्त विचार 3175

फूल की उम्मीद थी मगर पत्थर निकला,

ये साल तो पिछले साल से भी बत्तर निकला !

दिन घटा घटा कर वर्ष कर रहे हैं,

हम वक्त को ऐसे खर्च कर रहे हैं..

सुविचार 3300

इस साल का सफ़र _ कुछ यूँ गुज़र गया,

कुछ अपने अंजान हो गए _ कुछ अंजान अपने हो गए..

तारीखों में _ धीरे – धीरे _ व्यतीत हो रहे हैं हम,

आज है _ लेकिन हर छण _ अतीत हो रहे हैं हम..

सुविचार 3299

कल उनका होता है, _ जिन्हें अपने सपनों की खूबसूरती में यकीन होता है..

सुविचार 3298

यदि आप सच बोलने वाले हैं,

कटु आलोचना के लिए स्वयं को सदैव प्रस्तुत रखिए ! “सांच को आंच नहीं”

सुविचार 3297

बुराइयों से दूर रहने का एक ही तरीका है,

अच्छे विचारों को अपने जीवन में आने दीजिए.

मस्त विचार 3171

लोग कहते हैं समझो, तो खामोशियाँ भी बोलती हैं,

मैं अरसे से ख़ामोश हूँ, वो बरसों से बेख़बर है..

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